महिला,दलित एवं पिछड़ा वर्ग के मसीहा महात्मा फूले
महात्मा फूले का नाम कौन नहीं जानता . महान समाज सुधारक सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महिला शिक्षा के जनक, दलित एवं पिछड़ी जाति के मसीहा तथा अनेकों नामों से जाने जाने वाले महात्मा ज्योति राव फूले का जन्मदिन 11 अप्रैल 1827 को पुणे में गोविंदराव माली के घर हुआ। ज्योतिराव के जन्म के एक वर्ष बाद ही उनकी मात…
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शब्दों में शक्ति तभी होगी जब सोच में गहराई होगी : अतुल मलिकराम
“एक लेखक की सबसे बड़ी पूंजी उसकी सोच होती है। शब्द तो केवल उस सोच का माध्यम होते हैं।” एक शाम मैं अपनी बालकनी में सुकून से बैठा था, बड़े दिनों बाद ऐसा मौका मिला था जब हाथ में एक बढ़िया किताब और पास में गर्मागर्म चाय थी। लेखक ने किताब में अपनी विचारधारा को कुछ इस तरह पिरोया था कि किताब बीच में छोड़ने…
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आधी रात में केक काटने का चलन: उत्सव या दिखावा? अतुल मालिकराम
कु छ दिनों पहले ही मेरा जन्मदिन बीता, रात के 12 बजते ही अचानक से फोन बज उठा। जन्मदिन की बधाई देने के लिए परिचितों के फ़ोन और मैसेज की जैसे कतार सी लग गई, ऐसा लग रहा था मानों रात के 12 बजे का समय एकदम से विशेष बन गया हो। घर में भी हर कोई जाग रहा था, मेरी बिटियाँ हाथ में केक और चेहरे पर चिरपरिचित मुस्…
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राजनीति को नया आयाम देने के लिए जरुरी युवाओं की भागीदारी
युवाओं के हाथ में राजनीति के नए युग की शुरुआत..... -अतुल मलिकराम (लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार) राजनीति —यह शब्द सुनते ही अक्सर हमारे मन में नकारात्मक विचारों की बाढ़ आ जाती है। भ्रष्टाचार, सत्ता की भूख, और धोखाधड़ी जैसे शब्द हमारे दिमाग में घूमने लगते हैं। समाज में राजनीति और राजनेता दोनों को ही नका…
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आदित्य अनमोल ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर पर लिखी किताब और कहा उनका जीवन युवाओं के लिए मार्गदर्शक हो सकता है
आदित्य अनमोल ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर पर एक किताब लिखी है, जिसका शीर्षक है द जननायक कर्पूरी ठाकुर: वॉइस ऑफ द वॉइसलेस। दिवंगत मंत्री का जीवन आज भी लोगों को प्रेरित करता है, लेकिन उनकी मृत्यु अभी भी कई लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। ठाकुर की 1988 में रहस्यमय परिस्थितियों में मृ…
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भारतीय समाज के लिए महात्मा फुले का योगदान
महान समाज सुधारक सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महिला शिक्षा के जनक, दलित एवं पिछड़ी जाति के मसीहा तथा अनेकों नामों से जाने जाने वाले महात्मा ज्योति राव फूले का जन्मदिन 11 अप्रैल 1827 को पुणे में गोविंदराव माली के घर हुआ। ज्योतिराव के जन्म के एक वर्ष बाद ही उनकी माता चिमना बाई की मृत्यु हो गई । उनके…
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सावित्रीबाई फुले का महिलाओं के लिए योगदान : हरगोपाल भाटी
सावित्रीबाई फुले की पुण्य तिथि 10 मार्च पर      सावित्रीबाई फुले 19वी सदी की प्रथम शिक्षित महिला, प्रशिक्षित शिक्षक महिला, क्रांतिकारी विचारक, सामाजिक एवं धार्मिक नवत्थान में योगदान एवं महिला उत्थान में महिलाओं की भागीदारी के लिए के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन, महिला शिक्षा, दलितो एवं अछूतों के लिए समर्…
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हर महिला के पास ये पाँच टाइमलेस डायमंड ज्वेलरी होना ही चाहिए
महिला दिवस : 8 मार्च ल क्ज़री, ग्लैमर और अटूट प्रेम के प्रतीक के रूप में, हीरे की सदियों से ही एक अलग पहचान रही है। इंगेजमेंट रिंग्स से लेकर रेड कार्पेट नेकलेस तक, एक महिला के जीवन में आने वाले सबसे महत्वपूर्ण पलों में हीरे ने खूब शोभा बढ़ाई है। लेकिन एक ट्रेडिशनल सॉलिटेयर रिंग से अलग, आपके ज्वेलरी क…
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"भारत की प्रथम महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले "
भारत में आज महिलाओं की स्थिति देखते हैं तो आज की महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर साथ दे रही है क्या आपने कभी सोचा है की महिलाओं को इस स्तर पर लाने वाली वह कौन थी उसका उत्तर है सावित्रीबाई फुले।     आओ आज हम सावित्रीबाई फुले के बारे में जाने!        सावित्रीबाई फुले का जन्म महाराष्ट्र में …
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महात्मा फूले दर्शन
सामा जिक क्रांति के जनक, महिला शिक्षा के जनक, साक्षरता आंदोलन के जनक, सामाजिक न्याय के प्रणेता, महात्मा गांधी के महात्मा एवं भीमराव अंबेडकर के गुरु तथा अनेक नामों से जाने पहचाने जाते हैं हमारे जन जन के लाडले महात्मा ज्योतिराव फुले।      उन्नीसवीं सदी में भारतीय समाज में अनेक बुराइयां जैसे वर…
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शंकर लालवानी के साथ और बाद, कौन करेगा सिंधियों की अगुवाई? – अतुल मलिकराम, राजनीतिक विश्लेषक
वह समाज, जिसने भारत के लिए अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया 1947 में हुए देश के विभाजन ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया। जिन्होंने भारत को चुना, उन्हें अपना घर, जमीन, जायदाद, सब पीछे छोड़कर भागना पड़ा। हालाँकि, इस त्रासदी का यदि कोई सबसे अधिक शिकार हुआ, तो वह था सिंधी समाज। वह समाज, जिसने भारत के लिए अपना …
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बेटी धन
रा मकन्या गर्दन झुकाए गहरे विचारों में खोई हुई थी, उसके परिवार वाले गोल घेरा बनाए बैठे थे,क्योंकि बेटी सुमित्रा के विवाह के लिए, पास के गांव के सरपंच साहब के यहां से अपने बेटे गोविंद का रिश्ता आया था। घर के सभी सदस्य इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे थे। वह भी सोच रही थी, बेटी सुमित्रा के लिए इसस…
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उदासीनता और लापरवाही की शिकार, हॉकी के जादूगर की प्रतिमा: अतुल मलिकराम
मे जर ध्यान चंद भारत माता के उन सपूतों में से एक हैं, जिनका नाम ही उनकी पहचान है। अब तक के सबसे महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक ध्यान चंद ने अपनी हॉकी स्टिक से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया, और तो और भारत को विश्व मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाने में भी अटूट योगदान दिया। हॉकी के जादूगर पद्म विभूषण …
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आज याद आ गई वो बचपन की चिड़िया...
साथियों, यह रचना उन सब माताओं को समर्पित है, जिनके बच्चें उनसे दूर निकल गये है अपना भविष्य बनाने के लिए :– आज याद आ गई वह बचपन की चिड़िया। वही जो अपने साथी के साथ दिन भर, अन्दर बाहर उड़ती फिरती। लकड़ी की बल्ली पर अपना संसार बसाने को आतुर। तिनका तिनका संजोती। उसका साथी हरदम उसके साथ, गिरे तिनकों को उठा…
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कविता : जगा रहूं.... - डॉ.एम.डी.सिंह
मेरे जख्मों पर मरहम नहीं नमक छिड़क  कि चीखता रहूं दर्द से बिलबिलाता रहूं  कि कहीं सो न जाऊं  जगा रहूं जगा रहूं  कि वर्तमान मुझे मरा न समझ ले  कि इतिहास कहीं कायर ना लिख दे  मेरी छाती में वरछियां घोप  आँखों में उंगलियां डाल जला दे दिमाग को अलाव की तरह  कि मेरे सीने में सहानुभूति न रहे  कि मेरी आंखों…
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संस्कृति और विरासत की गोद में बैठे भारत से विलुप्त होते संस्कार- अतुल मलिकराम
सं स्कृति और विरासत की गोद में बैठे भारत को संस्कारों का देश कहा जाता है। अच्छे संस्कार हमारे देश के लोगों के रोम-रोम में बसते हैं। बात घर आए मेहमान का आदर सत्कार करने की हो या भोजन को देवतुल्य मानने की, माता-पिता और गुरु को भगवान् का दर्जा देने की हो या अन्य प्राणियों की सेवा की, सद्भावना और परोपक…
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बादाम के साथ मनाएं अंतर्राष्ट्री य परिवार दिवस का जश्न!
इस अंतर्राष्ट्री य परिवार दिवस पर अपने आहार में बादाम को शामिल करने का संकल्पा लें! भारत। हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीअय परिवार दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन परिवारों के महत्वं को रेखांकित करता है और इसका लक्ष्यत परिवारों से सम्बंपधित मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन, हमें अपने परिवा…
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मातृदिवस पर आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत हुआ काव्य पाठ
जगत पूर्ण संसाधन है "माँ", दूर हुई तब अहसास हुआ प्रदेश के युवाओं को साहित्य के क्षेत्र में बढ़कर-चढ़कर भाग लेना चाहिए। इसके लिये साहित्य अकेडमी मध्यप्रदेश, गाँव-गाँव तक कार्यक्रम आयोजित करा रहा है। साथ ही ऐसे लेखक जिनकी अभी तक एक भी पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है वह पांडुलिपि हमें भेज सकते है।…
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महात्मा फुले
11 मई हम सबके लिए यादगार दिन है आज ही ज्योतिराव गोविंदराव फुले को महात्मा की उपाधि प्रदान की गई थी।     प्रथम मजदूर नेता राव साहब नारायण मेघा जी लोखंडे ने 11 मई 1888 को मुंबई के कोलीवाड़ा में विशाल आयोजन किया जिसमें मुख्य अतिथि राव बहादुर विट्ठल राव कृष्ण बन्डेकर जो महान समाज सुधारक थे उनके …
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कोरोना को चुनौती देती डॉ.एम.डी.सिंह की कविता
समय कुटिल साधना होगा जीवन को बांधना होगा युद्ध मृत्यु से हो चाहे कठोर अनित्य से हो चाहे मनुज हारा नहीं अभी तक संघर्ष अभित्य से हो चाहे उसे अवश्य हारना होगा जीवन को बांधना होगा कोरोना कौन है आखिर  कहां है पूंछ किधर है सिर कहां छुपी जान है उसकी कैसे जी उठ रहा फिर फिर हमको यह जानना होगा जीवन को बांधना…
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