कीट का प्रकोप होने पर किसान सतत रखें फसल की निगरानी

रबी फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिये किसानों को सलाह


          उज्जैन। मौसम की प्रतिकूलता के कारण गेहूं फसल में जड़ माहू एवं अन्य भूमिजनित कीट का प्रकोप देखने में आ रहा है। किसानों को कृषि विभाग के अधिकारियों ने सलाह दी है कि वे अपनी गेहूं की फसल की सतत निगरानी रखें। फसलों की स्थिति एवं कीटव्याधि प्रकोप का निरीक्षण एवं नियंत्रण तथा तकनीकी मार्गदर्शन हेतु कृषि वैज्ञानिकों का दल का गठन किया गया है, जो  समय-समय पर जिले में भ्रमण कर किसानों को सलाह दे रहे हैं।


          कृषि विभाग के उप संचालक श्री सीएल केवड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि जड़ माहू कीट की पहचान किसान इस तरह करें कि यह कीट हल्के पीले रंग से गहरे पीले रंग का होता है, जो जड़ों का रस चूसता है। इसके कारण पौधे की पत्तियां सूखने लगती है। प्रभावित पौधे को उखाड़कर देखने पर जड़ माहू की जड़ों के आसपास देखी जा सकती है। अधिक तापमान इस कीट की सक्रियता बढ़ाती है। किसानों को जड़ माहू नियंत्रण के लिये सलाह दी जाती है कि वे एमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 200 से 250 एमएल मात्रा 400 से 500 लीटर पानी के साथ छिड़काव फसल में करें। थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी एक एमएल प्रति लीटर के मान से स्प्रे करें। एक हेक्टेयर में कम से कम 400 से 500 लीटर पानी का उपयोग करें। जहां पर जड़ सड़न एवं पत्ती सूखने की शिकायत है, वहां पर मैकोजेब एवं कार्बनडाइज्म का मिश्रण तीन ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ स्प्रे करें तथा थोड़ा सिंचाई के अन्तराल को बढ़ायें। जिन किसानों की गेहूं की फसल में भूमिगत कीट का प्रकोप है, वहां पर खड़ी फसल में क्लोरीपाइरीफॉस 25 ईसी दवा चार लीटर प्रति हेक्टेयर सिंचाई के साथ दें। अधिक जानकारी के लिये किसान अपने क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय या स्वयं उनसे सम्पर्क कर सकते हैं।


          रबी फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिये सलाह देते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि कहीं-कहीं पर गेहूं फसल में पीलापन आने की समस्या होने की जानकारी प्राप्त हो रही है। यह उत्पादकता को प्रभावित करेगा। इसके लिये किसानों से आग्रह किया गया है कि वे रूट एफिड एवं भूमिगत कीट के प्रकोप के नियंत्रण के लिये जहां सिंचाई होने वाली है वहां तीन से चार लीटर प्रति हेक्टेयर क्लोरीपॉरीफॉस 20 ईसी तरल को सिंचाई के साथ फसल में दें। साथ ही जहां सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां पर डाइमिथोनेट डेढ़ मि.ली. पानी के माध्यम से स्प्रे करें। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में फसल का निरीक्षण किया गया था। इसी के आधार पर विभाग द्वारा किसानों के लिये सलाह दी गई है।