एजुकेट गर्ल्स संस्था और राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने सरकारी शिक्षकों को डिजिटल तकनीक का उपयोग करने में मदद करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

● एजुकेट गर्ल्स संस्था शुरू करने जा रही है ट्रेन द ट्रेनर मॉड्यूल

● एजुकेट गर्ल्स संस्था का राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के साथ किया समझौता ज्ञापन - 33 जिलों में संस्था करेगी मास्टर ट्रेनर तैयार

● राजस्थान के स्कूल शिक्षक अब डिजिटल तकनीक के माध्यम से ड्रॉप आउट बच्चों को करेंगे चिन्हित


राजस्थान।
कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है। लड़कियों की पढ़ाई पर इसका सबसे बुरा असर हुआ है। कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर से बच्चों की शिक्षा पर हुए दुष्प्रभाव के असर को कम करने के हेतु से एजुकेट गर्ल्स संस्था स्कूल शिक्षा परिषद के साथ मिलकर ‘ट्रेन द ट्रेनर मॉड्यूल’ शुरू करने जा रही है। 23,अगस्त 2022 को एजुकेट गर्ल्स संस्था और समग्र शिक्षा अभियान के साथ एक समझौता ज्ञापन किया गया | जयपुर में हुए इस समारोह में समग्र शिक्षा अभियान से डॉ मोहन लाल यादव और एजुकेट गर्ल्स से डॉ. पल्लवी सिंह तथा कुछ अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे।

ट्रेन द ट्रेनर पहल राज्य के 33 जिलों में प्रारम्भ होने जा रहा है । संस्था डिजिटल तकनीक के माध्यम से बच्चों को चिन्हित करने से लेकर नामांकन का रियल टाइम डेटा एकत्रित करती है। इस परियोजना में हमारा उद्देश्य जिला स्तर पर प्रशिक्षकों के एक समूह को प्रशिक्षित करना, प्रशिक्षित दक्ष प्रशिक्षों के द्वारा सरकारी शिक्षकों को इस डिजिटल तकनीक में प्रशिक्षण देना और इसके कार्यान्वन में सहयोग करना है। साथ ही डोर टू डोर सर्वे, डेटा विश्लेषण और रिपोर्टिंग के लिए तकनीक आधारित सुविधा प्रदान करना है।

इस परियोजना की शुरुआत अगस्त 2022 से होगी। इस पहल से शिक्षा से वंचित बालिकाओं को चिन्हित करने, उनके नामांकन और ठहराव में बढ़ोतरी होगी। जिससे अधिक से अधिक लड़कियां अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी कर पाएंगी।

डॉ मोहन लाल यादव, स्टेट प्रोजेक्ट डारेक्टर, समग्र शिक्षा अभियान, राजस्थान ने कहा " मैं सभी संस्थाओं से उम्मीद करता हूँ कि आप अच्छे से काम करें, किसी प्रकार की समस्या आए तो सीधा हमसे सम्पर्क करें | मैं आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ, साथ ही राज्य, जिला स्तर पर हर तरह के सहयोग का आश्वासन देता हूँ।”

एजुकेट गर्ल्स की असोसिएट डायरेक्टर, प्रोग्राम, डॉ. पल्लवी सिंह ने बताया, "एजुकेट गर्ल्स को उम्मीद है कि इस डिजिटल तकनीक से शिक्षकों को ऑउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिन्हित और नामांकन करने में कम समय लगेगा और राज्य स्तर पर भी वास्तविक समय पर डेटा विश्लेषण के लिए उपलब्ध होगा। शिक्षा विभाग को शुक्रिया एजुकेट गर्ल्स को इस पहल से जोड़ने के लिए एजुकेट गर्ल्स के बारे में: एजुकेट गर्ल्स एक ग़ैर-लाभकारी संस्था है जो भारत के ग्रामीण और शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाकों में बालिकाओं की शिक्षा के लिए समुदायों को प्रेरित करता है। सरकार के साथ साझेदारी में काम करते हुए एजुकेट गर्ल्स वर्तमान में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 20,000 से अधिक गांवों में सफलतापूर्वक कार्यरत है। सामुदायिक स्वयंसेवकों की बड़ी संख्या को सहभागी बनाते हुए, एजुकेट गर्ल्स स्कूल से वंचित बालिकाओं की पहचान, नामांकन, और स्कूलों में ठहराव बनाए रखने और सभी बच्चों (दोनों - बालिकाओं और बालकों) के लिए साक्षरता और अंक गणितीय योग्यता में बुनियादी सुधार के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करती है।

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