इतिहास लिखने वालों ने केवल मुगल साम्राज्य की चर्चा की, सत्य फिर से उजागर हो जाएगा - अमित शाह


क पुस्तक विमोचन के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान दे दिया है। अमित शाह ने कहा कि हमारे इतिहास लिखने वालों ने केवल मुगल साम्राज्य की ही चर्चा की है। उन्होंने कहा कि इतिहास लिखने वालों ने केवल मुगल साम्राज्यों की चर्चा की। पांड्य, अहोम, पल्लव, मौर्य और गुप्त जैसे राज्यों ने 500 से अधिक वर्षों तक शासन किया और बहादुरी से लड़े लेकिन उन पर संदर्भ ग्रंथ नहीं लिखे गए। उन्होंने कहा कि हमें अपने गौरवशाली अतीत को जनता के सामने रखना चाहिए और उस पर ग्रंथ और पुस्तकें लिखी जानी चाहिए। धीरे-धीरे...सच्चाई फिर से जाग उठेगी। सत्य फिर से उजागर हो जाएगा। शाह ने कहा कि भारत ने 1,000 साल तक अपनी संस्कृति, और धर्म के लिए लड़ाई लड़ी जो व्यर्थ नहीं गई और इस लड़ाई के दौरान कुर्बानियां देने वालों की आत्मा को आज भारत का पुनरुत्थान देखकर शांति मिलती होगी। 

इस कार्यक्रम में मौजूद लेखकों व इतिहासकारों से अमित शाह ने आह्वान किया कि वे इतिहास पर टीका -टिप्पणी छोड़कर देश के गौरवशाली इतिहास को संदर्भ ग्रंथ के रूप में जनता के सामने रखें। भाजपा नेता ने साफ तौर पर कहा कि जब हमारा प्रयास किसी से बड़ा होता है तो अपने आप झूठ का प्रयास छोटा हो जाता है। हमें प्रयास बड़ा करने पर ध्यान देना चाहिए। झूठ पर टीका-टिप्पणी करने से भी झूठ प्रचारित होता है। हमें कोई नहीं रोकता है, हमारा इतिहास लिखने से। अब हम स्वाधीन हैं। किसी के मोहताज नहीं हैं। हम हमारा इतिहास खुद लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि पांड्य साम्राज्य 800 साल तक चला जबकि अहोम साम्राज्य असम में 650 साल तक चला। इस साम्राज्य ने बख्तियार खिलजी से लेकर औरंगजेब तक को परास्त किया और असम को स्वतंत्र रखा। शाह ने कहा कि इसी प्रकार पल्लव साम्राज्य 600 साल तक, चालुक्य साम्राज्य 600 साल तक, मौर्य साम्राज्य 500 साल तक तथा गुप्त साम्राज्य 400 साल तक चला। उन्होंने कहा कि समुद्रगुप्त ने तो पहली बार भारत की कल्पना को चरितार्थ करने का साहस दिखाया मगर इन सब पर कोई संदर्भ ग्रंथ नहीं लिखा गया। 

इसके साथ ही गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी समाज को अपना उज्ज्वल भविष्य बनाना हो तो उसे अपने इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए, उससे सीख लेनी चाहिए और अपने इतिहास से सीखकर अपना आगे का रास्ता प्रशस्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारों के अभ्यासक्रम से इतिहास की जानकारी मिलती है। लेकिन इतिहास को पढ़ना होता है, जानना होता है, और वह सरकार पर आधारित नहीं होता है। अगर हम संदर्भ ग्रंथ बनाने की शुरुआत करें, इतिहास को हम हमारे दृष्टिकोण से लिखने की शुरुआत करें... उस पर बहस करें, नयी पीढ़ी अभ्यास करे तो कुछ देर नहीं हुई है। यह लड़ाई बहुत लंबी है। इसके लिए जरूरी है कि हम हमारे इतिहास को सामने रखें।’’ केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इतिहास की कई गौरवशाली घटनाओं पर समय की धूल पड़ी थी, उस समय की धूल को ढंग से हटाकर उन घटनाओं की तेजस्विता को लोगों के सामने लाने का काम इस किताब के माध्यम से किया गया है। 

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