विदेशों में बढ़ रही है उज्जैन की भैरवगढ़ प्रिंट की मांग
जापान सहित कई देशों में धूम मचा रहे हैं भैरवगढ़ में बने बटिक प्रिंट
उज्जैन। उज्जैन के कालभैरव क्षेत्र के भैरवगढ़ में कई छीपा कलाकार रोज कड़ी मेहनत कर अपनी कल्पनाओं को कई रंगों और आकर्षक डिजाईन कपड़ों पर उकेरते हैं।

इन उत्पादों की जापान सहित कई देशों में अच्छी-खासी मांग बढ़ रही है। कालियादेह की महिलाओं का एक स्वसहायता समूह भैरवगढ़ प्रिंट के वस्त्र अमेजन पर ऑनलाइन सेल हेतु ले जा रहा है। छीपा कलाकार चर्चा में बताते हैं कि उनके पूर्वज राजस्थान के नागौर के रहने वाले थे। कई वर्षों पहले वे उज्जैन के समीप भैरवगढ़ में आकर बस गये थे। छपाई का काम करने के कारण इनके समुदाय को ‘छीपा’ समुदाय के नाम से जाना जाता है। तकरीबन 150 साल पहले वसीम के पूर्वज छपाई के कार्य में वेजिटेबल डाई का प्रयोग करते थे।

आधुनिक युग में भी भैरवगढ़ की विश्व प्रसिद्ध प्रिंट्स में छपाई और डिजाईन बनाने का कार्य पूरी तरह हाथ से किया जाता है। इसमें किसी भी तरह की मशीनरी का उपयोग नहीं होता है। यही एक बात भैरवगढ़ प्रिंट्स को बाकीयों से अलग बनाती है। यहां तक कि रंगाई करने के लिये उपयोग में आने वाले पेन भी विशेष तौर पर सायकल की ताड़ी और ब्रश घोड़े के बाल से बनाये जाते हैं।
कई कलाकारों के पास वर्तमान में उनके पास छपाई के उपयोग में आने वाले सौ साल से भी अधिक पुराने ब्लॉक्स मौजूद हैं, जिनमें उस समय की कई आकर्षक डिजाईनें हैं। छपाई का कार्य केवल शुद्ध सूती और शुद्ध रेशम तथा कोसा रेशम के कपड़ों पर ही किया जाता है। किसी भी तरह के सिंथेटिक कपड़े पर भैरवगढ़ प्रिंट्स का कार्य संभव नहीं है। छपाई के लिये प्रयोग में आने वाली उत्तम गुणवत्ता की डाई भी बाहर से मंगाई जाती है। परम्परागत डिजाईन के अलावा कई नई तरह की प्रासंगिक फ्रीहैण्ड डिजाईन भी वसीम और उनके कारीगरों द्वारा बनाई जाती है।

स्वसहायता समूह की श्रीमती नसीमबी कहती हैं कि बटिक छपाई के पहले कपड़े को आठ दिनों तक पानी में गलाया जाता है। इसके बाद कपड़े की ब्लिचिंग की जाती है। फिर दो दिनों तक इसे दोबारा पानी में रखा जाता है। जरूरत के हिसाब से कपड़े की कटिंग की जाती है। बटिक छपाई के लिये कारखाने में एक तरफ गैस पर मोम गर्म होता रहता है और एक तरफ मेज पर सफेद कपड़ा फैला रहता है। पिघले हुए मोम में कलम डुबोकर कारीगर फ्रीहैण्ड चित्र बनाते हैं। इसके बाद 120 डिग्री सेल्सियस पर गर्म पानी में कपड़ों को मोम निकालने के लिये भिगोया जाता है। फिर रंगों में डुबोकर इन्हें डाई किया जाता है। बटिक छपाई में अधिकतम सात रंगों का प्रयोग एक ही कपड़े पर किया जा सकता है।