कन्टेनमेंट क्षेत्रों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बढ़ सकती है ढील


      भोपाल। रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में पाबंदी और प्रस्तावित ढील का सुझाव राज्य सरकार ने केंद्र को भेज दिया। रेड जोन में आने वाले इंदौर, उज्जैन और भोपाल में लाॅकडाउन बढ़ाने के साथ राज्य सरकार कंटेनमेंट एरिया में सख्ती के पक्ष में हैं। हालांकि रेड जोन के कंटेनमेंट क्षेत्र को बफर में बदलकर बाकी जगहों की दुकानें खोलने के साथ अन्य गतिविधियों में ढील बढ़ सकती है।


      राज्य सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि कंटेनमेंट एरिया का दायरा बढ़ाकर उसे बफर बना सकते हैं। उदाहरण के लिए भोपाल का जहांगीराबाद कंटेनमेंट एरिया है तो उसके आसपास एक-दो किमी का क्षेत्र और लेकर उसे बफर घोषित किया जा सकता है। इसमें सख्ती रखी जाए और इसके बाहर के क्षेत्र में ढील बढ़ाई जाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शासन को मिले सभी सुझावों की समीक्षा की और देर शाम गृह विभाग ने इसे केंद्र को भेज दिया। मप्र सरकार का मानना है कि 17 मई को लाॅकडाउन 3.0 पूरा होने के बाद केंद्र सरकार आगे की गाइडलाइन राज्यों को भेजेगी। इसी के आधार पर गतिविधियां बढ़ेंगी।


      सुबह 7 से शाम 7 बजे तक खुलेंगी दुकानें - भीड़ वाले बड़े बाजार बंद रहेंगे, उदाहरण के रूप में भोपाल के न्यू मार्केट जैसे बड़े बाजार बंद रहेंगे, लेकिन पांच, छह या सात नंबर जैसे छोटे मार्केटो खुल सकेंगे, मोहल्लों की दुकानें खुलेंगी। कंटेनमेंट के बाहर होटल खोले जाएंगे, जिसमें सिर्फ रुकने की इजाजत होगी। भोजन की होम डिलीवरी की स्वीकृति रहेगी। रेड जोन में कंटेनमेंट के बाहर 25 श्रमिकों के साथ निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। ऑरेंज और ग्रीन में यह बाध्यता नहीं रहेगी। कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहर ट्रांसपोर्ट शुरू होगा। रेड जोन में मोटरसाइकिल, निजी चार पहिया वाहन को छूट रहेगी। मोटर साइकिल पर एक और कार में ड्राइवर व दो लोग। रेड जोन में निजी दफ्तर 33 फीसदी मैनपावर के साथ खुलें।


      ऑरेंज और ग्रीन जोन में ये छूट संभव - इसमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू होगा। ग्रीन जोन में गतिविधियां पूरी तरह सामान्य हो जाएंगी। आॅरेंज जोन के कंटेनमेंट क्षेत्र को छोड़कर गतिविधियां बढ़ेंगी। ऑरेंज में परिवहन में 50 फीसदी यात्रियों की बाध्यता रहेगी। सभी जोन के कंटेनमेंट क्षेत्र में कोई ट्रांसपोर्टेशन नहीं होगा। निर्माण कार्यों में श्रमिकों के नियोजन की कोई बाध्यता नहीं रहेगी। दफ्तर भी खुलेंगे।


      रेड: राज्य के कुल संक्रमित केस की 80 फीसदी संख्या जितने जिलों से पूरी हो जाएगी, वे ही जिले रेड जोन में रहेंगे। साफ है कि शुक्रवार के आंकड़ों के हिसाब से राज्य में कुल केस की संख्या 4595 है। इसका 80 फीसदी 3676 होता है। कोविड-19 की जारी सूची के हिसाब से जितने जिलों से यह 80 प्रतिशत का आंकड़ा पूरा हो जाएगा, वे जिले रेड जोन कहलाएंगे। यह नंबर इंदौर, भोपाल और उज्जैन से ही पूरा हो रहा है, लिहाजा यही तीन जिले रेड जोन में रहें। मप्र ने एक सुझाव यह भी दिया है कि यदि रेड जोन के जिले में नगर निगम है और कंटेनमेंट एरिया नगर निगम के अंदर है तो इसकी सीमा से बाहर वाले क्षेत्रों को ऑरेंज जोन माना जाएगा।


      ऑरेंज: जिन जिलों में 20 से ज्यादा केस हों वे जिले शामिल होंगे। इनमें बुरहानपुर, जबलपुर, खरगौन, धार, खंडवा, रायसेन, देवास, मंदसौर, नीमच, होशंगाबाद, ग्वालियर, रतलाम, बड़वानी व मुरैना। यहां कंटेनमेंट क्षेत्र है तो उसके बाहर का पूरा जिला ग्रीन जोन कहलाएगा। इसी का प्रोटोकॉल लागू होगा।


      ग्रीन: 20 से कम केस वाले जिले।


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