15 महीने बाद 'मामा' एक बार फिर सिंहासन तक
 

      भोपाल। 15 महीने पुरानी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार की विदाई के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की सत्ता संभाल लिया। वह एक बार फिर पैदल सिपाही से सिंहासन तक पहुंच गए। वहीं मध्य प्रदेश की जनता को एक बार फिर उनके मामा यानी कि शिवराज सिंह चाैहान का शासन वापस मिल गया है।



      61 वर्षीय शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार फिर से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली है। खास बात तो यह है कि उन्होंने चाैथी बार शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। 5 मार्च, 1959 को सिहोर जिले के जैत नामक गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुए थे। इनके पिता का नाम प्रेम सिंह चौहान और माता का नाम सुंदर बाई था। उनके सार्वजनिक जीवन की यात्रा 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से शुरू हुई थी।


      छात्र जीवन में भी काफी चर्चित रहे शिवराज। भोपाल के मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करते हुए 1975 में वे स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने आपातकाल के खिलाफ भूमिगत आंदोलन में भाग लिया और 1976-77 में उन्हें जेल में उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
      इसके अलावा अलावा राजनीतिक आंदोलन और सार्वजनिक कारणों से कई अन्य अवसरों पर भी उन्हें ऐसे उतार चढ़ाव देखने पड़े थे। शिवराज सिंह चौहान 1977 से में भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय से परास्नातक में गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं।


      भाजपा के महासचिव और पार्टी की एमपी इकाई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। शिवराज सिंह पहली बार 1990 में बुधनी सीट से मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद 1991 में पहली बार विदिशा सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
      इसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 में चार बार लोकसभा के लिए चुने गए। चौहान 2000 से 2003 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी रहे।
      दिसंबर, 2003 में विधानसभा चुनावों में भाजपा की ओर से शिवराज सिंह तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लडे थे।


      चाैहान 29 नवंबर, 2005 को जब वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे तब उन्हें बाबूलाल गौर के स्थान पर राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था। उसके बाद उन्होंने 2006 में गृह जिले सीहौर जिले के बुधनी से 36,000 वोट से चुनाव जीता।
      2008 के विधानसभा चुनाव में वे फिर यहीं से 41,000 वोट से जीते। इस चुनाव में बीजेपी को लगातार बहुमत मिली और वे दूसरी बार 12 दिसंबर 2008 को प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
      2013 के विधानसभा चुनाव में वे दो सीटों बुधनी और विदिशा से चुनाव लड़े और दोनों ही जगह सीटें जीतीं थी। इस तरह वे तीसरी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।


मध्यप्रदेश के चहेते शिवराज
      एमपी में लोग शिवराज को प्यार से मामा बुलाते हैं। शिवराज भी जनता के लिए बहुत कुछ करते हैं।
      शिवराज सिंह ने लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्‍यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्‍यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, स्‍कूली बच्‍चों को साइकिल प्रदान करने, गरीबों के लिए 1 रुपये प्रति किलो चावल और 2 रुपये प्रति किलोग्राम गेहूं और सम्‍बल योजना के लिए सस्‍ती बिजली मुहैया कराने जैसी कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की। इनमें से कुछ योजनाएं इतनी लोकप्रिय हुईं कि अन्य राज्यों ने भी उनका अनुकरण किया।


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