पैसा डबल करने के नाम पर 5 करोड़ से ज्यादा की ठगी


      नई दिल्ली। रकम दोगुनी करने के नाम पर करीब 150 लोगों से 5 करोड़ रुपये की ठगी के मामले को हल्के में लेना दिल्ली पुलिस को महंगा पड़ा है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शिकायत मिलने के 4 महीने बाद प्राथमिकी दर्ज की। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के उपायुक्त को नोटिस जारी किया है।


      कोर्ट ने कहा कि वह विभाग की इस लचर प्रणाली पर जवाब दें। रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार की कोर्ट ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार किसी भी आपराधिक मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधिकतम छह हफ्ते तफ्तीश के लिए ले सकती है। गंभीर संज्ञेय अपराध में पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य होता है।


      जांच अफसर ने कहा कि उसने पुलिस नियमावली के मुताबिक जांच कर प्राथमिकी दर्ज की। कोर्ट ने नियमावली दिखाने को कहा तो वह कोई जवाब नहीं दे पाया। इस मामले में पहली शिकायत पुलिस को जनवरी 2019 में मिली थी। इसके बाद पुलिस के पास तकरीबन डेढ़ सौ लोगों ने शिकायत दी लेकिन पुलिस ने चार मई 2019 को प्राथमिकी दर्ज की।


      कोर्ट ने कहा कि इससे साफ है कि दिल्ली पुलिस किस तरह काम करती है। देश की राजधानी में कई लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई और पुलिस ने मामला दर्ज करने में ही चार माह का समय लगा दिया। कोर्ट ने संबंधित विभाग के उपायुक्त को कहा कि वह प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी पर अपना जवाब कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें।


      शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि चिट एंड फंड कंपनी के नाम पर उनसे ठगी हुई है। पुलिस ने भी इस मामले में पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम की धोखाधड़ी की बात मानी है। लेकिन पुलिस ने जांच एफआईआर दर्ज करने में ही चार माह लगा दिए। पुलिस ने सरस्वती विहार इलाके में रहने वाले भीम सैन, उसकी पत्नी कंचन व बेटे समेत चार लोगों को आरोपी बनाया है। मामले में मुख्य आरोपी भीम सैन की तरफ से कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी परंतु कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।