मंदिरों में ट्रस्ट-कमेटियां खत्म, अब से एक समिति - एक कानून



      उज्जैन। उज्जैन के महाकाल और सीहोर के मां सलकनपुर देवी मंदिर समेत प्रदेश के छह मंदिरों की व्यवस्थाओं का संचालन अब एक ही कानून के तहत होगा। शुक्रवार को विधानसभा ने मप्र विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक 2019 पारित कर संचालन संबंधी नियम तय कर दिए। इस विधेयक के अधीन खंडवा के दादाजी दरबार, छिंदवाड़ा के जाम सांवली हनुमान मंदिर, इंदौर के खजराना गणेश मंदिर, मैहर के शारदा मंदिर का संचालन होगा। व्यवस्थाओं के लिए हर मंदिर की एक कमेटी होगी। इस कानून के लागू होने के बाद मंदिरों में लागू मौजूदा अधिनियम स्वत: समाप्त हो जाएंगे। 


      समितियां और ट्रस्ट भी खत्म हो जाएंगे। नए अधिनियम में मंदिर के कोष, बजट, लेखा, चढ़ावा, दान आदि के लिए भी नियम तय किए गए हैं। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि नया अधिनियम लागू होने के बाद किसी भी विशेष मंदिर के लिए अलग से अधिनियम नहीं बनाना पड़ेगा। अब एक नोटिफिकेशन के जरिए मंदिर को जोड़ा जा सकेगा। समितियां और ट्रस्ट भी खत्म हो जाएंगे।


      नए अधिनियम में मंदिर के कोष, बजट, लेखा, चढ़ावा, दान आदि के लिए भी नियम तय किए गए हैं। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि नया अधिनियम लागू होने के बाद किसी भी विशेष मंदिर के लिए अलग से अधिनियम नहीं बनाना पड़ेगा। अब एक नोटिफिकेशन के जरिए मंदिर को जोड़ा जा सकेगा।


हर मंदिर में एक समिति
संचालन समिति के प्रमुख कलेक्टर होंगे। समिति में एसपी, नगर निगम आयुक्त या मुख्य नगर पालिका अधिकारी, कलेक्टर द्वारा नामित चार द्वितीय श्रेणी स्तर के अधिकारी, सरकार द्वारा नामित दो पुजारी, राज्य सरकार द्वारा नामित दो अशासकीय ऐसे सदस्य जो धर्म-पूजा विधान के जानकार हों, कलेक्टर द्वारा नामित एक पुजारी तथा राज्य सरकार द्वारा विशेष आमंत्रित शामिल होंगे। हिंदू धर्म को न मानने वाला समिति का सदस्य नहीं होगा। समिति डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को प्रशासक नियुक्त कर सकेगी, जो कि समिति का सचिव भी होगा। समिति में शामिल सदस्यों को हटाने का भी प्रावधान किया गया है। मानसिक संतुलन बिगड़ने, कोर्ट से सजा होने, मंदिर के विरुद्ध क्रिया कलाप, छुआछूत करने पर सदस्य को हटाया जा सकेगा।