पिता-पुत्री जैसा नहीं मिलेगा इस दुनिया में कोई भी बंधन-बेटी अरुषी निशंक ने अपने पिता, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के लिए एक दिल छू लेने वाली कविता लिखी; वे एम्स, दिल्ली में कोविड की जटिलताओं से जूझ रहे हैं

पिता-पुत्री का रिश्ता वाकई सबसे खास होता है। दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसकी तुलना अपनी बेटी के लिए पिता के प्यार और इसके विपरीत से की जा सके। इसलिए, जब शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को कोविड-19 जटिलताओं के बाद नई दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया, तो उनकी बेटी अरुषी के पैरों के नीचे से जैसे जमीन खसक गई। प्रशंसित एक्ट्रेस, डांसर, एनवायर्नमेंटल कंज़र्वेशनिस्ट, कवि और आंत्रप्रेन्योर, अरुषी चिंता के घेरे में आ गईं, जो कि एक प्राकृतिक घटना है। इस मुश्किल घड़ी में, अरुषी ने अपनी भरोसेमंद कलम का सहारा लिया, जो उन्हें सबसे ज्यादा शांत करती है। अरुषी ने अपने पिता के लिए एक बेहद सुन्दर कविता लिखी और अपने सोशल मीडिया पर इसे शेयर किया। यह कविता इस प्रकार है:

जब भी मैं अकेली बैठी रहती,

आप हर बार तोड़ देते थे मेरी चुप्पी,

आज जब आप चुप बैठे हैं तो,

'आइसोलेशन' की राय ने बाँध दी है मेरी मुट्ठी।

बचपन में मेरे रिपोर्ट कार्ड पर,

दिल में जैसे आपके होती थी धुकधुकी।

आज जब आपका 'ब्लडटेस्ट' आता है,

मेरी साँस चल चल कर है रुकती।

आपका वो डांटना हर बार जब मैं,

खाना खाते फोन में गुम हो जाती हूँ।

इस समय जब कोई फाइल लेकर आता है,

तो मैं वैसे ही गुस्से में लाल हो जाती हूँ।

मेरी चट्टान जरूर आज थोड़ी शांत है,

पर हर पत्थर ने जिससे ताकत ली, वो आप हैं।

'निशंक' वो सूरज है जिसने हर दिशा जलकर,

कभी न खोई अपनी कांति ताप है।

जीती आपने बहुत-सी बड़ी जंग है,

ये तो महज़ छोटी-सी लड़ाई है।

आप तो योद्धा हैं, हर उस व्यक्ति के,

अब की बार कोविड पर हमारी चढ़ाई है।

कर्मा हर बार लौटकर है आता,

सब लोग ऐसा कहा करते थे।

आज जब आप बात नहीं सुनते मेरी तो,

याद वो बातें आती हैं, जो हम अनसुना करते थे।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,

ये मैंने अपने जीवन में आप से सीखा है।

दृढ़ इच्छाशक्ति के मालिक हैं आप,

हर संघर्ष आपके सामने फीका है।

हम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं और इस समय में अरुषी के लिए शक्ति और साहस की कामना करते हैं।

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