पूजा... - डॉ.एम.डी.सिंह


निज को गा लेना
स्वयं को पा लेना 
पूजा है

रीति -प्रीति ,लगन- मगन
आस्था, विरल- सघन
निष्ठा, प्रेम की प्रतिष्ठा
पूजा है

पूजा मूर्ति की आराधना नहीं
स्वयं को मूर्ति में बांधना है
सिद्ध करना है साधना है
अमूर्त को मूर्त कर देना
पूजा है

नित्य अनित्य निर्धारित करना
सुचिता को संचारित करना
चित्त की चंचलता पर चाबुक चलाकर
चैतन्यता को विस्तारित करना
पूजा है

- डॉ.एम.डी.सिंह
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