जो हंसाते हैं आपको, क्या हंसाते हैं उन्हें?


सा कहा जाता है कि हंसी सबसे अच्छी दवा होती है और हर किसी को हंसना-मुस्कुराना अच्छा लगता है, क्योंकि यह उनकी सारी चिंताओं को कुछ देर के लिये भुला देता है। काॅमेडी शोज परिवार को साथ मिलकर देखने के लिये ही बनाये गये हैं, खासकर इस मुश्किल वक्त में। यूं तो एक दर्शक के तौर पर आपके पास ऐसे शोज की पूरी लिस्ट होगी जो आपको हंसा सकते हैं। लेकिन जाने-माने कलाकार राजू श्रीवास्तव, आसिफ शेख, अनु अवस्थी, शुभांगी अत्रे, योगेश त्रिपाठी और रोहिताश्व गौड़, जोकि कई परिवारों में हंसने एवं मुस्कुराने का कारण हैं, उन चीजों के बारे में बता रहे हैं, जो उन्हें हंसाती है। जाने-माने काॅमेडियन, राजू श्रीवास्तव कहते हैं, ‘‘जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं भी कनपुरिया हूं। मेरा परिवार और मैं एण्डटीवी पर ‘भाबीजी घर पर हैं‘ और ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ को देखने का पूरा आनंद लेते हैं। दोनों ही शो में एक अपनापन-सा है और धांसू कनपुरिया जुमले हैं, जो सभी को हंसाते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि इसके कोई एपिसोड ना छूटें। मैं हप्पू सिंह और उनके परिवार से विशेष रूप से प्यार करता हूं। उनकी नोंक-झोंक और बोलचाल के शब्द जैसे न्यौछावर, अरे दादा, गुर्दे छील देंगे, घुइयां के खेत में, कंटाप, नींबू निचोड़ देंगे, तीन कलर में मूतोगे, ज्ञान ना पेलो, चिरांद, मेरे बेहद पसंदीदा हैं। सभी किरदारों का चिकाई करने का अंदाज निराला है। आप दोनों शोज के एपिसोड्स देख कर हंसते-हंसते लोटपोट हो जायेंगे।‘‘ ‘भाबीजी घर पर हैं‘ के आसिफ शेख उर्फ विभूति नारायण मिश्रा ने कहा, ‘‘जब से मैंने इस मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा है तब से ही मेरा मकसद जितना हो सके, लोगों को हंसाना है। एक परफाॅर्मर के तौर पर मुझे ऐसा लगता है कि हमारे पास सुपरपावर है कि हम लोगों को टेलीविजन और बड़े परदे के माध्यम से ना जाने कितनी भावनाओं का अहसास कराते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं जिनका मुझ पर कुछ ऐसा ही प्रभाव पडा़ था, वो हैं महमूदजी। उनका काॅमिक अंदाज हमेशा ही मुझे हंसाकर लोट-पोट कर देता था और मैं अक्सर उनके जोक्स दोस्तों पर इस्तेमाल करता रहता हूं। कई बार तो उनकी तरह बात करने की भी कोशिश करता हूं। मुझे ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में काफी बाद में ‘नई पड़ोसन‘ से मिलता-जुलता किरदार निभाने का मौका मिला था। वाकई वह मेरे लिये सम्मान की बात थी।‘‘ ‘और भई क्या चल रहा है‘ के अनु अवस्थी उर्फ बिट्टू कपूर ने कहा, ‘‘काॅमेडियन के तौर पर मैंने कानपुर में बेहद ही लोकल तरीके से शुरूआत की थी। मैंने कभी भी यह नहीं सोचा था कि मेरी पहुंच मुंबई और दिल्ली जैसे जगहों पर रहने वाले लोगों तक होगी। यह ख्याल भी नहीं आया था कि वहां मुझे पहचान मिलेगी! मुझे जो चीज हंसाती है वह है अच्छी कहानी जिसमें अच्छी टाइमिंग वाले जोक हों और मेरे लिये ‘और भई क्या रहा है?‘ की कहानी ऐसी ही है। जैसे ही मैंने इस शो की कहानी पढ़ी मुझे पता था कि इसके समझदारी भरे जोक्स और कंटेंट दर्शकों को बहुत पसंद आयेंगे। इस शो का हिस्सा बनकर ना केवल यह मुझे काॅमिक बनाता है, बल्कि मुझे इसमें काफी मजा भी आ रहा है।‘‘ ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की शुभांगी अत्रे उर्फ अंगूरी भाबी कहती हैं, ‘‘जब मैं एंटरटेनमेन्ट इंडस्ट्री में आयी थी, मैंने कभी नहीं सोचा था कि काॅमेडी जोनर में मैं काम करूंगी। ‘भाबीजी घर पर हैं‘ के साथ मुझे अपने काॅमिक पक्ष को जानने का मौका मिला। मुझे स्टैंड-अप काॅमेडी देखना बहुत पसंद है और उसमें जो व्यंग्यात्मक सेशन होते हैं और वे जिस तरह से अपने दर्शकों को बांधकर रखते हैं, वह मुझे अच्छा लगता है। ‘रसेल पीटर्स‘ को उनकी काॅमिक टाइमिंग और व्यंग्यात्मक अंदाज में देखना पसंद है।‘‘ योगेश त्रिपाठी उर्फ ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ के हप्पू सिंह कहते हैं, ‘‘मैंने जब से ‘अरे दादा‘ कहना शुरू किया, मुझे तभी से पता था कि ये तकिया कलाम मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन जायेगा और दर्शकों को यह पसंद आयेगा। जब छोटे-छोटे बच्चों को मुझे हप्पू दादा कहते हुए सुनता हूं तो दिल खुश हो जाता है। लोगों को हंसाना एक कला है, जिसे मैंने महान काॅमेडियन-चार्ली चैपलिन से सीखा है। उन्होंने साइलेंट काॅमेडी को एक नई ऊंचाई दी। उन्हें पता था कि सिर्फ आपका हाव-भाव ही एक व्यक्ति को लोट-पोट कर सकता है। उनके एक्शन और हाव-भाव ही हजार शब्दों के बराबर होते थे, उन्होंने ह्यूमर को बहुत ही सरल बना दिया और दुनिया को और करीब लेकर आये।‘‘ रोहिताश्व गौड़ उर्फ ‘भाबीजी घर पर हैं‘ के मनमोहन तिवारी कहते हैं, ‘‘काॅमेडी दुनिया में एक शांतिपूर्ण और सकारात्मक बदलाव ला सकती है। खासकर अभी के समय में हम दुनिया को ज्यादा से ज्यादा खुशहाल बनाने के तरीके ढूंढ रहे हैं। जब भी मैं सेट पर अपनी लाइनों की प्रैक्टिस कर रहा होता हूं, तो ना चाहते हुए भी मैं अपने आप से यह सवाल पूछता हूं कि क्या यह दर्शकों को हंसायेगा? क्योकि मुझे पता है बाहर हजारों ऐसे लोग हैं जोकि अपनी चिंताओं को भूलने के लिये टेलीविजन देखते हें। महान काॅमेडियन जाॅनी वाॅकर और ‘शिकार‘, ‘चाची 420‘ जैसी फिल्मों में उनका ऐतिहासिक अभिनय हमेशा से ही मेरा फेवरेट रहा है। इसके साथ ही ओम पुरी, परेश रावल, बोमन ईरानी, जाॅनी लीवर जैसे अभिनेताओं ने भी अपने काॅमिकल ऐक्ट्स से मुझे हमेशा हंसाया है। ये हंसते भी हैं और हंसाते भी हैं!‘‘