अमेज़न इंडिया के ऑपरेशंस में तेजी लाते हुए इंदौर की ये आईएचएस पार्टनर अपनी उद्यमशीलता की विरासत का निर्माण कर रही हैं


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वन में कठिन समय आने पर, कुछ महिलाएं आगे बढ़कर स्थिति को संभालती हैं और इसे बदलने का काम करती हैं। ये महिलाएं हर चुनौती को एक अवसर के रूप में देखना पसंद करती हैं और अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगी दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही कुछ महिलाओं में इंदौर की सुनीता डाबी भी शामिल हैं।

सुनीता कुछ समय से अपने परिवार की जरूरतों की देखभाल कर रही हैं। कुछ वर्षों पहले अपने पति से अलग होने के बाद, उनके बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। सुरक्षा गार्ड की नौकरी से होने वाली आमदनी बहुत कम थी और अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना और दो बच्चों की पढ़ाई की व्‍यवस्‍था करना एक चुनौती बन रही थी। लेकिन वह बच्‍चों को उज्जवल भविष्य देने के अपने संकल्प को लेकर मजबूती से खड़ी थीं और अपने पिता की दुकान, भैरू भाई किराना स्टोर में उनकी मदद करने लगीं।

उसकी अदम्य भावना ने उसे अन्य रास्तों की तलाश करने में मदद की, जिसने उन्‍हें अतिरिक्त कमाई करने में सक्षम बनाया। इसी समय, उन्‍हें अमेज़न के आई हैव स्पेस (आईएचएस) प्रोग्राम के बारे में पता चला और इससे अपने पिता के व्यवसाय को बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में उनकी समझ बनी। उन्‍होंने तुरंत प्रोग्राम में दाखिला लिया और यहीं से उनकी उद्यमशीलता की यात्रा शुरू हो गयी।

आईएचएस प्रोग्राम एक अद्वितीय पहल है जो स्थानीय स्टोर मालिकों को अमेज़न के साथ साझेदारी करने में सक्षम बनाता है और उनकी नियमित आय में अतिरिक्त कमाई जोड़ता है, और इसके साथ ही, उनकी स्थानीय दुकानों के लिए ग्राहकों की संख्या में भी वृद्धि करता है। कई अन्य स्टोर मालिकों की तरह, सुनीता भी अपने स्टोर के 2-4 किलोमीटर के दायरे में ग्राहकों को पिकअप और डिलीवरी सेवाएं प्रदान करती हैं।

अमेज़न के साथ 3 साल से अधिक समय तक आईएचएस पार्टनर के रूप में काम करते हुए, सुनीता स्टोर की देखभाल करते हुए और अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं को आसानी से निभाते हुए, एक स्थिर कमाई करने में सक्षम हो चुकी हैं। प्रोग्राम से हुई अतिरिक्त आय ने सुनीता को काफी हद तक अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने और अपने बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करने में सक्षम बनाया है, जिसके वे हकदार भी हैं। सुनीता की कार्यशैली अमेज़न के लीडरशिप सिद्धांतों की मिसाल पेश करती है और वह जो काम करती हैं, उसमें समाधान को ध्‍यान में रखते हुए और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए, काम करने के लिए जानी जाती हैं।

सुनीता कई भूमिकाएं निभाती हैं और उनमें अधिक से अधिक काम करने की लगन है। वह अपने दिन की शुरुआत डिलिवरी देने से करती हैं और फिर पूरे दिन किराना स्टोर की देखभाल करती हैं।

अपने अनुभव के बारे में बताते हुए, सुनीता कहती हैं कि “अमेज़न से मुझे जो सहयोग और स्वतंत्रता मिली है, उसने मुझे अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्‍ध कराने में सक्षम बनाया है। सबसे बड़ी जीत वह सम्मान और मान्यता है जो मुझे समाज में मिलती है और जब दूसरे लोग मुझे एक मददगार के रूप में देखते हैं। इससे मुझे काम करते रहने के लिए आत्मविश्वास और प्रेरणा मिलती है। अमेज़न के साथ आईएचएस पार्टनर बनना मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ रहा है।”

अमेज़न इंडिया ने ऐसी महिला स्टोर मालिकों की उद्यमशीलता की क्षमता को सफलतापूर्वक उजागर किया है, जिससे वे अपनी नियमित आय और अपने स्टोर में ग्राहकों की संख्‍या बढ़ा सकती हैं। यह प्रोग्राम उन सभी स्टोर मालिकों के लिए उपलब्ध है जो पैदल या दोपहिया वाहन से सेवाएं दे सकते हैं। ‘आई हैव स्पेस’ पार्टनर बनने के लिए एकमात्र आवश्यकता स्टोर मालिक के पास अपने ऑफ-पीक घंटों के दौरान स्थानीय डिलीवरी करने के लिए पर्याप्त समय, और पैकेज रखने के लिए जगह होना है।

उद्यमशीलता की यह कहानी सिर्फ सुनीता की ही नहीं, बल्कि ऐसी हजारों महिलाओं की है जो सफल कॅरियर महिला होने की अपनी संभावनाओं की तलाश करना चाहती हैं, अपनी आजीविका कमाना चाहती हैं और इस प्रक्रिया में दूसरों का उत्थान करना चाहती हैं। यह उत्साह उस प्रगति का भी संकेत है, जो महिलाएं अपना स्वयं का व्यवसाय करने और बड़े पैमाने पर देश को मजबूत बनाने और सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए सक्रिय रूप से भागीदारी करते हुए हासिल कर रही हैं।