वल्र्ड फूड डे विशेष - रतन राजपूत ने रांची में अपने पसंदीदा स्थानीय पकवानों और फूड डेस्टिनेशन्स के बारे में बताया


भारतीय पकवानों में बहुत सारी विविधतायें हैं। खाने-पीने के सामानों को लेकर हर जगह की अपनी खासियत होती है और कई पारंपरिक व्यंजन उस क्षेत्र से जुड़े होते हैं। खान-पान की यह विविधता भारत की एक सबसे बड़ी विशेषता भी है। वल्र्ड फूड डे के अवसर पर, एण्डटीवी के ‘संतोषी मां सुनायें व्रत कथाएं‘ में ऊष्मा देवी (देवी रूप) और संतोषी (धरती रूप) की भूमिका निभा रहीं रतन राजपूत ने रांची के अपने पसंदीदा स्थानीय पकवानों और फूड डेस्टिनेशन्स के बारे में बताया। रतन कहती हैं, ‘‘रांची के व्यंजनों में जनजातीय संस्कृति की झलक दिखाई देती है। ये बंगाली, बिहारी और मुगलई पकवानों का एक मजेदार मिश्रण हैं। झारखंडी व्यंजनों में अक्सर अलग-अलग तरीके से पकाई गई सब्जियां शामिल होती हैं, जिनमें रसे वाली एवं फ्राई की गई सब्जियों से लेकर भूनी गई और उबाली गई सब्जियां भी शामिल हैं। स्थानीय पकावानों में ढुस्का, पिट्टा रगड़ा, अरसा, आरू की सब्जी, मार्द झोर, चाकोर झोल, सनई का फूल का भरता, मूंग अड़ा, छिलका, लिट्टी चोखा और सत्तू एवं हंडिया (झारा, दियांग) के साथ महुआ मसाला, जोकि एक तरह का राइस वाइन है और जिसके बिना कोई भी आदिवासी समारोह अधूरा है, शामिल हैं। रांची में कुछ कमाल के मीठे व्यंजन भी मिलते हैं, जिसमें शामिल हैं अरसा रोटी, चावल से बना एक डिजर्ट डुम्बू, मालपुआ, छठ पूजा के दौरान मिलने वाला मशहूर ठेकुआ-प्रसाद, तिल बर्फी, मीठा खाजा, लौंग लता और दुधोरी। यदि स्ट्रीट फूड की बात की जाये, तो शहर में तरह-तरह के डिशेज मिलते हैं, जैसे कि लिट्टी, सिंघाड़ा या समोसा, आलू चाॅप, बैगन चाॅप, वेजिटेबल चाॅप, पकौड़ी बगैरह, जिन्हें एक बार तो जरूर खाया जाना चाहिये। झाल-मूरी और आलू एवं मटर के साथ परोसे जाने वाले गोलगप्पे यहां के लोगों की पसंदीदा डिश है। स्ट्रीट फूड का स्वाद लेने के लिये सबसे मशहूर जगह है दोरांडा स्थित फूड स्ट्रीट। यहां पर मुंह में पानी भर देने वाले, स्वादिष्ट और लज़ीज पकवान मिलते हैं। खाने के शौकीनों को मेन रोड जरूर जाना चाहिये, जहां पर अलग-अलग तरह के व्यंजनों के लिये मशहूर कई रेस्टोरेंट्स हैं। इस वल्र्ड फूड डे, मैं बस इतना ही कहना चाहूंगी कि हर दिन कई लोग भूखे पेट सोते हैं। आईये हम मिलकर उनके साथ अपना खाना बांटें और भूखों का पेट भरने की कोशिश करें। 


तो यदि आपने अभी तक रांची के इन स्थानीय व्यंजनों का स्वाद नहीं चखा है, तो आप वाकई में एक बहुत बड़ी चीज मिस कर रहे हैं!


रतन राजपूत को ऊष्मा देवी के रूप में देखिये, ‘संतोषी मां सुनायें व्रत कथाएं‘ में हर सोमवार से शुक्रवार, रात 9ः00 बजे, सिर्फ एण्डटीवी पर!