आज की बात आपके साथ - विजय निगम

          ।ॐ गं गणपतये नमः।।
या देवी सर्व भुतेशू शक्तिरूपेण सांस्थिता 
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम:
ॐयमाय धर्मराजाय श्री चित्रगुप्ताय नमो नमः।।. 
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌸🌸🌲🌹💐प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹 
🌻 नमस्ते।🌻

आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयोंका दिनांक20.नवम्बर2020शुक्रवार
कीप्रातःकीबेलामें हार्दिकवंदन हैअभिनन्दनहै।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 
 A कुछ रोचक समाचार
B.आजके दिनजन्मे.मैसूर के शासक व.दुनिया का पहलेमिसाइल मैन टीपू सुल्तान का जीवन
परिचय 
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
🌻💐🌲🌹💐🌸🌲🌹💐🌸🌲🌹💐 (A) कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)


🌻🌺(A/2)कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली स्थित शक्तिस्थल पहुंचकर देश की पूर्व पीएम स्वर्गीय इंदिरा को श्रद्धांजलि अर्पित की🌺
🌺(A/3)दिल्ली मे कोरोनाकी चिंताजनक स्थितिकेजरीवाल सरकारनेआज बुलाई सर्व
दलीय मीटिंग 🌺
🌻💐🌺(A/4)दिल्ली मे छठ पर्व पर फल एवं सब्जिया फिर से महंगी🌺।
🌻💐🌹🌱🌸🌲🌹💐🌸🌲🌹💐💐(A)कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)
💐(A/1)कर अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने और उसे विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की है.
   दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद जारी बयान के अनुसार बाइडन ने मोदी की बधाई के लिए उनका आभार व्यक्त किया और दक्षिण एशियाई मूल की पहली उपराष्ट्रपति के साथ मिल कर अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने और उसे विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की है.Subscribe to updates
वॉशिंगटन: अमेरिका (America)  के निर्वाचित राष्ट्रपति जो (Joe Biden) ने कहा है कि वह कोविड-19 (COVID-19) महामारी से पार पाने, वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy)  को पटरी पर लाने के लिए कदम उठाने और बाइडेन एक सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने सहित सभी साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ मिल कर काम करने के इच्छुक हैं.रीबाइडेन के सत्ता हस्तांतरण दल ने यह जानकारी 
देश में तीन नंवबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी.फ
बाइडेन (Joe Biden) और निर्वाचित उप राष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris) के सत्ता हस्तांतरण दल ने बताया, ‘निर्वाचित राष्ट्रपति ने कहा है कि वह कोविड-19 महामारी से पार पाने और भविष्य में आने वाले स्वास्थ्य संकटों से बचाव की तैयारी करने, जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने, वैश्विक अर्थव्यवस्था की पुनर्बहाली के लिए कदम उठाने, देश में तथा विदेशों में लोकतंत्र को मजबूत करने और एक सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद- प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने सहित सभी साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मिल कर काम करने के इच्छुक हैं.’
यूदोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद जारी बयान के अनुसार बाइडन ने मोदी की बधाई के लिए उनका आभार व्यक्त किया औरदक्षिणA- एशियाईमूल की पहली उपराष्ट्र
पति के साथ मिल कर अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने और उसे विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की है.
इमरान ने कट्टरपंथियों के सामने टेके घुटने, फ्रांसके खिला उठाया यह कदमसाझा प्राथमि
कताओं और चुनौतियों पर चर्चा
इससे पहले मंगलवार को मोदी ने ट्वीट करके कहा कि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन से फोन पर बात करके उन्हें बधाई दी. हमने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कोविड-19 महामारी, जलवायु परिवर्तन तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग पर साझा प्राथमिकताओं और चुनौतियों पर चर्चा की.प्रधानमंत्री ने अमेरिका की निर्वाचित उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को भी बधाई दी.उन्होंने कहा, ‘उनकी सफलता भारतीय अमेरिकी समुदाय के लिए गर्व और प्रेरणा की बात है. यहसमुदायभारत-अमेरिका सबंधों की मजबूती का महत्वपूर्ण स्रोत है.’
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को एक बयान जारी करके कहा कि मोदी ने बाइडन के निर्वाचन के लिए उन्हें बधाई दी।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌸🌸🌲🌹💐💐💐🌻🌺(A/2)कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली स्थित शक्तिस्थल पहुंचकर देश की पूर्व पीएम स्वर्गीय इंदिरा को श्रद्धांजलि अर्पित की🌺
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली स्थित शक्तिस्थल पहुंचकर देश की पूर्व पीएम स्वर्गीय इंदिरा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इंदिरा गांधी जयंती के अवसर पर राहुल गांधी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि देशहित में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। राहुल गांधी ने अपने ट्विट में कहा है कि इंदिरा जी एक कार्यकुशल प्रधानमंत्री और शक्ति की अवतार थीं। पूरा देश उनके प्रभावशाली नेतृत्व की आज भी मिसाल देता है। लेकिन मैं उन्हें हमेशा अपनी प्यारी दादी के रूप में याद करता हूं। उनकी सिखाई हुई बातें मुझे निरंतर प्रेरित करती हैं। देशहित में उनके एक्शन से सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है।
बांग्लादेश मुक्तिसंग्राम में निभाई अहम भूमिका
बता दें कि इंदिरा गांधी लंबे अरसे तक सियासी कार्यकुशलता के बल पद देश की प्रधानमंत्री रहीं। उन्होंने बांग्लादेश मुक्तिसंग्राम में अहम भूमिका का निर्वहन किया। 1971 के भारत—पाक युद्ध में सेना को फ्री हैंड देकर वहां के हुक्मरानों के सबक सिखाने का काम कया। देशहित में तत्कालीन सोवियत संघ के सैन्य गठजोड़ कर न केवल पाक और चीन के मंसूबों पर पानी फेरा पर अमरीका को भी इस बात का अहसास कराया कि भारत दक्षिण एशिया में पावर है।
🌻💐🌹🌸🌲🌸🌸🌲🌹💐💐💐🌺(A/3)दिल्ली मे कोरोनाकी चिंताजनक स्थितिकेजरीवाल सरकार ने आज बुलाई सर्वदलीय मीटिंग 🌺
नई दिल्लीपूरेदेश में कोरोना वायरस का संकट
लगातार जारी है। देश में इस समय अनलोक की प्रक्रियाचलरही है,लेकिन कोरोनासंक्रमितों केआंकड़े लगातारबढ़ रहे हैं। खासकर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थिति
 बेहद खतरनाक होती जा रही है। पिछले 24 घंटे में नेशनल कैपिटल में कोविड-19 ने 131 लोगों की जान ले ली है। इस आंकड़े के साथ ही दिल्ली में मौत का रिकॉर्ड टूट गया है।
     🌺दिल्ली में कोरोना की चिंताजनक स्थिति🌺
कोविड-19 से केन्द्र और राज्य सरकार लगातार जंग रही है। इसके बावजूद कोरोना के आंकड़े लगातार चौंकाने वाले आ रहे हैं। एक समय था दिल्ली में कोरोना संक्रमितों के केस काफी कम हो गए थे। रोजाना औसतन एक हजार से कम नए केस आ रहे थे। लेकिन, अक्टूबर के अंत से दिल्ली में कोरोना ने एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 7,486 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 131 लोगों की मौत हुई है। इस विकराल स्थिति के बीच राहत की बात ये है कि 6,901 लोगों ने कोरोना से जंग भी जीती है। मौत का यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। इससे पहले 12 नवंबर को दिल्ली में कोरोना से एक दिन में 104 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, मंगलवार को कोरोना के नए मामले 6396 थे। जबकि, 99 लोगों की मौत हुई थी। नवंबर महीने में दिल्ली में औसतन रोजाना पांच से सात हजार के बीच कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना को लेकर दिल्ली में सबसे ज्यादा खराब स्थिति जून महीने में थी।
नवंबर में अब तक एक लाख से ज्यादा केसअकेले में नवंबर महीने में दिल्ली में एक लाख से ज्यादा कोरोना के नए मामले अब तक आ चुके हैं। एक से 16 नवंबर के बीच दिल्ली में 12 सौ लोगों की कोरोना महामारी से मौत हो चुकी है। जबकि, 94 हजार कोरोना से जंग जीतचुके हैं।दिल्ली मेंअब तक4.50 लाखलोगकोरोना
से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें एक्टिव केसों की संख्या 42,हजार है। वहीं, 4,45,लाख लोगों की इस वायरस से ठीक हो चुके हैं। वहीं, अब तक 7 हजार लोग कोरोना वायरस के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। कोरोना की खतरनाक स्थिति को लेकर सरकार और प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है। केजरीवाल सरकार ने आज सर्वदलीय मीटिंग बुलाई हे।
🌻💐🌹🌸🌲🌹💐💐💐🌻💐🌺💝(A/4)दिल्ली मे छठ पर्व पर फल एवं सब्जिया फिर से महंगी💝।
नई दिल्ली। दिवाली के बाद पूर्वोत्तर भारत में छठ पर्व का अपना अलग महत्व है। अब बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जहां भी रहते हैं वहीं पर ही इस पर्व को मनाते हैं। फिर चाहे वो दिल्ली हो या फिर मुंबई। खास बात तो ये है कि इस त्योहार के मौके पर देश की राजधानी दिल्ली में सब्जियों की मांग बढऩे से कीमत में करीब 25 फीसदी का इजाफा हो गया है। पर्व छठ पूजा में प्रकृति से प्राप्त सामग्री की विशेष प्रधानता होती है, इसलिए कई प्रकार की मौसमी सब्जियां व फलों का उपयोग चढ़ावे के रूप में होता है। जिस कारण कीमत में इजाफा देखने को मिला है।
              🌺फल सब्जी हुए महंगे🌺
नॉर्थ दिल्ली स्थित मॉडल टाउन इलाके के खुदरा सब्जी विक्रेता अनिल सिंह का कहना है कि हम भी बिहार से है, इस दौरान व्रत करने वाले लोग मांस खाना छोड़ देते है। साथ ही पूजा में सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इस कारण से मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लौकी, बैंगन, परवल, गाजर, कद्दू आदि सब्जियों की कीमत में 25 से 30 फीसदी तक इजाफा हो गया है। इसके अलावा सेब, संतरा, चीकू आदि फलों के दाम में भी इजाफा देखने को मिला है। आने वाले दिनों में नई आवक आने के बाद मुमकिन है कीमतों में गिरावट देखने को मिले।
आलू की नई आवक आने से पहले दाम कम नहीं
फलों और सब्जियों की एशिया की सबसे बड़ी मंडी 'आजादपुर सब्जी मंडी' में हालांकि नया आलू उतरने से आलू के थोक भाव में हालांकि थोड़ी नरमी ही दर्ज की गई, लेकिन मंडी के कारोबारी व पोटैटो एंड ऑनियन मर्चेट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि आलू की आवक जब तक नहीं बढ़ेगी, तब तक दाम में ज्यादा नरमी की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इस समय छठ पर्व को लेकर सब्जियों और फलों की मांग बढ़ गई है, इसलिए कीमतों में नरमी की उम्मीद नहीं है, लेकिन सोमवार से आलू की आवक बढऩे पर दाम में नरमी आ सकती है।
       🌺क्या हैं मंडी में आलू का भाव🌺
उन्होंने बताया कि अच्छी क्वालिटी का नया आलू बुधवार को थोक में 36 रुपये से 41 रुपये प्रति किलो, जबकि पुराना आलू 28 रुपये से 36 रुपये प्रति किलो बिका। हालांकि आजादपुर एपीएमसी की रेट लिस्ट के अनुसार, मंडी में आलू का थोक भाव 22 रुपये से 34 रुपये प्रति किलो और प्याज का थोक भाव 15 रुपये से 45 रुपये प्रति किलो, जबकि टमाटर का थोक भाव 5.75 रुपये से 34 रुपये प्रति किलो था।
दिल्ली-एनसीआर में सब्जियों के खुदरा भाव
सब्जियांकीमत ( रुपया प्रति किलो )आलू नया60आलू पुराना50प्याज50 से 60टमाटर50 से 60करेला80बैगन50खीरा50शिमला मिर्च80परवल80मूली30गाजर60कद्दू40भिंडी60शलगम60मटर160तोरई60कच्चा पपीता40बंद 
🌻💐🌹🌲🌸🌲🌹💐💐💐 💐(B)आज के दिन जन्मे.मैसूर के शासक व..दुनिया का पहले मिसाइल मैन टीपू सुल्तान का जीवन परिचय
                 जीवन परिचय  लेख. 
उनके पिता का नाम हैदर अली और मां का फकरुन्निसां था. उनके पिता मैसूर साम्राज्य के एक सैनिक थे लेकिन अपनी ताकत के बल पर वो 1761 में मैसूर के शासक बने. टीपू सुल्तान को इतिहास न केवल एक योग्य शासक और योद्धा के तौर पर देखता है बल्क‍ि वो विद्वान भी थे.
उनकी वीरता से प्रभवित होकर उनके पिता हैदर अली ने ही उन्हें शेर-ए-मैसूर के खिताब से नवाजा था. अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए 4 मई 1799 को टीपू सुल्तान की मौत हो गई.
💥टीपू सुल्तान से जुड़ी कुछ खास बातें💥:
💥1. टीपू सुल्तान को दुनिया का पहला मिसाइल मैन माना जाता है. बीबीसी की एक खबर के मुताबिक, लंदन के मशहूर साइंस म्यूजियम में टीपू सुल्तान के रॉकेट रखे हुए हैं. इन रॉकेटों को 18वीं सदी के अंत में अंग्रेज अपने साथ लेते गए थे.
💥2. टीपू द्वारा कई युद्धों में हारने के बाद मराठों एवं निजाम ने अंग्रेजों से संधि कर ली थी. ऐसी स्थिति में टीपू ने भी अंग्रेजों से संधि का प्रस्ताव दिया. वैसे अंग्रेजों को भी टीपू की शक्ति का अहसास हो चुका था इसलिए छिपे मन से वे भी संधि चाहते थे. दोनों पक्षों में वार्ता मार्च, 1784 में हुई और इसी के फलस्वरूप 'मंगलौर की संधि' सम्पन्न हुई.
💥3. टीपू ने 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के विरुद्ध पहला युद्ध जीता था.
💥4. 'पालक्काड कि‍ला', 'टीपू का कि‍ला' नाम से भी प्रसिद्ध है. यह पालक्काड टाउन के मध्य भाग में स्थित है. इसका निर्माण 1766 में किया गया था. यह कि‍ला भारतीय पुरातात्त्विक सर्वेक्षण के अंतर्गत संरक्षित स्मारक है.
💥5. टीपू सुल्तान खुद को नागरिक टीपू कहा करता था. 
                 💫जीवनी 💫
18 वीं शताब्दी के अन्तिम चरण में हैदर अली का देहावसान एवं टीपू सुल्तान का राज्याभिषेक मैसूर की एक प्रमुख घटना है टीपू सुल्तान के आगमन के साथ ही अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीति पर जबरदस्त आधात पहुँचा जहाँ एक ओर ईस्ट इंडिया कम्पनी अपने नवजात ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए प्रयत्नशील थी तो दूसरी ओर टीपू अपनी वीरता एवं कुटनीतिज्ञता के बल पर मैसूर की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित था वस्तुत:18 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में टीपू एक ऐसा महान शासक था जिसने अंग्रेजों को भारत से निकालने का प्रयत्न किया। अपने पिता हैदर अली के पश्चात 1782 में टीपू सुल्तान मैसूर की गद्दी पर बैठा।
अपने पिता की तरह ही वह भी अत्याधिक महत्वांकाक्षी कुशल सेनापति और चतुर कूटनीतिज्ञ थे यही कारण था कि वह हमेशा अपने पिता की पराजय का बदला अंग्रेजों से लेना चाहते थे, अंग्रेज उनसे काफी भयभीत रहते थे। टीपू सुल्तान की आकृति में अंग्रेजों को नेपोलियन की तस्वीर दिखाई पड़ती थी। वह अनेक भाषाओं का ज्ञाता थे अपने पिता के समय में ही उन्होंने प्रशासनिक सैनिक तथा युद्ध विधा लेनी प्रारंभ कर दी थी परन्तु उनका सबसे बड़ा अवगुण जो उनकी पराजय का कारण बना वह फ्रांसिसियों पर बहुत अधिक निर्भरता और भरोसा ।
वह अपने पिता के समान ही निरंकुश और स्वंत्रताचारी थे लेकिन फिर भी प्रजा की तकलीफों का उन्हें काफी ध्यान रहता था। अत: उनके शासन काल में किसान प्रसन्न थे। वह कट्टर व धर्मान्त मुस्लमान थे फिर भी वह हिन्दु, मुस्लमानों को एक नजर से देखते थे।
उनके चरित्र के सम्बंध में विद्वानों ने काफी मतभेद है।
मैसूर में एक कहावत है कि हैदर साम्राज्य स्थापित करने के लिए पैदा हुए थे और टीपू उसे खोने के लिए। कुछ ऐसे भी विद्वान है जिन्होंने टीपू सुल्तान के चरित्र की काफी प्रशंसा की है।
वस्तुत: टीपू एक परिश्रमी शासक मौलिक सुधारक और अच्छे योद्धा थे। इन सारी बातों के बावजूद वह अपने पिता के समान कूटनीतिज्ञ एवं दूरदर्शी थे, यह उनका सबसे बड़ागुण था। टीपू का नाम उर्दू पत्रकारिता के अग्रणी के रूप में भी याद किया जाएगा, क्योंकि उनकी सेना का साप्ताहिक बुलेटिन उर्दू में था, यह सामान्य धारणा है कि जाम-ए-जहाँ नुमा, 1823 में स्थापित पहला उर्दू अखबार था। वह गुलामी को खत्म करने वाला पहला शासक था। कुछ मौलवियों ने इस उपाय को थोड़ा बहुत बोल्ड और अनावश्यक माना। टीपू अपनी बंदूकों से चिपक गया। उन्होंने पूरे जोश के साथ उस लाइन को लागू करने के फैसले को लागू कर दिया जिसमें उनके देश में प्राप्त स्थिति को इस उपाय की आवश्यकता थी। टीपू सुल्तान का सामंतवाद के प्रति दृष्टिकोण अलग था । उन्होंने इसे एक बार में समाप्त कर दिया और नतीजा यह है कि आज भी कर्नाटक के किसान - विशेष रूप से पूर्व मैसूर क्षेत्र में - उत्तरी भारत के किसानों से अलग हैं। ज़मीन के टिलर टीपू के दिनों से ही अपनी पकड़ के मालिक थे। इस उपाय के परिणामस्वरूप, यह क्षेत्र में एक विकसित प्रांत है। कर्नाटक के किसान भूमि मालिक हैं और उनके बेटों और बेटियों ने शिक्षा में अच्छा किया है। टीपू सुल्तान भी अपने राज्य के ब्राह्मण पुरोहितों के प्रति निष्ठावान थे और उनके सहयोग की माँग करते थे - यहाँ तक कि उनके द्वारा देवताओं के आशीर्वाद के लिए विशेष प्रार्थना करने का भी अनुरोध किया जाता था। 1791 में श्रीगंगातट के जगतगुरु स्वामी को लिखे उनके पत्र हिंदू विषयों के साथ उनके उत्कृष्ट संबंधों के प्रमाण हैं। इस दावे के लिए टीपू के कुछ 30 पत्रों को भारतीय पुरातत्व विभाग में संरक्षित किया गया है। दक्षिण भारत के विल्क्स हिस्टोरिकल स्केच, टीपू सुल्तान की हिंदू-नफरत के रूप में कोई भी न्याय नहीं करते हैं। गांधीजी ने उन सभी इतिहास की पुस्तकों का विमोचन किया, जो टीपू सुल्तान को हिंदुओं धर्मांतरण के लिए मजबूर करती थी। वह सोचते थे कि कन्नड़ भाषा में टीपू के पत्र हिंदुओं के प्रति उनकी उदारता का जीवंत प्रमाण हैं। गांधीजी ने टीपू द्वारा वक्फों (ट्रस्टों) को हिंदू मंदिरों के समानांतर स्थापित किया। उनके महल वेंकटरमन श्रीनिवास और श्री रंगनाथ मंदिरों के करीब खड़े थे। वह विशेष रूप से मैसूर के शासक की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि शेर के जीवन का एक दिन सियार के 100 साल के जीवन से बेहतर होता है। ' टीपू का सुसंस्कृत मन था। मोहिबुल हसन के अनुसार, वह बहुमुखी थे और हर तरह के विषयों पर बात कर सकते थे। वह कन्नड़ और हिंदुस्तानी (उर्दू) बोल सकते थे, लेकिन उन्होंने ज्यादातर फ़ारसी में बात की जो उन्होंने आसानी से लिखी थी। उन्हें विज्ञान, चिकित्सा, संगीत, ज्योतिष और इंजीनियरिंग में दिलचस्पी थी, लेकिन धर्मशास्त्र और सूफीवाद उनके पसंदीदा विषय थे। कवियों और विद्वानों ने उसके दरबार को सुशोभित किया, और वह उनके साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करने के शौकीन थे। वह सुलेख में बहुत रुचि रखते थे, और उनके द्वारा आविष्कृत सुलेख के नियमों पर ""रिसाला डार खत-ए-तर्ज़-ए-मुहम्मदी"" नामक फारसी में एक ग्रंथ मौजूद है। उन्होंने ज़बरजद नामक ज्योतिष पर एक किताब भी लिखी। उनकी लाइब्रेरी की अनेक पुस्तकें पैगम्बर मोहम्मद, उनकी बेटी फातिमा और उनके बेटों, हसन और हुसैन के नाम को कवर के मध्य में और चार कोनों पर चार खलीफाओं के नाम के साथ ले जाती हैं। उनकी निजी लाइब्रेरी में अरबी, फ़ारसी, तुर्की, उर्दू और हिंदी पांडुलिपियों के 2,000 से अधिक संगीत, हदीस, कानून, सूफीवाद, हिंदू धर्म, इतिहास, दर्शन, कविता और गणित से संबंधित हैं।
            💢तृतीय मैसूर युद्ध 💢
1799 में श्रीरंगपट्टन की लड़ाई में टीपू सुल्तान की सेनाओं द्वारा उपयोग की जाने वाली तोपमंगलोर की संन्धि से भी अंग्रेजों और मैसूर युद्ध समाप्त नहीं हो पाया दोनों पक्ष इस सन्धि को चिरस्थाई नहीं मानते थे। 1786 ई. में लार्ड कार्नवालिस भारत का गवर्नर जनरल बना । वह भारतीय राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के मामले में सामर्थ नहीं था लेकिन उस समय की परिस्थिति को देखते हुए उसे हस्तक्षेप करना पड़ा क्योंकि उस समय टीपू सुल्तान उनका प्रमुख शत्रु था इसलिए अंग्रेजों ने अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए निजाम के साथ सन्धि कर ली इस पर टीपू ने भी फ्रांसीसियो से मित्रता के लिए हाथ बढ़ाया ताकि दक्षिण में अपना वर्चस्व स्थापित करें। कार्नवालिस जानता था कि टिपु के साथ उसका युद्ध अनिवार्य है इसलिए वह महान शक्तियों के साथ मित्रता स्थापित करना चाहता था। उसने निजाम और मराठों के साथ सन्धि कर एक संयुक्त मोर्चा कायम किया और इसके बाद उसने टीपू के खिलाफ युद्ध कि घोषणा कर दी इस तरह तृतीय मैसुर युद्ध प्रारंभ हुआ यह युद्ध दो वर्षों तक चलता रहा प्रारंभ में अंग्रेज असफल रहे लेकिन अन्त में उनकी विजय हुई। मार्च 1792 ई. में श्री रंगापटय कि संन्धि के साथ युद्ध समाप्त हुआ टीपू ने अपने राज्य का आधा हिस्सा और 30 लाख पौंड संयुक्त मोर्चे को दंड स्वरूप दिया इसका सबसे बड़ा हिस्सा कृष्ण ता पन्द नदी के बीच का प्रदेश निजाम को मिला।
कुछ हिस्सा मराठों को भी प्राप्त हुआ जिससे उसकी राज्य की सीमा तंगभद्रा तक बढ़ गई, शेष हिस्सों पर अंग्रेजों का अधिकार रहा टीपू सुल्तान ने जायतन के रूप में अपने दो पुगों को भी कार्नवालिस को सुपुर्द किया। इस पराजय से टीपु सुल्तान को भारी क्षति उठानी पड़ी उनका राज्य कम्पनी राज्य से घिर गया तथा समुद्र से उनका सम्पर्क टुट गया।
आलोचकों का कहना है कि कार्नवालिस ने इस सन्धि को करने में जल्दबाजी की और टीपू का पूर्ण विनाश नहीं कर के भारी भूल की अगर वह टीपु की शक्ति को कुचल देता तो भविष्य में चतुर्थ मैसुर युद्ध नहीं होता लेकिन वास्तव में कार्नवालिस ने ऐसा नहीं करके अपनी दूरदर्शता का परिचय दिया था उस समय अंग्रेजी सेना में बिमारी फैली हुई थी और युरोप में इंग्लैड और फ्रांस के बीच युद्ध की संभावना थी।
       ऐसी स्थिति में टीपू फ्रांसिसीयों की सहायता ले सकते थे अगर सम्पूर्ण राज्य को अंग्रेज ब्रिटिश राज्य में मिला लेते तो मराठे और निजाम भी उससे जलने लगते इसलिए कार्नवालिस का उद्देश्य यह था कि टीपू की शक्ति समाप्त हो जाए और साथ ही साथ कम्पनी के मित्र भी शक्तिशाली ना बन सके इसलिए उन्होंने बिना अपने मित्रों को शक्तिशाली बनाये टीपू की शक्ति को कुचलने का प्रयास किया।
         💢चतुर्थ अंग्रेज मैसूर युद्ध💢 
टीपु सुल्तान रंगापट्टी की अपमानजनक सन्धि से काफी दुखी थे और अपनी बदनामी के कारण वह अंग्रेजो को पराजित कर दूर करना चाहते थे, प्रकृति ने उन्हें ऐसा मौका भी दिया लेकिन भाग्य ने टीपु का साथ नहीं दिया। जिस समय इंग्लैण्ड और फ्रांस में युद्ध चल रहा था ,इस अंतरराष्ट्रीय विकट परिस्थिति से लाभ उठाने के लिए टीपू ने विभिन्न देशों में अपना राजदुत भेजे।
फ्रांसीसियों को उसने अपने राज्य में विभिन्न तरह की सुविधाएं प्रदान कर अपने सैनिक संगठन में उन्होने फ्रांसीसी अफसर नियुक्त किये और कुछ फ्रांसीसियों ने अप्रैल 1798 ई. में अंग्रेजों के विरुद्ध टीपू की सहायता की।
     फलत: अंग्रेज और टीपु के बीच संघर्ष आवश्यक हो गया। इसी समय लार्ड वेलेजली बंगाल का गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया था। उन्होनें टीपू कि शक्ति को कुचलने का निश्चय किया टीपु के विरुद्ध उसने निजाम और मराठों के साथ गठबंधन करने कि चेष्टा की निजाम को मिलाने में वह सफल हुए लेकिन मराठों ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया 1798 में निजाम के साथ वेलेजली ने सहायक सन्धि की और यह घोषणा कर दी जीते हुए प्रदेशों में कुछ हिस्सा मराठों को भी दिया जाएगा।
पुर्ण तैयारी के साथ वेलेजली ने मैसूर पर आक्रमण कर दिया इस तरह मैसुर का चौथा युद्ध प्रारंभ हुआ।
और टीपू सुल्तान वीरता के साथ आखिर तक युद्ध करते करते मृत्यु को प्राप्त हुए।
मैसूर पर अंग्रेजो का अधिकार हो गया इस् प्रकार 33 वर्ष पुर्व मैसुर में जिस मुस्लिम शक्ति का उदय हुआ था सिर्फ उसका अन्त ही नहीं हुआ बल्कि अंग्रेज मैसुर युद्ध का नाटक ही समाप्त हो गया। मैसुर जो 33 वर्षों से लगातार अंग्रेजों कि प्रगति का शत्रु बना था अब वह अंग्रेजों के अधिकार में आ गया था। अंग्रेज और निजाम ने मिल कर मैसुर का बंटवारा कर लिया। मराठों को भी उत्तर पश्चिम में कुछ प्रदेश दिये गये लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया,शेष मैसुर पुराने हिन्दु राजवंश के एक नाबालिग लड़के को सन्धि के साथ दिया जिसके अनुसार मैसुर की सुरक्षा का भार अंग्रेजों पर आ गया वहाँ ब्रिटिश सेना तैनात किया गया सेना का खर्च मैसुर के राजा ने देना स्वीकार किया। इस नीति से अंग्रेजों को काफी लाभ पहुँचा मैसुर राज्य बिल्कुल छोटा पड़ गया और दुश्मन का अन्त हो गया ब्रिटिश कम्पनी की शक्ति में काफी वृद्धि हुई ।
फलत: मैसुर चारों ओर से ब्रिटिश राज्य से घिर गया इसका फायदा उन्होनें भविष्य में उठाया जिससे ब्रिटिश शक्ति के विकास में काफी सहायता मिली और एक दिन उसने सम्पूर्ण हिन्दुस्तान पर अपना अधिपत्य कायम कर लिया ।
   💥टीपू सुल्तान की धार्मिक नीति 💥
        💥हिन्दुओं पर अत्याचार💥
19 वीं सदी में ब्रिटिश सरकार के एक अधिकारी और लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब 'मालाबार मैनुअल' में लिखा है कि टीपू सुल्तान ने किस प्रकार अपने ३० हजार सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी। टीपू सुल्तान हाथी पर सवार था और उसके पीछे उसकी विशाल सेना चल रही थी। पुरुषों और महिलाओं को सरेआम फांसी दी गई। उनके बच्चों को भी उन्हीं के साथ फांसी पर लटकाया गया। सारे इतिहास को खंगालने से साफ़ पता चलता की टीपू एक इस्लामिक धर्मांध शासक था जिसकी तलवार पर ही लिखा था की " मालिक मेरी सहायता कर की मैं काफिरों का सफाया कर दूँ " कुर्ग  के 80 हजार लोगों को या तो मार डाला गया या उन्हें जबरदस्ती मुसलमान बना दिया गया !
मात्र कुछ घटनाओं और दस्तावेजों के आधार पर नहीं कहा जा सकता है कि टीपू सुल्तान धर्मान्ध मुसलमान नही था।
इसी पुस्तक में विलियम यह भी लिखते हैं कि शहर के किसी भी मंदिर व चर्च को नुकसान ना पहुंचाने का आदेश दिया गया।
   💥हिंदू संस्थाओं के लिए उपहार 💥
1791 में रघुनाथ राव पटवर्धन के कुछ मराठा सवारों ने श्रृंगेरी शंकराचार्य के मंदिर और मठ पर छापा मारा। उन्होंने मठ की सभी मूल्यवान संपत्ति लूट ली। इस हमले में कई लोग मारे गए और कई घायल हो गए। शंकराचार्य ने मदद के लिए टीपू सुल्तान को अर्जी दी। शंकराचार्य को लिखी एक चिट्ठी में टीपू सुल्तान ने आक्रोश और दु:ख व्यक्त किया। इसके बाद टीपू ने बेदनुर के आसफ़ को आदेश दिया कि शंकराचार्य को 200 राहत (फ़नम) नक़द धन और अन्य उपहार दिये जायें। श्रृंगेरी मंदिर में टीपू सुल्तान की दिलचस्पी काफ़ी सालों तक जारी रही, और 1790 के दशक में भी वे शंकराचार्य को खत लिखते रहे। टीपू के यह पत्र तीसरे मैसूर युद्ध के बाद लिखे गए थे, जब टीपू को बंधकों के रूप में अपने दो बेटों देने सहित कई झटकों का सामना करना पड़ा था। यह सम्भव है कि टीपू ने ये खत अपनी हिन्दू प्रजा का समर्थन हासिल करने के लिए लिखे थे।
टीपू सुल्तान ने अन्य हिंदू मन्दिरों को भी तोहफ़े पेश किए। मेलकोट के मन्दिर में सोने और चांदी के बर्तन है, जिनके शिलालेख बताते हैं कि ये टीपू ने भेंट किए थे। ने कलाले के लक्ष्मीकान्त मन्दिर को चार रजत कप भेंटस्वरूप दिए थे। 1782 और 1799 के बीच, टीपू सुल्तान ने अपनी जागीर के मन्दिरों को 34 दान के सनद जारी किए। इनमें से कई को चांदी और सोने की थाली के तोहफे पेश किए। ननजनगुड के श्रीकान्तेश्वर मन्दिर में टीपू का दिया हुआ एक रत्न-जड़ित कप है। ननजनगुड के ही ननजुनदेश्वर मन्दिर को टीपू ने एक हरा-सा शिवलिंग भेंट किया। श्रीरंगपटना के रंगनाथ मन्दिर को टीपू ने सात चांदी के कप और एक रजत कपूर-ज्वालिक पेश किया।मान्यता है कि ये दान हिंदू शासकों के साथ गठबंधन बनाने का एक तरीका थे।
                  💥 मृत्यु 💥
4 मई 1799 को 48 वर्ष की आयु में कर्नाटक के श्रीरंगपट्टना में टीपू सुल्तान की बहुत धूर्तता से अंग्रेजों द्वारा हत्या कर दी गयी। हत्या के बाद उनकी तलवार अंग्रेज अपने साथ ब्रिटेन ले गए। टीपू की मृत्यू के बाद सारा राज्य अंग्रेज़ों के हाथ आ गया
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(C) आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ💐
1815 – यूरोप में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए रूस, प्रशिया, आस्ट्रिया और इंग्लैंड ने गठबंधन किया।
1829 – रूस के निकोलायेव और सेवेस्तोपोल क्षेत्र से यहूदियों को निकाला गया।
1866 – अमेरिका के वांशिगटन में [[हावर्ड विश्वविद्यालय की स्थापना।
1917 – यूक्रेन गणराज्य घोषित हुआ।
1917 – कलकत्ता (अब कोलकाता) में बोस अनुसंधान संस्थान की स्थापना।
1942 – ब्रिटिश सेना ने लीबिया की राजधानी बेनगाजी पर दोबारा कब्जा किया।
1945 – जापान का अमेरिका के समक्ष पूर्ण आत्मसमर्पण एवं द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति।
1945 – जर्मनी में बीस से अधिक नात्सी अफ़सरों पर युद्धापराधों को लेकर मुकदमा शुरु।
1949 – इजरायल में यहूदियों की संख्या दस लाख हुई।
1955 – पॉली उमरीगर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में भारत की ओर से पहला दोहरा शतक लगाया।
1968 – अमेरिका ने नेवादा में परमाणु परीक्षण किया।
1981 – अफ्रीकी देशबुरुंडी में संविधान अंगीकार किया गया।
1981 – भास्कर उपग्रह को छोड़ा गया था।
1985 – माइक्रोसाफ्ट विंडोज 1.0 जारी हुआ।
1994 – अंगोला सरकार और यूनिटा विद्रोहियों के मध्य 19 वर्ष से जारी संघर्ष की समाप्ति के लिए लुसाका में शांति संधि सम्पन्न।
1995 – वेल्स की राजकुमारी डायना ने वेल्स के राजकुमार से अलगाव और अपने विवाहेत्तर संबंधों के बारे में बीबीसी टेलीविज़न पर खुल कर बात की।
1997 – अमेरिकी अंतरिक्ष शटल यान 'कोलम्बिया' फ़्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केन्द्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित।
1998 – अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जारया का पहला माड्यूल जारी।
2002 – अटलांटिक महासागर में स्पेन के तट से क़रीब 150 मील दूर बहामा जा रहा 'प्रेस्टीज तेल टैंकर' डूबा।
2003 – तुर्की के इस्ताम्बल में हुए बम विस्फोट में ब्रिटेन के महावाणिज्य दूत सहित 27 लोगों की मृत्यु।
2007 – पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय व प्रान्तीय असेंबलियों के चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
2008 – मालेगाँव धमाके के मामले में गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों पर मकोका लगया गया।
2008 – राज्यसभा के दो नवनिर्वाचित सदस्यों प्रभाकर कारे तथा बरण मुखर्जी ने सदन की सदस्यता की शपथ ली।
2008 – अदन की खाड़ी में अपने व्यावसायिक जहाज़ों की रक्षा के लिए भारत ने गाइडेड मिसाइल युक्त एक विध्वंसक जहाज़ भेजा।
2015 – अफ्रीकी देश माली की राजधानी बमाको में बंधक बनाकर कम से कम 19 लोगों की हत्या की गई।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐(D)आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
1750 – टीपू सुल्तान, मैसूर राज्य का शासक
1989 – बबीता फोगाट- एक भारतीय महिला फ्रीस्टाइल पहलवान
🌻💐🌹🌲🌸🌸🌲🌹💐🌹💐💐🌻(E)आज के दिन निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
1971 – स्पेन के तानाशाह जनरल फ़्रैंको का निधन।
2014 – निर्मला ठाकुर - भारत की प्रसिद्ध कवियित्री।
2009 – श्याम बहादुर वर्मा - बहुमुखी प्रतिभाशाली, अनेक विषयों के विद्वान, विचारक और कवि।
1984 – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ - प्रसिद्ध शायर, जिनको अपनी क्रांतिकारी रचनाओं में रसिक भाव (इंक़लाबी और रूमानी) के मेल की वजह से जाना जाता है।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻
(F) आज के दिन/ दिवस/उत्सव का नाम
1.राष्ट्रीय पुस्तक दिवस (सप्ताह)
2.नवजात शिशु दिवस (सप्ताह)
3.राष्ट्रीय औषधि दिवस (सप्ताह)
4.विश्व शौचालय दिवस
5 टीपू सुल्तान, मैसूर राज्य का शासक था आज उनका जयंती दिवस।
6 बबीता फोगाट- एक भारतीय महिला फ्रीस्टाइल पहलवान है आज उनका जन्मदिवस हे।
7.जनरल फ़्रैंको जो कि स्पेन के तानाशाह  थे
का पुण्यतिथि दिवस
8 निर्मला ठाकुर भारत की प्रसिद्ध कवियित्री थी। उनका  पुण्यतिथि दिवस
9. श्याम बहादुर वर्मा - बहुमुखी प्रतिभाशाली, अनेक विषयों के विद्वान, विचारक और कवि थे आज उनका  पुण्यतिथि  दिवस
10.फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ - प्रसिद्ध शायर, जिनको अपनी क्रांतिकारी रचनाओं में रसिक भाव (इंक़लाबी और रूमानी) के मेल की वजह से जाना जाता है आज उनका  पुण्यतिथि दिवस।
🌻💐🌹🌲🌸🌲🌹🌸🌸🌲🌹💐💐   आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जयमहाकाल,बोलेसोनिहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐
💐  निवेदक;-💐
💐 चित्रांश ;-विजय निगम।💐


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