आज की बात आपके साथ - विजय निगम

        ।ॐ गं गणपतये नमः।।
या देवी सर्व भुतेशू शक्तिरूपेण सांस्थिता 
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम:
ॐयमाय धर्मराजाय श्री चित्रगुप्ताय नमो नमः।।. 
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प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹
🌻 नमस्ते।🌻
आज की बात आपके साथ मे आपसभी साथीयों का दिनांक 13 नवम्बर 2020 शुक्रवार रूपचौदस की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 
A कुछ रोचक समाचार
B आज के दिन जन्मे.शेर-ए पंजाब जाट सिख महाराजा,.महाराजा रणजीत सिंह का.जीवन परिचय लेख. 
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के दिन  निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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  (A) कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)
💝(A/1)आज का दिन विशेष:-नर्क चतुर्दशी (रूप चौदस) की कथा और महत्व💝
❤️(A/2) सीमा वर्ती नागरिक भी करते है सुरक्षा बलों को मदद।❤️
❤️(A/3)भारत पहली बार आर्थिक मंदीके दौर से जूझ रहा हे।दूसरी तिमाही में जीडीपी पिछले वर्ष की तुलना में 8.6  प्रतिशत कम रही।❤️
❤️(A/4)केंद्र सरकार का इंडियन इको
नॉमी को 2.50 लाख करोड़ रुपए का बूस्टर डोज❤️
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐(A)कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)
💝(A/1)आज का दिन विशेष:-नर्क चतुर्दशी (रूप चौदस) की कथा और महत्व💝
💝 यमराज के लिए करें दीपदान💝
दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। दीपावली पर्व के ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली, रूप चौदस और काली चतुर्दशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
🔥शाम को दीपदान की प्रथा 🔥 
आज के दिन शाम को दीपदान की प्रथा हेजिसे यमराज के लिए दीप जलाकर यमराज मंदिर में दीप रखे जाते है व दीप दान किया जाता है। इस पर्व का जो मह
त्व हैउसदृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्योहार है।
दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात को।
         💝क्या है इसकी कथा💝
इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कईपौराणिक कथाएं और लोकमान्य
ताएं हैं। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दु्र्दांत असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीयों की बारात सजाई जाती है।
इस दिन के व्रत और पूजा के संदर्भ में एकदूसरी कथा यह है कि रंतिदेव नामक
 एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हुए।
यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है।
यह सुनकर यमदूत ने कहा कि हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक बार एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था,यह उसी पापकर्म का फल है। इसके बाद राजा ने यमदूत से एक वर्ष समय मांगा। तब यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय पूछा।
तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है।
          💝क्या है इसका महत्व💝-
इस दिन के महत्व के बारे में कहा जाता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने करके विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना करना चाहिए। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।
कई घरों में इस दिन रात को घर का सबसे बुजुर्ग सदस्य एक दिया जला कर पूरे घर में घुमाता है और फिर उसे ले कर घर से बाहर कहीं दूर रख कर आता है। घर के अन्य सदस्य अंदर रहते हैं और इस दिए को नहीं देखते। यह दीया यम का दीया कहलाता है। माना जाता है कि पूरे घर में इसे घुमा कर बाहर ले जाने से सभी बुराइयां और कथित बुरी शक्तियां घर से बाहर चली जाती है।
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❤️(A/2) सीमा वर्ती नागरिक भी करते है सुरक्षा बलों को मदद।❤️
नई दिल्ली।गुजरात के भुज मेंआयोजित कार्यक्रम विकासोत्व में बोलते हुएकेंद्रीय
 गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब मैं भूकंप के बाद 2001 में भुज आया था, तबयह जर्जर था।निवास के सभी स्थानों
को समतल कर दिया गया था।अब मॉल औरइमारतें इतनी संख्या में खड़ी कर दी गई हैं।यह विकासभुज के लोगोंकी लची
लापन के लिए एक वसीयतनामा है।
उन्होंने सीमावर्ती गांवों के बारे में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस 'विकासोत्सव'का उद्देश्य हमारे सीमावर्ती गांवों के निवासियों को सुविधाएं प्रदान करना है जो अन्य आंतरिक गांवों में उप
लब्ध हैं। हमारे रक्षा बलों के साथ सुरक्षा बनाए रखने में सीमावर्ती नागरिक प्रमुख हितधारक हैं। इससे पहले आज अमित शाह रण ऑफ कच्छ के समीप के गांवों के प्रधानोंसे भी मुलाकात की। रणऑफ
 कच्छपाकिस्तान से सटा हुआ इलाका है। यहीं से पाकिस्तान और भारत का बॉर्डर भी है।
🌻💐🌹🌸🌲🌹💐💐🌻💐❤️(A/3)भारत पहली बार आर्थिक मंदीके दौर से जूझ रहा हे।दूसरी तिमाही में जीडीपी पिछले वर्ष की तुलना में 8.6 %  कम रही।❤️
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर तक) में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक साल पहले की तुलना में 8.6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह दावा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक अधिकारी ने अपनी पूर्वानुमान रिपोर्ट में किया है। यह रिपोर्ट आरबीआई की मासिक बुलेटिन में प्रकाशित हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मुसीबत कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से आई है। माना जा रहा है कि लगातार दो तिमाही में जीडीपी घटने से देश पहली बार मंदीके संकट में घिर गया हैहालांकि
अच्छी बात यह है कि गतिविधियां धीरे-
धीरे सामान्य हो रही हैं और इससे संकुचन की दर भी सुधर रही है। रिपोर्ट में स्थिति जल्द बेहतर होने की उम्मीद भी जताई गई है।
कोरोना महामारी और लॉकडाउन का बुराअसर पहली तिमाही (अप्रैल से जून) परपड़ाथाऔरतबजीडीपी 23.9प्रतिशत
 तक कम हो गई थी। हालांकि, दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) की जीडीपी के सरकारी आंकड़े अभी तक नहीं आए हैं,मगरआरबीआई के कुछ विशेषज्ञअधि
कारियों ने त्वरित आकलन के आधार परअनुमान लगाया है कि जुलाई से सितं
बर की तिमाही का जीडीपी 8.6प्रतिशत
 तक रह सकती है।
     ❤️पहली बार बनी यह स्थिति❤️
आरबीआई के अधिकारी पंकज कुमार की ओर से तैयार की गई यह पूर्वानुमान रिपोर्टरिजर्व बैंकऑफइंडियाकी मासिक बुलेटिन में प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत तकनीकी रूप से वर्ष 2020-21 की पहली छमाही (मार्च से सितंबर) में अपने इतिहास में पहली बार आर्थिक मंदी के दौर में चला गया है। इकोनॉमिक्स एक्टिविटी इंडेक्सयानी 
आर्थिक कामकाज का सूचकांक शीर्षक से प्रकाशित लेख में बताया गया है कि पहली की तरह दूसरी तिमाही में भी आर्थिक संकुचन हो सकता है।
   ❤️जल्द राहत के संकेत भी दिए❤️
वैसे, आरबीआई ने पहले से अनुमान लगा रखा है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी में 9.5 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में राहत की उम्मीद जताते हुए यह भी कहा गया है कि गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं और इसके साथ ही संकुचन की दर भी कम हो रही है। इससे स्थिति जल्द ही बेहतर हो सकती है।
🌻💐🌹🌸🌲🌹💐💐🌻💐❤️(A/4)केंद्र सरकारका इंडियन इको
नॉमी को 2.50 लाख करोड़ रुपए का बूस्टर डोज❤️
नई दिल्ली। आज देश की वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण ने प्रेस कांफ्रेंस देश की गिरती इकोनॉमी को 2.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का बूस्टर डोज दिया। प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मंत्री ने 12 योजनाओं की घोषणाएं की। जिसके तहत 2.65 लाख करोड़ रुपए की योज
नाओंका ऐलान किया गया है।यह प्रोत्सा
हन पैकेज सकल घरेलू उत्पाद के रूप में राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद का 15 फीसदी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम में 10 चैंपियन कंपनियों को चुना गया है और इसमें करीब 1,46,000 रुपए का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत रोजग़ार योजना' को लांच किया जा रहा है,ताकि नए रोजग़ार के सृजन को प्रोत्साहन दिया जा सके। ये योजना 1 अक्टूबर 2020 से लागू होगी। इस योजना के तहत जिस संस्था में 1,000 या उससे कम कर्मचारी हैं उसमें कर्मचारी के हिस्से का 12 फीसदी और काम देने वाले के भी भत्ते का 12 फीसदी का केंद्र सरकार योगदान देगी। जहां 1,000 से ज़्यादा कर्मचारी हैं वहां केवल कर्मचारियों का केंद्र सरकार 12 फीसदी योगदान देगी। ये अगले दो वर्ष तक लागू रहेगा।
🌻💐🌹🌲🌸🌲🌹💐💐 💐❤️(B)आज के दिन जन्मे.शेर-ए पंजाब जाट सिख महाराजा,.महाराजा रणजीत सिंह का.जीवन परिचय  लेख❤️         
    ❤️ महाराजा रणजीत सिंह का❤️
         ❤️जीवन परिचय  लेख.❤️ 
   शेर-ए पंजाब जाट सिख महाराजा
         महाराजा रणजीत सिंह  (1780-1839) पंजाब प्रांत के राजा थे।वे शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं।महाराजारणजीत एकऐसीशख्सियत थे
,जिन्होंनेन केवलपंजाबको एक सशक्त
सूबे के रूप में एकजुट रखा,बल्किअपने
 जीते-जी अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं फटकने दिया। रणजीत सिंह का जन्म सन 1780 में गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) संधावालिया महाराजा महां सिंह के घर हुआ था। उन दिनों पंजाब पर सिखों और अफगानों का राज चलता था जिन्होंने पूरे इलाके को कई मिसलों में बांट रखा था। रणजीत के पिता महा सिंह सुकरचकिया मिसल के कमांडर थे। पश्चिमी पंजाब में स्थित इस इलाके का मुख्यालय गुजरांवाला में था। छोटी सी उम्र में चेचक की वजह से महाराजा रणजीत सिंह की एक आंख की रोशनी जाती रही।[2] महज 12 वर्ष के थे जब पिता चल बसे और राजपाट का सारा बोझ इन्हीं के कंधों पर आ गया।[3] 12 अप्रैल 1801 को रणजीत ने महाराजा की उपाधि ग्रहण की। गुरु नानक के एक वंशज ने उनकी ताजपोशी संपन्न कराई। उन्होंने लाहौर को अपनी राजधानी बनाया और सन 1802 में अमृतसर की ओर रूख किया।
          महाराजा रणजीत सिंह। 
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महाराजा रणजीत सिंह 'संधवालिया'
शासनावधि
12 अप्रैल 1801 – 27 जून 1839
महाराजा रणजीत ने अफगानों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं और उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर खदेड़ दिया। अब पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर उन्हीं का अधिकार हो गया। यह पहला मौका था जब पश्तूनों पर किसी गैर मुस्लिम ने राज किया। उसके बाद उन्होंने पेशावर, जम्मू कश्मीर और आनंदपुर पर भी अधिकार कर लिया। पहली आधुनिक भारतीय सेना - "सिख खालसा सेना" गठित करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उनकी सरपरस्ती में पंजाब अब बहुत शक्तिशाली सूबा था। इसी ताकतवर सेना ने लंबे अर्से तक ब्रिटेन को पंजाब हड़पने से रोके रखा। एक ऐसा मौका भी आया जब पंजाब ही एकमात्र ऐसा सूबा था, जिस पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं था। ब्रिटिश इतिहासकार जे टी व्हीलर के मुताबिक, अगर वह एक पीढ़ी पुराने होते, तो पूरे हिंदूस्तान को ही फतह कर लेते। महाराजा रणजीत खुद अनपढ़ थे, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में शिक्षाऔर कलाकोबहुतप्रोत्साहन दिया।
उन्होंने पंजाब मेंकानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी भी किसी को मृत्यु
दण्डनहीं दी।उनका सूबाधर्मनिरपेक्ष था उन्होंने हिंदुओं और सिखों से वसूले जाने वाले जजिया पर भी रोक लगाई। कभी भी किसी को सिख धर्म अपनाने के लिए विवश नहीं किया। उन्होंने अमृतसर के हरिमन्दिर साहिब गुरूद्वारे में संगमरमर लगवाया और सोना मढ़वाया, तभी से उसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा।
  बेशकीमती हीरा कोहिनूर महाराजा रणजीत सिंह के खजाने की रौनक था। सन 1839 में महाराजा रणजीत का निधन हो गया। उनकी समाधि लाहौर में बनवाई गई, जो आज भी वहां कायम है। उनकी मौत के साथ ही अंग्रेजों का पंजाब पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। अंग्रेज-सिख युद्ध के बाद 30 मार्च 1849 में पंजाब ब्रिटिश साम्राज्य का अंग बना लिया गया और कोहिनूर महारानी विक्टोरिया के हुजूर में पेश कर दिया गया।
                   ❤️ परिचय  ❤️
रणजीतसिंह का जन्म सन् 1780 ई. में जट सिख (जाट) परिवार में हुआ था। महानसिंह के मरने पर रणजीत सिंह बारह वर्ष की अवस्था में मिस्ल सुकरचकिया के नेता हुए। सन्1798 ई. में जमान शाह के पंजाब से लौट जाने पर उन्होनेलाहौर पर अधिकार कर लिया
। धीरे-धीरे सतलज से सिंधु तक, जितनी मिस्लें राज कर रही थीं, सबको उसने अपने वश में कर लिया। सतलज और यमुना के बीच फुलकियों मिस्ल के शासक राज्य कर रहे थे। सन् 1806 ई. में रणजीतसिंह ने इनको भी अपने वश में करना चाहा, परन्तु सफल न हुए। 
रणजीतसिंह में सैनिक नेतृत्व के बहुत सारे गुण थे। वे दूरदर्शी थे। वे साँवले रंग का नाटे कद के मनुष्य थे। उनकी एक आँख शीतला के प्रकोप से चली गई थी। परन्तु यह होते हुए भी वह तेजस्वी थे। इसलिए जब तक वह जीवित थे, सभी मिस्लें दबी थीं।
उस समय अंग्रेजों का राज्य यमुना तक पहुँच गया था और फुलकियाँ मिस्ल के राजा अंग्रेजी राज्य के प्रभुत्व को मानने लगे थे। अंग्रेजों ने रणजीतसिंह को इस कार्य से मना किया। रणजीतसिंह ने अंग्रेजों से लड़ना उचित न समझा और संधि कर ली कि सतलज के आगे हम अपना राज्य न बढ़ाएँगे। रणजीतसिंह ने फ्रांसीसी सैनिकों को बुलाकर, उसकी सैनिककमान मेंअपनी सेनाकोविलायती
 ढंग पर तैयार किया।
अब उनने पंजाब के दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी भागों पर आक्रमण करना प्रारंभ किया और दस वर्ष में मुल्तान, पेशावर और कश्मीर तक अपने राज्य को बढ़ा लिया।
रणजीतसिंहनेपेशावर कोअपनेअधिकार
 में अवश्य कर लिया था, किंतु उस सूबे पर पूर्ण अधिकार करने के लिए उसे कई वर्षों तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। वह पूरे पंजाब का स्वामी बन चुका; और उसे अंग्रेजों के हस्तक्षेप का सामना नहीं करना पड़ा। परंतु जिस समय अंग्रेजों ने नैपोलियन की सेनाओं के विरुद्ध सिक्खों से सहायता माँगी थी, उन्हें प्राप्त न हुई।
रणजीतसिंह ने सन् 1808 ई. में अपनी महत्वाकांक्षिणी सास सदाकोर के नाम पेशावर का राज्य परिवर्तित कर दिया था। क्योंकि यह अंग्रेजों की एजेंट महिला थी। रणजीतसिंह ने अपनी कुचक्रप्रिय सास से झगड़ा करके उसे कैद कर लिया था और ह्वदनी के गढ़ को अपने अधिकार में कर लिया था। ब्रिटिश सेना की एक टुकड़ी ने बंदी विधवा सदाकौर को छुड़ाया और अधिकार को वापस दिलाया। ब्रिटिश सेना के साथ रणजीतसिंह किसी प्रकार का झगड़ा नहीं चाहते थे।
सन 1835 में महाराजा रणजीत सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर को एक टन सोना दान किया जिससे उसके ऊपरी भाग पर स्वर्णपत्र जड़ा गया।
अंग्रेजों की तरफ से संधि की शर्तों को भंग करने का आरोप लगाया जा सकता था। इसलिए चुपचाप मौन रहकर उसने तैयारियाँ प्रारम्भ की थीं फिर भी १८०९ ई. में लार्ड मिंटो से संधि कर ली। यद्यपि इस संधि से महाराज को सिक्खों में बहुत अपमानित होना पड़ा था। उपर्युक्त संधि के कारण पंजाब के अफगानी राज्य तथा अफगानिस्तान को कुछ हद तक आंतकित कर सके थे। १८०२, १८०६ तथा १८१० ई. में मुलतान पर चढ़ाई की और अधिकार कर लिया एवं शाह शूजा से संधि करके अपने यहाँ रखा और उससे एक गिलास पानी के लिए 'कोहेनूर हीरा' प्राप्त किया। १८११ ई. में काबुल के शाह महमूद के आक्रमण की बात सुनकर और यह जानकार कि महमूद का इरादा काश्मीर के शासक पर आक्रमण का है, उसने काश्मीर पर आक्रमण कर दिया ताकि महमूद को वापस जाना संभव हो जाए और उसकी मित्रता भी इसे मिल जाए। काश्मीरके बाद इसने पेशावर पर 1822 मेंचढ़ाई कर दी,यारमुहम्मदखाँअफगानि
यों का नेतृत्व करता हुआ बहुत बहादुरी से लड़ा लेकिन अंत में पराजित हुआ। इसयुद्ध में सिक्खों का भी बड़ा नुकसान हुआ।1868 में पेशावर पर रणजीतसिंह के अधिकार से भयभीत होकर दोस्त
मुहम्मद खाँ काबुलनरेश बहुत भयभीत हुआ और रूस तथा ईरानसे दोस्ती कर ली।इस बातको ध्यान में रखकर अंग्रेजों ने स्वयं रणजीतसिंह तथा शाहशुजा के साथ एक त्रिगुट संधि कराई।महाराजा रणजीतसिंह हो रहे थे। 1838 में लकवा का आक्रमण हुआ, यद्यपि उपचार किया गया और अंग्रेज डाक्टरों ने भी इलाज किया, लेकिन 27 जून 1839 ई. को उनका प्राणांत हो गया। वेह उदारहृदय भी थे। काशी विश्वनाथ मंदिर पर जो स्वर्णपत्र आज दिखाई देता है वह उसकी काशीयात्रा तथा उदारता का परिचायक है। उसने दान के लिए 47 लाख रुपए की सम्पत्ति अलग कर रखी थी। जगन्नाथमंदिर पर भी वह कोहेनूर हीरा चढ़ाना चाहते थे लेकिन उस हीरे को तो विदेश में जाकर छिन्न-भिन्न होना था।
महाराजा के बाद सिक्खों के आपसी वैमनस्य, राष्ट्रद्रोह तथा अंग्रेजी कूटनीतिज्ञता का जवाब न देने की असमर्थता से सिक्ख राज्य मिट गया।
   रणजीत सिंह की समाधि (लाहौर)
        ❤️कश्मीर और कोहिनूर ❤️
❤️महाराजरणजीतसिंहकासाम्राज्य❤️
❤️महाराजाने स्वर्णमन्दिर का पुनरुद्धार कराया।❤️
बातसन्1812 की है।पंजाबपरमहाराजा
रणजीत सिंह का एकछत्र राज्य था। उस समय महाराजा रणजीत सिंह ने कश्मीर के सूबेदार अतामोहम्मद के शिकंजे से कश्मीरको मुक्त कराने काअभियान शुरू कियाथा।इसअभियानसे भयभीत होकर अतामोहम्मदकश्मीरछोड़कर भाग गया। कश्मीरअभियान केपीछेएकअन्य कारण भी थाअतामोहम्मद ने महमूद शाह द्वारा पराजित शाहशुजा कोशेरगढ़ के किले में कैद कर रखा था। उसे कैदखाने से मुक्त कराने के लिए उसकी बेगम वफा बेगम ने लाहौर आकरमहाराजा रणजीत सिंह से प्रार्थना कीऔर कहा कि मेहरबानी कर आप मेरे पति को अतामोहम्मद की कैद से रिहा करवादें,इसअहसानकेबदले बेशकीमती कोहिनूर हीरा आपको भेंट कर दूंगी। शाहशुजा के कैद हो जाने के बादवफाबेगमहीउन दिनोंअफगानिस्तान
की शासिका थी।इसी कोहिनूरकोहड़पने
 के लालच में भारत पर आक्रमण करने वालेअहमदशाह अब्दाली के पौत्र जमान शाह को स्वयं उसी के भाई महमूद शाह ने कैदखाने में भयंकर यातनाएं देकर उसकीआंखेंनिकलवा लीथीं।जमानशाह
अहमद शाह अब्दाली के बेटे तैमूर शाह का बेटा था,जिसकाभाईथामहमूद शाह। अस्तु,महाराजा रणजीति सिंहस्वयंचाहते
थे कि वे कश्मीर को अतामोहम्मद से मुक्त करवाएं।अत:सुयोगआने पर महा
राजारणजीत सिंह ने कश्मीर कोआजाद
करा लिया।उनके दीवान मोहकमचंद ने शेरगढ़ के किले को घेर कर वफा बेगम केपति शाहशुजाको रिहा कर वफा बेगम के पास लाहौर पहुंचा दिया। राजकुमार खड्गसिंह ने उन्हें मुबारक हवेली में ठह
राया।पर वफा बेगम अपने वादे के अनु
सारकोहिनूर हीरा महाराजारणजीत सिंह कोभेंट करने में विलम्ब करती रही। यहां तककिकई महीने बीत गए।जबमहाराजा 
ने शाहशुजा से कोहिनूर हीरे के बारे में पूछा तो वह और उसकी बेगम दोनों ही बहाने बनाने लगे। जब ज्यादा जोर दिया गयातो उन्होंनेएकनकली हीरा महाराजा रणजीत सिंहको सौंप दियाजो जौहरियों 
केपरीक्षण की कसौटी पर नकलीसाबित 
हुआ।रणजीत सिंह क्रोध से भरउठे और मुबारक हवेली घेर ली गई। दो दिन तक वहां खाना नहीं दिया गया। वर्ष 1813 कीपहली जून थी जब महाराजा रणजीत सिंह शाहशुजा के पास आए और फिर कोहिनूर के विषय में पूछा।धूर्तशाहशुजा
 ने कोहिनूर अपनी पगड़ी में छिपा रखा था। किसी तरह महाराजा को इसका पता चल गया। अत: उन्होंने शाहशुजा को काबुल की राजगद्दी दिलाने के लिए "गुरुग्रंथ साहब" पर हाथ रखकर प्रतिज्ञा की। फिर उसे "पगड़ी-बदल भाई" बनाने के लिए उससे पगड़ी बदल कर कोहिनूर प्राप्त कर लिया। पर्दे की ओट में बैठी वफा बेगम महाराजा की चतुराई समझ गईं। अब कोहिनूर महाराजा रणजीत सिंह के पास पहुंच गया था और वे संतुष्ट थे कि उन्होंने कश्मीर को आजाद करा लियाथा।उनकी इच्छा थी कि वे कोहिनूर हीरेको जगन्नाथपुरी के मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान जगन्नाथ को अर्पित करें। हिन्दू मंदिरों को मनों सोना भेंट करने के लिए वे प्रसिद्ध थे। काशी के विश्वनाथ मंदिर में भी उन्होंने अकूत सोना अर्पित किया था। परन्तु जगन्नाथ भगवान (पुरी) तक पहुंचनेकीउनकीइच्छाकोषाध्यक्षबेलीरामकी कुनीति के कारण पूरी न हो सकी।
महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु के पश्चात् अंग्रेजों ने सन् 1845 में सिखों पर आक्रमण कर दिया। फिरोजपुर क्षेत्र में सिख सेना वीरतापूर्वक अंग्रेजों का मुकाबला कर रही थी। किन्तु सिख सेना के ही सेनापति लालसिंह ने विश्वासघात किया और मोर्चा छोड़कर लाहौरपलायन कर गया। इस कारण विजय के निकट पहुंचकर भी सिख सेना हार गई। अंग्रेजों ने सिखों से कोहिनूर हीरा ले लिया।साथ ही कश्मीर और हजारा भी सिखों से छीन लिए क्योंकि अंग्रेजों ने डेढ़ करोड़ रुपए का जुर्माना सिखों पर किया था, अर्थाभाव-ग्रस्त सिख किसी तरह केवल 50 लाखरुपए ही दे पाए थे। लार्डहार्डिंग ने इंग्लैण्ड की रानी विक्टोरिया को खुश करने के लिए कोहिनूर हीरा लंदन पहुंचा दिया,जो "ईस्ट इंडिया कम्पनी"द्वारा रानी विक्टोरियाको सौंप दिया गया। उन दिनों महाराजारणजीत सिंहके पुत्रदिलीपसिंह
वहीं थे।कुछ लोगोंकाकथन हैकि दिलीप सिंह से ही अंग्रेजों ने लंदन में कोहिनूर हड़पा था। कोहिनूर को 1 माह 8 दिन तक जौहरियों ने तराशा और फिर उसे रानी विक्टोरिया ने अपने ताज में जड़वा लिया
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(C) आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
1789- बेंजामिन फ्रैंकलिन ने अपने मित्र को एक पत्र में लिखा-मृत्यु और करोंको छोड़कर कुछ भी स्थाई नहीं है।”
1918- ऑस्ट्रिया गणराज्य बना।
1950- तिब्बत ने चीनी आक्रमण के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में अपील की।
1968- पाकिस्तान में जुल्फेकार अली भुट्टो को गिरफ्तार किया गया।
1971अमेरिकी अंतरिक्ष संस्थान नासा द्वारा भेजा गया यान मरीनर 9 मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँच गया।
1975- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एशिया के चेचक मुक्त होने की घोषणा की।
1985 - कोलंबिया में ज्वालामुखी नेवादो देल रुइज़ के विस्फ़ोट से कम से कम 20,000 लोग मारे गए।
2009, शुक्रवार, - झारखण्ड में नक्सलियों ने निवर्तमान विधायक रामचन्द्र सिंह सहित सात लोगो का अपरहण कर लिया है
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐(D)आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
1780-भारत में पंजाब राज्य के महा
राजा रणजीत सिंह , पंजाब के शासक
1967- भारतीय बोलीवुड फिल्म अभि
नेत्री  मीनाक्षी शेषाद्रि
1968-जूहीचावला,हिंदीफिल्मअभिनेत्री
(हम हैं राही प्यार के)
1989- लोकेश जैन, उत्कृष्ठ भारतीय कलाकार
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌲🌹💐💐🌻(E)आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
1589 मे भगवानदास का निधन  को हुआ
1883 मे अमेरिकी चिकित्सक जे मारिओन सिम्स का निधन 
1903 मे डेनिश-फ्रांसीसी प्रभाववादी और नव-प्रभाववादी चित्रकार केमिली पिसारो का निधन हुआ था।
1952 मेबच्चों की पुस्तकों के अमेरिकी लेखक मार्गरेट वाइज ब्राउन का निधन  हुआ था।
1974अमेरिकी रासायनिक तकनीशि
यन और श्रमिक संघ कार्यकर्ता  करेन
सिल्कवुड का निधन हुआ था।
2005 अमेरिकी प्रोफेशनल पहलवान एडी गुरेरो का निधन 13 नवंबर,  को हुआ था।
🌻💐🌹🌲🌸🌲🌹💐💐🌻
      (F) आज का दिवस का नाम
1.आज दीपावलीत्योहारकी 5 दिवसीय श्रृंखला में रूपचौदस का दिन हे।
2 .महाराजा रणजीत सिंह , पंजाब के शासक का जयंती दिवस
3 .भारतीय की सुप्रसिद्ध बोलीवुड फिल्म अभिनेत्री  मीनाक्षी शेषाद्रि का जन्मदिवस
4. भारतीय की सुप्रसिद्ध बोलीवुड फिल्म अभिनेत्री जूही चावला,का जन्मदिवस
5. भगवानदास का पुण्यतिथि दिवस
6. अमेरिकी के प्रसिद्ध चिकित्सक जे मारिओन सिम्स का पुण्यतिथि दिवस
7. डेनिश-फ्रांसीसी प्रभाववादी और नव-प्रभाववादी चित्रकार केमिली पिसारो का पुण्यतिथि दिवस
8. बच्चों की पुस्तकों के अमेरिकी लेखक मार्गरेटवाइजब्राउन का पुण्यतिथि दिवस
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌲🌹💐💐   
आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन दीपावली पर्व के एक दिन पूर्व रूपचौदस की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जयमहाकाल,बोले सोनिहाल💐
💐।जय हिंद जयभारत💐
💐  निवेदक;-💐
💐 चित्रांश ;-विजय निगम।💐


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