जरूरत काम करने की है.... - विजय निगम

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             वरिष्ठ नागरिक परिवार
                      एवम
             घर के मजबूर हालात  


78 वर्ष की यह मेरी उम्र 
अब आराम करने की है ।
जरूरत काम करने की है ।।


धुंधली नजर बेहरे कान ।
सुस्त दिमाग लरजती जुबान।।
चेहरे पर लटकते वृद्ध निशान ।
वृद्ध तन में कमजोर जान ।।


ये हकीकत अब मेरी आत्मा के
 आशियाने की है ।
मेरी बात गुजरे जमाने की है ।।
आज जरूरत कुछ कमाने की है ।।


 हालात ए जेहन खुद से लडने की है ।
बात ये अफसोस करने की है ।।
उम्र आराम करने की है ।
जरूरत अभी काम करने की है ।।


अब नहीं चलेगा मेरा सिक्का।
मेरे हाथ में नहीं है अब कोई इक्का ।।
चिडी का चिड़िया और चुजे के साथ है
हुकुम का इक्का बड़ा बद मिजाज है 
ईट का बना घर उसने खुद ही बिखेर दिया ।
उसकी इच्छा और जिद 
पान की दुकान गृहस्थी की कमान
बंद करने की है । द्वंद करने की है ।।
मेरी दिल की ख्वाहिश अभी और  धड़कने की है ।


मान्या के लिए कुछ करने की है ।।
कुछ इकट्ठे दाम करने  की है 
मान्या की उम्र अभी पढ़ने की है ।।
उम्र आराम करने की है ।
जरूरत काम करने की है 


जो फल मुझ पर लगे मेरे सगे
वो आज की मैनाओं ( मेनकाओं) 
प्रतिभाओं  शिक्षाओं ने कुतर दिए ।
जो चिड़िया हसीन थी मेरे कुचे में 
खुद मेरे ही हबीब ने उसके रकीब ने
ही उसके पर कुतर दिए ।।


छोड़ दिया उसकी बीच दर्मियाने में
किसी के बरगलाने में , अफसाने में ।।
अब की बारी ,
 उसकी  परी के नाम करने की है ।।
उम्र आराम करने की है ।
जरूरत काम करने की है ।।


लालन पालन सब खुदा ही करेंगे ।
सब इंतजाम भगवान ही करेंगे ।।
मेरी आखों में रोशनी वहीं भरेंगे।
मन में भरोसा भी वहीं भरेंगे ।।
अब जरूरत हालात बदलने की है ।
उम्र अब राम नाम भजने की है ।


मान्या के घर की जरूरत 
मेरे  कुछ भी काम करने की है  ।।
नीम को, आम करने की है 
काम करने की है ।।
असम्भव सा लगता है ।
मुझे ख्वाब सा लगता है ।


12 साल की चिड़िया के लिए
हर पल जैसे सवाल लगता है ?
27 बरस तक ही उसका काम होगा ।
जब जाकर कहीं उसका नाम होगा ।।


राम जाने कैसे ये चारधाम होगा ?
ये कैलाश धाम होगा ?
या अक्षरधाम होगा ?
या नाम बदनाम होगा ?
शेष उम्र, उसी के नाम करने की है 
उम्र आराम करने की है ।
जरूरत काम करने की है ।।


गुस्सा क्रोध मत्सर
 मुझे सब तरफ से घेरे है ।
 मेरे भाग्य में  अभी हजार फेरे हैं।।


अब तक कई बार  पहाड़ से गिरा हूं ।
हजार बार टूटा हूं मिट्टी में मिला हूं ।
कोई ने कोई फरिश्ता आया ।
 मुझे अपने साथ गगन में उड़ाया ।।
पर औरों के पंखों से
 मै उड़ना न सीख पाया


 उड़ न पाया,
 टीक से चल भी न पाया।।
वक़्त ऐसा भी कई बार आया ।
जब साथ छोड़ गया मेरा ही साया।।
अब हारा हुआ मन रोगी काया ।
ये कर्म फल मैने ही कमाया ।।


अब हालात मान्या के घर की 
इच्छा , नारायण की,या  नर की। ।
दादी बाबा से, दोनों के बूढ़े मन से,  तन से ,
कुछ, ज्योतिर्मय शाम करने की है 
हालांकि,उम्र आराम करने की है ।
पर ,जरूरत काम करने की है ।।


बाबा के दोनों पीडीसी चेक बाउंस हो गए 
जो रब ने दिए थे दहेज में 
वो आउट डेटेड अनाउंस हो गए ।
खुदा के हस्ताक्षर भी नहीं मिलते ।


उनके हिसाब  में ।
कांपते हाथों से लिखते हैं 
कुछ किताब में ।।
आजकल चेक 
स्कैन करने का जमाना है ।
बेचैन करने का बहाना है ।।


जो दिया था रब ने
 उसी से काम चला था
सब सहज था कुछ न खला था
रब दयालु है दया करेगा
जरूरत अब दया करने की है
राम राम जपते काम करने की है ।
उम्र भले ही आराम करने की है।
जरूरत काम करने की है ।।


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निवेदक;चित्रांश: विजॉय निगम
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