आज की बात आपके साथ - विजय निगम

      ॐ यमाय यमाय धर्मराजाय 
         श्री चित्रगुप्ताय नमो नमः   
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प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹 
🌻 नमस्ते।🌻
आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक 17 अगस्त 2020 सोमवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 
 A कुछ रोचक समाचार
B.आज के दिन जन्मे.हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर.का जीवन 
परिचय  लेख.. 
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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    (A) कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)
💝(A/1)क्रिकेट:-धोनीऔररैनानेसंन्यास
लेनेकेबाद एकदूसरे को गले से लगाया💝
💝(A/2)UPSC पास करने का इनका फंडा कुछ अलग है, इन 7 फॉर्मूलों ने बदल दी जिंदगी।💝
💝(A/3)अटल बिहारी वाजपेयी द्वितीय पुण्यतिथि स्मरण;- शादी के सवाल पर भरे सदन में दिया था जवाब💝
💝(A/4)आइए जानते हैं जेठालाल यानी दिलीप जोशीएकदिन केलिएकितना 
चार्ज करते हैं।और बबीता के पति का अय्यर कीएक दिन की फीस कितनीहै💝
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 💝(A)कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)💝
💝(A/1)क्रिकेट:-धोनीऔररैनानेसंन्यास
लेनेकेबादएकदूसरे को गले से लगाया💝.
धोनीके रिटायरमेंट के बाद सुरेश रैना ने भी रिटारमेंट ले लिया।रैनानेभीसोशलमीडियापर पोस्ट शेयर
कर इसकी जानकारी दी है
धोनी और रैना के द्वारा संन्यास के ऐलान केबाद ऐसा था CSK टीम का ड्रेसिंग रूम
खास बातें
धोनी और रैना ने एक साथ इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा
चेन्नई सुपरकिंग्स ने शेयर किया ड्रेसिंग रूम का इमोशनल वीडियो
सोशल मीडिया पर लोग बोले- दोस्त हो तो ऐसा
:एमएस धोनी (MS Dhoni) ने 15 अगस्त के ऐतिहासक दिन इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. धोनी के रिटायरमेंट के बाद सुरेश रैना (Suresh Raina) ने भी रिटायरमेंट ले लिया. रैना ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी है. धोनी और रैना का एक साथ इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहना हर किसी को हैरान कर दिया है. बता दें कि रैना हमेशा से धोनी को अपना दोस्त और गुरू मानते आए हैं, लेकिन जब माही ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया तो उन्होंने भी खुद को इंटरनेशनल क्रिकेट से अलग कर लिया. सोशल मीडिया पर दोनों क्रिकेटरों के रिटायरमेंट पर लोगों के रिएक्शन आ रहे हैं.।खासकर फैन्स काफी इमोशनल भी हो रहे हैं।इसी बीच चेन्नई सुपरकिंग्सने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया है जिसमेंरैनाधोनी को गले से लगातेहुए नजर आ रहे हैं.
यह वीडियो धोनी के रिटायरमेंट के ऐलान के बाद का है।वीडियो में सीएसके का हर एक सदस्य धोनी को गले से लगाकर उन्हें उनकेबेहतरीन और यादगारक्रिकेट करियर के लिए बधाई दे रहा है.सीएसके के ट्विटर पर से शेयर किया गया यह वीडियो खूब वायरल भी हो रहा है. वीडियो को देखकर फैन्सभावुक हो रहे हैं औरअपना रिएक्शन भी दे रहे हैं. कई लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा हैकिधोनी और रैनाकोअब भारतीय
जर्सीमेंखेलते हुएनहीं देख पाएंगे।धोनी का
इंटरनेशनलकरियर 2004 में शुरू हुआ था तो वहीं, रैना ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच 2005 में खेला था।भारतीय टीम के पूर्व कप्तान ने अपने इंटरनेशनल करियर में 90 टेस्ट, 350 वनडे, और 98 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले थे।कप्तान के तौर पर भी धोनी काफी सफल रहे।धोनी के नाम इंटरनेशनल करियर में 16 शतक दर्ज है. वहीं, सुरेश रैना ने अपने करियर में 18 टेस्ट,226वनडेऔर78 टी-20इंटरनेशनल
मैच खेले, रैना ने इंटरनेशनल करियर में 7 शतक जमाए.: कुछ दिन पहले विराट ने करियर को लेकर बड़ी बात कही थी।. 
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻💝(A/2)UPSC पास करने का इनका फंडा कुछ अलग है, इन 7 फॉर्मूलों ने बदल दी जिंदगी।💝
यूपीएससी की परीक्षा पास करना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं। हर प्रतिभागी अलग है और उसके पढ़ने और लिखने का तरीका भी।आज हम बात कर रहे हैं चंद्र
ज्योति की जिन्होंने पहली ही बार में इस कठिन परीक्षा को पास कर लिया।   
सिविल सर्विसेज की परीक्षा में ऑलइंडिया 
में 28वां रैंक हासिल करके ट्राइसिटी में टॉपर रहीं चंद्रज्योति की दिली इच्छा है कि उन्हें पंजाब क्षेत्र में सेवा करने का मौका मिले। यहां सेवाएं देकर वह शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना चाहती हैं। शिक्षा व्यवस्था और महिलाओं की समस्याओं ने उन्हें आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया।
भवन विद्यालय चंडीगढ़ सेक्टर- 27 से 12वीं कर चुकीं और मोहाली की रहने वाली चंद्रज्योति ने बताया कि पहली ही बार में सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण की है। चंद्रज्योति के पिता दलबारा सिंह आर्मी से रिटायर्ड डॉक्टर और माता मीणा सिंह गृहणी हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी ने मिड सेमेस्टर के विद्यार्थियों को अगली कक्षा में किया प्रमोट, चेहरों पर झलकी खुशी
पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी से जुड़े मामले में आया नया मोड़, सरकार गवाह बनने की याचिका खारिज
12 साल बड़ी अमृता सिंह से सैफ अली खान ने रचाई थी शादी, इस वजह से हुआ तलाक।
चंद्रज्योति ने बताया कि 2018 में दिल्ली से इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। आईएएस बनने का बचपन से ही सपना था, इसलिए उन्होंने स्कूल से ही अखबार पढ़ने की आदत डाली थी। चंद्रज्योति ने बताया उन्होंने दिल्ली में रहकर सेल्फ स्टडी की।
तैयारी के दौरान कई बार उनका हौसला कमजोर पड़ जाता था। ऐसे में उनकी माता उनके लिए हौसला बनी। वे दिल्ली जाकर कई दिन उनके साथ रहती और उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रेरित करतीं। चंद्रज्योति ने बताया प्रारंभिक परीक्षा, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार परीक्षा की घड़ी में उनकी मां उनके पास थीं।
ऐसे चढ़ी सफलता की सीढ़ी
1. प्रतिदिन अखबार पढ़ना।
2. करंट अफेयर्स पर ज्यादा फोकस और रिवीजन।
3. बेसिक्स के लिए एनसीईआरटी की किताबें पढ़ी।
4. सभी विषयों के लिए चुनी हुई किताबें पढ़ी। 
5. प्रिलिम्स के लिए मॉक टेस्ट पर ज्यादा फोकस। 
6. मैंस में आंसर राइटिंग पर किया ज्यादा फोकस।   
7. कोचिंग सेंटर घूमने की बजाय सेल्फ स्टडी पर दिया ध्यान ।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻💝(A/3)अटल बिहारी वाजपेयी द्वितीय पुण्यतिथि स्मरण;- शादी के सवाल पर भरे सदन में दिया था जवाब💝
      भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयीकीआज दूसरी पुण्य
तिथि है।कल के ही दिन यानी 16 अगस्त को अटल बिहारी वाजपेयी इस दुनिया को विदा कह गए थे। उनके निधन की खबर ने पूरे देशको झकझोर कर रख दिया था। वह भारतीय राजनीति के उन चंद नेताओं में से हैं जो कभी दलगत राजनीति के बंधन में नहीं बंधे और उन्हें हमेशा ही सभी पार्टियों से भरपूर प्यार व स्नेह मिला।यहां तक कि जम्मू-कश्मीर में भी वह सबसे लोकप्रिय नेता रहे हैं। 80 और 90 के दशक में पैदा या बड़े हुए हर शख्स के मनपसंद नेता की लिस्ट मेंअटल जी का नाम सबसेऊपर रहा है। आज हम आपको उनकी जिंदगी के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो बहुत कम लोगों को पता हैं.... 
ऐसानहीं है कि शादी से जुड़ा सवाल अटल जी से ज्यादा नहीं पूछा गया। लेकिन जब भी पूछा जाता वह कभी परेशान नहीं होते थे बल्कि बड़े ही शांत और संयमित तरीके से उन सवालों का जवाब देते थे। कई बार तो वो कहते कि, ‘व्यस्तता के कारण ऐसा नहीं हो पाया।’ बाद में ये कहकर मुस्कुरा देते थे। उनके करीबी लोग तो ये भी कहते हैं किउन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ केलिए आजीवनअविवाहित रहने का निर्णय लिया था।अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव यूपी के बटेश्वर में था,हालांकि उनका जन्म 25 दिसंबर1924 कोग्वालियर में हुआ था
ग्वालियर के ही विक्टोरिया कॉलेज से उन्होंनेपढ़ाई की।अगर उनकेपूरे जीवन पर
नजर डालें तो वो राजनीति,कविता और सादगी के बीच बीता। हालांकि लोगों के जेहनमें ये बात भी आती है कि कभी शादी क्योंनहीं की,जिसकासही-सही जवाब और ठोस कारण किसी को नहीं पता। हालांकि इसबारे में वहखुदसदन में विपक्ष के हमलों
के बीच अपने अविवाहित होने का बारे में बड़ी ही साफगोई के साथ ये बता चुके हैं, ‘मैंअविवाहितजरूर हूंलेकिन कुंवारा नहीं।
लोकभवनलाई गई भारत रत्नअटलबिहारी
की कांसे की प्रतिमा, 25 दिसंबर को होगा अनावरण वाजपेयी फॉर्मूले से आगे जाने की जरूरत :अलगाववादी नेता भी बड़ी
शिद्दतसे वाजपेयी का जिक्रकरते हैं। पूर्व 
पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाएगा रामलीला मैदान!
बहुत से ऐसे लोग हैं जो ये बात तो जानते हैं किअटल जी ने शादीनहीं की थी लेकिन
क्याआप जानते हैं उनकी एक बेटीभी थी। उनकानामनमिता भट्टाचार्य है जोअटल जी
की दत्तक पुत्री हैं।अटल जी जीते जी जिस तरह हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत रहे वहीं उनकीमौत के बाद हुए कर्मकांड ने भी एक बड़ी मिसाल पेश की।बता दें कि अटल जी केपार्थिव शरीर को मुखाग्नि उनकी बेटी 
नमिता भट्टाचार्य ने ही दी।
अटलजी केबारेमें कहा जाता है किकॉलेज
केदिनोंमेंउनकीएक महिलामित्र राजकुमारी
कौल हुआ करती थीं,जो अपने आखिरी
समय तक अटल जी के साथ रही थीं।दोनों ग्वालियरके विक्टोरिया कॉलेज (लक्ष्मीबाई कॉलेज)में साथपढ़तेथे।अटल जीपरलिखी
गई किताब अटलबिहारी वाजपेयीः ए मैन
ऑफआल सीजंस"मेंइस बात का जिक्र है।
बेटीनमिता और नातिन निहारिका किताब
में लिखा है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के कुछ समय बाद अटल जी राजनीति में सक्रिय हो गए और इस बीच मिसेज कौल के पिता ने उनकी शादी कॉलेज में प्रोफेसर ब्रिजनारायण कौल से कर दी।शादीके बाद मिसेज कौलका परिवार दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज कैम्पस में रहने लगा। हालांकि अटल जी और राजकुमारी कौल का संबंध कभी चर्चा का कारण नहीं बना। लेकिन जब 2014 में राजकुमारी कौल की मौत हुई तो देश के कई बड़े अखबारों ने इसे प्रमुखता से छापा।अटल जी की दोस्ती की नैतिकता ऐसी थी कि राजकुमारी कौल के पति ब्रिज नारायण कौल को भी इस पर कोई ऐतराज नहीं था। राजकुमारी कौल ने 80 के दशक में एक मैगजीन को इंटरव्यू दियाथा।इसमें उन्होंने कहा,अटल के साथ अपनेरिश्ते को लेकर मुझे कभी अपने पति को स्पष्टीकरणनहीं देना पड़ा।हमारा रिश्ता
 समझबूझ के स्तर पर काफी मजबूत था।’
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻💝(A/4)आइए जानते हैं जेठालाल यानी दिलीप जोशी एक दिन के लिए कितना चार्ज करते हैं।और बबीता के पति का अय्यर कीएकदिन की फीस कितनीहै💝
जेठालाल यानी दिलीप जोशी: जेठालाल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की जान हैं।26 मई 1968 को पोरबन्दर स्थित गोसा नाम के गांव में जन्में दिलीप जोशी ने 12 सालकीउम्र से ही थिएटर मेंचाइल्डआर्टिस्ट के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। दिलीप जोशी सलमान खान और शाहरुख खान के साथ कई फिल्मों में काम कर चुके हैं।यहां तक कि दिलीप जोशी ने सलमान कीडेब्यू फिल्म मेंभीउनके साथकामकिया।
एक दिन के शूट के लिए 50 हजार लेते हैं जेठालालः रिपोर्ट्स के अनुसार, एक दिन के शूट के लिए पचास हजार रुपए लेते हैं यानी उनकी महीने भर की फीस करीब पंद्रह लाख है। गौर करने वाली बात है कि जेठालाल महीने में सिर्फ 25 दिन ही काम करते हैं।अय्यर को मिलती जेठालाल की आधी फीसः शो में बबीता जी के CGHH अय्यर यानी तनुज महाशब्दे का किरदार भी लोगों को खूब पसंद आता है। जेठालाल की अय्यर के साथ शो में खटपट भी लोगों को आनंदित करता है। रिपोर्ट के मुताबिक अय्यर को शो के लिए जेठालाल सेआधी फीस दी जाती है।यानी तनुज महा
शब्दे एक दिन की शूट के लिए 25 हजार चार्ज करते हैं।
बाबूजी को मिलती है जेठालाल से कम फीस: शो में बाबूजी जेठालाल के पिता का रोल निभा रहे हैं। बाबूजी का असल नाम अमित भट्ट है। हालांकि रियल लाइफ की बात करें तो अमित भट्ट, दिलीप जोशी से छोटे हैं। बता दें कि अमित 16 सालों से थिएटर में काम कर रहे थे और इन्होंने कई गुजराती और हिंदी सीरियल में भी काम किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें हर‍ एपिसोड के लिए 70-80 हजार रुपये लेते हैं।तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में तारक के बॉस बनकर आ रहे ये दिग्गज एक्टर, शो में आएगा दिलचस्प मोड़।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में तारक के बॉस बनकर आ रहे ये दिग्गज एक्टर, शो में आएगा दिलचस्प मोड़
राकेश बेदी के मुताबिक जो वो किरदार निभाने जा रहे हैं, असल कहानी में भी वो किरदार मौजूद है। 12 साल पहले भी इस किरदार को लेकर उनसे संपर्क किया गया था लेकिन ...तारक मेहता का उल्टा चश्मा में एक्टर राकेश बेदी की एंट्री होने वाली है।फैमिली कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ टीवी के सबसे लोकप्रिय शोज में से एक है। 12 साल हो चुके इस शो में समय समय पर कई बदलाव नजर आए। दयाबेन का किरदार निभाने वाली दिशा वकानी सालों से इस शो से गायब हैं। इस बीच खबर आ रही है कि शो में एक नए किरदार की एंट्री होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस नए किरदार की एंट्री से शोमें दिलचस्प मोड़ आने वाला है। बता दें हाल में इश्कबाज फेम ऐक्ट्रेस नविना बोले की शो में एंट्री सायकायट्रिस्ट के रोल में हुई थी। अब शो में एक और बड़ी एंट्री होने जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर् के मुताबिक शो में टीवी के दिग्गज एक्टर राकेश बेदी एंट्री लेने जा रहे हैं। वह शो में तारकमेहता के बॉसकेरूप वो नजर आएंगे
रिपोर्ट कीमानें तो राकेश बेदी अपनीशूटिंग भी शुरू कर चुके हैं। राकेश बेदी के हवाले से लिखा है कि राकेश बेदी ने 14 अगस्त से शो की शूटिंग शुरू कर दी है।शो का हिस्सा बनने को लेकर राकेश बेदी नेकहा
, मुझे 12 साल पहले भी मुझे इस रोल का ऑफर मिला था, तब तारक मेहता का उल्टा चश्मा शुरू ही हुआ था’।
राकेश बेदी के मुताबिक जो वो किरदार निभाने जा रहे हैं असल कहानी में भी वो किरदार मौजूद है। 12 साल पहले भी इस किरदार को लेकर उनसे संपर्क किया गया था लेकिन तब बात नहीं बन पाई थी। लेकिन अब उनसे इस किरदार के लिए दोबारा संपर्क किया गया है। और जल्द ही नए एपिसोड में उनके किरदार से दर्शक रूबरू होंगे।
गौरतलब है कि राकेश बेदी 90 के दशक के कई टीवी शोज में नजर आ चुके हैं। ‘श्रीमान श्रीमती’ और ‘जबान संभाल के’ जैसे शो में उनके किरदार की काफी तारीफ हुई थी। फिलहाल वह जाने-माने कॉमेडी शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ में अंगूरी के पिता के किरदार में दिखाई देते हैं। बता दें कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने 12 साल और 3000 एपिसोड पूरे किए हैं।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐 💐(B)आज के दिन जन्मे.हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर.का जीवन 
परिचय  लेख. 
अमृतलाल नागर (17 अगस्त, 1916 - 23 फरवरी, 1990) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। आपको भारत सरकार द्वारा १९८१ में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
                  जीवनी
अमृत लाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 ई0 को गोकुलपुरा, आगरा (उत्तर प्रदेश) में एक गुजराती ब्राह्मण परिवार में हुआ। आपके पिता का नाम राजाराम नागर था। आपके पितामह पं. शिवराम नागर 1895 से लखनऊ आकर बस गए थे। आपकी पढ़ाई हाईस्कूल तक ही हुई। फिर स्वाध्याय द्वारा साहित्य, इतिहास, पुराण, पुरातत्व व समाजशास्त्र का अध्ययन। बाद में हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगला, अंग्रेजी पर अधिकार। पहले नौकरी, फिर स्वतंत्र लेखन, फिल्म लेखन का खासा काम किया। 'चकल्लस' का संपादन भी किया। आकाशवाणी, लखनऊ में ड्रामा प्रोड्यूसर भी रहे।
1932 में निरंतर लेखन किया। शुरूआत में मेघराज इंद्र के नाम से कविताएं लिखीं। 'तस्लीम लखनवी' नाम से व्यंग्यपूर्ण स्केच व निबंध लिखे तो कहानियों के लिए अमृतलाल नागर मूल नाम रखा। आपकी भाषा सहज, सरल दृश्य के अनुकूल है। मुहावरों, लोकोक्तियों, विदेशी तथा देशज शब्दों का प्रयोग आवश्यकतानुसार किया गया है। भावात्मक, वर्णनात्मक, शब्द चित्रात्मक शैली का प्रयोग इनकी रचनाओं में हुआ है।
                 💐  रचनाएँ💐
💐उपन्यास💐 : महाकाल (1947) (1970 से ‘भूख’ शीर्षक प्रकाशित), बूँद और समुद्र (1956), शतरंज के मोहरे (1959), सुहाग के नुपूर (1960)(यह तमिल महाकाव्य 'सिलप्पदिकारम:दुःख की लड़ी' के आधार पर लिखा माना जाता है।)[1], अमृत और विष (1966), सात घूँघट वाला मुखड़ा (1968), एकदा नैमिषारण्ये (1972), मानस का हंस (1973), नाच्यौ बहुत गोपाल (1978), खंजन नयन (1981), बिखरे तिनके (1982), अग्निगर्भा (1983), करवट (1985), पीढ़ियाँ (1990)।
💐कहानी संग्रह💐 : वाटिका (1935), अवशेष (1937), तुलाराम शास्त्री (1941), आदमी, नही! नही! (1947), पाँचवा दस्ता (1948), एक दिल हजार दास्ताँ (1955), एटम बम (1956), पीपल की परी (1963), कालदंड की चोरी (1963), मेरी प्रिय कहानियाँ (1970), पाँचवा दस्ता और सात कहानियाँ (1970), भारत पुत्र नौरंगीलाल (1972), सिकंदर हार गया (1982), एक दिल हजार अफसाने (1986 - लगभग सभी कहानियों का संकलन)।
💐नाटक 💐: युगावतार (1956, बात की बात (1974), चंदन वन (1974), चक्कसरदार सीढ़ियाँ और अँधेरा (1977), उतार चढ़ाव (1977), नुक्कड़ पर (1981), चढ़त न दूजो रंग (1982)।
व्यंग्य : नवाबी मसनद (1939), सेठ बाँकेमल (1944), कृपया दाएँ चलिए (1973), हम फिदाये लखनऊ (1973), मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ (1985), चकल्लस (1986) : उपलब्ध स्फुट हास्यँ-व्यंग्य रचनाओं का संकलन।
💐अन्य कृतियाँ💐 : गदर के फूल (1957 - 1857 की इतिहास-प्रसिद्ध क्रांति के संबंध में महत्त्वपूर्ण सर्वेक्षण), ये कोठेवालियाँ (1960 - वेश्याओं की समस्या पर एक मौलिक एवं अनूठा सामाजिक सर्वेक्षण), जिनके साथ जिया (1973 - साहित्यकारों के संस्मरण), चैतन्य महाप्रभु (1978 - आत्म परक लेखों का संकलन), टुकड़े-टुकड़े दास्तान (1986 - आत्मोपरक लेखों का संकलन), साहित्यत और संस्कृति (1986 - साहित्यिक एवं ललित निबंधों का संकलन), अमृत मंथन (1991 - अमृतलाल नागर के साक्षात्कार (संपादक : डॉ॰ शरद नागर एवं डॉ॰ आनंद प्रकाश त्रिपाठी), अमृतलाल नागर रचनावली (संपादक : डॉ॰ शरद नागर, 12 खंडों में, 1992), फिल्मरक्षेत्रे रंगक्षेत्रे (2003 - नागरजी के फिल्मी, रंगमंच तथा रेडियो नाटक संबंधी लेखों का संकलन), अत्र कुशलं तत्रास्तु (2004 - नागरजी एवं रामविलास शर्मा के व्यक्तिगत पत्राचार का संग्रह)।
💐बाल साहित्य:💐नटखट चाची (1941), निंदिया आजा (1950), बजरंगी नौरंगी (1969), बजरंगी पहलवान (1969), बाल महाभारत (1971), इतिहास झरोखे (1970), बजरंग स्मडगलरों के फंदे में (1972), हमारे युग निर्माता (1982), छ: युग निर्माता (1982), अक्ल बड़ी या भैंस (1982), आओ बच्चोंं नाटक लिखें (1988), सतखंडी हवेली का मालिक (1990), फूलों की घाटी (1997), बाल दिवस की रेल (1997), सात भाई चंपा (1998), इकलौता लाल (2001), साझा (2001), सोमू का जन्म-दिन (2001), शांति निकेतन के संत का बचपन (2001), त्रिलोक विजय (2001)।
💐अनुवाद💐 : बिसाती (1935 - मोपासाँ की कहानियाँ), प्रेम की प्याकस (1937 - गुस्तामव फ्लाबेर के उपन्यास ‘मादाम बोवरी’ का संक्षिप्त भावानुवाद), काला पुरोहित (1939 - एंटन चेखव की कहानियाँ), आँखों देखा गदर (1948 - विष्णु भट्ट गोडसे की मराठी पुस्ताक ‘माझा प्रवास’ का अनुवाद), 5. दो फक्‍कड़ (1955 - कन्हैकयालाल माणिकलाल मुन्शी के तीन गुजराती नाटक), सारस्वत (1956 - मामा वरेरकर के मराठी नाटक का अनुवाद)।
💐संपादन 💐: सुनीति (1934), सिनेमा समाचार (1935-36), अल्ला कह दे (20 दिसंबर, 1937 से 3 जनवरी 1938, साप्ता्हिक), चकल्लस (फरवरी, 1938 से 3 अक्टूबर, 1938, साप्ताहिक), नया साहित्य (1945), सनीचर (1949), प्रसाद (1953-54) मासिक पत्रों का संपादन किया।।
💐संस्मरण💐 : 'गदर के फूल', 'ये कोठेवालियां', 'जिनके साथ जिया।'
अन्य : मोपासां, चेखव, लाबेयर, के. एम. मुंशी, मामा वरेरकर की रचनाओं के अनुवाद व विपुल बाल-साहित्य। नाटक, रेडियो नाटक व फीचर भी अनेक। 1940 से 1947 तक फिल्म सेनेरियो का लेखन कार्य किया। 1953 से 1956 तक आकाशवाणी लखनऊ में ड्रामा प्रोड्यूसर रहे।
            💐पुरस्कार💐
‘बूँद और समुद्र’ पर काशी नागरी प्रचारिणी सभा का विक्रम संवत 2015 से 2018 तक का बटुक प्रसाद पुरस्का्र एवं सुधाकर पदक,
‘सुहाग के नूपुर’ पर उत्तर प्रदेश शासन का वर्ष 1962-63 का प्रेमचंद पुरस्कार,
‘अमृत और विष’ पर वर्ष 1970 का सेवियत लैंड नेहरू पुरस्कार,
‘अमृत और विष’ पर वर्ष 1967 का साहित्य अकादेमी पुरस्काकर,
‘मानस का हंस’ पर मध्य प्रदेश शासन साहित्य परिषद का वर्ष 1972 का अखिल भारतीय वीरसिंह देव पुरस्कार,
‘मानस का हंस’ पर उत्तर प्रदेश शासन का वर्ष 1973-74 का राज्य साहित्यिक पुरस्कार,
हिंदी रंगमंच की विशिष्ट सेवा हेतु सन 1970-71 का उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्काार,
‘खंजन नयन’ पर भारतीय भाषा, कलकत्ता (कोलकाता) का वर्ष 1984 का नथमल भुवालका पुरस्कार,
वर्ष 1985 का उ.प्र. हिंदी संस्थान का सर्वोच्च भारत भारती सम्मान (22 दिसंबर, 1989 को प्रदत्त),
हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा 'साहित्य वाचस्पति' उपाधि से विभूषि
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻(C) आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
 1717- फ्रांस, रूस और प्रशिया के बीच पर हस्ताक्षर किये गये।
 1743 - स्वीडन और रूस के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गये।
 1787 - यहूदियों को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में समूह बनाकर प्रार्थना करने की इजाजत मिली। 
1836 - ब्रिटेन की संसद में जन्म, विवाह और मृत्यु से संबंधित पंजीकरण स्वीकार किये गये।
 1858 - हवाई द्वीप में पहला बैंक खोला गया।
 1909 - मदन लाल ढींगरा को वायली और लालकाका की हत्या मामले में पेंटोनविली कैदखाने में फाँसी दी गयी। महान क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा को फाँसी पर चढ़ा दिया गया।
 1914 - लिथुवानिया ने जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
 1915 - चक्रवाती तूफान से गेलवेस्टोन और टेक्सास में 275 लोगों की मौत। 1917 - इटली ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
 1924 - फ्रांस और जर्मनी के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। 1945 - सुकर्णों और मोहम्मद हट्टा ने इंडोनेशिया में नीदरलैंड से अपनी आजादी की घोषणा की। 
1947 - भारत की आज़ादी के बाद पहली ब्रिटिश सैन्य टुकडी स्वदेश रवाना
 1959 - सोवियत संघ और इराक ने इराक में परमाणु संयंत्र के निर्माण के लिये संधि पर हस्ताक्षर किये। 
1982 - जर्मनी में पहली सीडी (कंपेक्ट डिस्क) लोगों के लिये उपलब्ध की गई। 1988 - पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया-उल-हक और अमेरिका के राजदूत अर्नाेल्ड राफेल की एक हवाई दुर्घटना में मौत।
 1994 - सं.रा. अमेरिका और जापान ने वाशिंगटन में पेटेंट समझौते पर हस्ताक्षर किये। 
1998 - राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपने अनैतिक आचरण के लिए प्रथम बार ग्रैंड जूरी के समक्ष उपस्थित हुए।
 2000 - फिजी में भारतीय मूल के लोगों की बर्बादी रोकने के लिए अपदस्थ प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी ने भारत से मदद मांगी, ब्रिटेन द्वारा मानव भ्रूण कोशिकाओं की क्लोनिंग की अनुमति।
 2002 - रूस ने दलाई लामा को अपने देश में दौरे के लिए वीजा देने से इन्कार किया। 
2004 - उदारवादी राजनीतिक लिओनल फ़र्नाडीस ने डोमिनिक गणराज्य के नये राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। 2005 - पूरा बांग्लादेश बम धमाकों से दहला। 63 ज़िलों में लगभग 400 विस्फोट हुए।
 2007 - अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की बेटी की सगाई रिपब्लिकन सांसद जॉन हेगर के बेटे के साथ हुई।
 2008 - झामुमो ने 23 माह पुरानी मधुकोड़ा सरकार से समर्थन वापस लिया। अमेरिका के महान् तैराक एक ओलंपिक खेल के दौरान आठ स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।
 2009 - आंतरिक सुरक्षा के मसले पर देश के सभी मुख्यमंत्रियों का एकदिवसीय सम्मेलन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। 
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐(D)आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
1961 - अनामिका - हिंदी भाषा की जानीमानी कवयित्री हैं। 
1916 - अमृतलाल नागर, साहित्य जगत् में उपन्यासकार के रूप में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त 
1941 - वॉय. वी. रेड्डी -  रिज़र्व बैंक के इक्कीसवें गवर्नर।
 1941 - बिमल जालान - भारतीय रिज़र्व बैंक के बीसवें गवर्नर। 
1932 - वी.एस. नायपॉल - भारतीय मूल के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी साहित्यकार थे।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻(E)आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
1958 - जॉन मार्शल - 1902 से 1928 तक भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक थे। 
1949 - पुलिन बिहारी दास - महान् स्वतंत्रता प्रेमी व क्रांतिकारी थे। 
1909 - मदनलाल ढींगरा 
1982 - फ़ादर कामिल बुल्के - प्रसिद्ध साहित्यकार, जिनका जन्म बेल्जियम की फ्लैंडर्स स्टेट के 'रम्सकपैले' गांव में हुआ था।
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   (F) आज का दिवस का नाम
1 इण्डोनेशिया का स्वतंत्रता दिवस
2.अमृतलाल नागर, साहित्य जगत् में उपन्यासकार के रूप में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त थे उनका जयंती दिवस
3.वॉय. वी. रेड्डी - भारतीय रिज़र्व बैंक के इक्कीसवें गवर्नर थे उनका जयंती दिवस
4.बिमल जालान - भारतीय रिज़र्व बैंक के बीसवें गवर्नर थे उनका जयंती दिवस।
5.पुलिन बिहारी दास - महान् स्वतंत्रता प्रेमी व क्रांतिकारी थे उनका पुण्यतिथि दिवस
6-मदनलाल ढींगरा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे उनका पुण्यतिथि दिवस
7 फ़ादर कामिल बुल्के - प्रसिद्ध साहित्यकार, जिनका जन्म बेल्जियम की फ्लैंडर्स स्टेट के 'रम्सकपैले' गांव में हुआ था उनका पुण्यतिथि दिवस।
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आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।



💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐
💐  निवेदक;-💐
💐 चित्रांश ;-विजय निगम।