कारगिल विजय दिवस विशेष...



        आज 26 जुलाई 2020 के दिन है   
 इसे ओपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है।
भारत और पाकिस्तान के मध्य मई और जुलाई 1999 में 60 दिवस तक काश्मीर प्रान्त के कारगिल गांव में यह युद्ध चलता रहा। इस सशस्त्र संघर्ष में  भारतीय सेना व वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले स्थानों पर हमला किया और धीरे धीरे अंतररास्ट्रीय सहयोग से  पाकिस्तान देश को  सीमा पार जाने के लिए मजबूर कर दिया। चुकी यह युद्ध उचाई वाले स्थानों पर हुए और दोनों देशों को काफी ऊंचाई वाले स्थानों पर  लड़ने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
   पाकिस्तानी  घुसपैठियों के खिलाफ भारतीयसेना  की और से की गई कार्यवाही में 527 शहिद एवं पाकिस्तानीयों के 1363 जवान घायल हुवे।इस युद्ध मे पाकिस्तान के लगभग  3000 सैनिक मारे गए थे। यह युद्ध भारतीय सेना के  जज्बा एवम साहस का अनूठा उदहारण है।जिस पर हर देशवासी ने गर्व किया है और गर्व करता रहेगा।
         भारत ने 26 जुलाई 1999 को करगिल युद्ध  में विजय हासिल की थी. करगिल युद्ध में भारत की जीत के बाद से हर साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस मनाया जाता आ रहा है. यह दिन करगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के सम्मान हेतु मनाया जाता है। करगिल युद्ध, जिसे ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है। करगिल युद्ध (Kargil War) लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को उसका अंत हुआ। भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तान को सीमा पार वापिस जाने को मजबूर किया. यह युद्ध ऊंचाई वाले इलाके पर हुआ और दोनों देशों की सेनाओं को लड़ने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ सेना की ओर से की गई। करगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर देशवासी को गर्व होना चाहिए।
     भारतीय वायुसेना ने करगिल युद्ध में बड़ा योगदान दिया था. भारतीय वायुसेना ने 32 हजार फीट की ऊंचाई से एयर पावर का उपयोग किया था. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया और जहां भी पाकिस्तान ने कब्जा किया था वहां बम गिराए गए। साथ ही पाकिस्तान के कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलों से हमला किया गया था।
 करगिल युद्ध के समय स्व.अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे
      अटल बिहारी बाजपेई ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ बातचीत कर उन्हें लताड़ा था। उन्होंने नवाज शरीफ से कहा था कि मेरा लाहौर बुलाकर स्वागत करते हैं और उसके बाद करगिल का युद्ध छेड़ देते हैं यह बहुत बुरा व्यवहार है।
       बोफोर्स तोपें करगिल लड़ाई में सेना के खूब काम आई थी.भारतीय सेना को करगिल के युद्ध में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. पाकिस्तानी सैनिक ऊंची पहाड़ियों पर बैठे थे और हमारे सैनिकों को गहरी खाई में रहकर उनसे मुकाबला करना था. भारतीय जवानों को आड़ लेकर या रात में चढ़ाई कर ऊपर पहुंचना पड़ रहा था जोकि बहुत जोखिमपूर्ण था।
    करगिल युद्ध की जीत की घोषणा तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजेपयी ने 14 जुलाई को की थी, लेकिन आधिकारिक तौरपर 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की घोषणा कीगई थी।
निवेदक/चित्रांश - विजय निगम