आज की बात आपके साथ - विजय निगम

प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹 
🌻 नमस्ते।🌻


 आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक 15 जुलाई 2020 बुधवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 
 A  कुछ रोचक समाचार
 B आज के दिन जन्मे.बादल सरकार..का 
    जीवन परिचय  लेख. 
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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    (A) कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)
🌺(A/1)सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विकास दुबे की मौत की जांच के लिए पैनल गठन पर विचार🌺
🌺(A/2)मध्यप्रदेश सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस, धार्मिक स्थलों पर पांच से अधिक व्यक्ति नहीं हो सकेंगे इकट्ठा
🌺(A/3)रेलवे से मिलेगा कमाई का मौका, मोदी सरकार कर रही ये तैयारी🌺
🌺(A/4)अमिताभ बच्चन ने अस्पताल में भी नहीं तोड़ा डेली रुटीन, फैंस को दी जन्मदिन की बधाई।🌺
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻 (A)कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)
🌺(A/1)सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विकास दुबे की मौत की जांच के लिए पैनल गठन पर विचार🌺
सुप्रीम कोर्टने मंगलवार को गैंगस्टरविकास
दुबे व उसके साथियों के एनकाउंटर की अपनीनिगरानीमें सीबीआई से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाईकी। सुनवाई केदौरानउत्तरप्रदेश सरकार ने कोर्ट से कहा कि वह दुबे और उसके साथियों के साथ हुई मुठभेड़ों के संबंध में उठाए गए कदमों केबारे में स्थितिरिपोर्ट दायर करेगी।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।न्याया
लय ने कहा कि वह विकास दुबे व उसके साथियों के मुठभेड़ में मारे जाने और आठ पुलिस कर्मियों की हत्या की जांच के लिए 
पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक पैनल के गठन पर विचार कर सकता है। वहीं, इस मामले पर अगली सुनवाई 20 जुलाई को की जाएगी।
गैंगस्टर विकासदुबे और उसकेपांचसाथियों
की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इन याचिकाओं में एक विकास दुबे एनकाउंटर 
से कुछ घंटों पहले ही ईमेलकेजरिएदाखिल की गई थी।इलाहाबादहाईकोर्ट नेइसमामले
में न्यायिकआयोगबनानेकीयाचिकाखारिज
कर दी इससे पहले,इलाहाबाद  हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गैंगेस्टर  विकास दुबे के  पुलिस एनकाउंटर की जांच के लिए न्यायिक आयोगबनाने की याचिका खारिज कर दी है।न्यायमूर्ति पी के जायसवालऔर
न्यायमूर्ति केएसपवार नेसोमवारको यह
फैसला एक स्थानीय वकील की जनहित
 याचिका पर, याची की ओरसेइसे वापस लेने केआधार परसुनाया।प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कुमारशाही नेकहा किसरकार ने पहले ही हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति शशिकांत अग्रवाल का न्यायिक आयोग गठित कर दिया है। एसआईटी प्रकरण की जांच कर रही है ऐसे में याचिका महत्वहीनऔर खारि
ज करने लायक है।उन्होंने इससे संबंधित सरकार कीअधिसूचना भी पेशकी,जिसका कोर्टनेअवलोकनकिया।इस परयाचीनंदिता
भारती ने याचिका को यह कहते हुएवापस लेने कीगुजारिश की कि उसे नई याचिका
दाखिल करने की इजाजत दीजाएकोर्ट ने
याचिका  खारिज करचभविष्य में जरूरत
पड़ने पर नई पीआईएल दाखिल करने को कहा है।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻🌺(A/2)मध्यप्रदेश सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस, धार्मिक स्थलों पर पांच से अधिक व्यक्ति नहीं हो सकेंगे इकट्ठा🌺
मध्यप्रदेश केमुख्यमंत्रीशिवराजसिंह चौहान 
नेकहा है कि प्रदेशमेंकोरोनासंक्रमण रोकने के लिए उत्सवों पर सार्वजनिक झाकियां नहींलगाई जाएंगी।धार्मिक स्थलों,उपासना स्थलों पर एकबार में 5 सेअधिक व्यक्ति इकट्ठे नहीं होंगे। वहीं शादी,सगाई आदि में दोनों पक्षों के 10-10 व्यक्तियों से अधिक सम्मिलितनहीं होंगे।जन्मदिनआदि उत्सवों
 में भी 10 सेअधिक व्यक्ति शामिल नहीं होंगे।
मुख्यमंत्रीचौहान मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रें
सिंगकेमाध्यम से प्रदेश में कोरोनाकीस्थिति
एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे।इस 
अवसर पर गृह, जेल, संसदीय कार्य, विधि मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिवइकबाल सिंह बैंस,डीजीपीश्रीविवेक
जौहरी,अपर मुख्यसचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान आदि उपस्थित थे।
      🌺घर में ही मनाएं तीज-त्यौहार🌺
मुख्यमंत्रीचौहान ने कहा हैकिकोरोना संक्र
मण रोकने के लिए घर पर ही आगामी त्यौ
हार मनाएं। देव प्रतिमा घर पर ही स्थापित करपूजा-अर्चना करें।सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिमास्थापित करने,त्योहार मनाने कीअनु
मति नहीं होगी।
🌺संक्रमित कॉलोनी, मोहल्लों में कर सकते हैं लॉकडाउन🌺
जबलपुरजिले की समीक्षा में पाया गया कि पिछले एक सप्ताह में वहां संक्रमण बढ़े हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि  जिला आपदा  प्रबंधन समूह के निर्णय अनुसार जिन कॉलोनीमोहल्लों मेंअधिकप्रकरणआ
रहे है,वहां लॉकडाउन कियाजा सकता है। 
🌺बैतूल में किल कोरोना अभियान में कोई पॉजिटिव नहीं🌺
बैतूल जिले की समीक्षा में पाया गया कि वहां किल कोरोना अभियान के अंतर्गत 1051 व्यक्तियों के कोरोना टैस्ट किए गए जिनमें कोई भी पॉजिटिव नहीं निकला। वहां अभी 48 एक्टिव मरीज हैं तथा 70 स्वस्थ होकर घर चले गए हैं। मृत्यु दर शून्य है। मुख्यमंत्री चौहान ने सजग रहकर कार्य करने के निर्देश दिए जिससे संक्रमण फैले नहीं।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻🌺(A/3)रेलवे से मिलेगा कमाई का मौका, मोदी सरकार कर रही ये तैयारी🌺
बीते साल केंद्र सरकार ने रेलवे की कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लॉन्च किया था. इस आईपीओ के जरिए निवेशकों ने बंपर कमाई की.
अब सरकार रेलवे के जरिए ही कमाई का एक और मौका देने जा रही है. इस बार भी कमाई आईपीओ के जरिए ही होगी. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सरकार साल के अंत तक इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन लि. (आईआरएफसी) का आईपीओ लाने पर गौर कर रही है.
इसी साल जनवरी में आईआरएफसी ने आईपीओ के लिए सेबी में डिटेल सब्मिट की थी. हालांकि, सेबी की ओर से अभी मंजूरी नहीं मिली है लेकिन उम्मीद है कि इस साल के अंत तक सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएं.
इस आईपीओ से सरकार को 500 से 1,000 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं. आपको यहां बता दें कि आईआरएफसी भारतीय रेलवे की विस्तार योजनाओं के लिए फंड जुटाती है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2017 में रेलवे की पांच कंपनियों को सूचीबद्ध करने को मंजूरी दी थी.
इनमें से इरकॉन इंटरनेशनल लि., राइट्स लि., रेलवे विकास निगम लि. और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) पहले ही सूचीबद्ध हो चुकी है. आईआरएफसी को साल के अंत तक सूचीबद्ध कराये जाने की संभावना है.
आईआरएफसी के अलावा इस साल एलआईसी का भी आईपीओ आने वाला है. एलआईसी के आईपीओ का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में किया था
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻🌺(A/4)अमिताभ बच्चन ने अस्पताल में भी नहीं तोड़ा डेली रुटीन, फैंस को दी जन्मदिन की बधाई।🌺
इसके साथहीबिग बी नेउनकीसेहत केलिए दुआ कर रहेफैंस का शुक्रिया भीअदाकिया है।बॉलीवुड के महानायकअमिताभ बच्चन
कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और नाना
वटीअस्पताल में भर्ती हैं।उनकीहालतस्थिर
हैऔर सेहतमें तेजी से सुधार भीहो रहा है। इस बीच बिग बी ने अपना डेली रुटीन नहीं टूटने दिया है। वो पहले की तरह ही अभी भी अपने फैंस को जन्मदिन की शुभकाम
नाएं दे रहे हैं। उन्होंने अपने ब्लॉग में उन्हें विश किया है। अमिताभ बच्चन ने रविवार रात को अपने ब्लॉग पर लिखा, "बर्थडे- मनोज कुमार ओझा,तरन घंटासला। सोमवार,13 जुलाई,दोनों को जन्मदिन की बधाई। हमेशा खुश रहें।"
हेल्थ अपडेट: अमिताभ बच्चन की सेहत में तेजी से सुधार, अभिषेक की हालत भी स्थिरअमिताभ बच्चन अपने ब्लॉग पर फैंस को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं इसके साथ हीबिग बी ने उनकी सेहत के लिए दुआ कर रहे फैंसका शुक्रियाभीअदा किया हैउन्होंनेलिखा"अभिषेक, ऐश्वर्या, आराध्या और मेरे लिए आपकी चिंता, प्रार्थना और जल्दी से ठीक होने के लिए भेजी गई शुभ
कामनाओं ने मुझे कृतज्ञता से भर दिया है। सभी का धन्यवाद।"
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐 💐(B)आज के दिन जन्मे.बादल सरकार..का जीवन परिचय  लेख. 
 पूरा नाम;-सुधीन्द्र सरकार
अन्य नाम:-बादल सरकार
जन्म;-15 जुलाई सन् 1925 ई
जन्म भूमि;-कोलकाता
मृत्यु;-13 मई , 2011
मृत्यु स्थान;-कोलकाता
अभिभावक;-पिता- महेन्द्रलाल सरकार, माता- सरलमना सरकार
कर्म-क्षेत्रकला और साहित्य
मुख्य रचनाएँ:-इन्द्रजित (1963), पगला घोड़ा (1967), राम श्याम जोदू (1961), कवि कहानी (1964), बाक़ी इतिहास (1965), तीसरी शताब्दी (1966) आदि।शिक्षा:-बैचलर ऑफ इंजीनि‍यरिंग' तथा 'टाउन प्‍लानिंग' में डिप्‍लोमा विद्यालय
शिवपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, कोलकाता
प्रसिद्धि:-अभिनेता,नाटककार, निर्देशक;-विशेष योगदाननुक्कड़ नाटकों को लोकप्रिय बनाने, उसे रंगमंच की समकालीन बहस के बीच लाने में सबसे बड़ा योगदान बादल सरकार का ही है।नागरिकता;-भारतीय पहला नाटक
सॉल्यूशन एक्स (1956)बादल सरकार  जन्म: 15 जुलाई, 1925 -मृत्य:13 मई 
2011) 
व्यवसाय;-अभिनेता,नाटककार, निर्देशक और इनसबकेअतिरिक्त रंगमंच केसिद्धांत
कारथे।उन्होंनेतीसरा रंगमंच कासैद्धांतिक 
प्रतिपादनकिया,औरउसे मंचपरभी उतारा
बादलसरकारने बैचलर ऑफइंजीनि‍यरिंग
'तथा'टाउन प्‍लानिंग'में डिप्‍लोमा की शिक्षा भारत और विदेशों में ली थी।वह भारत के बहुचर्चित नाटककारों में एक थे।सातवें दशक में पूरे देश में उनकी धूम मची थी।मोहन राकेश,विजय तेंडुलकरऔर गिरीश 
कर्नाड के साथ बादल सरकार को मिलाने के बाद ही उस दौर का रंगपरिवेश संपूर्ण होताथा।उनके नाटक भारीसंख्या में हिन्दी
में और अन्‍य भारतीय भाषाओं में मंचित हुएऔर वेबांग्‍ला कीपरिधि से बाहरनिकल 
समग्रता में भारत के नाटककार और भारतीय रंगमंच के अगुआ बने। उन्‍होंने रंगमंच को प्रेक्षागृह की परिधि से बाहर निकाला। आंगन मंच का सिद्धांत रचा। कम से कम खर्च में नाटक मंचित करना औरआमजन के लिए नाटक को नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराना उनका लक्ष्‍य बना। सन् 1956 में बादल सरकार ने अपना पहला नाटक 'सॉल्‍यूशन एक्‍स' लिखा।
          💐जीवन परिचय💐
15 जुलाई, 1925 को कोलकाता के एक ईसाई परिवार में बादल उर्फ सुधीन्द्र सरकार का जन्म हुआ। पिता महेन्द्रलाल सरकार 'स्कॉटिश चर्च कॉलेज' में पढ़ाते थे और विदेशियों द्वारा संचालित इस संस्था के वे पहले भारतीय प्रधानाचार्य बने थे। मां, सरलमना सरकार से बादल सरकार को साहित्य की प्रेरणा मिली। 1941 में प्रथम श्रेणी में मैट्रिक पास करने के बाद वे 'शिवपुर इंजीनियरिंग कॉलेज' में भर्ती हुए और 1946 में वे सिविल इंजीनियर बने। इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ते समय वे मार्क्‍सवादी विचारधारा और राजनीति से सघन रूप से जुड़ गए। कम्युनिस्ट पार्टी में सक्रिय रूप से कई वर्षों तक जुड़े रहने के बावजूद, बाद में वे पार्टी राजनीति से अलग हट गए।
                 💐नौकरी💐
बादल सरकार ने 1947 में नागपुर के पास एक निर्माण संस्‍था में पहली नौकरी की। बाद में वे फिर कोलकाता लौट आए जहां उन्होंने जादवपुर और कोलकाता विश्वविद्यालय में इंजीनियर की नौकरी की। वे उन दिनों नौकरी के साथ-साथ शिवपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में सायंकालीन कक्षाओं में 'टाउन प्‍लानिंग' डिप्‍लोमा के लिए पढ़ाई करते रहे। 1953 में दोमादर वैली कारपोरेशन की नौकरी लेकर माइथन गए। माइथन में बादल सरकार 1956 तक थे। इसी दौरान नाटक के प्रति उनका रुझान दिखने लगा। दफ़्तर के सहकर्मियों के साथ मिलकर एक अभिनव रिहर्सल क्‍लब की शुरुआत की जहां, बादल सरकार के शब्‍दों में 'रिहर्सल होगा पर नाटक का मंचन कभी नहीं होगा।' जैसा अभिनव नियम लागू किया गया था, पर बाद में सदस्यों के उत्साह से इस नियम में तोड़कर नाटकों के मंचन की शुरुआत हुई।
बचपन से ही बादल सरकार नाटकों के प्रति आकर्षित थे। उन्हें नाटकों में हास्य रस सबसे ज़्यादा पसंद था, लिहाज़ा यह स्वाभाविक ही था कि उनके प्रारंभिक नाटकों में हमें यह तत्व ज़्यादा मुखर दिखता है। वे इसे 'सिचुएशन कॉमेडी' कहते हैं। उनका 1956 में लिखा गया पहला नाटक 'सॉल्यूशन एक्स' था। यह नाटक एक विदेशी फ़िल्म, 'Monkey Business' की कहानी पर आधारित एक सिचुएशन कॉमेडी के रूप में प्रसिद्ध हुआ
   💐💐विदेश में बादल सरकार💐💐
1957 से 1958, इन दो वर्षों के दौरान उन्होंने इंग्लैंड में ‘टाउन-प्‍लानिंग’ का कोर्स करने के साथ-साथ नौकरी की। इसी समय उन्‍हें प्रसिद्ध अभिनेताओं का अभिनय देखने का मौक़ा मिला। विवयन ली, चार्ल्स लैटन, माइकल रॉडरेथ, मार्गरेट कॉलिन्‍स आदि के अभिनय और वहां के रंगकर्म से वे बेहद प्रभावित हुए। पर शायद उनके ‘तीसरे रंगमंच’ की नींव की पहली ईंट के रूप में फ्रेंच कवि रॉसिन की कृति ‘फ्रिड्रे’ नाटक को देखने का अनुभव था। 21 फ़रवरी, 1958 को देखे गए 'थिएटर-इन-राउण्‍ड' में इस प्रस्तुति के बारे में अपने अनुभवों को डायरी के पन्नों में दर्ज करते हुए उन्होंने लिखा था, 'आज जो देखा उसे कभी भुला न पाऊंगा।' मुक्त मंच के इस अनुभव को हम वर्षों बाद उनके तीसरे रंगमंच की अवधारणाओं में विकसित होते देख पाते हैं।
इंग्लैंड प्रवास के दिनों में ही उन्होंने 'बोड़ो पीशी मां' (बड़ी बूआजी) लिखा। इसी समय उन्‍होंने एक छोटा नाटक 'शनिवार' लिखा। यह नाटक जी.बी. प्रिस्‍टले के नाटक 'एन इन्स्पेक्टर कॉल्स' पर आधारित था। 1959 में वे इंग्लैंड से कोलकाता लौट आए और आते ही अपने उत्साही मित्रों के साथ 'चक्रगोष्ठी' नाम से एक 'नाट्य संस्था' की नींव रखी। हर शनिवार को इस गोष्ठी में नाटक के साथ-साथ संगीत, साहित्‍य, विज्ञान आदि विभिन्न विषयों पर चर्चा होती थी। इसी 'चक्रगोष्ठी' के प्रयास से उनके कई आरंभिक नाटकों से दर्शक परिचित हुए। 'बोड़ो पीशीमां', 'शोनिबार', 'समावृत', 'रामश्यामजदु' आदि जिनमें प्रमुख हैं।
इसके बाद बादल सरकार फ्रांस सरकार के आर्थिक अनुदान पर वहां गए और फिर तीन वर्षों तक नाइजीरिया में नौकरी की। इस विदेश प्रवास के दौरान उन्होंने 'एबों इन्द्रजित', 'सारा रात्तिर', 'बल्लभपुरेर रूपकथा', 'जोदी आर एकबार', 'त्रिंश शताब्दी', 'पागला घोड़ा', 'प्रलाप', 'पोरे कोनोदिन' जैसे महत्त्वपूर्ण नाटक लिखे।
          💐भारत लौटने पर💐
देश में लौटने के पहले ही 'एबों इन्द्रजित' बहुरूपी नाट्य पत्रिका में (अंक: 22 जुलाई, 1965) प्रकाशित हुआ। इसके प्रकाशन के साथ ही बादल सरकार की ख्याति चारों ओर फैल गई। इसका पहला मंचन 'शौभनिक' नाट्यसंस्था ने 16 दिसंबर, 1965 को किया। नाटक के प्रकाशन और मंचन ने नाट्य जगत् में मानों धूम मचा दी। 1968 को उन्हें इस नाटक के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। नाइज़ीरिया से भारत लौटने के तुरंत बाद उन्होंने 'बाकी इतिहास' लिखा। उन दिनों शंभु मित्र रंगमंच के शीर्षस्थ व्यक्तियों में थे। उनकी नाट्य संस्था 'बहुरूपी' ने 'बाकी इतिहास' का सफल मंचन किया। ये दोनों नाटक उनके 'सिचुएशनल कॉमेडी' वाले नाटकों से बिल्कुल भिन्न थे, जो भारतीय रंगमंच में एक नए युग का संकेत था।
'       💐शताब्दी' नाट्य संस्था💐
1967 में उन्होंने अपने साथियों के साथ 'शताब्दी' नाट्य संस्था की स्थापना की। 18 मार्च, 1967 को 'रवीन्द्र सरोवर मंच' से 'शताब्दी' ने अपनी रंगयात्रा शुरू की। 1956 सेलेकर1967तक के सभी नाटक बादल सरकार ने 'प्रोसेनियम मंच' के लिए लिखे थे। लिहाज़ा 'शताब्दी' की आरंभिक प्रस्तुतियां 'प्रोसेनियम' ही थीं। 1971 से रंगमंच कोलेकरबादल सरकार कीअवधार
णाएंतेजी से बदलने लगी थींऔर वेनिरंतर प्रयोग कर रहे थे। प्रयोगों के इस दौर से गुजरते हुए वे 'तीसरे रंगमंच' तक जल्द ही पहुंच सके।वे मानने लगे थेकि नाटक एक जीवंत कला माध्यम है- Live show ! लोगों का दो समूह - एक ही वक्‍त, एक ही स्‍थान पर इकट्ठे होकर एक कला माध्‍यम के साथ जुड़ रहेहैं-अभिनेताओंऔरदर्शकों
केदो समूह के रूप में। यह एक मानवीय क्रिया है-मनुष्‍य का मनुष्‍य के साथ जुड़ाव
 सिनेमा हमें ऐसे प्रत्‍यक्ष जुड़ाव का मौक़ा नहीं देता।' ऐसे ही विचारों से रंगमंच पर प्रयोग करते हुए, उन्‍होंने अन्‍तत: रंगमंच को सार्थककला माध्‍यम केरूप मेंस्‍थापित
करने के उद्देश्‍य से, प्रोसेनियम रंगमंच को त्याग, तीसरे रंगमंच को आम जनता तक एक 'फ्री-थिएटर' के रूप में ले जाने में कामयाबी हासिल की।
        💐1970 से 1993💐
1970 से 1993 तक बादल सरकार के सभी नाटक तीसरे या विकल्प के रंगमंच को ध्यान में रखकर लिखे गए। 'शताब्दी' के अलावापूरेदेश में इन नाटकोंकोविभिन्न 
भाषाओं में, छोटे-बडे़ शहरों - कस्‍बों में विभिन्‍न नाट्य संस्‍थाओं द्वारा खेला गया। बादल सरकार के तीसरे रंगमंच ने भारत की भाषाई,प्रांतीय और सांस्कृतिक दूरियों कोखत्मकरपहलीबारएक सार्थकभारतीय
रंगमंच विकसित करने की दिशा में एक सफल प्रयास किया। मराठी, हिन्दी, पंजाबी, गुजराती, मलयाली, कन्नड़,ओडिय़ा आदिभारतीयभाषाओं मेंउनकेनाटकमंचितहुएऔरकिसी नकिसी
रूप मेंदेशकेसभी प्रांतों के रंगकर्मियों को तीसरे रंगमंच ने अपनी ओर आकर्षित किया।
💐साहित्य समीक्षक चिन्मय गुहा का कथन💐
प्रसिद्ध कला और साहित्य समीक्षक चिन्मय गुहा ने बादल सरकार के जीवन और कृतित्व पर चर्चा करते हुए 'आनंद बाज़ार पत्रिका' में लिखा है, जो बेहद गौरतलब है - 'आज से सौ वर्ष बाद शायद इस बात पर बहस हो कि क्या बीसवीं और इक्कीसवीं सदी के संधि काल में, एक ही साथ तीन-तीन बादल सरकार हुए थे जिनमें से एक ने सरस पर बौद्धक रूप से प्रखर संवादों से भरे, कॉमिक स्थितियों की बारीकियों पर अपनी पैनी नज़र साधे, बेहद प्रभावशाली हास्य नाटक लिखे थे। दूसरे, जिन्होंने समाज में हिंसा के, विश्व राजनीतिक खींचातानी के चलते युद्ध की काली परछाई के, परमाणु अस्त्रों के, आतंक के और समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ को अपने नाटकों में दर्ज किया था और तीसरे,जिन्होंने प्रेक्षागृहों केअंदर कैद मनो
रंजन प्रधान रंगमंच को एक मुक्ताकाश के नीचे आम जनता तक पहुंचाने का सपना देखा था।'
     💐 भारतीय रंगमंच का विकास💐
आज सेसौ वर्ष बाद के पाठकों को शायद इनतीनोंबादलसरकारको एक ही व्यक्तित्व
के रूप में चिह्नित करने में कठिनाईहोगी। लेकिन राहत की बात कि भारतीय जनता के सुख-दुख,उनकी चिंताओं,उनकी सम
स्याओं और सत्ता द्वारा उनके शोषण की समानता के चलते उनकी जो एक विशिष्ट पहचान बनी थी-भाषा, प्रांत और संस्कृति के बीच की दीवारों को तोड़े कर बनी थी। इसी विशिष्ट पहचान को आधार मानकर भारतीय रंगमंच का विकास संभव हुआ था। सिनेमा-टेलीविजन और तमाम अन्य मनोरंजन के साधनों के जरिए जहां सत्ता की संस्कृति जन संस्‍कृति के ख़िलाफ़ व्या
पक रूप से सक्रिय हो रही थीऔर जनता के सरोकारों और सवालों से उन्हें भ्रमित करने में लगी थी, तब समाज परिवर्तन के उद्देश्य से न सही, महज एक देशव्यापी प्रतिरोध की संस्कृति को ज़िंदा रखने के लिए, तीसरे रंगमंच ने एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बादल सरकार और उनके तीसरे रंगमंच को आने वाले कल के पाठक उसी तरह तरह से अपने क़रीब पाएंगे- जितने क़रीब और आत्‍मीय सरकार आज हमारे बीच थे।
तीसरा रंगमंच के संस्थापक और भारतीय ग्रामीण पारंपरिक रंगमंच के पुरोधा बादल सरकार का जीवन परिचय
तीसरा रंगमंच के संस्थापक और भारतीय ग्रामीणपारंपरिक रंगमंच के पुरोधा बादल सरकार का पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 13 मई 2011 को निधन हुआ
तीसरा रंगमंच के संस्थापक और भारतीय ग्रामीण पारंपरिक रंगमंच के पुरोधा बादल सरकार का पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 13 मई 2011 को निधन हुआ। बादल सरकार  कैंसर से पीड़ित थे.
बादल सरकार  अभिनेता थे, नाटककार थे, निर्देशक थे और इन सबके अतिरिक्त रंगमंच के सिद्धांतकार थे. उन्होंने तीसरा रंगमंच का सैद्धांतिक प्रतिपादन किया, और उसे मंच पर भी उतारा.
बादल सरकार के अनुसार शहरी रंगमंच पश्चिम से प्रभावित है और ग्रामीण रंगमंच पारंपरिक शैलियों से. और दोनों में ही अंतर्वस्तु की कमी है. शहरी रंगमंच अपने प्रोसिनियम दायरे में बंधा है और ग्रामीण यापारंपरिकरंगमंचअपनीपुरानीशैलियोंमें,जिसमें प्रखर राजनीतिक चेतनाकाअभाव
है।बादल सरकारआधुनिक रंगमंच को
प्रोसिनिमय दायरे से निकाल कर लोगों के 
बीच ले गए।गांवोंऔरकस्बों में ले गएआम 
लोगों के बीच ले गए।रंगमंच को उन्होंने राजनीतिक चेतना से लैस किया.बादल 
सरकार के नाटकजुलूस (बांग्लामेंमिछिल)
ने अखिल भारतीय स्तर पर 1974-75 के दौर में (जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरूहुए छात्र आंदोलनका दौर)रंगकर्मिं
यों और नाट्य प्रेमियों की कल्पनाशीलता को बेहद प्रभावित किया.नुक्कड़ नाटकों को लोकप्रिय बनाने,उसे रंगमंच की सम
कालीन बहस के बीच लाने में सबसे बड़ा योगदान बादल सरकार का ही है.बादल
सरकारको वर्ष 1968 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1972 में पद्मश्री, वर्ष 1997 में संगीतनाटक अकादमी-रत्न
सदस्यका पुरस्कारमिल चुकाहै.वर्ष2010 
में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म-भूषण सम्मानदिया गया जोकिउन्होंने लेने से यह कह कर इंकार कर दिया कि एक लेखक
का सबसे बड़ा सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार वह पहले ही पा चुके हैं।.
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻(C) आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ💐
1999 - चीन द्वारा न्यूट्रान बम की क्षमता हासिल करने की स्वीकारोक्ति।
 2000 - सिएरा लियोन में सैन्य कार्यवाही द्वारा सभी भारतीय सैनिक बंधक मुक्त।
 2002 - अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारे उमर शेख़ को पाकिस्तानी अदालत द्वारा मौत की सज़ा सुनाई गई। 2004 - माओवादियों से वार्ता में नेपाल के प्रधानमंत्री ने विदेशी मध्यस्थता मंजूर की।
 2005 - श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने सुनामी राहत सामग्री बंटवारे विषयक सरकार-लिट्टे समझौते को निलम्बित किया।
 2008 - नेपाल में दोनों प्रमुख वामपंथी दलों के बीच देश के प्रथम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद पर नियुक्तियाँ तथा नई सरकार के गठन पर सहमति बनी। 2011- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी सी-17 के जरिए जीसैट-12 ए का श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण किया। 


🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐(D)आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
1883 - जमशेद जी जीजाभाई - प्रसिद्ध भारतीय जो व्यवसाय से अत्यंत धनी और दानवीर थे। 
1885 - पत्तम थानु पिल्लई - आधुनिक केरल प्रदेश के प्रमुख नेता। 
1903 - के. कामराज - भारत रत्न सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री। 
1909 - दुर्गाबाई देशमुख - आंध्र प्रदेश की प्रथम महिला नेता।
 1909 - गनपतराव देवजी तापसे - महाराष्ट्र काँग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य तथा बम्बई विधानसभा के सदस्य। 
1912 - मोहम्मद उस्मान - भारतीय सेना के उच्च अधिकारी, जो भारत और पाकिस्तान के प्रथम युद्ध (1947-48) में शहीद हुए थे।
 1925 - बादल सरकार - प्रसिद्ध अभिनेता, नाटककार, निर्देशक और इन सबके अतिरिक्त रंगमंच के सिद्धांतकार। 1927 - सी. एच. मुहम्मद कोया - 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' के राजनीतिज्ञ और केरल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे। 
1959 - रमेश पोखरियाल - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ और एक हिन्दी कवि हैं। 
1840 - विलियम विलसन हन्टर - एक परिष्कृत शिक्षाविद, ग्रन्थकार और सांख्यिकीविज्ञ अंग्रेज़ अधिकारी।
 1611 - जयसिंह - आमेर के राजा तथा मुग़ल साम्राज्य के वरिष्ठ सेनापति (मिर्ज़ा राजा) थे
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻(E)आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
1953  विधायकएस मुथैया मुदलियार
 का निधन हुआ था।
1967 में  मराठी रंगमंच के महान् नायक और प्रसिद्ध गायक बाल गन्धर्व का निधन   हुआ था।
2004 में भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक तथा परिवारनियोजन विशेषज्ञ बानो
जहाँगीर कोयाजी का निधन हुआ था।
2017 में गणित की दुनिया का प्रतिष्ठित सम्मान 'फील्ड्स मेडल' पाने वाली पहली महिला गणितज्ञ मरियम मिर्ज़ाख़ानी का निधन  हुआ।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐🌻(F) आज का दिवस का नाम
1.जमशेद जी जीजाभाई - प्रसिद्ध भारतीय जो व्यवसाय से अत्यंत धनी और दानवीर थे उनका जयंती दिवस।
2.पत्तम थानु पिल्लई - आधुनिक केरल प्रदेश के प्रमुख नेता थे  उनका जयंती दिवस।
3. के. कामराज - भारत रत्न सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे है उनका जयंती दिवस।
4. विधायकएस मुथैया मुदलियार
थे उनका पुण्यतिथि दिवस।
5 मराठी रंगमंच के महान् नायक और प्रसिद्ध गायक बाल गन्धर्व  थे उनका पुण्यतिथि दिवस ।
6 भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक व परिवार
नियोजन विशेषज्ञ बानो जहाँगीर कोयाजी
थे उनका पुण्यतिथि दिवस।
🌻💐🌹🌲🌱🌸🌸🌲🌹💐💐   
आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐
💐  निवेदक;-💐
 💐 चित्रांश ;-विजय निगम।


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