आज गुरु पूर्णिमा पर विशेष - विजय निगम


प्रिय साथियो
राम राम,नमस्ते।
आज गुरुपूर्णिमा है आज आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है। 
         गुरु पूर्णिमा का महत्व
  गुरु पूर्णिमा के दिन पर अपने गुरुओं और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु का पूजन करने की परंपरा है। महर्षि वेद व्सास की जयंती पर इस पर्व को मनाया जाता है। चारों वेदों, 18 पुराणों , महाभारत के रचयिता और कई अन्य ग्रंथों के रचनाकार का श्रेय महर्षि वेद व्यास को दिया जाता है। वेदों का विभाजन करने के कारण इनका नाम वेद व्यास पड़ा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुओं की पूजा और उनका सम्मान करते हुए उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आज के दिन कई शहरों में मेला भी लगता है देवास मध्यप्रदेश में भी आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन मेला लगता है। आज के दिन विशेष रूप से  शिष्यों के द्वारा  गुरुजणो  का सम्मान किया जाता है। जीवन मे गुरु जी शिष्यों के अज्ञान के अन्धकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की और ले जाते है। हर शिष्य हर व्यक्ति का जीवन मे गुरु होना चाहिए जो कि हमे सद्मार्ग की ओर ले जाने की प्रेरणा प्रदान करते है।
मेरे जीवन मे बचपन मे मेरी माँ सबसे बड़ी गुरु रही है जिन्होंने मुझे संस्कार प्रदान किये मेरे पिता जी मेरे गुरु रहै है जिन्होंने मुझे जीवन पथ पर चलना सिखाया ।विद्यालय व महाविद्यालय  समस्त विषयो के विशेषज्ञ गुरुजनो ने मुझे संसार के विभिन्न विषयों का ज्ञान कराया।नॉकरी में विद्दयुत विभाग में मेरे समस्त वरिष्ठ अधिकारियों सहकर्मीयो ,मुझसे कनिष्ठ साथियो ने भी मुझे ज्ञान का प्रकाश प्रदान किया है। और आज भी में अपने आप को मेरे जीवन में इस जीवन का वविद्यार्थी ही मानता हूं और आज भी में व्हाटस अप फेसबुक कॉलेज ऑनलाइन साथियो से जाने अनजाने में सिख ही रह हु।
लार्ड मैकाले बहुत जाने माने शिक्षा विद हुवे है उन्होंने शिक्षा की परिभाषा दि है
शिक्षा जीवन की एक ऐसी प्रक्रिया रही है जिसमे व्यक्ति जीवन पर्यंत जीवन के अनुभवों से सीखता रहता है।
में इस मानव जीवन में विज्ञान,कला,शिक्षा,संस्कृति एवम ,संगीत,कम्प्यूटर साइंस ,का विद्यार्थी रहा हु साथ ही विद्युत मंडल के  इंजीरिंग विभाग,वणिज्यिक विभाग,भंडार,संचालन संधारण कार्य,विजलेंस कार्य,आदि में भी एक विद्यार्थी के रूप में भी कार्य किया है।  मेरे समस्त गुरुओं को आज नमन करता हूँ उनका अभिवादन करता हु और आप सभी व्हाट्स एप फेसबुक के प्रत्यक्ष एवम अप्रत्यक्ष गुरुजनों व साथियो को भी दिल से नमन कर गुरुपूर्णिमा के अवसर हर हार्दिक  अभिनंदन करता हु।नमन करता हूं। साथ ही माँ, मा सरस्वती,गजानन्द गणेश,गुरुदेव ,बाबा महाकाल,कुलदेव सभी से प्रार्थना करता हुआ कि आप सभी का आशीर्वाद हम सभी साथियो पर सदेंव बना रहे। सभी स्वस्थ,व्यस्त,प्रसन्न रहे। अज्ञान के अंधकार से दूर रहकर सदज्ञान की रोशनी में प्रकाश में हम सब प्रज्वलित रहें।



निवेदक/चित्रांश - विजय निगम


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