मध्यप्रदेश देश का अकेला ऐसा राज्य जिसने अन्य राज्यों के 35 हजार मजदूरों को सीमा तक पहुंचाया

  • श्रमिकों के परिवहन के लिए 10 हजार बसें संचालित

  • अन्य राज्यों के 35 हजार मजदूरों को सीमा तक पहुंचाया गया

  • ऐसी व्यवस्था करने वाला मध्यप्रदेश देश का अकेला राज्य



      उज्जैन। कोरोना संकट के कारण विभिन्न प्रदेशों में फंसे मध्यप्रदेश के श्रमिकों और अन्य प्रदेशों के श्रमिक जो मध्यप्रदेश से गुजर रहें हैं उनको उनके गंतब्य तक पहुचाँने के लिए अभी तक 10 हजार बसों को लगाया गया है। मध्यप्रदेश देश का अकेला राज्य है जिसने प्रदेश के श्रमिकों के साथ साथ दूसरें राज्यों के श्रमिको को भी परिवहन और भोजन की निशुल्क व्यवस्था की है। परिवहन के लिए लगी बसों पर अब तक लगभग 29 करोंड की राशि व्यय की जा चुकी है। मध्यप्रदेश के मजदूरों को उनके गृह जिलों और अन्य प्रदेशों के श्रमिकों को सीमावर्ती राज्य की सीमा तक पहुचाँया जा रहा है। अभी तक मध्यप्रदेश के 3 लाख 39 हजार श्रमिकों को वापस लाया गया है। दूसरे राज्यों के श्रमिक जो पैदल अथवा किसी अन्य साधन से मध्यप्रदेश की सीमा पर पहुँच रहें हैं ऐसे लगभग 35 हजार मजदूरों को पिछले 3 दिनों में सीमावर्ती राज्यों की सीमा तक छोड़ा गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने प्रदेश के श्रमिकों की चिंता करने के साथ-साथ दूसरें राज्यों के श्रमिकों को भी सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।


      मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मजदूरों के प्रति संवेदनशीलता का दृष्टिकोण रखते हुए दूसरे राज्यों के श्रमिकों को भी राज्य के सीमा में निशुल्क बस और भोजन देने की व्यवस्था करने के लिए निर्देश दिये थे। देश का हृदय प्रदेश होने के कारण महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान आदि राज्यों से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जाने वाले श्रमिक मध्यप्रदेश से गुजर रहे है। महाराष्ट्र से आने वाले मजदूरों का सेंधवा बार्डर पर अधिक दबाव बना हुआ है। शासन द्वारा वहां लगातार बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है।


      मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रमिकों को आश्वस्त किया है कि सभी को उनके गंतब्य तक पहुचांया जायेगा। प्रदेश में किसी भी श्रमिक को भूखे, प्यासे और पैदल यात्रा करने की कोई आवश्यकता नही है। उन्होंने कहा की परिस्थितियों को देखते हुए थोड़ा धैर्य रखें।


      सेंधवा के बड़ी बिजासन से 12 से 15 मई तक 25 हजार से अधिक श्रमिकों को 615 बसों में उनके गृह राज्यों की ओर रवाना किया गया है। दिनांक 12 मई को 104 बसों में 4200, 13 मई को 110 बसों में 4400, 14 मई को 160 बसों में 6400 और 15 मई को 241 बसों में 10478 श्रमिकों को देवास भिजवाया गया है। देवास से उनके राज्यों की सीमा तक भेजा गया है।


      राज्य की दूसरी सीमाओं झाबुआ, अलीराजपुर, नीमच श्योपुर, मुरैना, सिवनी पर आने वाले श्रमिकों के लिए भी बसें  लगातार लगी हुई हैं। इन सभी स्थानों पर आने वाले श्रमिकों को भोजन, पेयजल और अन्य व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई है।


      मध्यप्रदेश के दूसरें राज्यों में फंसे 96 हजार मजदूरों को ट्रेनों के माध्यम से प्रदेश लाया गया है। स्टेशनों से उनके गंतब्य तक पहुंचाने के लिए भी बसें उपलब्ध कराई गई है। अभी तक श्रमिकों को लेकर 77 ट्रेनें आ चुकी है आज एक ट्रेन हरियाणा, 4 महाराष्ट्र और 2 गुजरात से आई है। कल 16 मई को भी 8 ट्रेन श्रमिकों को अब तक लेकर मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में आएंगी। सड़क मार्ग से प्रदेश के 2 लाख 43 हजार श्रमिकों को लाया गया है। अभी तक गुजरात से 1 लाख 72 हजार, राजस्थान से 52 हजार और महाराष्ट्र से 78 हजार श्रमिक वापस लायें गये है। इसके अलावा गोवा, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, केरल, आंध्रप्रदेश और तेलांगना से भी श्रमिक लाये गये है।


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