आज की बात आपके साथ - विजय निगम


प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹
🌻 नमस्ते।🌻


      आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक 07 मई 2020  गुरुवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
🌻💐🌹🌲🌱@💮🌳🌺🥀🌼🌻आज की बात आपके साथ  अंक मे है 
A कुछ रोचक समाचार
B आज के दिन जन्मे प्रसिद्ध कवी एवं   
   साहित्यकार  रबीन्द्रनाथ ठाकुर का             
  जीवनपरिचय  लेख. 
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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🌺(A)कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)💐


🌺 (A/1)कोरोना महामारी संकट के बीच क्रूड आयल के भाव मे कमी के बावजूद भी पेट्रोल व डीजल के दाम में इजाफा🌺
🌺(A/2)  हंदवाड़ा में हुए हमले को लेकर बिग बी ने किया ट्वीट, इमोशनल कर देंगी अमिताभ की बातें।🌺
🌺(A/3) क्या कोई देश अधिक नोट छाप कर बन सकता है अमीर? जानें नोटों की प्रिंटिंग के पीछे का गणित🌺
🌺(A/4) जम कर सस्ता क्रूड खरीद रही ओएमसी, 253 अरब रुपये की बचत🌺
🌺🥀🌾🌴🌲🌹🌻🌱🍁🔆⚘🌺(A) कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)💐
🌺(A/1) कोरोना महामारी संकट के बीच क्रूड आयल के भाव मे कमी के बावजूद भी पेट्रोल व डीजल के दाम में इजाफा🌺
कोरोनामहामारी संकट केबीच क्रूड आयल के भाव मे कमी के बावजूद भी पेट्रोल व डीजल के दाम में इजाफा क्योहो रहा है।
देखा जा रहा है.एक तरफ जहांआमजनता काबैंक बैलेंस खत्म हो रहा हैतोवहीं दूसरी तरफ मंहगाई की मार अब तेजी से लोगों पर पड़ रही है. इसी बीच खबर ये भी आई है कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटीमें काफी ज्यादा बढ़ोतरी की गई है।दरअसल बताया जा रहा हैकि प्रति लीटर पेट्रोल पर एक्सा
इज ड्यूटी में 10 रुपये औरडीजल पर 13 रुपये का इजाफा किया गया है. बता दें कि केंद्र की तरफ से जारी किया गया ये नियम आधीरात से ही लागू हो गया है,लेकिन इस बीचजानने वाली बाततो ये हैकिइससेआम
नागरिकों पर किसी तरह का बदलाव नहीं होगा.इसके पीछे का कारण ये है किकीमत को लेकरजो इजाफा हुआ हैउसकी भरपाई तेल कंपनियां खुदकरेंगीऔरपेट्रोल-डीजल
की खुदरा कीमत पहले जैसी ही रहेगी.
इस इजाफे से केंद्र केराजस्वमेंकाफीज्यादा 
बढ़ोतरी होगी.लेकिन इसके साथ हीदुनिया
में जिसतरह कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है,उसका पूरा लाभ भारतीयजनता कोनहीं मिलपाएगाआपकी
जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में किए गए बदलाव में 8 रुपये प्रति लीटर के गणित सेपेट्रोल-डीजल पर एक्साइजड्यूटी का इजाफा किया गया है. इतना ही नहीं 2 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल पर और 5 रुपये प्रति लीटर डीजल पर स्पेशल एडिशनल ड्यूटी भी लगाई गई है. ऐसे में देखा जाए तो पेट्रोल की कीमत में 10 रुपये और डीजल की कीमत में 13 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.
 कोरोना महामारी संकट में लॉकडाउन के चलते कच्चे तेल की खपत पहले की तरह नहीं हो पा रही है. लेकिन तेल के त्पादन पर फोकस करें तो उसमें अभी तक कोई कमी नहीं देखने को मिली है. यही कारण है कि दुनिया के बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट जारी है. ऐसे में भारत की ओर से काफी कम कीमत पर तेल लाकर यहां पर इसे महंगे दाम पर बेचा जा रहा है. हालांकि एक तरफ से देखा जाए तो भारत में जनता को सस्ते तेलों का फायदा मिल सकता था. लेकिन अंतराष्ट्रीय में घटते दाम का पूरा लाभ केंद्र अपने खुद उठाना चाहती है. इसी कारण केंद की ओर से एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का नियम लागू किया गया है. ऐसे में अब तेल कंपनियों को सस्ता कच्चा तेल का जो लाभ मिल रहा था वो अब नहीं दिया जाएगा. क्योंकि अब उन्हें पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल पर रुपये प्रति लीटर की दर से एक्साइज ड्यूटी सरकार को देनी होगी।
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🌺(A/2)  हंदवाड़ा में हुए हमले को लेकर बिग बी ने किया ट्वीट, इमोशनल कर देंगी अमिताभ की बातें।
जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में हाल ही में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में चार जवान और एक पुलिस अधिकारी शहीद हो गए। जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर के तमाम लोगों ने इन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तो वहीं इस मुठभेड़ को लेकर भी प्रतिक्रिया दी हैं। बॉलीवुड से भी इसे लेकर प्रतिक्रिया सामने आ रही है। सदी के महानायककहे जाने वाले अमिताभ बच्चन ने भी इस मुठभेड़ को दुखद बताया है।अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं वो अक्सर सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर ट्वीट करते रहते हैं। उनके ट्वीट्स भी काफी वायरल होते हैं। अब हाल ही में अमिताभ ने जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में हुई सुरक्षाबलों और आतंकियों केबीचमुठभेड़ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही इसे बेहद दुखद बताया है।
अमिताभ ने अपने ट्वीट में शहीद हुए वीरों को सलाम करते हुए लिखा, हाल ही में हुए हमले में 'शहीद' की दिल को छू लेने वाली तस्वीरें,साथी अफसरों के परिवारकी,सहने
के लिएऔर जिक्र करने के लिएबहुत कुछ, बस, उन पर गर्व है जो किसी और इच्छा से परे हैं, जय हिन्द ! और सलाम।'अमिताभ
का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वाय
रल हो रहा है। अमिताभ के द्वारा किए गए इस इमोशनल ट्वीट पर उनके फैन्स भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अमिताभ का ये ट्वीट लोगों के दिलों को छू रहा है। अमिताभ ही नहीं उनके अलावा बॉलीवुड के की और सेलिब्रिटीज ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दीहै।अमिताभ सेपहलेअभिनेता
आयुष्मान खुराना ने भी इस हमलेमेंशहीद हुएजवानों कोश्रद्धांजलि अर्पित की थी।आयुष्मान खुराना ने एक कविता लिखकर इन जवानों कोश्रद्धांजलि अर्पित की थी।आयुष्मान की इस भावुक कविता को भी लोगों ने खूब पसंद किया था।
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🌺(A/3) क्या कोई देश अधिक नोट छाप कर बन सकता है अमीर? जानें नोटों की प्रिंटिंग के पीछे का गणित🌺
नई दिल्ली,देश और दुनिया कोरोनावायरस की वजह से अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया के अधिकतर हिस्सों में लॉक
डाउन लागू है।इससे लोगों की आजीविका पर बहुत अधिक असर पड़ा है। दुनियाभर के अधिकतर देशों में लोग अपनी सरकारों से सीधीमदद मांग रहे हैं।हालांकि,सरकारों
 के हाथ भी बंधे हुए हैं और वह एक सीमा तक ही राहत पैकेज दे सकती है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता होगा कि किसी भी देश के पास नोट छापने की अपनी मशीन होती हैतो वह बड़ी संख्या में नोटछापकर गरीबों, वंचितोंऔर मध्यम वर्ग के लोगों को क्यों नहीं बांट देता है? इसके साथ ही एक और सवाल कौंधता होगा कि गरीब देश अधिक-से-अधिक नोट छापकर अमीर क्यों नहीं बन जाते हैं? ऐसे में हमने एक्सपर्ट्स सेबात करके इस बारे में जानना चाहा कि आखिर केंद्रीय बैंक या सरकार केअधिकनोट छापने पर देश की इकोनॉमी
पर क्या असर पड़ता है। 
🌺नोट की छपाई को लेकर क्या है आदर्श स्थिति🌺
कोई भी देश सामान्यत:जीडीपी के दो से तीन %के बराबर नोट छापता है।इसकारण अधिक नोट छापने के लिये जीडीपी को बढ़ाना जरूरी होता है और जीडीपी बढ़ाने के लिये विनिर्माण व सेवाजैसे विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि, व्यापार घाटे को कम करने आदि जैसे कारकों पर ध्यान होता है। 
🌺अधिक नोट छापने से चरम पर पहुंच सकती है महंगाई🌺
जानी-मानी अर्थशास्त्री बृंदा जागीरदार से जब इस बाबत सवाल किया गयातोउन्होंने कहा,'हम इस बात को जिम्बाब्वेऔरवेनेजु
-एला मेंउपजी परिस्थितियों के जरिए
आसानी से समझ सकते हैं। इन दोनों देशों की सरकारों ने कर्ज के निपटारे के लिए बड़े पैमाने पर नोट छापे।हालांकि, आर्थिक वृद्धि,सप्लाई और डिमांड केबीचसामंजस्य
नहीं होने केकारण इन दोनों देशों मेंमहंगाई आसमान पर पहुंच गई।''उल्लेखनीय है कि 
अफ्रीकी देशजिम्बाब्वेऔर दक्षिणअमेरिकी
देश वेनेजुएला ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने केलिए अधिक नोटोंकीप्रिंटिंग की। हालांकि, इन देशों ने नोटों की जितनी अधिक छपाई की, महंगाई उतनी अधिक बढ़ती गई और ये दोनों देश 'Hyperinflation' यानी बहुत अधिक महंगाई के दौर में पहुंच गए। वर्ष 2008 में जिम्बाब्वे में महंगाई दर में 231,000,000% की वृद्धि दर्ज की गई। 
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🌺(A/4) जम कर सस्ता क्रूड खरीद रही ओएमसी, 253 अरब रुपये की बचत🌺


अंतरराष्ट्रीय बाजार में  जिसतरह से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट हुआ है उसका पूरा फायदा उठाने में देश की तेल कंपनियां जुट गई हैं। सरकारी क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) ना सिर्फ भारी मात्रा में तेल खरीद कर देश का रणनीतिकभंडार भर रहीहैं बल्कि समुद्र में ही रहने वालेक्रूड से भरे जहाजों को भी खरीद रही हैं। 
सस्ती दर पर जिनता क्रूड मार्च और अप्रैल में खरीदा गया है उससे देश को 253 अरब रुपये से ज्यादा की बचत कर चुके हैं। इस खरीदसे देश में 53 लाखटन कारणनीतिक क्रूडभंडार अगले कुछ दिनों में भरजाएगा।पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मार्च, 2020 के शुरुआत में ही यह फैसला कर लिया गया था कि सस्ती दरों पर क्रूड की खरीद की जाए। 
सबसे पहले 11 मार्च, 2020 को वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त धन की मांग की गई और 1 अप्रैल, 2020 को 3184 करोड़ रुपये की राशि का इंतजाम भी वित्त मंत्रालय की तरफ से कर दिया गया। जो 690 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान से काफी ज्यादा था। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री ने अतिरिक्त क्रूड की खरीद के लिए सउदी अरब और यूएई के ऊर्जा मंत्रियों से संपर्क साधा। दोनो देशों ने 20.08 लाख टन क्षमता के 12 जहाज भारतीय तेल कंपनियों को आवंटित किये। इनमें से 8 तेल जहाज भारत पहुंच चुके हैं और इनसे 18.6 लाख टन क्रूड उतारा भी जा चुका है। बाकी चार जहाज जल्द ही भारतीय तट पर पहुंचने वाला है। इस अतिरिक्त क्रूड को देश में बनाये गये रणनीतिक भंडार में रखा गया है। इन भंडारों की क्षमता 53.3 लाख टन की है जो पहली बार पूरी तरह से भरी जा रही है।भारतीय तेल कंपनियों ने 83 लाख टन
क्षमता की फ्लोटिंग स्टोरेज की भीव्यवस्था कर ली है। इस क्रूड को तकरीबन 21.3 डॉलर प्रति बैरल की दर से खरीदा गया है। अगर जनवरी, 2020 में खरीदे गयेक्रूड से
तुलना करें तो 20,332 करोड़ रुपये की बचत की गई है।जबकि सउदीअरबऔर यूएई सेअतिरिक्त क्रूड की खरीद से 5014 करोड़रुपये कीबचतकी गई हैइसकेअलावा
देश कीसरकारी व निजी कंपनियों ने 2.25 करोड़टनक्षमताकेक्रूड वपेट्रोलियमउत्पादों का भंडारण भी कर रखा है। यह भी सस्ते क्रूड को देखते हुए ही किया गया है।मार्च
2020 में तेल कंपनियों ने 33.36 डॉलर
प्रतिबैरलकी दर सेऔसतखरीदकीहैजबकि
अप्रैल,2020 में औसत कीमत 19.90 डॉलर प्रति बैरल की रही है।सरकारीसूत्रों का कहना है कि पिछले 2महीनों में सस्ती
कीमतों की वजह से कुल3.86 करोड़ टन
क्रूड खरीदी गई हैजो सालाना खपत का तकरीबन18.5 % है।
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🌺(A/5) सलमान खान ने #Being
Haangrry के जरिए शुरू किया गरीबों को राशन पहुंचाने का काम।🌺
सलमान खान की फिल्म 'राधे' की शूटिंग के दौरान यूनिट के लोगों के लिए खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किये जानेवाले दो फूड ट्रकोंको राशन बांटने के ट्रक मेंतब्दील किया गया है।
मुम्बई: सब जानते हैं कि सलमान खान ने देशभर में लागू लॉकडाउन के दौरानशूटिंग
बंद हो जाने के चलते घर बैठने को मजबूर हजारों दिहाड़ी मजदूरों के अकाउंट  में
करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर उनकी मदद की थी.इतना ही नहीं,हाल ही में सलमानखान ने अपने करीबी दोस्त और कांग्रेस पार्टी के नेता बाबासिद्दीकी के जरिएभी गरीबों तक ट्रक भर राशन पहुंचाया था।अपने पनवेल स्थित फार्महाउस मेंभी सलमानखानअपनी 
गर्लफ्रेंड उलिया वंतूर और अभिनेत्री जैक
लीन फर्नांडीस के साथ आसपास के गांवों वालोंको राशन बांटते नजर आये थे.मगर
अब सलमान खान ने अपनी चैरिटी संस्था 'बीइंग ह्यूमन'की तर्ज पर' बीइंग हैंगरी' 
('हंगरी' यानि भूख और 'एंगरी' यानि गुस्सा से मिलकर बना शब्द)नामकनयी पहल की है.इस पहल के तहत सलमानखान कीओर‌ से दो मिनी ट्रक द्वारा ज़रूरतमंदों कोराशन पहुंचाने का काम किया जा रहा है.सलमान
खान की आनेवाली फिल्म 'राधे' की शूटिंग के दौरान यूनिट के लोगों के लिए खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होनेवाले फूड ट्रक को राशन बांटने के ट्रकों में तब्दील किया गया है, जो अब मुम्बई की सड़कों पर घूम
-घूमकर लोगों की मदद की कर रही हैं.
सलमान खान‌ की इन नयी पहल परउन्होंने कहा, राधे की शूटिंग के दौरान इस तरह के दो फूड ट्रक यूनिट के लोगों के लिए हेल्दी खाना बनाने‌ के लिए इस्तेमाल किये जा रहे थे.उन्हीं दो फूड ट्रकों अब जगह-जगह जाकर गरीबों को राशन बांटने के काम में लगाया गया है."येफूड ट्रक पिछलेतीन-चार 
दिनों से राशन बांटने के काम में लगे हुए हैं औरअब तक मुम्बई खार, सांताक्रूज,बांद्रा, मस्जिद बंदर जैसे इलाकों में राशन बांट चुके हैं. राशन के हर पैकेज में दाल,चावल, आटा,‌ नमक जैसी खाने की बुनियादीचीजें होती हैं और अब तक 2500 से 3000 पैकेट लोगों में बांटे जा चुके हैं।.गौरतलब है कि सलमान खान‌ की इस दरियादिली की खूब तारीफ हो रही है. भूखे औरगरीबों के लिए सलमान की इस पहल का वीडियो सामने आने‌ के बाद से इंटरनेट पर तमाम लोग सलमान को गरीबों का मसीहा तक बता रहे है।
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    🌺 (B) आज के दिन जन्मे  प्रसिद्ध कवी साहित्यकार रबीन्द्रनाथ ठाकुर  का              
जीवन परिचय  लेख.🌺 
 पूरा नाम :-रबीन्द्रनाथ ठाकुर 
अन्य नाम -रबीन्द्रनाथ टैगोर, गुरुदेव 
जन्म- 7 मई, 1861 
जन्म भूमि;- कलकत्ता, पश्चिम बंगाल मृत्यु ;-7 अगस्त, 1941 
मृत्यु स्थान- कलकत्ता, पश्चिम बंगाल अभिभावक ;-देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी
पति/पत्नी;- मृणालिनी देवी 
कर्म भूमि;- पश्चिम बंगाल 
कर्म-क्षेत्र- साहित्य की सभी विधाएँ
मुख्य रचनाएँ -राष्ट्र-गान जन गण मन और बांग्लादेश का राष्ट्र-गान 'आमार सोनार बांग्ला', 'गीतांजलि', पोस्टमास्टर, मास्टर साहब, गोरा, घरे-बाइरे आदि। विषय- साहित्य भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी, बांग्ला 
विद्यालय- सेंट ज़ेवियर स्कूल, लंदन कॉलेज;- विश्वविद्यालय
पुरस्कार-उपाधि सन 1913 ई. में 'गीतांजलि' के लिए नोबेल पुरस्कार, नाइटहुड (जलियाँवाला कांड के विरोध में उपाधि वापिस की) विशेष योगदान राष्ट्र गान के रचयिता
नागरिकता;- भारतीय अन्य जानकारी 1901 में टैगोर ने पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित शांतिनिकेतन में एक प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना की। जहाँ उन्होंने भारत और पश्चिमी परंपराओं के सर्वश्रेष्ठ को मिलाने का प्रयास किया।  साहित्यकार- सूची 
रबीन्द्रनाथ ठाकुर अथवा रबींद्रनाथ टैगोर   जन्म- 7 मई, 1861, कलकत्ता, पश्चिम बंगाल; मृत्यु- 7 अगस्त, 1941, कलकत्ता) एक बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे। भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ रूप से पश्चिमी देशों का परिचय और पश्चिमी देशों की संस्कृति से भारत का परिचय कराने में टैगोर की बड़ी भूमिका रही तथा आमतौर पर उन्हें आधुनिक भारत का असाधारण सृजन
शील कलाकार माना जाता है। 
       💐जीवन परिचय 💐
रबीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 कलकत्ता(वर्तमानकोलकाता)में देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के पुत्र के रूप में एक संपन्न बांग्ला परिवार में हुआ था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री टैगोर सहज ही कला के कई स्वरूपों की ओर आकृष्ट हुए जैसे- साहित्य, कविता, नृत्य और संगीत। शांतिनिकेतन, बीरभूम, पश्चिम बंगाल दुनिया की समकालीन सांस्कृतिक रुझान से वे भली-भाँति अवगत थे। साठ के दशक के उत्तरार्ध में टैगोर कीचित्रकला यात्रा शुरू हुई।यह उनके कवित्य सजगता का विस्तार था।हालांकिउन्हेंकला कीकोई औपचारिकशिक्षानहीं मिलीथीउन्होंने एक सशक्त व सहजदृश्य शब्दकोश काविकास
 कर लिया था।श्री टैगोर की इस उपलब्धि के पीछे आधुनिक पाश्चात्य, पुरातन एवं बाल्य कला जैसे दृश्य कला के विभिन्न स्वरूपों की उनकी गहरी समझ थी 
    💐रबीन्द्रनाथ ठाकुर कीशिक्षा💐
रबीन्द्रनाथ टैगोर की स्कूल की पढ़ाई प्रतिष्ठित सेंट ज़ेवियर स्कूल में हुई। टैगोर ने बैरिस्टर बनने की चाहत में 1878 में इंग्लैंड के ब्रिजटोन पब्लिक स्कूल में नाम दर्ज कराया। उन्होंने लंदन कॉलेज विश्वविद्यालय में क़ानून का अध्ययन किया लेकिन 1880 में बिना डिग्री हासिल किए ही वापस आ गए। रबीन्द्रनाथ टैगोर को बचपन से ही कविताएँ और कहानियाँ लिखने का शौक़ था। उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर एक जाने-माने समाज सुधारक थे। वे चाहते थे कि रबीन्द्र बडे होकर बैरिस्टर बनें। इसलिए उन्होंने रबीन्द्र को क़ानून की पढ़ाई के लिए लंदन भेजा। लेकिन रबीन्द्र का मन साहित्य में ही रमता था। उन्हें अपने मन के भावों को काग़ज़ पर उतारना पसंद था। आख़िरकार, उनके पिता ने पढ़ाई के बीच में ही उन्हें वापस भारत बुला लिया और उन पर घर-परिवार की ज़िम्मेदारियाँ डाल दीं। रबीन्द्रनाथ टैगोर को प्रकृति से बहुत प्यार था। वे गुरुदेव के नाम से लोकप्रिय थे। भारत आकर गुरुदेव ने फिर से लिखने का काम शुरू किया।
             💐रचनाएँ💐
रबीन्द्रनाथ ठाकुर एक बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे। जिन्हें 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। टैगोर ने बांग्ला साहित्य में नए गद्य और छंद तथा लोकभाषा के उपयोग की शुरुआत की और इस प्रकार शास्त्रीय संस्कृत पर आधारित पारंपरिक प्रारूपों से उसे मुक्ति दिलाई। धर्म सुधारक देवेन्द्रनाथ टैगोर के पुत्र रबींद्रनाथ ने बहुत कम आयु में काव्य लेखन प्रारंभ कर दिया था। 1870 के दशक के उत्तरार्ध में वह इंग्लैंड में अध्ययन अधूरा छोड़कर भारत वापस लौट आए। भारत में रबींद्रनाथ टैगोर ने 1880 के दशक में कविताओं की अनेक पुस्तकें प्रकाशित की तथा मानसी (1890) की रचना की। यह संग्रह उनकी प्रतिभा की परिपक्वता का परिचायक है। इसमें उनकी कुछ सर्वश्रेष्ठ कविताएँ शामिल हैं, जिनमें से कई बांग्ला भाषा में अपरिचित नई पद्य शैलियों में हैं। साथ ही इसमें समसामयिक बंगालियों पर कुछ सामाजिक और राजनीतिक व्यंग्य भी हैं।
दो-दो राष्ट्रगानों के रचयिता रवीन्द्रनाथ टैगोर के पारंपरिक ढांचे के लेखक नहीं थे। वे एकमात्र कवि हैं, जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं- भारत का राष्ट्र-गान जन गण मन और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बांग्ला गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं। वे वैश्विक समानता और एकांतिकता के पक्षधर थे। ब्रह्मसमाजी होने के बावज़ूद उनका दर्शन एक अकेले व्यक्ति को समर्पित रहा। चाहे उनकी ज़्यादातर रचनाएँ बांग्ला में लिखी हुई हों। वह एक ऐसे लोक कवि थे जिनका केन्द्रीय तत्त्व अंतिम आदमी की भावनाओं का परिष्कार करना था। वह मनुष्य मात्र के स्पन्दन के कवि थे। एक ऐसे कलाकार जिनकी रगों में शाश्वत प्रेम की गहरी अनुभूति है, एक ऐसा नाटककार जिसके रंगमंच पर सिर्फ़ 'ट्रेजडी' ही ज़िंदा नहीं है, मनुष्य की गहरी जिजीविषा भी है। एक ऐसा कथाकार जो अपने आस-पास से कथालोक चुनता है, बुनता है, सिर्फ़ इसलिए नहीं कि घनीभूत पीड़ा के आवृत्ति करे या उसे ही अनावृत करे, बल्कि उस कथालोक में वह आदमी के अंतिम गंतव्य की तलाश भी करता है।
        💐 सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ💐
सियालदह और शजादपुर स्थित अपनी ख़ानदानी जायदाद के प्रबंधन के लिए 1891 में टैगोर ने 10 वर्ष तक पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांगला देश) में रहे, वहाँ वह अक्सर पद्मा नदी (गंगा नदी) पर एक हाउस बोट में ग्रामीणों के निकट संपर्क में रहते थे और उन ग्रामीणों की निर्धनता व पिछड़ेपन के प्रति टैगोर की संवेदना उनकी बाद की रचनाओं का मूल स्वर बनी। उनकी सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ, जिनमें 'दीन-हीनों' का जीवन और उनके छोटे-मोटे दुख' वर्णित हैं, 1890 के बाद की हैं और उनकी मार्मिकता में हल्का सा विडंबना का पुट है। जो टैगोर की निजी विशेषता है तथा जिसे निर्देशक सत्यजित राय अपनी बाद की फ़िल्मों में कुशलतापूर्वक पकड़ पाए हैं।
गल्पगुच्छ की तीन जिल्दों में उनकी सारी चौरासी कहानियाँ संग्रहीत हैं, जिनमें से केवल दस प्रतिनिधि कहानियाँ चुनना टेढ़ी खीर है। 1891 से 1895 के बीच का पाँच वर्षों का समय रवीन्द्रनाथ की साधना का महान् काल था। वे अपनी कहानियाँ सबुज पत्र (हरे पत्ते) में छपाते थे। आज भी पाठकों को उनकी कहानियों में 'हरे पत्ते' और 'हरे गाछ' मिल सकते हैं। उनकी कहानियों में सूर्य, वर्षा, नदियाँ और नदी किनारे के सरकंडे, वर्षा ऋतु का आकाश, छायादार गाँव, वर्षा से भरे अनाज के प्रसन्न खेत मिलते हैं। उनके साधारण लोग कहानी खत्म होते-होते असाधारण मनुष्यों में बदल जाते हैं। महान्ता की पराकाष्ठा छू आते हैं। उनकी मूक पीड़ा की करुणा हमारे हृदय को अभिभूत कर लेती है।
उनकी कहानी पोस्टमास्टर इस बात का सजीव उदाहरण है कि एक सच्चा कलाकार साधारण उपकरणों से कैसी अद्भुत सृष्टि कर सकता है। कहानी में केवल दो सजीव साधारण-से पात्र हैं। बहुत कम घटनाओं से भी वे अपनी कहानी का महल खड़ा कर देते हैं। एक छोटी लड़की कैसे बड़े-बड़े इंसानों को अपने स्नेह-पाश में बाँध देती हैं। 'क़ाबुलीवाला' भी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। रवीन्द्रनाथ ने पहली बार अपनी कहानियों में साधारण की महिमा का बखान किया।
रवीन्द्रनाथ की कहानियों में अपढ़ 'क़ाबुलीवाला' और सुसंस्कृत बंगाली भूत भावनाओं में एक समान हैं। उनकी क़ाबुलीवाला, मास्टर साहब और 'पोस्टमास्टर' कहानियाँ आज भी लोकप्रिय कहानियाँ हैं-लोकप्रिय और सर्वश्रेष्ठ भी और बनी रहेंगी। उनकी कहानियाँ सर्वश्रेष्ठ होते हुए भी लोकप्रिय हैं और लोकप्रिय होते हुए भी सर्वश्रेष्ठ हैं।
अपनी कल्पना के पात्रों के साथ रवीन्द्रनाथ की अद्भुत सहानुभूतिपूर्ण एकात्मकता और उसके चित्रण का अतीव सौंदर्य उनकी कहानी को सर्वश्रेष्ठ बना देते हैं जिसे पढ़कर द्रवित हुए बिना नहीं रहा जा सकता। उनकी कहानियाँ फ़ौलाद को मोम बनाने की क्षमता रखती हैं।
अतिथि का तारापद रवीन्द्रनाथ की अविस्मरणीय सृष्टियों में है। इसका नायक कहीं बँधकर नहीं रह पाता। आजीवन 'अतिथि' ही रहता है। क्षुधित पाषाण, आधी रात में (निशीथे) तथा 'मास्टर साहब' प्रस्तुत संग्रह की इन तीन कहानियों में दैवी तत्त्व का स्पर्श मिलता है। इनमें पहली 'क्षुधित पाषाण' में कलाकार की कल्पना अपने सुंदरतम रूप में व्यक्त हुई है। यहाँ अतीत वर्तमान के साथ वार्तालाप करता है-रंगीन प्रभामय अतीत के साथ नीरस वर्तमान। समाज में महिलाओं का स्थान तथा नारी जीवन की विशेषताएँ उनके लिए गंभीर चिंता के विषय थे और इस विषय में भी उन्होंने गहरी अंतर्दृष्टि का परिचय दिया है।
                   💐संगीत💐
राष्‍ट्रगान (जन गण मन) के रचयिता टैगोर को बंगाल के ग्राम्यांचल से प्रेम था और इनमें भी पद्मा नदी उन्हें सबसे अधिक प्रिय थी। जिसकी छवि उनकी कविताओं में बार-बार उभरती है। उन वर्षों में उनके कई कविता संग्रह और नाटक आए, जिनमें सोनार तरी (1894; सुनहरी नाव) तथा चित्रांगदा (1892) उल्लेखनीय है। वास्तव में टैगोर की कविताओं का अनुवाद लगभग असंभव है और बांग्ला समाज के सभी वर्गों में आज तक जनप्रिय उनके 2,000 से अधिक गीतों, जो 'रबींद्र संगीत' के नाम से जाने जाते हैं, पर भी यह लागू होता है।
🌺🥀🌾🌴🌲🌹🌻🌱🍁🔆⚘🌺 (C)आज के दिन की महत्त्वपूर्ण 
                       घटनाएँ ।
1976 - एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल को अपने आविष्कार का पेटेंट मिला जिसे उन्होंने "टेलीफ़ोन" (दूरभाष) का नाम दिया।
1989 - भारतीय मूल के लेखक सलमान रश्दी के ख़िलाफ़ ईरानी फ़तवे के बाद ब्रिटेन और ईरान के बीच राजनयिक सम्पर्क टूट गया।
1999 - स्काटलैंड संसदीय चुनावों में लेबर पार्टी को सफलता।
2000 - ब्लादिमीर पुतिन ने रूस के नये राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार सम्भाला।
2001 - पूर्वोत्तर ईरान में बाढ़।
2002 - गुजरात की हिंसा पर अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने गम्भीर चिंता जताई।
2004 - नेपाल के प्रधानमंत्री सूर्य बहादुर थापा ने इस्तीफ़ा दिया।
2008 - रूस के पूर्व राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने देश के 10वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। पाकिस्तान ने परमाणु क्षमता से लैस मिसाइल हत्फ़-8 का परीक्षण किया।
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💐(D)आज के दिन जन्मे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व💐


1968 - केशव प्रसाद मौर्य - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञों में से एक हैं।
1912- पन्नालाल पटेल- गुजराती भाषा के जानेमाने साहित्यकार थे।
1861 - रबीन्द्रनाथ ठाकुर - नोबेल पुरस्कार प्राप्त बांग्ला कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार।
1880 - पांडुरंग वामन काणे - महान् भारतीय संस्कृतज्ञ और विद्वान् पंडित।
1893 - भारतीय गुरु परमहंस योगानंद
1889 - एन. एस. हार्डिकर - प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा 'हिन्दुस्तानी सेवादल' के संस्थापक
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💐 (E)आज के दिन निधन हुवे     
             महत्वपूर्ण  व्यक्तित्व💐
1924 - अल्लूरी सीताराम राजू - प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
1952 - भारतीय गुरु परमहंस योगानंद
2001- प्रेम धवन, हिंदी सिनेमा जगत् के मशहूर गीतकार


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💐(F)आज के दिन का/उत्सव का नाम


1. रवीन्द्र जयन्ती 
2. सीमा सड़क संगठन स्थापना दिवस
3. केशव प्रसाद मौर्य - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञों में से एक हैं की जयंती।
4- पन्नालाल पटेल- गुजराती भाषा के जानेमाने साहित्यकार थे की जयंती 
5.अल्लूरी सीताराम राजू - प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी का पुण्यतिथि दिवस
6 भारतीय गुरु परमहंस योगानंद का पुण्यतिथि दिवस
7 प्रेम धवन, हिंदी सिनेमा जगत् के मशहूर गीतकार का पुण्यतिथि दिवस
🌺🥀🌾🌴🌲🌹🌻🌱🍁🔆⚘🌺  आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐
💐  निवेदक;-💐
 💐 चित्रांश ;-विजय निगम