आज की बात आपके साथ - विजय निगम


प्रिय साथियो। 


🌹राम-राम🌹 


🌻 नमस्ते।🌻


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक 29 मई 2020 शुक्रवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।


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आज की बात आपके साथ अंक मे है 


A कुछ रोचक समाचार


B आज के दिन जन्मे प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,समाज सुधारक,लेखक व पत्रकार रामानन्द चैटर्जी का जीवन            


परिचय लेख. 


C आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ


D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व


E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।


F आज का दिवस का नाम ।


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(A) कुछ रोचक समाचार


               ( संक्षिप्त)


💐(A/1) इंसानों की कोरोना महामारी क़े बाद,नई चुनोती अब टिड्डी दल का कहर आप की अनाज की फसलों पर💐


💐(A/2)चीन को घेरने के लिए बनाया चक्रव्यूह! किसी भी चाल को कामयाब नहीं होने देगा भारत💐


💐(A/3)पूर्व पीएम पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर बॉलीवुड डायरेक्टर ने किया ट्वीट, बोले- कभी-कभी हैरानी होती है कि भारत के...💐.


💐(A/4)आजमगढ़. अभी कुछ दिन ही हुए जब प्याज की कीमत ने आम आदमी को रूलाया था।💐


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 (A) कुछ रोचक समाचार


                (विस्तृत)


💐(A/1) इंसानों की कोरोना महामारी क़े बाद,नई चुनोती अब टिड्डी दल का कहर आप की अनाज की फसलों पर💐


टिड्डी दल एक दिन में 10 हाथी और 25 ऊंट या फिर 2500 आदमियों के बराबर का खाना हजम कर जाती हैं।


देशमेंकिसान कोरोनावायरसऔर लॉक-डाउन से कितने बेहाल और परेशानहैं,यह किसीसेछिपा नहीं है।उसपर अब यहटिड्डीदल का हमला मानोंकिसानों के लिए कोढ़ मेंखाज काकाम कर रहा है।टिड्डीदलअभीखास करउत्तर भारत के तीन राज्य मध्य प्रदेश राजस्थान,उत्तरप्रदेश के किसानों के लिए आतंक का पर्याय बने हुए हैं। टिड्डियों का यह दल जिस तरह एक राज्य से दूसरे राज्य होते हुए आगे बढ़ रहा और किसानों की फसल को देखते ही देखते बर्बाद करता जा रहा है, उससे हर कोई हैरान और परेशान है।देखा जाए तो भारत में इस से पहले टिड्डी दल का इतना बड़ा हमला करीब 26साल पहले हुआ था।संयुक्त राष्ट्र की मानें तो देश में टिड्डीदल का यह संकट मानसून तक रह सकता है। वहीं, खेती-किसानी से जुड़े कई जानकार और आर्थिक विशेषज्ञ इस बात को लेकर आशंकित हैं कि अगर इस टिड्डीदल काखात्मा जल्द से जल्दनहीं हुआ तो ये जातेे-जाते काफी बड़ी मात्रा में फसलों का नुकसान कर देश को अरबों-खरबों रुपये का चूना लगा चुके होंगे।टिड्डी दल वास्तव में कहते किसे हैं। एक साथ इतनीबड़ी संख्या में टिड्डी आते कहां से हैं और इनका आना न सिर्फ किसानों बल्कि, देश की आर्थिक सेहत पर किस तरह और कितना असर डालता है, इसे एक नजर में समझते हैं --


10 प्रजातियों वाला प्रवासी कीट, 2हजार मील तक उड़ान टिड्डी ग्रॉसहोपर समुदाय में एक्रिडाइडी परिवार के आर्थोप्टेरा गण का एक कीट है।दुनियाभर में टिड्डियों की कुल 10 प्रजातियां पाई जाती हैं,जिनमें 4 भारत में समय-समय पर देखी जाती रही हैं।यहएकप्रवासी कीट है।यानी यह न सिर्फ शहर और 


राज्य बल्कि, देेश की सीमाएं तक लांघ जाते हैं।इनकी कुल उड़ान दो हजार मील तक हो सकती है,जबकि एक दिन में करीब 15 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार सेडेढ़सौकिलोमीटर तकउड़सकती हैं। भारत में जो टिड्डी दल हमला किए हुए है, वह पाकिस्तान से आया है।


रेगिस्तान में पैदा हुए, तलाश हरियाली कीटिड्डीदल यानीछोटे-छोटे कीटों के कई बड़े झुंड। एक झुंड में हजारों से लाखों कीट हो सकते हैं। ये रेगिस्तानी इलाके में पैदा होते हैं। खासकर, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका में। जब इन्हें एक समान पर्यावरणीय हालात (हरियाली, मानसून आदि) मिलते हैं, तो दिमाग में सेरेटॉनिन नामक रासायनिक पदार्थ उत्पन्न होता है।इसकेबाद येप्रजनन करते हैं। इनकी संख्या 50 से 100 गुना तक तेजी से बढ़ती है। इसके बाद झुंड हरियाली की तलाश में दुनियाभर के लिए उड़ान भरता है।पाकिस्तान


 से घुसे, देश में कहां-कहां घूमे भारत मेंटिड्डी दल ने सबसे पहले


राजस्थान के गंगानगर से हमला शुरू किया। इसके बाद जयपुर और आसपास के जिलों में किसानों की फसल चट कर गए। अक्सर गुजरात और राज


-स्थान तक सीमित रहने वाला यह झुंड इस बार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहुंच गया।मध्य प्रदेश केमालवानिमाड़ 


से होते हुए यह बुंदेलखंड के रास्ते उत्तर प्रदेश में घुसा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तबाही मचाते हुएदिल्ली-एनसीआर की ओर बढ़ रहा है।


इस बार कहानी अलग, पहली बार शहर क्यों आए?हरियाली की खोज में टिड्डीदल सिर्फगांवों और खेतोंंकीसरहद तकसीमित रहते थे।यह पहली बार है,जब इनके दल ने शहरों की तरफ रुख किया है। जयपुर, मुरैना,श्योपुर केशहरीक्षेत्र मेंआतंकमचाने


के बाद अब येदिल्ली-एनसीआर की तरफ रुख कर रहे। माना जा रहा कि भारत में जुलाई सेअक्टूबर के बीच आने वाले टिड्डी दलने इसबार पहले दस्तक दी है।इससाल खेतोंमें फसल कट चुकी हैऔरअब मजबूरी में यह हवाओं के साथउसी दिशा में सफर कर रहे हैं। बीते करीब डेढ़ साल में कई बार टिड्डी हमारे देश पर हमला कर चुके हैं।


💐झुंडबड़ा हुआ तबनुकसान नहीं,तबाही


आएगी💐


विशेषज्ञों के अनुसार, अगर टिड्डी दल का झुंडछोटा है तो येखेती को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकते।मगर एक झुंड में इनकी संख्या हजारों-लाखों में है,तो ये सिर्फनुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि, तबाही लाते हैं। हालांकि, भारत में घुसा झुंड भी अब दो से तीन भागों में बंट चुका है और यह सभी के लिए राहत भरी खबर है।


💐सर्दियों में खत्म हो जाती थी, इस बार नहीं हुई💐


कृषि विशेषज्ञों की मानें तो टिड्डियां सर्दियों में खुद खत्महोजाती हैं।इससे पहले1993 में टिड्डी दल ने हमला किया,तब उस साल अक्टूबर-नवंबर में ठंड से उनकी मौत हो गई थी,लेकिन इस सर्दी में ठंड जब अपने चरम पर थी तब भी टिड्डियांमरीनहीं बल्कि,गुजरात और राजस्थान के कुछ इलाकों में खतरनाक तरीके से तबाहीमचा रही थीं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जलवायु परिवर्तन का असर है और ये टिड्डियां पहले से ज्यादा खतर


नाक हैं।टिड्डी दल का कहर


, 2500 आदमी का खाना हजमटिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) की ओर से टिड्डी नियंत्रण एवं शोध विषय पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक,सबसे खतरनाक रेगिस्तानीटिड्डी होती है,जोभारतमें सक्रिय है।यह किस हद तक नुकसानदेह साबित हो सकती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाएं कि एक छोटा टिड्डी दल एक दिन में 10 हाथी और 25 ऊंट या फिर 2500 आदमियों के बराबर का खाना हजम कर जाती हैं।


💐खतराटलानहीं,बारिशअभीबाकिहै💐


जानकारों की मानें तो टिड्डियां बारिश के समय प्रजनन करती है।मानसूनआनेवाला है।ऐसे में इनकी संख्याअभी जबरदस्त


तरीके से बढ़ सकती है।इसकोलेकर अभी से तैयारी करनी होगी, वरना एक से डेढ़ महीने मेंखतरा कई गुनाबढ़सकता है और तब यह खेतों में खड़ीखरीफ की फसल के लिए खतरा पैदा करेंगी।


इन्हें रोकें कैसे, थाली पीटें।


कीटनाशक छिडक़ेंटिड्डियों का उत्पात अगर एक बार शुरू हो गयातो इसे नियंत्रित करना काफी मुश्किल हो जाता हैै। इस पर नियंत्रण के लिए हवाई जहाज से कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव करें। जिन खेतों से गुजरने की संभावना हो, उनमें विषैला चारा रखें। बेंजीन हेक्साक्लोराइड से भीगी गेहूं की भूंसी भी खेतों में रख सकते हैं। साथ ही, अगर टिड्डियों का दल आए तो जोर-जोर से आवाजें करते हुए थाली पीटें या ढोल बजाकर इन्हें भटकाने की कोशिश करें


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💐(A/2)चीन को घेरने के लिए बनाया चक्रव्यूह! किसी भी चाल को कामयाब नहीं होने देगा भारत💐


प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजितडोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिनरावत के साथ बैठक करके तय कर लिया किचीन जिस भाषा में बात समझता हो,उसेउसी भाषा में समझादिया जाए.


💐चीन कर रहा है युद्ध की तैयारी💐


💐भारतचीनके बीचसीमा पर तनाव💐


चीनचारों तरफ से घिर गया है औरउसको घेराहै हिंदुस्तान ने।हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसाचक्रव्यूहबनाया है,जिसमें सेनिकलना चीन के लिए मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन लगता है. क्योंकि ये घेराबंदी सिर्फ लद्दाख में सेना की टुकड़ी भेजने तक नहीं, बल्कि उससे कहीं ज्यादा आगे तक की है।.कोरोनावायरस को विश्व में फैलाने केलिए चीनको जिम्मेदार ठहराया जारहा है. चीन एक ऐसा देश है जिसकी दोस्ती किसी को नहीं दिखती लेकिन दुश्मनी साफ-साफ प्रकट हो जाती है वो हमेशा अपने खुराफातों की ऐसी चाल चलता है कि दूसरे देश उसमें फंसकर चकरघिन्नी बन जाएं. लेकिनप्रधानमंत्री


 नरेंद्र मोदी केभारत ने तयकर


लिया है कि वो चीन की किसी भी चालको कामयाब नहीं होने देगा।. प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा चक्रव्यूह बनाया है जिसमें से निकलना चीन के लिए असंभव होगा.उसचक्रव्यूह का सबसे बाहरीव्यूह है सामरिक. उसके अंदर का व्यूह है कूटनीतिक औरफिर उसके अंदर का व्यूह है आर्थिक. तो एक-एक कर जान लीजिए कि कैसे चीनकीविस्तारवादी सोचको लगाम कसने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बना रखा है एकजबर्दस्तरणनीतिकचक्रव्यूह.इसकी शुरुआत होती है रक्षा मामलों से.पूर्वी लद्दाख के तीन केंद्रों पर चीन ने घुसपैठ कर ली. अपनी सैनिक टुकड़ी के साथ डट गया।उसनेसोचा होगा किभारतकोई पलटवार नहीं करेगा लेकिन हिंदुस्तान की सेना जा डटी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षामंत्री राजनाथसिंह,राष्ट्रीयसुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत के साथ बैठककरके


तय कर लिया कि चीनजिस भाषा में बात समझता हो,उसेउसी भाषा में समझादिया जाए.भारतकेइसतेवर से चीनतिलमिलायाहुआ है


.जिनपिंगनेअपने सैन्यअधिकारियोंके साथ


 बैठक करके युद्ध के लिए तैयार रहने की बात की है।.


          💐युद्ध की तैयारी💐


चीन केराष्ट्रपति ने किसी देशका नाम नहीं लिया कि वो किससे युद्ध के लिए तैयारी कररहे हैं.वैसेचीन का सबसे बड़ा कूटनी


-तिक युद्ध तो अमेरिका से चल रहा है जो कोरोना पर शुरू हुआ है.लेकिन जब चीन की हरकतों पर भारत ने अपने तेवर कड़े किए तो अमेरिका को भी लग गया कि हालात बदल रहे हैं।ट्रंप ने ट्वीट किया कि हमने भारत और चीन दोनों को सूचित किया है कि उनके तीखे सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता करने को तैयार है.


दरअसल, कोरोना के संक्रमण के दौरान जहांभारतनेअपना पूरा ध्यानइस महामारी


से निपटने में लगाया है।वहींचीन ने LAC परभारतीयसीमा मेंकरीब 5 हजारसैनिकों


की तैनाती बहुत तेजी से कर दी।लेकिन भारत ने जल्द ही अपनी फौज की तैनाती कर दी।अब भारत की नाराजगी अमेरिका


के गुस्से के बीच चीन अलग थलग पड़ने लगा है।दुनिया केतमाम देशउससे किनारा कर रहे हैं, बावजूद इसके चीन अपने रक्षा बजट में वृद्धि कर रहा है।.


चीन अपनी ताकत दिखाने में मशगूल है लेकिन अमेरिका के बहाने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चक्रव्यूह के दूसरे व्यूह पर आते हैं जिसमें चीन को कूटनी


-तिक रूप से घेरना है।चीन ने ताइवान की आजादी का अतिक्रमण कर रखा है।लेकिन दुश्मन कादुश्मन दोस्त की कूटनीति का इस्तेमाल करते हुएभारत ने ताइवान का कूटनीतिक समर्थन कर दिया।बुधवार को ताइवन की नई राष्ट्रपति साइ इंग वेन के शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के दो सांसदों मीनाक्षी लेखी और राहुल कस्वां ने ऑनलाइन शिरकत कीऔर उनको बधाई दी।भारत जैसेदेश के समर्थन से ताइवान को ताकत मिली है जो देर सबेर चीन के खिलाफ काम आ सकती है।इससे भी चीन तिलमिलाया हुआ है।


     💐हॉन्गकॉन्ग में भी नाराजगी💐


चीन के खिलाफ हॉन्गकॉन्ग में भी भारी नाराजगी है। हॉन्गकॉन्ग में हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच चीन ने उसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून संसद में पेश किया है।जबकि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत हॉन्गकॉन्ग के लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करता है.वैसे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पहलेहीअपने लोकतांत्रिक फलसफेको दुनिया के सामने रख चुके हैं।चीन को घेरने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के चक्रव्यूहका तीसरा व्यूह आर्थिक मोर्चा है.कोरोनानेदुनिया में चीन की साख कोमिट्टीमें मिला दिया है. वहां पर कोई भी कंपनी कामनहीं करना चाहती.अमेरिकी राष्ट्रपति


डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही दुनिया से कह रहे हैं कि चीन को अलग-थलग कर देना है।. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना कहे ही बहुत कुछ इशारा तब कर दिया था जब आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया।


          💐मैनुफैक्चरिंग हब💐


आज दुनिया में मैनुफैक्चरिंग का सबसे बड़ा हब चीन ही है।लेकिनकोरोना से उस


की येताकत टूटने वाली है।कोरोना से पैदा हुईदिक्कतों के बीच दुनिया कीकरीब एक हजार कंपनियां भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाना चाह रही हैं।इनमें मोबाइल, मेडिकल डिवाइसेज,कपड़ा,सिंथेटिक फैब्रिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंपनियां हैं।येकंपनियां भारत को वैकल्पिक मैनु-


-फैक्चरिंग हब के रूप में देख रही हैं।


दूसरे देशों में चीन का माल बिकता है तो उसकी जेब मजबूत होती है और उस पैसे को खर्च करता है युद्ध के साजोजामान में।भारतकी नईरणनीतियही है किकोरोना


कालमें चीन से कंपनियों की नाराजगी का फायदाउठा लिया जाए.चीन के साथआज


पाकिस्तानजैसे इक्के दुक्के देशको छोड़


कर कोई खड़ा नहीं है. जबकि भारत की ताकत वैश्विक दोस्ती के मामले में भी बढ़ रही है।


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💐(A/3)पूर्व पीएम पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर बॉलीवुड डायरेक्टर ने किया ट्वीट, बोले- कभी-कभी हैरानी होती है कि भारत के...💐.


बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि पर एक ट्वीट किया है,जो की सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.अनुभव सिन्हा ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की पुण्यतिथि पर किया ट्वीट


              खास बातें


पूर्व पीएम पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर अनुभव सिन्हा ने किया ट्वीट


अनुभव सिन्हा ने कहा कि कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि...पंडित नेहरू को लेकर अनुभव सिन्हा का ट्वीट हुआ वायरल


नई दिल्ली:भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू यानी 27 मई के दिन निधन हो गया था.पुर्वप्रधानमंत्री की56वींपुण्यतिथि थी. इस मौके पर पीएम मोदी सेलेकरकांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. वहीं,बॉलीवुडके मशहूर डायरेक्टरअनुभव सिन्हा ने पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथिपर एक ट्वीट किया है,जो की सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।अपने ट्वीट में अनुभव सिन्हा ने लिखा कि कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि नेहरू द्वारा भारत के बुनियादी ढांचे के बीच क्या बनाया या संपादित नहीं किया गया था। 


अनुभव सिन्हा के इस ट्वीट ने लोगों का खूब ध्यान खींचा है, साथ ही फैंस इसपर जमकर कमेंट भी कर रहे हैं. अपने ट्वीट मेंबॉलीवुड डायरेक्टर नेलिखा,कभी-कभी


मुझे आश्चर्य होता है कि नेहरू द्वारा भारत के बुनियादी ढांचे के बीच क्या बनाया या संपादित नहीं किया गया था. उनकी दृष्टि अब भी देश के भविष्य के लिए प्रासंगिक है.इसदिन 1964 में उनका निधन हो गया था।बता दें कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू नेअगस्त1947 से मई1964 तक देश की कमान संभाली थी.पंडित नेहरू का निधन 1964 में हुआ था.वहीं, अनुभव सिन्हा की बात करें तो बॉलीवुडडायरेक्टर अपनी फिल्मों के साथ


-साथ अपने विचारों के लिए भी खूब जाने जाते हैं. वह अकसर समसामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय पेश करते हैं. फिल्मी दुनिया से ताल्लुक रखने के बाद भी अनुभवसिन्हा की सामाजिक,आर्थिक औरराजनैतिकमुद्दों पर बखूबीपकड़ होती है.इससे इतर आखिरीबार उनके द्वारा डायरेक्ट की गई 'थप्पड़' रिलीज हुई थी, जिसमेंएक्ट्रेस तापसी पन्नू ने मुख्यभूमिका निभाईथी.फिल्म ने दर्शकों का दिलजीतने मेंभी कोई कसर नहीं छोड़ी थी।


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 💐(A/4)आजमगढ़. अभी कुछ दिन ही हुए जब प्याज की कीमत ने आम आदमी को रूलाया था।💐


 सौ रूपए किलों तक बिकी प्याज ने सरकार के भी होश उड़ा दिए थे। यही नहीं लाक डाउन के शुरूआती दिनों में भी प्याज 40 रूपये किलो तक बिकी फिर भी सरकार नहीं चेती। सरकार ने प्याज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया तो 50 हजार से अधिक किसानों ने अच्छे मुनाफे की उम्मीद में बड़े क्षेत्रफल पर प्याज की खेती की लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण किसान अब खून के आंसू रो रहा है। कारण है कि प्याज का उत्पादन देख आढ़तियों ने इसकी कीमत घटाकर 70 रूपये कुंटल कर दिया है। फुटकर में भी प्याज 10 रूपये किलों बिक रही है। किसान के लिए लागत और अपना मेहनताना निकालना मुश्किल हो गया है।


हर किसान के जेहन में अब सिर्फ एक सवाल है कि अगर सरकार प्याज की खेती कराती है और हर साल उसे दूसरे देशों से प्याज निर्यात करना पड़ता है तो धान गेंहू की तरह इसकी खरीद की व्यवस्था क्यों नहीं करती। अधिकारी सरकार की पालिसी का रोना रे रहे है।


बता दें कि प्राकृतिक आपदा के चलते किसानों को खरीफ और रबी की फसल में भारी नुकसान उठाना पड़ा था। पिछले दिनों प्याज की कीमत को देखते हुए किसानों ने सोचा की प्याज की खेती कर वे कुछ हद तक रबी के नुकसान की भरपाई कर लेंगे। यूपी सरकार ने भी उद्यान विभाग के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित किया। परिणाम रहा कि जिले में 50 हजार से अधिक किसानों ने प्याज की खेती की। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 800 हेक्टेर प्याज की खेती की गयी है। किसानों ने 10960 मैट्रिक टन प्याज का उत्पादन किया है। यह उन किसानोें के आंकडेे़ है जो उद्यान विभाग यहां पंजीकृत है। छोटे किसान जो 10 बिस्वा या एक बीघा धान की खेती करते है उनकों जोड़ दिया जाय तो प्याज उत्पादन करने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों का डेढ़ गुना हो जाएगी।


प्याज की खेती करने वाले किसान सतेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, रिखई मौर्य, रामधनी मौर्य, अमति राय आदि बताते हैं कि जबतक फसल तैयार नहीं थी प्याज का रेट काफी अच्छा था। हमारी प्याज तैयार होते ही कारोबारियों ने भाव काफी गिरा दिया है। मंडल में प्याज 6500 से 7000 रूपये कुंटल खरीदी जा रही है। एक एकड़ में 50 से 60 कुंटल प्याज का उत्पादन होता है। अगर साठ कुंटल प्याज हुई तो आज अधिकतम 40 से 42 हजार रूपये मिल रहा है। प्रति एकड़ उत्पादन में 30 हजार के करीब लागत आयी है। मंडल तक ले जाने में डेढ़ से दो हजार किराया। फिर पल्लेदारी आदि में हजारों रूपये खर्च हो रहा है। सब मिलाकर 60 कुंटल प्याज बेचने पर आठ से दस हजार मुनाफा हो रहा है। यदि एक व्यक्ति की चार माह की मनरेगा मजदूरी जोड़ दे तो घर से जाने वाली बात है। अगर सरकार धान और गेंहू की तरह प्याज खरीद की व्यवस्था करती तो कारोबारी ऐसा शोषण नहीं कर पाते लेकिन सरकार का ध्यान इस तरफ बिल्कुल नहीं है।


जिला उद्यान अधिकारी बालकृष्ण वर्मा का कहना है कि सरकार की जो पालिसी है विभाग उसी के हिसाब से काम करता है। बाहरी प्याज की आंवक बढ़ी है। खासतौर पर नासिक और पूना की प्याज आये से रेट तेजी से गिरा है। किसान प्याज को स्टोर कर आने वाले समय में अच्छी कीमत प्राप्त कर सकते है।


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  🌺(B)आज के दिन जन्मे प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,समाज सुधारक,लेखक व पत्रकार रामानन्द चैटर्जी का जीवन परिचय लेख🌺. 


पूरा नाम:- रामानन्द चैटर्जी 


जन्म :-29 मई, 1865 


जन्मभूमि :-बांकुड़ा ज़िला, बंगाल 


मृत्यू तिथी:- 30 सितंबर, 1943


मृत्युस्थल:- कोलकाता 


नागरिकता:- भारतीय 


प्रसिद्धि:- स्वतंत्रता सेनानी 


संबंधित लेख:- जगदीश चन्द्र बोस, ब्रह्मसमाज 


अन्यजानकारी;-रामानन्द भारतीय-राष्ट्रीयकांग्रेस के प्रबल


 समर्थक थे।कुछ वर्षां के पश्चात् उन्होंने कांग्रेस राष्ट्रवादी पार्टी और हिन्दूसभा का सहयोग दिया। रामानन्द सम्पादकीय विचार की स्वाधीनता के प्रबल समर्थक थे। 


          💐 रामानन्द चैटर्जी 💐, 


जन्म;- 29 मई, 1865, 


जन्मस्थान;-बांकुड़ा ज़िला,बंगाल;


मृत्यु:- 30 सितंबर, 1943,


मृत्यु स्थल:- कोलकाता भारत


कार्य;- पत्रकारिता जगत के एक पुरोगामी शख्सियत थे। वे कोल-


काता से प्रकाशित पत्रिका मॉडर्न रिव्यू'के संस्थापक संपा


दक एवं मालिक थे। उन्हें "भारतीय पत्रकारिता का जनक" माना जाता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने विशेष रूप से कार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने अध्यापक और प्राचार्य के पद पर काम किया था। 


               // परिचय //


रामानन्द चैटर्जी का जन्म 29 मई, 1865 को बांकुड़ा ज़िला, बंगाल में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता और बांकुड़ा से अपनी शिक्षा-दीक्षा ग्रहण की। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से सन 1890 में अंग्रेज़ी में स्नात्तकोत्तर परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण


की थी।वेआचार्य जगदीश चन्द्र बोस तथा शिवनाथ शास्त्री सेअत्यन्त प्रभावित थे। उनके सामने इंग्लैंड जाकर आगे अध्ययन करने का प्रस्ताव भी आया, पर रामानंद ने उसे स्वीकार नहीं किया। तब तक उन पर ब्रह्म समाज का प्रभाव पड़ चुका था।


          रामानन्द चैटर्जी  द्वारा


             सम्पादन कार्य


रामानन्द चैटर्जी पत्रकारिता जगत के पुरोगामी शख्सियत थे।उन्होंने प्रवासी,बंगाल भाषा,मॉडर्न रिव्यू' अंग्रेज़ी में तथा विशाल भारत' जैसी पत्रिकाएँ निकालीं। रामानंदचटर्जी ने प्रसिद्ध भारतीय मासिक पत्र मॉडर्नरिव्यु


'का दिसंबर 1906 में प्रकाशन आरंभ किया। 1901 ई. में उन्होंने बांग्ला भाषा के पत्र 'प्रवासी' का संपादन किया।विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने द इंडियन मैसेंजर' के संपादन का काम अपने हाथ में ले लिया था और बांग्ला पत्र 'संजीवनी में नियमित रूपसे लिखा करते थे। उनका'देशाश्रय' नाम के सामाजिक संगठन से संपर्क हुआ तो उसकी मुखपत्र 'दासी' का सम्पादनभीउन्होंने ही किया।उन्होंने बच्चों कीपत्रिका 'मुकुल'और साहित्यिक पत्रिका 'प्रदीप' के संपादन में भी सहयोग दिया। इनके माध्यम से ही रामानंद का रबींद्रनाथ टैगोर सेपरिचयहुआथा।शीघ्र हीयह प्रवासी नामक पत्रिका बंगलाभाषा-भाषियों की अत्यंत प्रिय पत्रिका बन गई। यह अपने समय का अत्यंत प्रसिद्ध पत्र बन गया। उच्च कोटि के लेखक‍इसमें अपनी रचनाएं भेजते थे। इसकी संपादकीय टिप्पणियां ज्ञानवर्धक और प्रेरक होती थीं।


          प्रधानाचार्य का पद


कुछसमयबाद रामानन्द चैटर्जी की कायस्थ पाठशाला, इलाहा-


बाद के प्रधानाचार्य के पद पर नियुक्ति हुई और वे कोलकाता से इलाहाबाद आ गए।इसी बीच जातीय भेदभाव के कारण उन्हें कायस्थ पाठशाला से त्यागपत्र देना पड़ा।


      💐विदेश यात्रा💐


रामानन्दचैटर्जीकुछवर्षबाद हिंदूमहासभाके अध्यक्ष बने। पत्रकार के रूप में उनकी ख्यातिके कारण राष्ट्र संघने अपनी कार्य


वाहीस्वयंदेखने के लिए उन्हें जिनेवा आमं


त्रित कियथा।तभीउन्होंने यूरोप केविभिन्न 


देशोंकाभी भ्रमण किया।उन्हें रूस से भी निमंत्रण मिला था,पर वहां अभिव्यक्ति पर प्रतिबंधों को देखतेहुए उन्होंनेउसे स्वीकार


नहीं किया। वे 'प्रवासी बंग साहित्य सम्मे-


लन' के संस्थापकों में से थे और उसके अध्यक्ष भी रहे।


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💐(C)आज के दिन की ऐतिहा-


सिक महत्त्वपूर्ण घटनाएँ💐


 1990 - बोरिस येल्तसिन सोवियत संघ के राष्ट्रपति निर्वाचित। 


1999 - नाइजीरिया में नागरिक सत्ता की स्थापना। 


2003 - ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर इराक के पुनर्निर्माण कार्यों का आकलन करने के लिए बसरा पहुँचे।


 2004 - म्यांमार में चक्रवाती तूफ़ान ने 140 लोगों की जान ली। पाकिस्तान ने परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान पर लगाये गये प्रतिबंधों में ढील दी। 


2007 - जापान की रियो मोरी मिस यूनिवर्स 2007 बनीं।


 2008 - भारतीय जनता पार्टी के नेता वीएस येदुरप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट माइस्पेस के साथ ई-मेल सम्बन्धी समझौता किया।


2009 नेपाली सरकार ने राजतंत्र का अन्त कर गणतंत्र की घोषणा करते हुए शाही महलों सहित देश के सभी भागों से राजतंत्र के सभी चिह्न हटाते हुए राष्ट्रध्वज को मान्यता दी।


 2010 - अमेरिका और भारत के बीच सितंबर 2008 में हुए 123 अग्रीमेंट में छोड़ दिए गए परमाणु ईंधन की रिप्रोसेसिंग के पहलू पर अमेरिकी प्रशासन ने सहमति का ऐलान किया। 2010 भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हेनान प्रांत के लुओयांग में पहली सदी के प्राचीन श्वेताश्व व्हाइट हार्स मंदिर परिसर में भारतीय शैली से निर्मित एक बौद्ध मंदिर का लोकार्पण किया।


2011.भारत की ओर से हेनान प्रांत के लुओयांग में बनाये गये इस बौद्ध मंदिर के निर्माण में मंदिर पर क़रीब 18 करोड़ रुपये की लागत आयी थी। इसके निर्माण में तीन वर्ष लगे।


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💐(D)आज के दिन जन्मे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व 💐


1865 रामानन्द चैटर्जी - पत्रकारिता जगत के एक पुरोगामी शख्सियत थे।


1906 कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर -हिन्दी के जाने-माने निबंधकार।


1922इयनिसज़ेनाकिस,ग्रीकसंगीतकार


1979विवेकसिंह,चितरा,देवघर झारख‍ंड


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  💐(E)आज के दिन निधन हुवे       


           महत्वपूर्ण व्यक्तित्व💐


 1987 - चौधरी चरण सिंह - भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री, जो किसानों की आवाज़ बुलन्द करने वाले प्रखर नेता माने जाते थे। 


1977 - सुनीति कुमार चटर्जी - भारत के प्रसिद्ध भाषाविद, साहित्यकार तथा विद्याशास्त्री 


1972 - पृथ्वीराज कपूर - हिंदी फ़िल्म और रंगमंच अभिनय के इतिहास पुरुष, जिन्होंने मुम्बई में 'पृथ्वी थिएटर' स्थापित किया। 


1933 - लोकराम नयनराम शर्मा - भारत के स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और संगठनकर्त्ता


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    (F)आज के दिन/दिवस का नाम


   उत्सव/अवसर संपादित करें


 1. संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय शांतीरक्षक दिवस : 


 2.नाइजिरिया देश का लोकतंत्र दिवस : 


 3.कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर - हिन्दी के जाने-माने निबंधकार थे का जयंती दिवस


 4.रामानन्द चैटर्जी पत्रकारिता जगत के एक पुरोगामी शख्सियत का जयंती दिवस


5.सुनीति कुमार चटर्जी - भारत के प्रसिद्ध भाषाविद, साहित्यकार तथा विद्याशास्त्री था का पुण्यतिथी दिवस 


6.पृथ्वीराज कपूर - हिंदी फ़िल्म और रंगमंच अभिनय के इतिहास पुरुष, जिन्होंने मुम्बई में 'पृथ्वी थिएटर' स्थापित किया का पुण्यतिथि दिवस। 


7. लोकराम नयनराम शर्मा - भारत के स्वतंत्रता सेनानी एवम पत्रकार थे का पुण्यतिथि दिवस


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       आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।


      आज जन्म लिये सभी व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई। बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।


💐।जय चित्रांश।💐


💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐


💐।जय हिंद जय भारत💐


💐 निवेदक;-💐


  💐 चित्रांश ;-विजय निगम।💐