आज की बात आपके साथ - विजय निगम


प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹 
🌻 नमस्ते।🌻


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक 01 मई 2020 शुक्रवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 


 A कुछ रोचक समाचार
B आज के दिन जन्मे ,फ़िल्म अभिनेता  बलराज साहनी का जीवन परिचय  लेख.                  
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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   (A) कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त) 
🌺(A/1)जानिये आज 1मई अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के बारे मे🌺
🌺(A/2) ओं शान्ती ओं का गीत सन्देश देने वाले कलाकार ऋषी कपूर ओं शान्ती की चीर निद्रा मे ब्रह्म्ततव मे लीन🌺
🌺(A/3)व्हाइट हाउस ने पीएम मोदी को ट्वीटर अकाऊंट से अनफोलो क्यो किया
अमेरिका ने?🌹
🌺(A/4)अपने मरने के बाद इतने करोड़ की संपत्ति छोड़ गए ऋषि कपूर, जानकर रह जाएंगे हैरान🌹
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    (A) कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)    
🌺(A/1)जानिये आज 1मई अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के बारे मे🌺
भारत मे 1 मई का दिन मजदूर दिवस के रुप मे मनाया जाता है।
मजदूर  दिवस मनाने की शुरूआत 1मई
1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में बम धमाका हुआ था।यह बम किस नेफेंका किसी का कोई पता नहीं। इसके निष्कर्ष के तौरपर पुलिस ने मज़दूरों पर गोली चला दीऔर सात मज़दूर मार दिए। "भरोसेमंद गवाहों नेतस्दीक की कि पिस्तौलों कीसभी फलैशें गली के केंद्र की तरफ से आईं जहाँ पुलिसखड़ी थी और भीड़ की तरफ़ से एक भी फ्लैश नहीं आई। इस से भी आगे वाली बात,प्राथमिक 
अखबारी रिपोर्टों में भीड़ की तरफसे गोली
बारी का कोई ज़िक्र नहीं।मौकेपरएक टेली
ग्राफ खंबा गोलियों के साथ हुई छेद से पुर हुआ था,जो सभी की सभी पुलिस वाले तरफ़ से आईं थीं। चाहे इन घटनाओंका अमेरिका पर एकदम कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा थालेकिनकुछ समय के बाद अमेरिका में 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया था।मौजूदा समय भारत व अन्य मुल्कों में मज़दूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित क़ानून लागू है।
       🌺 अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस🌺
मुंबई में एक में दिन रैली  आधिकारिक नामअंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवसअन्य नाममें डे (मई दिवस)अनुयायीकाम करने वाले मजदूरों और उनके श्रम यूनियनों और ऐच्छिक व्यक्तिउत्सवआयोजित सड़क प्रदर्शनों तिथि मई 1 समान पर्व मई दिवस
अंतरराष्ट्रीय मज़दूर आंदोलन, अराजकतावादियों, समाजवादियों, तथा साम्यवादियों द्वारा समर्थित यह दिवस ऐतिहासिक तौर पर केल्त बसंत महोत्सव से भी संबंधित है।इस दिवस का चुनाव हेमार्केट घटनाक्रम की स्मृति में, जो कि 4 मई 1886 को घटित हुआ था, द्वितीय अंतरराष्ट्रीय के दौरान किया गया।
         🌺मई दिवस का उद्देश्य🌺
किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में मज़दूरों, कामगारों और मेहनतकशों की अहम भूमिका होती है। उन की बड़ी संख्या इस की कामयाबी के लिए हाथों, अक्ल-इल्म और तनदेही के साथ जुटी होती है। किसी भी उद्योग में कामयाबी के लिए मालिक, सरमाया, कामगार और सरकार अहम धड़े होते हैं। कामगारों के बिना कोई भी औद्योगिक ढांचा खड़ा नहीं रह सकता।
🌺चेन्नई के मैरिना बीच पर मज़दूर की जीत🌺
भारत में एक मई का दिवस सब सेपहले
 चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाना शुरू किया गया था। उस समय इस को मद्रास दिवस के तौर पर प्रामाणित कर लिया गया था। इस की शुरूआत भारती मज़दूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। भारत में मद्रास के हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प के पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये। भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस पहली मई को मनाया जाता है। इसके पीछे तर्क है कि यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के तौर पर प्रामाणित हो चुका है।
               🌺 महात्मा गांधी🌺
महात्मा गांधी ने कहा था किकिसी देश की तरक्की उस देश के कामगारोंऔर किसानों पर निर्भर करती है।उद्योगपति, मालिक या प्रबंधक समझने की बजाय अपने-आप को ट्रस्टीसमझने लगे। लोकतन्त्रीय ढांचो में तो सरकारभी लोगों की तरफ़ से चुनी जाती है जोराजनीतिक लोगों कोअपने देश की बाग
डोर ट्रस्टी के रूप में सौंपते हैं। वह प्रबंध चलानेकेलिएमज़दूरों, कामगारों व किसानों की बेहतरी,भलाई और विकास,अमन और कानूनी व्यवस्था बनाऐ रखने के लिएवचन
बद्ध होते हैं।मज़दूरों व  किसानों की बड़ी संख्या का राज प्रबंध में बड़ा योगदान है। सरकार का रोल औद्योगिक शान्ति, उद्योग
पतियों और मज़दूरों दरमियान सुखदायक, शांतमयी और पारिवारिक संबंध कायम करना, झगड़े और टकराव की सूरत में उन का समझौता और सुलह करवाने का प्रबंध करना और उन के मसलों को औद्योगिक ट्रिब्यूनल कायम कर कर निरपेक्षता और पारदर्शी ढंग से कुदरती न्याय के उसूल के सिद्धांत अनुसार इंसाफ़ प्रदान करना और उन की बेहतरी के लिए समय -समय से कानूनी और विवरण प्रणाली निर्धारित करना है।
      🌺गुरु नानक और भाई लालो🌺
भारतीय संदर्भ में गुरू नानक देव जी ने किसानों, मज़दूरों और कामगारों के हक में आवाज़ उठाई थी और उस समय के अहंकारी और लुटेरे हाकिम ऊँट पालक भागों की रोटी न खा कर उस का अहंकार तोड़ा और भाई लालो की काम की कमाई को सत्कार दिया था। गुरू नानक देव जी ने ‘काम करना, नाम जपना, बाँट छकना और दसवंध निकालना' का संदेश दिया। गरीब मज़दूर और कामगार का विनम्रता का राज स्थापित करने के लिए मनमुख से गुरमुख तक की यात्रा करने का संदेश दिया। 1 मई को भाई लालो दिवस के तौर पर भी सिक्ख समुदाय में मनाया जाता है।
        🌺महाराष्ट्र मे महाराष्ट्र दिवस🌺
आज  (1 मई) को महाराष्ट्र में महाराष्ट्र दिवस मनाते है। महाराष्ट्र के सभी ज़िलों में मज़दूर दिवस मनाया जाता है। यहाँ जितने भी व्यापारी , कारीगर होते है वे सभी छुट्टी रखते है।
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 🌺(A/2) ओं शान्ती ओं का गीत सन्देश देने वाले कलाकार ऋषी कपूर ओं शान्ती की चीर निद्रा मे ब्रह्म्ततव मे लीन।🌹
आइये जानते है हम उनका जीवन परिचय
ऋषि कपूर (4 सितंबर 1952 - 30 अप्रैल 2020)हिन्दी  फ़िल्मों के एक अभि
नेता थे। ऋषि कपूर एक भारतीयफ़िल्म
अभिनेता,फ़िल्म निर्माता और निर्देशक थे।वह एक बाल कलाकार के रूप मेकाम
कर चुके है।उन्हें बॉबीफ़िल्म केलिए1974
 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार और साथ ही 2008 में फ़िल्म
फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है। उन्होंने उनकी पहली फ़िल्म
 मेरा नाम जोकर में बाल कलाकार के रूप में शानदारभूमिका के लिए1970 में राष्ट्रीय
फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त किया।
                ऋषि कपूर
दो दूनी चार फिल्म के प्रीमियर के दौरान
जन्म 4 सितम्बर 1952  मुंबई, महाराष्ट्र, 
भारत मृत्यु  30 अप्रैल 2020 (उम्र:67)
व्यवसाय अभिनेता, निर्माता, निर्देशक
जीवन साथी नीतू सिंह विवाह 1980 मे 
बच्चे रिधिमा कपूर  रणबीर कपूर
उन्होंने 1973 और 2000 के बीच 92 फिल्मों में रोमांटिक लीड के रूप में प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं।  दो दूनी चार में उनके प्रदर्शन के लिए, उन्हें 2011 का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स पुरस्कार दिया गया,और कपूर एण्डसन्स में अपनी भूमिका के लिए, उन्होंने 2017 का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए फिल्म
फेयरपुरस्कार जीता।उन्हें 2008 में फिल्म
फेयर लाइफटाइमअचीवमेंटअवार्डसे सम्मा
नित किया गया।वह 1973 से 1981 के बीच बारह फिल्मों में अपनी पत्नी नीतू सिंह (1980 में शादी) के साथ दिखाई दिए। 30 अप्रैल 2020 को अस्थिमेरु
 कैंसर (बोन मैरो कैंसर) के कारण आयी जटिलताओं से उनकी 67 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गयी।
                🌺  जीवनी🌹
    🌺प्रारंभिक जीवन और परिवार🌺
कपूर का जन्म पंजाब के कपूर परिवार में मुंबई के चेम्बूर में हुआ था। वह विख्यात अभिनेता-फिल्म निर्देशक राज कपूर के पुत्र और अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के पोते थे। उन्होंने कैंपियन स्कूल, मुंबई और मेयो कॉलेज, अजमेर में अपने भाइयों के साथ अपनी स्कूली शिक्षा की।उनकेभाई रणधीर
कपूर और राजीव कपूर,मामा प्रेमनाथ
और राजेन्द्रनाथ और चाचा शशि कपूर
और शम्मी कपूर सभी अभिनेता हैं।
             🌺  निजी जीवन🌺
ऋषि कपूर स्‍वर्गीय राज कपूर के बेटे और पृथ्‍वीराज कपूर के पोते है।परम्‍परा के अनू
सार उन्‍होने भीअपने दादा और पिता के नक्‍शे क़दमपरचलतेहूए फिल्‍मों मेंअभिनय
किया और वे एक सफल अभिनेता के रूप में उभर आए।मेरानाम जोकर उनकीपहली 
फिल्‍म थी जिसमें उन्‍होनेअपनेपिता के बच
पन का रोल किया था।बतौरमुख्यअभिनेता
के रूप में उनकी पहली फ़िल्म बॉबी थी, जिसमें उनके साथ डिंपल कपाड़िया भी दिखाई दी। ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शादी 22जनवरी1980 मेंहुईथीऋषिकपूर
के दो संतानें है: रणबीर कपूर जो की एक अभिनेता हैऔर रिदीमा कपूर जो एक ड्रैस डिजाइन है।करिश्मा कपूर और करीना कपूर इनकी भतीजियां हैं। ऋषि कपूर अपने सोशल मीडिया पर उनकीटिप्पणियों
के लिए विवादों में रहे हैं।    
               🌺    निधन🌺
वर्ष 2018 में उन्हें कैंसर का पता चला था, जिसके बाद लगभग एक वर्ष तक न्यूयॉर्क 
में उनका इलाज चला था तत्पश्चात,भारत 
वापसी के बाद वे सार्वजनिक तौरपर बहुत कम देखे जाने लगे थे,जिस बीच उनका इलाज चलता रहा।दो वर्षो तक चली पीड़ा के बाद, ऋषि कपूर की 30 अप्रैल 2020 को अस्थिमेरु कैंसर (बोन मैरो कैंसर) के कारण आयी जटिलताओं से मुम्बई में,67 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गयी।अपने अंतिम समय में वे मुम्बई के एच॰एन॰ रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती थे। इसबीच वेअपनीफिल्म शर्माजी नमकीन की शूटिंग कर रहे थे।
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🌺(A/3)व्हाइट हाउस ने पीएम मोदी को ट्वीटर अकाऊंट से अनफोलो क्यो किया
अमेरिका ने?🌹 
व्हाइट हाउस ने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर अकाउंट को फॉलो किया था, लेकिन उसने उन्हें अनफॉलो कर दिया है। जिसपर बुधवार को व्हाइट हाउस ने सफाई देते हुए कहा कि वे राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मेजबान देशों के अधिकारियों के ट्विटर अकाउंट को संक्षिप्त समय के लिए फॉलो करते हैं ताकि वे यात्रा के समर्थन में उनके संदेशों को रीट्वीट कर सकें।
फरवरी के आखिरी हफ्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री कार्यालय, अमेरिका में भारतीय दूतावास, भारत में अमेरिकी दूतावास और भारत में अमेरिकी राजदूत, केन जस्टर के ट्विटर अकाउंट को फॉलो करना शुरू किया था।
हालांकि इस हफ्ते की शुरुआत में व्हाइट हाउस ने इन सभी छह अकाउंट्स को अनफॉलो कर दिया। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, 'व्हाइट हाउस का ट्विटर अकाउंट सामान्य रूप से अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ ट्विटर अकाउंट और अन्य को फॉलो करता है। उदाहरण के तौर पर राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान अकाउंट संक्षिप्त अवधि के लिए मेजबान देश के अधिकारियों, नेताओं के अकाउंट को फॉलो करता है ताकि यात्रा के समर्थन में किए जाने वाले ट्वीट को रीट्वीट किया जा सके।'
अधिकारी ने यह जवाब उस सवाल पर दिया जिसमें व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य भारतीय अधिकारियों के ट्विटर अकाउंट को फॉलो और फिर अनफॉलो करने का कारण पूछा गया था। व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के अकाउंट को ट्विटर पर अनफॉलो करने को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया सामने आई थीं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी इसपर प्रतिक्रिया दी थी।राहुल गांधी ने ट्वीट करकहा,‘मैं व्हाइटहाउसद्वारा ट्विटर पर हमारे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कोअन
फॉलो किए जाने’से निराश हुआ हूं।’ गांधी ने कहाकि विदेशमंत्रालय को इसकासंज्ञान 
लेना चाहिए।बता दें कि व्हाइट हाउस ने
10 अप्रैल को पीएम मोदी और भारत के
पांच ट्विटर हैंडल को फॉलो  करना शुरू किया था।अमेरिकाअन्य किसी देशों या उसके राष्ट्राअध्यक्षों के ट्विटर हैंडल को फॉलो नहीं करता,मगर भारत के ये हैंडल्स अपवाद स्वरूप फॉलो किए गए थे।लेकिन
अमेरिका नेअब अपने रुख में बदलाव कर
लिया है और अब व्हाइट हाउस अमेरिका के बाहर किसी को फॉलो नहीं कर रहा है।
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🌺(A/4)अपने मरने के बाद इतने करोड़ की संपत्ति छोड़ गए ऋषि कपूर, जानकर रह जाएंगे हैरान🌹
ऋषिकपूर भारतीयसिनेमा के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।वह एक ऐसे परिवार सेआते हैं,जिसका इतिहासभारत में फिल्म उद्योग से जुड़ा हुआ है।ऋषिकपूर अभि
नेता और निर्देशक, राज कपूर के दूसरे बेटे हैं, और वे अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के पोते हैं। ऋषि ने अपने पिता की फिल्म 'मेरा नाम जोकर' से शुरुआत की, जिसने उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलवाया।
तब से, ऋषि अमर अकबर एंथनी ’, दो दूनी चार,’ और ’डी-डे’ सहित कई प्रसिद्ध फिल्मों में दिखाई दिए। उन्होंने अभिनेत्री नीतू सिंह से शादी की, जिसके साथ ऋषि 12 फिल्मों में दिखाई दिए। इस दंपति के दो बच्चे हैं, रिद्धिमा और रणबीर, जो खुद एक स्टार हैं। ऋषि का एक सफल जीवन रहा है,इसलिए उनकेपास करोड़ोंकीसंपत्ति 
भी है 
 🌺 ऋषि कपूर  की कुल संपत्ति🌺
बॉलीवुड से परिचित कोई भी जानता हैकि
कपूरपरिवारकाउद्योग केभीतरबहुतसम्मान
 है।भारतीयसिनेमा को उम्र के साथ बेहतर बनाने में उनकी भागीदारी के कारण उन्हें रॉयल्टी माना जाता है ऋषि अपनी योग्यता के साथ-साथ लगभग123 फिल्मों केसाथ अपने नाम पर कायम हैं।अपने करियर के
चरम पर,उनकी वार्षिक आय 20 करोड़
(INR),जोलगभग 3.7मिलियन डॉलर है।उनकी कमाई केअलावा,ऋषि केपास कई
लक्जरी कारें हैं,जिनकी कीमत लगभग $ 9.7 मिलियन हैं।अपनी सभी संपत्तियों कोध्यान में रखते हुए, 2020 में निधन के समय ऋषि की कुल संपत्ति $40 मिलियन थी।
🌺ऋषि कपूर ने कैसे कमाया पैसा?🌺
1973 और 2000 के बीच, ऋषि ने 92 फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई, जिसमें से 36 बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं। उन्होंने 'मेरा नाम जोकर' में शुरुआत की, लेकिन एक वयस्क के रूप में उनकी पहली लीड 'बॉबी' में रही है। कई लोगों का मानना ​​था कि फिल्म ऋषि के करियर को शुरू करने के लिए बनाई गई थी। उनकी 51 एकल नायक फिल्मों में से ग्यारह बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं, जबकि उनकी 41 फ़िल्में जिनमे एक से अधिक स्टार्स थे, में से 25 फिल्मों को सफलता मिलीं।उन्हें 'दो दूनी चार' में उनकी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिला हैऔर कपूर एंड संस' में उनके हिस्से
के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला है। 2008 में, भारतीयसिनेमा में उनके योगदान की सरा
हना की गई औरउन्हें फिल्मफेयर लाइफ
टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।2008 और 
2020 के बीच, कपूर लगभग 25 फिल्मों में दिखाई दिए, जिनमें से कुछ सुपर डुपर हिट हैं जैसे 'लव आज कल,' अग्निपथ, और 'शुद्ध देसी रोमांस' ,'102 नॉट आउट ’और राजमा चावल।’ऋषि की कमाई का काफीहिस्सा विज्ञापनों और ब्रांड विज्ञापन से भीआता है। जनवरी 2017 में, ऋषि ने अपनी आत्मकथा जारी की, जिसका शीर्षक था "खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड।
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🌺(B)आज के दिन जन्मे प्रसिद्ध लेखक, रंगकर्मी ,फ़िल्म अभिनेता  बलराज साहनी  जीवन परिचय  लेख.🌺
बलराज साहनी (जन्म:1 मई, 1913 एवम निधन: 13 अप्रैल, 1973), को हुआ।बच
पन का नाम "युधिष्ठिर साहनी" थावे हिन्दी
फ़िल्मों के एक अभिनेता थे।वे प्रख्यात लेखक भीष्म साहनी के बड़े भाई व चरित्र अभिनेता परीक्षत साहनी के पिता हैं। एक प्रसिद्ध भारतीय फिल्म और मंच अभिनेता थे, जो धरती के लाल 
(1946), दो बीघा ज़मीन 
(1953), काबूलीवाला (1961) और गरम हवा के लिए जाने जाते हैं।
      बलराज साहनी 1955 हिंदी फिल्म (सीमा (1955 फिल्म)जन्मयुधिष्टिर साहनी1 मई 1913
रावलपिंडी, पंजाब, ब्रिटिश भारतमृत्यु13 अप्रैल 1973 (उम्र 59)
मुम्बई, महाराष्ट्र, भारतव्यवसायअभिनेता, लेखकजीवनसाथीदमयंती साहनी 1947
संतोष चंदोक (1949–?)बच्चे3, including परीक्षित साहनी
वह भेरा जो अब पंजाब, पाकिस्तान में है, से आए थे, और हिंदी लेखक, नाटककार और अभिनेता भीष्म साहनी के भाई थे।
         🌻  आरंभिक जीवन🌻
बलराज साहनी, उनकी पत्नी दमयंती, 1936साहनी का जन्म 1 मई 1913 को ब्रिटिश भारत के रावलपिंडी में हुआ था।  उन्होंने सरकारी कॉलेज विश्वविद्यालय (लाहौर), पंजाब, ब्रिटिश भारत में अध्ययन किया। लाहौर से अंग्रेजी साहित्य मेंअपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद, वह रावल
पिंडी वापस गएऔरअपने परिवार के व्यव
साय में शामिल हो गए।उन्होंने हिंदी में बैच
लर डिग्री भी आयोजित की,इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मास्टर्स
दमयंती साहनी से विवाह करने के तुरंत बाद।1930 के उत्तरार्ध में,साहनीऔर उन
की पत्नी ने बंगाल के शांतिनिकेतन में टैगोरके विश्व-भारती विश्वविद्यालमेंअंग्रेजी 
और हिंदी शिक्षक के रूप में शामिल होने के बाद रावलपिंडी को छोड़ दिया। यहां उनके बेटे परीक्षित साहनी का जन्म हुआ थातब उनकी पत्नी दमयंतीअपनी स्नातक की डिग्री कर रही थीं वह1938 में महात्मा गांध केसाथ भीकाम करनेगए।अगलेसाल, साहनी गांधीकेआशीर्वाद के साथ, बीबीसी
- लंदन की हिंदी सेवा में रेडियो उद्घोषक के रूप में शामिल होने के लिए इंग्लैंड गए। वह 1943 में भारत लौट आए।
              💐 करियर💐
साहनी हमेशा अभिनय में दिलचस्पी रखते थे,औरइंडियनपीपुल्कोंसथिएटर एसोसिएशन
 (आईपीटीए) के नाट के साथ अपने अभिनय करियर की शुरुआत की ।  संयोग से, उनकी पत्नी दमयंती फिल्मों में खुद के लिए नाम बनाने से पहले आईपीटीए अभिनेत्री के रूप में अच्छी तरह से जाने जाते थे।उन्होंने फिल्म इंसाफ (1946) के साथ मुंबई में अपना फिल्म कैरियर शुरू किया, इसके बाद 1946 में केए अब्बास द्वारा निर्देशित धरती के लाल, दमयंती की पहली फिल्म, 1946 में दूर चलें और अन्य फिल्मों में काम किया। लेकिन यह 1953 में बिमल रॉय के क्लासिक दो बीघा ज़मीन फिल्म थी कि साहनी को एक अभिनेता के रूप में उनकी असली शक्ति को पहले पहचाना गया था। फिल्म ने केन फिल्म फेस्टिवल में अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीता।उन्होंने टैगोर द्वारा लिखे गए 1961 के क्लासिक काबुलिवाला में भी काम किया।साहनी की पत्नी दमयंती, जो उनकी 1947 की फिल्म गुडिया की नायिका थीं, उसी साल एक छोटी उम्र में उनकी मृत्यु हो गई। दो साल बाद, उन्होंने अपने पहले रिश्तेदार संतोष चंदोक से विवाह किया, जिसे बाद में उन्हें लेखक और टेलीविजन लेखक के रूप में जाना जाता था।साहनी के अभिनय को उनकी सभी फिल्मों में बहुत पसंद किया गया और उनकी सराहना की गई। उन्होंने बिंद्य, सीमा (1955), सोन की चिडिया (1958), सुट्टा बाजार (1959), भाभी की चूड़ियाँ (1961), कथपट्टी (जैसे 1961), फिल्मों में पद्मिनी, न्यूटन, मीना कुमारी, वैजयंतीमाला और नर्गिस जैसे शीर्ष शीर्ष नायिकाओं का अभिनयकिया। (1957), लाजवती (1958) और घर संसार (1958)। नीलकमल, घर घर की कहानी, दो रास्त और एक फूल दो माली जैसी फिल्मों में उनकी चरित्र भूमिकाओं की बहुत सराहना की गई। हालांकि, फिल्म वक्त (1965) के महान गीत "ऐ मेरी जोहरा जबीन" के चित्रण के लिए वर्तमान पीढ़ी द्वारा शायद उन्हें सबसे अच्छा याद किया जाता है। साहनी संख्या में अचाला सचदेव के सामने दिखाई दी।उन्होंने क्ला
सिक पंजाबी फिल्म नानक दुखीया सब संसार (1970) के साथ-साथ समीक्षकों द्वारा प्रशंसितसतलुज दे कंदेमें भीअभिनय किया।अपनी आखिरी फिल्म गरम हवा में विभाजन के दौरानपाकिस्तानजानेसे इंकार कर दिया गया है, लेकिन आलोचकों द्वारा अक्सर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की सराहना प्राप्त की।बलराज,हालांकि,पूरी फिल्म को
अपने प्रदर्शनको रेट करने के लिएनहीं देख पाए, क्योंकि वह काम खत्म करने के एक दिन बाद ही मर गया।उन्होंने फिल्म केलिए रिकॉर्ड की आखिरी पंक्ति,और इसलिए उनकी आखिरीदर्जकी गईपंक्ति हिंदुस्तानी
इंसान कब तक अकेला जी सकता है?"
          💐 बाद में जीवन💐
 साहनीएक प्रतिभाशाली लेखक थे; उनके शुरुआती लेखन अंग्रेजी में थे,हालांकि बाद मेंउन्होंनेजीवनमेंपंजाबचले गएऔरपंजाबी
साहित्य में प्रतिष्ठा के लेखक बने।  1960 में,पाकिस्तान की यात्रा के बाद,उन्होंने मेरा पाकिस्तानीसफर लिखा था।उनकी पुस्तक मेरा रुसी सफरनामा, जिसे उन्होंने 1969 में पूर्व सोवियत संघ के दौरे के बाद लिखा था, ने उन्हें "सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार" अर्जित किया था।उन्होंने पत्रिकाओं में कई कविताओं और लघु कथाओं का योगदान दिया और अपनी आत्मकथा भी लिखी; मेरी फिल्मी आत्ममकाथा । साहनी एक बेहद अच्छी तरह से पढ़े और राजनीतिक रूप से जागरूक व्यक्ति थे।
वह और पीके वासुदेवन नायर ने दिल्ली में एआईवाईएफ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को व्यवस्थित करने के लिए दिल्ली कम्युनिस्ट, कॉमरेड गुरु राधा किशन के साथ अखिल भारतीय युवा संघ के विचार पर काम किया। उन्हों ने पूरे दिल से प्रयास किया कि 250 से अधिक प्रतिनिधि और भारत केविभिन्न राज्यों केकई युवासंगठनों
का प्रतिनिधित्व करने वाले पर्यवेक्षकों ने इस सत्र में अच्छी तरह से भाग ले सकें। बलराज साहनी को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के युवा विंग अखिल भारतीय युवा संघ के पहले अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया था। संगठन अन्य राजनीतिक समूहोंऔर हरजगहवरिष्ठकम्युनिस्टनेताओं
द्वारा संगठन की एक बड़ी सफलता और मजबूत उपस्थिति देखी गई थी।
साहनी ने पटकथा लेखन में भी डब किया; उन्होंने 1951कीफिल्म बाजीलिखीजिसने
देवआनंद की भूमिका निभाई और गुरु दत्त द्वारा निर्देशित किया गया। वह पद्मश्री पुरस्कार (1969) के प्राप्तकर्ता भी थे।बल
राज साहनी ने पंजाबी में भी लिखा और पंजाबी पत्रिका प्रीतेलारी में योगदान दिया। बहुतकम लोग किताबों के प्रती इनके प्यार को जानते हैं;1950 के दशक में वहदिल्ली मेंवंचित वर्ग के लिए लाइब्रेरीऔर अध्ययन केंद्र काउद्घाटन करने वालेपहले व्यक्ति थे।
साहनी निस्संदेह भारतीय स्क्रीन पर आने वाले महानतम कलाकारों में से एक थे: एक बेहद प्राकृतिक अभिनेता जिन्होंने मोतीलाल जैसे कलाकारों के दर्शकों को अपने साधारण व्यक्तित्व और अभिनय की एक परिष्कृतशैली के कारण याद दिलाया। उन्हें एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा गयाक्योंकि वह कभी भी किसी भी घोटाले में शामिल नहीं था। दो बिघा ज़मीन और गरम हावा में उनकाअभिनय उनके करियर की मुख्य विशेषताएं थी।वह माना जाता है किनव-यथार्थवादी सिनेमा के रूप में जाना जाता है।बलराज के भाई भीष्मसाहनी एक जाने-माने लेखक थेजिन्होंने तमस पुस्तक लिखी थी।उनके पुत्र परीक्षितसाहनीभीएक अभिनेता हैं। बलराज साहनी 13 अप्रैल 1973 को अपने 60 वें जन्मदिन से एक महीने से भी कम समय में बड़े पैमाने पर हृदय की गिरफ्तारी के कारण मृत्यु हो गई। वह अपनीछोटीबेटीशबनम कीअसामयिक
मौत से कुछसमयके लिएउदास होगयाथा।
बलराज साहनी द्वारा मुंबई में 1973 में स्थापित पंजाबी कला केंद्र",सालाना बल
राज साहनी पुरस्कार,औरअखिल भारतीय कलाकार संघ"भी प्रदान करता है। 
 साहिती कार्य'बलराज साहनी:एक आत्म
कथा', बलराज साहनी द्वारा। हिंद पॉकेट बुक्स, 1979 द्वारा प्रकाशित।
मेरा पाकिस्तानी सफरनामा (पंजाबी)
मेरा रूसी सफरनामा (पंजाबी)।
केमेई (लैबोर्रेर्स) (पंजाबी)
एक सफर एक दास्तान (पंजाबी)
गैर जज़्बाती डेयरी (पंजाबी)
            🌹 सरकारी सम्मान🌹
3 मई 2013 को उन्हें सम्मानित करने के लिए इंडियापोस्ट द्वारा उनकी तस्वीर वाला एक डाक टिकट को जारी किया गया था।
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🌺(C)आजकेदिनकी प्रमुख घटनाएँ🌹


1914: कार निर्माता फोर्ड वह पहली कंपनी बनी जिसने अपने कर्मचारियों के लिए आठ घंटे काम करने का नियम लागू किया।
1923: भारत में मई दिवस मनाने की शुरुआत।
1945 - सोवियत लाल सेना का बर्लिन में प्रवेश।
1956: जोनसा साल्क द्वारा विकसित पोलियो वैक्सीन जनता के लिए उपलब्ध कराई गई। 
1960: महाराष्ट्र और गुजरात अलग अलग राज्य बने।
1972: देश की कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण।
2009: स्वीडन ने समलैंगिक विवाह को मंजूरी दी।
1984 - फू दोरजी बिना ऑक्सीजन के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने में सफल।
1993 - श्रीलंका के राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की बम विस्फोट में मृत्यु। 
1996 - संयुक्त राष्ट्र ने स्वयं को सरकारी तौर पर निर्धन घोषित किया। 
1998 - पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य को नाटो में शामिल करने संबंधी प्रस्ताव सीनेट में पारित। 
1999 - नेपाल में मृत्युदंड की सज़ा समाप्त।
 2000 - अंतर्राष्ट्रीय अन्तर-संसदीय संघ ने पाकिस्तान, आइवरी कोस्ट व सूडान को देश की संसद भंग करने के लिए संघ की सदस्यता से निलंबित किया।
 2001 - लश्कर-ए-तोइबा व जैश-ए-मोहम्मद संयुक्त राज्य अमेरिका में आतंकवादी संगठन घोषित, भारत संयुक्त अमेरिकी की विशेष 301 सूची में शामिल।
 2002 - अमेरिका की अपील पर इस्रायल ने हेब्रोन से सेना हटाई।।
 2003 - अमेरिकी राजनयिक पाल ब्रोमर की इराक के प्रशासक पद पर नियुक
2004 - यूरोपीय संघ में 10 नये राष्ट्र शामिल।
 2005 - सद्दाम हुसैन ने सशर्त रिहाई की अमेरिकी पेशकश ठुकराई।
 2007 - ईएसपीएन द्वारा वनडे क्रिकेट रैंकिंग में भारत को नवां स्थान। 
2008- राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सात नये जजों की नियुक्ति की। पाकिस्तान के तालिबान समर्थक आतंकी गुट का पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रान्त के डेरा अदम खेल शहर पर नियंत्रण। बेलारूस ने 10 अमेरिकी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया। 
2013- स्व. रमेश भाई को श्रद्धांजलि
स्वरूपउनके बासठवें जन्मदिवस समारोह मज़दूर दिवस के  1 मई अवसर सर्वोदय आश्रम टडियांवा मे आयोजित समारोह में भारतकोश पर रमेश भाई से संबंधित सामग्री को वैश्विक पाठक वर्ग को समर्पित किया गया।
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        💐(D)आज के दिनजन्मे
          महत्वपूर्ण  व्यक्तित्व💐
1955 - आनंद महिंद्रा - भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति तथा व्यपारी हैं। 
1910 - निरंजन नाथ वांचू - वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा केरल और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल।
 1913 - बलराज साहनी- प्रसिद्ध हिन्दी फ़िल्म अभिनेता
 1920 - मन्ना डे, प्रसिद्ध गायक 
1922 - मधु लिमये - भारतीय राजनीतिज्ञ और समाजवादी आंदोलन के नेताओं में से एक थे। 
1927 - श्‍याम लाल यादव - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे। 
1927 - नामवर सिंह - हिन्दी के प्रसिद्ध कवि एवं समकालीन आलोचक। 
1932 - एस. एम. कृष्णा - भारतीय राजनीतिज्ञ।
 1951 - रमेश भाई, समाज सुधारक एवं सर्वोदय आश्रम टडियांवा के संस्थापक। 1960 - जगदीश व्योम - भारत के समकालीन कवि एवं लेखक। 
1872 - वजीर हसन - प्रमुख राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता। 
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     (E)आज के दिन निधन हुवे
           महत्तवपूर्ण व्यक्तित्व
1908: मुजफ्फरपुर बम काण्ड के आरोपी प्रफुल्ल चाकी का निधन उन्होने स्वयं को गोली मारी।
1978 आज के दिन तमिल सिनेमा के निर्देशक अजीत कुमार का निधन हुआ
1993 श्रीलंका के राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की बम विस्फोट में मृत्यु। 
2011: अमेरिका पर 2001 के हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मारे जाने की पुष्टि।
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         (F)आज के दिन उत्सव का नाम
 1.आज 1 मई को भारत मे मजदूर दिवस
     मनस्या जाता है।
2   आज ही के दिन कल कारखानो मे 
     कर्मचारियों के लिये सतत 8  घण्टे 
     कार्य करने का नियम बना सबसे 
     प्रथम इंग्लेंड की फोर्ड कार कम्पनी मे 
     कर्मचारियों के लिये नियम लागू हुआ।
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       आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।और है एक बात का अवश्य ध्यान रखिये उज्जैन सहित मध्यप्रदेश के 20 स्थानों पर लॉक डाउन किअवधि 20 मई 2020 तक विस्तारित कर दी गई है अतः प्रशासन का सहयोग कर घर पर ही रहे सुरक्षित रहे। covid 19 के नियमो का पालन कर स्वयम को व देश को सुरक्षित कर स्वस्थ रहे,स्वस्थ रखे।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐जय चित्रांश💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐जय हिंद जय भारत💐