वेस्ट कपड़े को रिसायकल कर बना रहे पेपर

नगर निगम की अभिनव और अनुकरणीय पहल
वेस्ट कपड़े को रिसायकल कर बना रहे पेपर
पेपर हो रहा कार्यालय में उपयोग
स्टेशनरी के खर्च में 25 प्रतिशत तक आई कमी
      उज्जैन। उज्जैन नगर पालिक निगम द्वारा एक अभिनव और अनुकरणीय पहल की जा रही है। स्वच्छता की तरफ एक और कारगर कदम उठाते हुए नगर निगम द्वारा मक्सी रोड स्थित डिपो में क्लॉथ एवं पेपर रिसायकलिंग इकाई स्थापित की गई है। इसमें पुराने अथवा वेस्ट कपड़ों से कागज बनाया जाता है।



      गौरतलब है कि विभिन्न स्नान पर्वों पर शहर के प्रमुख घाटों पर स्नान के लिये आने वाले श्रद्धालु अपने कपड़े वहीं छोड़ जाते हैं। उन्हीं वेस्ट कपड़ों का इकाई में ट्रीटमेंट कर कागज बनाया जा रहा है। इस कागज से फाइल कवर और कैरीबेग बनाये जा रहे हैं। एक केरीबैग में लगभग तीन से चार किलो सामान ले जाया जा सकता है। कागज के बने कैरीबेग एक तरफ जहां इकोफ्रेंडली हैं, वहीं पॉलीथीन का एक बेहतरीन विकल्प भी हैं। दूसरी ओर कागज से बने फाईल कवर निगम के कार्यालय में पुन: उपयोग में आ रहे हैं। इससे कार्यालय में समय-समय पर उपयोग में आने वाली स्टेशनरी की मांग में लगभग 25 से 30 प्रतिशत की कमी आ रही है।
नगर निगम के मैकेनिकल इंजीनियर और इकाई के प्रभारी  विजय गोयल ने जानकारी दी कि पुराने अथवा वेस्ट कपड़ों से कागज बनाने की प्रक्रिया छह चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में कच्चे माल के रूप में पुराने व बेकार कपड़ों का उपयोग करने के लिये एकत्रित किया जाता है। इसके बाद दूसरे चरण में कपड़ों को सबसे पहले छोटी-छोटी कतरनों में काटा जाता है। फिर तीसरे चरण में कपड़ों की कतरन को बीटर मशीन जिसकी क्षमता 25 किलो की है, उसमें कुछ मात्रा में कागज के साथ मिलाया जाता है।
इसमें लगभग 22 किलो कपड़े के साथ तीन किलो कागज को पानी और एक अन्य कैमिकल के साथ मिलाकर दो से तीन घंटों तक चलाया जाता है, जब तक कि इसकी लुग्दी न बन जाये। मशीन में लगे कटर के माध्यम से लुग्दी बन जाती है। इसके बाद के चरण में लुग्दी को ऑटोवेट मशीन में डालकर पेपर की शीट बनाई जाती है। फिर उन शीटों को स्क्रूप्रेस मशीन की मदद से एक निर्धारित आकार देकर उनका पानी बाहर निकाला जाता है। फिर शीटों को कपड़ों की तरह सुखाया जाता है। इसके बाद शीटों की कैलेण्डर मशीन में फिनिशिंग की जाती है तथा इन्हें एक बार पुन: खुले में सुखाया जाता है। तैयार शीटों से कैरीबेग और फाईल कवर बनाये जाते हैं।
      गोयल ने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट की लागत 12 लाख रुपये है। इसे भविष्य में और वृहद स्तर पर बनाने की योजना है, ताकि उज्जैन के दूसरे कार्यालयों में भी यहां बने कागज को उपलब्ध कराया जा सके। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से दो लोगों को रोजगार भी दिया गया है, जो शीट बनाने का काम करते हैं।