आज की बात आपके साथ - विजय निगम

 प्रिय साथियो,
💐राम-राम 💐
💐नमस्ते।


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का 
दिनांक   08 जनवरी 2020  बुधवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 


A कुछ रोचक समाचार 
B आज के दिन जन्मेप्रसिद्धसाहित्यकार,उपन्यासकार,
 नाटककार, स्व.मोहन राकेश.का जीवन परिचय  लेख. 
(C) आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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              💐 (A) कुछ रोचक समाचार 💐
💐(A/1)IPL-2020: फाइनल 24 मई को, मैचों की शुरुआत शाम साढ़े सात बजे से💐
(A/2)निर्भया केस: चारों दोषियों का डेथ वॉरन्ट जारी, 22 जनवरी को फांसी तय।💐
(💐 A/3)डॉक्टर ने गोबर से लिपी SUV से किया बेटी को विदा, वजह जानकर   कहेंगे वाह क्या  बबात है।
💐(A/4)जेएनयू: खामोश खड़ी रहीं दीपिका, कन्हैया लगाते रहे 'जय भीम' के नारे
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         💐  (A)    कुछ  रोचक समचार💐
 💐(A/1)IPL-2020: फाइनल 24 मई को, मैचों की शुरुआत शाम साढ़े सात बजे से।7UU
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2020 की शुरुआत 29 मार्च से मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होनी है और फाइनल मैच 24 मई को खेला जाएगा।.
     IPL का अगला सीजन 57 दिनों तक चलेगा
     एक दिन में दो मैच... अब अतीत की बात ।!
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2020 की शुरुआत 29 मार्च से मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होनी है|फाइनल मैच 24 मई को खेला जाएगा |लीगकाअगला संस्करण 57 दिनों तक चलेगा,जिसका मतलब है कि प्रसारण~
कर्ता स्टार स्पोटर्स ने अपनी बात लगभग मनवा ली है| और इस सीजन के दौरान एक दिन में दो मुकाबलों की प्रथा को खत्म कर दिया जाएगा|वहीं,मैचों की शुरुआत शाम 7:30 बजे से लगभग पक्काहै।इसमामले सेसंबंध
रखने वाले एक सूत्र नेआईएएनएस से इस बात कीपुष्टि
की है कि लीग 57 दिनों तक चलेगी । लंबी लीग होने का मतलब है कि एक दिन में दो मैचों की बात अब अतीत की हो जाएगी।
सूत्र ने कहा,हालांकि पूरा शेड्यूल तैयारनहीं है,लेकिन यह तय है कि टूर्नामेंट का फाइनल 24 मई को खेला जाएगा।. टूर्नामेंट की शुरुआत 29 मार्च को होगी।. इस दौरान 45 दिनों का समय मिलेगा।. ऐसे में एक दिन में एक मैच कराने में कोई समस्या नहीं होनीचाहिए।.'मैचों की शुरुआत के समय के बारे में पूछा गया, तो सूत्र ने कहा कि मैचों की शुरुआत का समय शाम 7:30 बजे लगभग तय है।.लीग का प्रसारणकर्ता चाहता था कि मैच जल्दी शुरू हों.सूत्र ने कहा, 'टीआरपी निश्चित तौर पर मुद्दा है।,लेकिन सिर्फ इस बात पर सारी चीजें नहीं डालते हैं,आप खुद भी देख सकते हैं कि पिछले सीजन में मैच कितनी देर से खत्म होते थे। जो लोग स्टेडियम आते थे उनके लिए घर लौटना आसान नहीं रहता था. इस पर चर्चा हुई है  यह लगभग तय है कि इस सीजन के दौरान शाम 7:30 बजे मैच शुरू होंगे।.'
फ्रेंचाइजियों को हालांकि इस पर आपत्ति है क्योंकि उनका मानना है कि इस समय दर्शकों का स्टेडियम में आना बेहद मुश्किल है. फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा।,'अगर आप मेट्रो में रह रहे हैं तो आप जानते है कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू में ट्रैफिक का क्या हाल रहता है .क्या आपको लगता है कि लोग छह बजे ऑफिस से निकलने के बाद अपने परिवार को लेकर मैच की शुरुआत तक स्टेडियम में आ पाएंगे? समय में बदलाव करने से पहले यह ऐसी चीज है, जिस पर विचार करना चाहिए.।'
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 💐(A/2)निर्भया केस: चारों दोषियों का डेथ वॉरन्ट जारी, 22 जनवरी को फांसी तय।
💐निर्भयामामला:चारोंअपराधी को फांसी कीसजा💐
देश की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया मामले के चारों दोषियों का डेथ वॉरन्ट जारी हो गया है।पटियाला हाउस अदालत ने फांसी के लिए 22 जनवरी, 2020 की तारीख़ सुबह सात बजे का समय तय किया है । हालांकि, वे 14 दिनों के अंदर फांसी के ख़िलाफ़ दया याचिका और क्यूरेटिव पिटिशन दाख़िल कर सकते हैं।निर्भयाकी मां ने पटियाला हाउसअदालत
 में याचिका दायर कर मांग की थी कि जल्द से जल्द चारों दोषियों के लिए डेथ वॉरंट जारी किया जाए।
गैंगरेप और हत्या का मामले में अदालत अक्षय, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और मुकेश सिंह को पहले ही दोषी क़रार दे चुकी थी।.
कोर्टरूम मेंमौजूद वरिष्ठ पत्रकारसुचित्र मोहंती नेबताया
किअदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग केमाध्यम से दोषियों
का पक्सुना।इस दौरान मीडिया को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग 
रूम से जाने के लिए कहा गया था.।दोषियों के वकील 
ए.पी.सिंह ने कहा कि वह इस फ़ैसले के लिए ख़िलाफ़ सुप्रीमकोर्ट में क्यूरेटिव पिटिशन दायर करेंगे निर्भयाकी
मां  पर विश्वास मज़बूत होगा।"इससे
पहले, दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर. भानुमति की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एक दोषी अक्षय कुमार की पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा था, ''हम दोषी साबित हो चुके अक्षय कुमार की याचिका ख़ारिज करतेहैं।उनकी याचिका परदोबारा
विचार करनेजैसा कुछ नहीं है।''चारों अपराधियों,मुकेश
अक्षय, पवन विनय ने मार्च 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़  सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खट-
खटाया। था. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में इन सभी को मौत की सज़ा देने पर मंज़ूरी दी गई थी।.इससे पहले13 
सितंबर 2013 को ट्रायल कोर्ट ने सभी दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई थी।.इसके बाद 5 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषियों की सभी अपीलों कोख़ारिज
कर दिया था.फिर तीन दोषियों पवन, विनय औरमुकेश
ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे 9 जुलाई 2018 कोसुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज करदिया.जिस
 बेंच ने वह पुनर्विचार याचिका ख़ारिज की थी, उसके अध्यक्ष जस्टिस दीपक मिश्रा थे.उन्होंने इस घटना को 'सदमे की सुनामी' बताया था.।
सुप्रीमकोर्ट की बेंच ने अपने लंबे चौड़े फ़ैसले में अप-
राधियों के बर्ताव को जानवरों जैसा बताया था और कहा था कि ऐसा लगता है कि ये पूरा मामला किसी दूसरी दुनिया में घटित हुआ जहां मानवता के साथ बर्बरता की जाती है।
              💐  क्या था पूरा मामला?💐
16 दिसंबर 2012 की रात राजधानी दिल्ली में 23 साल की एक मेडिकल छात्रा के साथ छह पुरुषों ने एक चलती बस में गैंगरेप किया था।.
चार दोषियों के अलावा एक प्रमुख आरोपी राम सिंह ने ट्रायल के दौरान ही तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।.
एक अन्य अपराधी, जो घटना के वक़्त नाबालिग़ साबित हुआ था, उसे सुधारगृह भेजा गया था।. साल 2015 में उसे सुधारगृह से रिहा कर दिया गया था।. इस अपराधी का नाम ज़ाहिर नहीं किया जा सकता. इसे अगस्त 2013 में तीन साल सुधारगृह में बिताने की सज़ा सुनाई गई थी.।
अब यह अपराधी व्यस्क हो चुका है, लेकिन तय नियमों के अनुसार उसकी सज़ा पूरी हो चुकी है . अब वो एक चैरिटी संस्था के साथ है ।क्योंकि बाहर उसे सुरक्षा का ख़तरा बना हुआ है।.
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(💐 A/3)डॉक्टर ने गोबर से लिपी SUV से किया बेटी को विदा, वजह जानकर   कहेंगे वाह क्या  बबात हैH
आपने   नई दुल्हन को फूलों से सजे कार में भेजते हुए जरूर देखा होगा लेकिन क्या कभी गोबर की लेप लगी गाड़ी में दुल्हन को आते देखा है? निश्चित तौर पर आपका जवाब होगा नहीं और आप कहेंगे कि भला महंगी एसयूवी गाड़ी पर कोई गोबर की लेप क्यों लगाकर बेटी को विदा करेगा? हम आपको बता दें कि यह सच है और ऐसा हुआ है महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में, जहां एक डॉक्टर ने गोबर की लेप से सजी गाड़ी में बिठाकर अपनी लाडली बेटी को विदा किया.
दरअसल ऐसा किया है डॉ. नवनाथ दुधाल ने जो पेशे से डॉक्टर और वैज्ञानिक हैं. इन्होंने मुंबई के टाटा रिसर्च अस्पताल में वर्षों तक काम किया. साल 2019 के मई महीने में जब पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ रही थी तो उन्हें खुद को ठंडा महसूस कराने के लिए अपने एसयूवी गाड़ी के एसी को बार-बार तेज करना पड़ता था लेकिन फिर भी गर्मी लगती थी.
अस्पताल से रिटायर होने के बाद जब डॉ. नवनाथ दुधाल समाजसेवी राजीव दीक्षित से प्रेरित होकर उस्मानाबाद में गुरुकुल गोशाला शुरू की और वो गाय के गोबर पर रिसर्च करने लगे. इसी दौरान उन्हें पता चला कि गाय के गोबर से बाहरी तापमान को कम किया जा सकता है. इसी वजह से उन्होंने अपने एसयूवी गाड़ी पर गोबर का लेप लगवा लिया.
उन्होंने अपने इस फैसले को लेकर बताया कि उनकी गाड़ी में लेप लगाने में 30 किलो गोबर का इस्तेमाल किया गया.  डॉ नवनाथ दुधाल का दावा है गोबर लगाने के बाद गर्मी के दिनों में गाड़ी का तापमान कम करने के लिए उन्हें एसी का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना पड़ा. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि गोबर के लेप से गर्मी के दिनों में गाड़ी जल्दी ठंडी होती है और जाड़े के दिनों में गाड़ी में ठंड भी कम लगती है. 
ईतना ही नहीं डॉ. नवनाथ ने बताया कि गाड़ी पर गोबर की लेप लगाने के बाद 6 महीने तक उसे धोना नहीं पड़ता है. जिससे प्रतिदिन के हिसाब से 20 लीटर पानी की बचत होती है. इससे महीने के 600 लीटर पानी बचाये जा सकते हैं.
गाड़ी पर गोबर के लेप के अलावा डॉ. नवनाथ दुधाल ने अपने मोबाइल कवर पर भी गोबर का लेप चढ़ाया है, यहां तक की उन्होंने गाड़ी में गोबर से बना गणपति ही रखा है.  डॉ. नवनाथ दुधाल का दावा है के गोबर के लेप से मोबाइल के रेडिएशन से बचा जा सकता है और गाड़ी में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
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(A/4)जेएनयू: खामोश खड़ी रहीं दीपिका, कन्हैया लगाते रहे 'जय भीम' के नारे
जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में हुई हिंसा के बाद बॉलीवुड की सबसे बड़ी मेनस्ट्रीम सुपरस्टार दीपिका पादुकोण जेएनयू के स्टूडेंट्स के समर्थन में यूनिवर्सिटी पहुंचीं हैं. एक दिन पहले ही मुंबई के कार्टर रोड में हुए बॉलीवुड प्रोटेस्ट के बाद दीपिका पादुकोण ने दिल्ली के जेएनयू में जाकर स्टूडेंट्स को सपोर्ट किया. बता दें कि दीपिका अपनी फिल्म छपाक के प्रमोशन्स के सिलसिले में दो दिनों से दिल्ली में मौजूद थीं.
दीपिका ने वहां मौजूद स्टूडेंट्स से ये भी कहा कि वे वहां कुछ बोलने के लिए नहीं आई हैं बल्कि स्टूडेंट्स के साथ हुई हिंसा का विरोध दर्ज कराने पहुंची हैं. दीपिका करीब 10 मिनटों के  लिए स्टूडेंट्स के साथ खड़ी रहीं फिर वे यूनिवर्सिटी से चली गईं
दीपिका पादुकोण को इन तस्वीरों में स्टूडेंट्स के बीच देखा जा सकता है. इस दौरान कन्हैया कुमार 'जय भीम' और 'आवाज दो हम एक है' जैसे नारे लगाते नजर आए वही दीपिका वहां चुपचाप खड़ी थीं. दीपिका जेएनयू कैंपस में कुछ देर के लिए पहुंचीं और वे नहीं चाहती थीं कि उनकी वजह से स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट में खलल पड़े. दीपिका कैंपस से बिना कुछ कहे ही चली गई थी.
इससे पहले दीपिका ने देश भर में छात्रों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर एक इंटरव्यू में कहा था कि 'ये देखकर मुझे गर्व होता है कि हम अपनी बात कहने से डर नहीं हैं. चाहे हमारी सोच कुछ भी हो, लेकिन मेरे ख्याल से हम देश और इसके भविष्य के बारे में सोच रहे हैं, ये अच्छी बात है.'
बता दें कि जेएनयू कैंपस में नकाबपोश गुंडों द्वारा की गई तोड़फोड़, मारपीट और हिंसा से देश के कई हिस्सों में विरोध हुआ था. मुंबई में भी इस घटना के सामने आने के बाद कई लोगों ने गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन किया था. बॉलीवुड के भी कई कलाकारों ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया था और देश के छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन किया था.
अनुराग कश्यप, विशाल भारद्वाज, तापसी पन्नू, दीया मिर्जा, अनुभव सिन्हा, ऋचा चड्ढा, राहुल बोस, जोया अख्तर, गौहर खान, रीमा कागती, अली फजल जैसे कई सितारों ने मुंबई के कार्टर रोड प्रोमेनाड में कई बॉलीवुड आर्टिस्ट्स के साथ प्रोटेस्ट किया था. अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा जैसे सितारे लगातार मोदी सरकार से सवाल करते रहे हैं.
वही केंद्र सरकार ने बॉलीवुड के कुछ सितारों को सीएए कानून को लेकर चल रही कंफ्यूजन को लेकर डिनर के लिए इंवाइट किया था. हालांकि ज्यादातर इंवाइट हुए स्टार्स इस डिनर पर नहीं पहुंचे थे लेकिन कुछ हस्तियों ने इस इवेंट में शिरकत भी की थी. इस सिलसिले में रणवीर शौरी, प्रसून जोशी, शान और कैलाश खेर जैसे आर्टिस्ट्स ने बीजेपी नेता पीयूष गोयल से मुलाकात की।
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     (B) आज के दिन जनमें  महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
  मोहन राकेश
पूरा नाम;-मोहन राकेश
जन्म:-8 जनवरी, 1925
जन्म भूमि:-अमृतसर, पंजाब
मृत्यु :-3 जनवरी, 1972
मृत्यु स्थान;-नई दिल्ली
कर्म भूमि;-भारत
कर्म-क्षेत्र;-नाटककार और उपन्यासकार
मुख्य रचनाएँ;- उपन्यास- अँधेरे बंद कमरे, अन्तराल
नाटक- आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, 'आधे अधूरे'
भाषा;-हिन्दी, अंग्रेज़ी
विद्यालय;-'ओरियंटल कॉलेज' (लाहौर में), 
पंजाब विश्वविद्यालय
शिक्षा;-एम.ए. (हिन्दी और अंग्रेज़ी)
पुरस्कार-उपाधि1968 में 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
'विशेष योगदान;-मोहन राकेश हिंदी साहित्य के उन चुनिंदा साहित्यकारों में हैं जिन्हें ‘नयी कहानी आंदोलन’ का नायक माना जाता है और साहित्य जगत् में अधिकांश लोग उन्हें उस दौर का ‘महानायक’ कहते हैं।नागरिकता:-भारतीय
अन्य जानकारी;-आधुनिकहिन्दी साहित्यकाल में मोहन
राकेश ने अपने लेखन से दूर होते हिन्दी साहित्य को
 रंगमंच के क़रीब ला दिया व स्वयं कोभारतेन्दु हरिश्चंद्र 
और जयशंकर प्रसाद के समकक्ष खड़ा कर दिया।
नाम:-  मोहन राकेश ,
जन्म: 8 जनवरी, 1925;
मृत्यु: 3 जनवरी, 1972) 
'       नई कहानी आन्दोलन' के साहित्यकार थे। हिन्दी नाटक के क्षितिज पर मोहन राकेश का उदयउस 
समय हुआ, जब स्वाधीनता के बाद पचास के दशक में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का ज्वार देश में जीवन के हर क्षेत्र को स्पन्दित कर रहा था।उनके नाटकों ने न सिर्फ़
नाटक का आस्वाद, तेवरऔर स्तर हीबदल दिया,बल्कि
हिन्दीरंगमंच की दिशा को भी प्रभावित कियाआधुनिक
 ₹हिन्दी साहित्य काल में मोहन राकेश ने अपने लेखन से दूरहोते हिन्दी साहित्य को रंगमंच के क़रीब ला दिया 
और स्वयं कोभारतेन्दु हरिश्चंद्रऔर जयशंकर प्रसाद के समकक्ष खड़ा कर दिया।
                   💐 जीवन परिचय💐
मोहन राकेश हिंदी साहित्य के उन चुनिंदा साहित्यकारों में हैं जिन्हें ‘नयी कहानी आंदोलन’ का नायक माना जाता है और साहित्य जगत् में अधिकांश लोग उन्हें उस दौर का ‘महानायक’ कहते हैं। उन्होंने ‘आषाढ़ का एक दिन’ के रूप में हिंदी का पहला आधुनिक नाटक भी लिखा। कहानीकार-उपन्यासकार प्रकाश मनु भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं, जो नयी कहानी के दौर में मोहन राकेश को सर्वोपरि मानते हैं। प्रकाश मनु ने कहा ‘‘नयी कहानी आंदोलन ने हिंदी कहानी की पूरी तस्वीर बदली है। उस दौर में तीन नायक मोहन
राकेश, कमलेश्वर और राजेंद्र यादव रहे। खुद कमलेश्वर और राजेंद्र यादव भी राकेश को हमेशा सर्वश्रेष्ठ मानते रहे।
                   💐  जन्म तथा शिक्षा   💐


मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी, 1925 को अमृतसर
, पंजाब में हुआ था। उनके पिता पेशे से वकील थे और साथ ही साहित्य और संगीत के प्रेमी भी थे। पिता की साहित्यिक रुचि का प्रभाव मोहन राकेश पर भी पड़ा। मोहन राकेश ने पहले लाहौर के 'ओरियंटल कॉलेज' से 'शास्त्री'की परीक्षा पास की।किशोरावस्था में सिर से
पिता का साया उठने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारीऔर पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद उन्होंने 'पंजाब विश्वविद्यालय' से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। एक शिक्षक के रूप में पेशेवर ज़िंदगी की शुरुआत करने के साथ ही उनका रुझान लघु कहानियों की ओर हुआ। बाद में उन्होंने कई नाटक और उपन्यास लिखे। बाद में अनेक वर्षों तक दिल्ली,जालंधर, शिमला और
मुम्बई में अध्यापन कार्य करते रहे।
                      💐 स्वतंत्र लेखन 💐
अपनी साहित्यिक अभिरुचि के  कारण   मोहन राकेश का अध्यापन कार्य में मन नहीं लगा और एक वर्ष तक उन्होंने 'सारिका' पत्रिका का सम्पादन किया। इस कार्य को भीअपने लेखनमेंबाधा समझकर;इससे किनारेकर .
लिया और जीवन के अन्त तक स्वतंत्र लेखन ही इनके जीविकोपार्जन का साधन रहा। मोहन राकेशहिन्दी के
बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और उपन्यासकार थे।समाज की संवेदनशीलअनुभूतियों को चुनकरउनका
 सार्थक सम्बन्ध खोज निकालना उनकी कहानियों की विषय-वस्तु थी
               💐 टीका टिप्पणी और संदर्भ 💐
 1.0 1.1 नयी कहानी के अनूठे नायक मोहन राकेश (हिंदी) वीकेएंड टाइम्स। अभिगमन तिथि: 3 जनवरी, 2013।
↑ 2.0 2.1 प्रथम आधुनिक हिन्दी नाटक लेखक (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 02 जनवरी, 2012।
↑ मोहन राकेश (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 11जून, 2011।
↑ 4.0 4.1 हिन्दी रंगमंच के अग्रदूत मोहन राकेश (हिन्दी) वाङ्मय हिन्दी पत्रिका। अभिगमन तिथि: 11जून, 2011।4
                      मोहन राकेश
            मोहन राकेश की रचनाएँ  
उपन्यास:-अँधेरे बंद कमरे,अन्तराल,न आने वाला कल
नाटक-आषाढ़ का एक दिन · लहरों के राजहंस · आधे अधूरे
कहानी संग्रह-दस प्रतिनिधि कहानियाँ नाटककार;-
-भारतीय,जयशंकर प्रसाद, मोहन राकेश,बादलसरकार
भवभूति, रबीन्द्रनाथ ठाकुर ,रामकुमार वर्मा हर्षवर्धन 
विजय तेंदुलकर,गिरीशकर्नाड, भिखारी ठाकुर,हबीब तनवीर,अनिल चौधरी,अण्णा साहेब किर्लोस्कर, सत्यदेव 
दुबे, के. वी. सुबन्ना, सफ़दरहाशमी
भुवनेश्वर,सर्वेश्वर दयाल सक्सेना,विश्वंभर 'मानव,शंकर शेष,रतन थियम,जगदीशचन्द्रमाथुर,हेस्नामकन्हाईलाल
विदेशी,कार्लो गोल्दोनी
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तित्व
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💐 (C) आज के दिन की (8 जनवरी की) महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ।💐
1026- सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ मंदिर को लूट कर उसे नष्ट कर दिया।
1790 - अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने पहली बार देश को सम्बोधित किया।
1800 - आस्ट्रिया ने फ्रांस को दूसरी बार हराया।
1952 - जॉर्डन ने संविधान Q
1929 - नीदरलैंड्स और वेस्टइंडीज के बीच पहला टेलीफाेन संपर्क स्थापित।
1995 - समाजवादी चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी अौर राम मनोहर लोहिया तथा जयप्रकाश नारायण के निकट सहयोगी रहे मधु लिमय का निधन।
1996 - फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ़्रांस्वा मितरां का 79 वर्ष की आयु में पेरिस में देहान्त।
2001 - आइवरी कोस्ट में विद्रोह विफल, भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वियतनाम व इंडोनेशिया की सात दिवसीय यात्रा पर वियतनाम पहुँचे, भारत-वियतनाम ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये, घाना में जैसी रालिंग्स का दो दशक पुराना शासन समाप्त, जॉन कुफारे राष्ट्रपति बने।
2003 - श्रीलंका सरकार और लिट्टे के बीच नकोर्न पथोम (थाइलैंड) में वार्ता शुरू।
2008 -केन्द्र सरकार ने अरुण रामनाथन को वित्तीय क्षेत्र का सचिव नियुक्त किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 6ठे प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन किया।
उपन्यासकार व पत्रकार मैक्डोनाल्ड फ़्रेजर का निधन।
2009 -पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंहशेखावत ने लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की।
कोस्टा रिका के उत्तरी क्षेत्र में 6.1 तीव्रता के भूकम्प में 15 लोगों की मौत एवं 32 अन्य घायल हुए।
2017- इजरायल के यरुशलम में ट्रक से हमले में कम से कम 4 सैनिकों की मौत, 15 घायल।
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💐 (D) आज के दिन 8 जनवरी को जन्मे महत्वपूर्ण     
        व्यक्तित्व💐


1984 - किम जोंग उन - उत्तर कोरिया के तीसरे सर्वोच्च नेता।
1975 - हैरिस जयराज, भारतीय संगीतकार
1942 - स्टीफन हॉकिंग, प्रसिद्ध ब्रितानी भौतिक विज्ञानी
1938 - नन्दा - भारतीय फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री।
1929 - सईद जाफ़री, भारतीय अभिनेता
1926 - केलुचरण महापात्र, भारतीय ओडिसी नृत्यांगना
1925 - मोहन राकेश, साहित्यकार
1909 - आशापूर्णा देवी, उपन्यासकार
1908 - नाडिया - प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री।
1890 - रामचन्द्र वर्मा - हिन्दी साहित्यकार।
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   💐(E) आज के दिन 8 जनवरी को निधन  हुए महत्वपूर्ण व्यक्क्तित्व💐


1984 - पहली भारतीय महिला पायलट सुषमा मुखोपाध्याय।
1941 - प्रणवानंदा महाराज - भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी।
1884 - केशव चन्द्र सेन - एक प्रसिद्ध धार्मिक व सामाजिक सुधारक, जो 'ब्रह्म समाज' के संस्थापकों में से एक थे।
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     💐(F) 8 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर 
1. अफ़्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस स्थापना दिवस।💐
2.भारतीय प्रवासी दिवस
3. केशव चंद्र सेन पुण्यतिथि दिवस
4  स्व,मोहन राकेश जयंती
5 स्व.सईद जाफरी जयंती
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  आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल आपसे पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल।💐
💐जय हिंद जय भारत💐


 💐 निवेदक;💐-


  चित्रांश -विजय निगम


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