आज की बात आपके साथ - विजय निगम

प्रिय साथियो,
💐राम-राम 💐
💐 नमस्ते💐


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का 
मकर सक्रांति दिवस पर ,दिनांक 14जनवरी  2020  मंगलवार की प्रातः की बेला में आप सभी को सक्रांति की हार्दिक बधाई। 
आप सभी अपने लक्ष्यों को पूर्ण करने  करने के लिए अपने कार्यो को इस प्रकार अंजाम दे कि  दे कि  आपके किये गए कार्यो की जीत की जयघोष आकाश ,में उड़ रही पतंग की तरह अनंत ऊँचाई तक हवा में तैरती रहे। आपके कार्यो आपके नाम का यश धरती से आकाश अनन्त  तक प्रसारित हो।आपको इतना यश प्राप्त हो कि ईश्वर के वरदान की डोर भी कम न पड़े आपके द्वारा सम्पन्न किये जा रहे में सर्वत्र यश और आनंद प्राप्त हो आप सपरिवार स्वस्थ,व्यस्त आनंदित रहे यही बाबा महाकाल से प्रार्थना है।आज के मकर सक्रांति दिवस का  हार्दिक वंदन अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 


A कुछ रोचक समाचार 
B आज के दिन जन्मे प्रसिद्ध शायर.कैफ़ी आज़मी का जीवन परिचय  लेख. ।
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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             💐 (A) कुछ रोचक समाचार 💐


💐(A/1) मकर सक्रांति पर्व भारत मे किस प्रकार मनाया जाता है इसका महत्व क्या है💐।
💐(A/2)छपाक का 3 दिवस का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन  ;दीपिका की 'छपाक' ने वीकेंड पर किया धांसू प्रदर्शन, कमा डाले इतने करोड़।💐
💐(A/3)लोहड़ी का जश्न हुआ शुरूः बॉलीवुड से लेकर चांदनी चौक की गलियों तक दिख रही रौनक
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💐(A/1) मकर सक्रांति पर्व भारत मे किस प्रकार मनाया जाता है इसका महत्व क्या है।💐
 मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है , इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।
                  💐   मकर संक्रान्ति 💐
प्रयाग में मकर संक्रान्ति के अवसर पर माघ-मेले में सक्रांति मेला पर्व आयोजित होता है जिसे बड़े धूमधाम से  नदी स्नान, पूजा ,पाठ, दान एव पतंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है। नाम  खिचड़ी, पोंगल अनुयायीहिन्दू,नेपाली भारतीय, प्रवासी भारतीय व नेपालीप्रकार
हिन्दूतिथि,;-पौष मास में सूर्य के मकर राशि में आने पर
तमिलनाडु:- में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि
 कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। 
मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं, यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है।
           💐  मकर संक्रान्ति के विविध रूप💐
            💐 उत्तरायण का आरम्भ💐
यह भारतवर्ष तथा नेपाल के सभी प्रान्तों मेंअलग-
अलग नाम व भाँति-भाँति के रीति-रिवाजों के द्वारा
भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।
       💐सक्रांति के विभिन्न नाम भारत में💐
मकरसंक्रान्ति ,छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा,     हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंधप्रदेश, तेलंगाना, 
कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर,
राजस्थान, .सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू
ताइ पोंगल;-, उझवर तिरुनल : तमिलनाडु
उत्तरायण : गुजरात, उत्तराखण्ड
माघी : हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब
भोगाली बिहु : असम
शिशुर सेंक्रात : कश्मीर घाटी
खिचड़ी : उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार
पौष संक्रान्ति : पश्चिम बंगाल
मकर संक्रमण : कर्नाटक
लोहड़ी : पंजाब
        💐   विभिन्न नाम भारत के बाहर। 💐
बांग्लादेश : सकरायन / पौष संक्रान्ति
नेपाल : माघे संक्रान्ति या 'माघी संक्रान्ति' 'खिचड़ी संक्रान्ति'
थाईलैण्ड :  सोंगकरन
लाओस : पि मा लाओ


म्यांमार : थिंयान


कम्बोडिया : मोहा संगक्रान


श्री लंका : पोंगल, उझवर तिरुनल
             💐   नेपाल में मकर-संक्रान्ति। 💐
नेपाल के सभी प्रान्तों में अलग-अलग नाम,भाँति-भाँति 
के रीति-रिवाजों द्वाराभक्ति एवं उत्साह के साथधूमधाम 
से मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति दिन किसान अपनी 
अच्छी फसल के लियेभगवान को धन्यवाद देकरअपनी 
अनुकम्पा कोसदैव लोगों पर बनाये रखने काआशीर्वाद 
माँगते हैं। इसलिए मकर संक्रान्ति के त्यौहार कोफसलों
एवं किसानों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है।
नेपाल में मकर संक्रान्ति को माघे-संक्रान्ति,सूर्योत्तरायण 
और थारू समुदाय में 'माघी' कहा जाता है। इस दिन नेपाल सरकार सार्वजनिक छुट्टी देती है। थारू समुदाय का यह सबसे प्रमुख त्यैाहार है।नेपाल के बाकीसमुदाय 
भी तीर्थस्थल में स्नान करके दान-धर्मादि करते हैं और तिल,घी,शर्करा और कन्दमूल खाकर धूमधाम से मनाते हैं। वे नदियों के संगम पर लाखों की संख्या में नहाने के लिये जाते हैंतीर्थस्थलों में रूरूधाम (देवघाट) वत्रिवेणी 
मेला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।
             💐 भारत में मकर संक्रान्ति👍।
सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रान्ति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। विभिन्न प्रान्तों में इस त्योहार को मनाने के जितने अधिक रूप प्रचलित हैं उतने किसी अन्य पर्व में नहीं।
                 💐  सक्रांति या लोहड़ी  💐
हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में एक दिन पूर्व 13 जनवरी को ही मनाया जाता है। इस दिन अँधेरा होते ही आग जलाकर अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति दी जाती है। इस सामग्री को तिलचौली कहा जाता है। इस अवसर पर लोग मूंगफली, तिल की बनी हुई गजक और रेवड़ियाँ आपस में बाँटकर खुशियाँ मनाते हैं। बेटियाँ घर-घर जाकर लोकगीत गाकर लोहड़ी माँगती हैं। नई बहू और नवजात बच्चे(बेटे) के लिये लोहड़ी का विशेष महत्व होता है।इसके साथ पारम्परिक मक्के की रोटीऔर सरसों के साग का आनन्द भीउठाया जाता है।  
            💐 सक्रांति या खिचड़ी पर्व 💐
उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से 'दान का पर्व' है।इलाहा
-बाद मेंगंगा,यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है। 14 जनवरी से ही इलाहाबाद में हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है। 14 दिसम्बर से 14 जनवरीतक का समय खर मास के नाम से जाना जाता है।एक समय था जब उत्तर भारत में 14 दिसम्बर से 14 जनवरी तक पूरे एक महीने किसी भीअच्छे काम को अंजाम भी नहीं दिया जाता था।मसलन शादी-ब्याह नहीं किये जाते थे परन्तु अब समय के साथ लोग बाग बदल गये हैं।परन्तु फिर भी ऐसा विश्वास है कि14 जनवरी यानी मकर संक्रान्ति से पृथ्वी पर अच्छे दिनों की शुरुआत होती है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आख़िरी स्नान तक चलता है।संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है।बागेश्वर में बड़ा मेला होता है। वैसे गंगा
-स्नान, रामेश्वर, चित्रशिला व अन्य स्थानों में भी होते हैं। इस दिन गंगा स्नान करके तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। इस पर्व पर क्षेत्र में गंगाएवं रामगंगा,घाटों पर बड़े-बड़े मेले लगते है। समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है।
                 💐  संक्रान्ति या खिचड़ी 💐
बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है।
                💐    तिलगुड़। 💐
महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बाँटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं -"तिळ गूळ घ्या आणि गोड़ गोड़ बोला" अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो। इस दिन महिलाएँ आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बाँटती हैं।
                  💐    तिल दान पर्व 💐
बंगाल में इस पर्व पर स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है।यहाँ गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा जी भगीरथ
 के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिये व्रत किया था। इस दिन गंगासागर मेंस्नान-दान  के लिये लाखों 
लोगों की भीड़ होती है।। लोग कष्ट उठाकर गंगा सागर की यात्रा करते हैं।वर्ष में केवल एक दिन मकर संक्रान्ति को यहाँ लोगों की अपार भीड़ होती है। इसीलिए कहा जाता है-"सारे तीरथ बार बार, गंगा सागर एक बार।"
               💐  सक्रांति या पोंगल पर्व 💐
तमिलनाडु में इस त्योहार कोतिल दान के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल और चौथे व अन्तिम दिन कन्या-पोंगल। इस प्रकार पहले दिन कूड़ा करकट इकठ्ठा कर जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिये स्नान करके खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाया जाता है। उसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। इस दिन बेटी और जमाई राजा का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।
                   💐  माघ-बिहू पर्व। 💐
असम में मकर संक्रान्ति को माघ-बिहू अथवा भोगाली
-बिहू के नाम से मनाते हैं।
               💐  मकर सक्रांति दान पर्व 💐
राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएँ अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएँ किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देती हैं। इस प्रकार मकर संक्रान्ति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है।
  💐आइये जानते है मकर संक्रांति कब और क्यों करना चाहिए  ?💐
हर बार की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की सही तारीख को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है कि मकर संक्रांति का त्योहार इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा या 15 जनवरी को। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष 15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्योहार मनाना चाहिए।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।हिन्दू पंचांग और धर्म शास्त्रों के अनुसार
सूर्य का मकर राशी में प्रवेश14 की शाम को हो रहा हैं। शास्त्रों के अनुसार रात में संक्रांति नहीं मनाते तो अगले दिन सूर्योदय के बाद ही उत्सव मनाया जाना चाहिए। इसलिए मकर संक्रांति 14 की जगह 15 जनवरी को मनाई जाने लगी है। अधिकतर 14 जनवरी को मनाया जाने वाला मकर संक्रांति का त्यौहार इस वर्ष भी 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
          💐  मकर संक्रान्ति का महत्व 💐
शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ठ होता है-


    माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।
  स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥


मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी कारण यहाँ पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतएव इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी। ऐसा जानकर सम्पूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा विविध रूपों में सूर्यदेव की उपासना, आराधना एवं पूजन कर, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की जाती है। सामान्यत: भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियाँ चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किन्तु मकर संक्रान्ति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ता है।
  💐मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व💐
ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।
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  💐(A/2)छपाक का 3 दिवस का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन  ;दीपिका की 'छपाक' ने वीकेंड पर किया धांसू प्रदर्शन, कमा डाले इतने करोड़।💐


 : बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म 'छपाक' (Chhapaak) ने तीसरे दिन धाकड़ कमाई कर ली है.
 : दीपिका की फिल्म ने अब तक किया इतना कलेक्शन
                      💐 खास बातें💐
दीपिका पादुकोण की 'छपाक' ने की शानदार कमाई
दर्शकों को पसंद आ रही है फिल्म
फिल्म ने तीसरे दिन किया इतना कलेक्शन
 बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म 'छपाक' (Chhapaak) रिलीज तो हो गई है, हालांकि विवादों के चलते इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस (Chhapaak Box Office Collection) पर दर्शकों का कुछ खास रिस्पांस नहीं मिल रहा है. लेकिन दीपिका पादकुोण ने फिल्म 'छपाक' ने  तीसरे दिन यानी रविवार को काफी अच्छा प्रदर्शन किया. बॉक्स ऑफिस इंडिया डॉट कॉम वेबसाइट के मुताबिक 'छपाक (Chhapaak Collection)' ने रविवार को 7 से 7.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. इस हिसाब से दीपिका की फिल्म ने तीन दिनों में 18.67 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन कर लिया है.
बता दें, दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' ने पहले दिन 4.77 करोड़ की कमाई की थी. तो, वहीं दूसरे दिन फिल्म की कमाई में 30-40 प्रतिशत का ग्रोथ दिखा. फिल्म ने शनिवार को 6.90 करोड़ से ऊपर की कमाई की. दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की 'छपाक' (Chhapaak) का बजट लगभग 35 करोड़ रुपये बताया जाता है. 'छपाक (Chhapaak)' का कहानी मालती यानी दीपिका पादुकोण की है. जो एसिड अटैक सरवाइवर है और इस घटना के बावजूद अपनी जिंदगी की जंग को पूरी ताकत और हिम्मत के साथ लड़ रही है. मालती की इस जंग में उसके साथी हैं अमोल (विक्रांत मैसे) और उनकी वकील (मधुरजीत सर्गी). इस तरह फिल्म की कहानी कहीं भी अत्यधिक नाटकीय नहीं होती और मालती के संघर्ष और इच्छाशक्ति की ओर इशारा करती है. इस तरह मेघना गुलजार ने पूरी कहानी को कहीं भी उपदेशात्मक नहीं होने दिया है. यही बात 'छपाक' की खासियत भी बनकर उभरती है.
'छपाक (Chhapaak)' की ताकत जहां दिल छू लेने वाली इसकी कहानी है तो इसी इमोशनल कहानी को पॉवरफुल अंदाज में पेश करने वाली दीपिका पादुकोण की एक्टिंग इसकी जान है. दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने बहुत ही मजबूती के साथ मालती के कैरेक्टर को परदे पर जिया है, और मालती की जिंदगी की हर बारीकी को पकड़ने की कोशिश की है. फिर वह चाहे मालती का दर्द हो, खुशी हो या कोर्ट कचहरी या जिंदगी की जंग हो, हर मोर्चे पर दीपिका पादुकोण ने दिल जीता है. विक्रांत मैसी ने भी सधी हुई एक्टिंग के जरिये दीपिका पादुकोण का अच्छा साथ दिया है
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💐(A/3)लोहड़ी का जश्न हुआ शुरूः बॉलीवुड से लेकर चांदनी चौक की गलियों तक दिख रही रौनक
लोहड़ी केपर्व काजश्न भारत मेंशुरू हो चुका हैबॉलीवुड से लेकर दिल्ली की चांदनी चौक की गलियों तक में लोहड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है. जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है वैसे वैसे लोहड़ी का जश्न परवान चढ़ता जा रहा है. ढोल नगाड़ों की धुन पर लोग थिरक रहे हैं.
iनई दिल्ली: लोहड़ी का पर्व शुरू हो चुका है. लोहड़ी एक ऐसा पर्व है जो भारत ही नहीं दुनिया के 20 से अधिक देशों में मनाया जाता है. भारत को त्यौहारों को देश कहा जाता है. इन त्यौहारों में लोहड़ी के पर्व को बेहद खास माना गया है. लोहड़ी का पर्व भारत की परंपराओं और सभ्यताओं का मिलाजुला रूप है. जिसमें धरती माता का सम्मान और प्रकृति की उदारता को नमन किया जाता है. भारत कृषि प्रधान देश है. लोहड़ी का सीधा संबंध हमारे खेतों से हैं।,खेतों का संबंध  हमारी लहलहाने वाली फसलों से है।.
  💐  खेतीबाड़ी से जुड़ा है लोहड़ी का पर्व   💐
लोहड़ी पर नई फसल की पूजा की जाती है. इस दिन लोहड़ी जलाने की भी परंरपरा है. आग के चारों ओर लोग चक्कर लगाते हैं, गीत गाते हैं और एक दूसरे को बधाई देते हैं. जिन घरों में किसी बच्चे का जन्म होता है उस घर में लोहड़ी को धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और मूंगफली से बने पकवान खाए जाते हैं.
        💐 लोहड़ी का बॉलीवुड कनेक्शन 💐
लोहड़ी का संबंध हमारे बॉलीवुड से भी है।. बॉलीवुड में इस पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.। बिग शोमैन राजकपुर से लेकर अक्षय कुमार तक ये परंपरा चली आ रही है।.बच्चन खानदान, कपूर खानदान, बीआर चोपड़ा, अनिल कपूर, शाहरूख खान, संजय दत्त, धर्मेंद्र सहित कई सुपर स्टार लोहड़ी का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं.।बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद ने अपने फैंस को ट्विटर के जरिए लोहड़ी की शुभकमानाएं दी हैं. वहीं एक्टर और सांसद सन्नी देओल ने भी लोहड़ी पर लोगों को विश किया है. सन्नी देओल ने करीब डेढ़ मिनट का एक वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर अपलोड किया है जिसमें वे लोहड़ी की शुभकामनाएं देते नजर आ रहे हैं.
            💐   लोहड़ी का जश्न हुआ शुरू 💐
लोहड़ी के पर्व को लेकर दिल्ली एनसीआर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और जम्मू कश्मीर में जश्न का मौहाल हैं, लोगों में इस पर्व को लेकर उत्साह देखा जा रहा है.।
   💐  गुड,तिल और मूंगफली गजक की धूम 💐
लोहड़ी का पर्व खाने पीने के शौकीनों के लिए भी जाना जाता है.। गुड़, तिल और मूंगफली से बनी पट्टी, गजक, लड्डू, रेवड़ी और मिठाइयों की बाजारों में धूम है।. लोग इनकी जमकर खरीदारी कर रहे हैं।. पुरानी दिल्ली, चांदनी चौक के बाजारों में लोहड़ी को लेकर रौनक देखते बन रही है.।
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         💐(B) आज के दिन जन्मे प्रसिद्ध शायर 
.कैफ़ी आज़मी.का जीवन परिचय  लेख. ।💐


 कैफ़ी आज़मी (असली नाम : अख्तर हुसैन रिजवी) उर्दू के एक अज़ीम शायर थे। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिए भी कई प्रसिद्ध गीत व ग़ज़लें भी लिखीं, जिनमें देशभक्ति का अमर गीत -"कर चले हम फिदा, जान-ओ-तन साथियों" भी शामिल है।
नाम;-                          कैफ़ी आज़मी
‎व्यवसाय;-                    कवि
राष्ट्रीयता;-                    भारतीय
शैली;-                          गज़ल, नज़्म
उल्लेखनीय कार्य;-         आवारा सज़दे,इंकार, 
                                   आख़िरे-शब
उल्लेखनीय सम्मान;-     फिल्मफेयर अवार्ड
जीवनसाथी;-                शौकत
संतान;-                      शबाना आज़मी, बाबा आज़मी


कैफी का असली नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटे से गाँव मिजवां में 14 जनवरी 1919 में जन्मे। गाँव के भोलेभाले माहौल में कविताएँ पढ़ने का शौक लगा। भाइयों ने प्रोत्साहित किया तो खुद भी लिखने लगे। 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली गज़ल लिखी।
                      💐  शायरी। 💐
किशोर होते-होते मुशायरे में शामिल होने लगे। वर्ष 1936 में साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित हुए और सदस्यता ग्रहण कर ली। धार्मिक रूढि़वादिता सेपरेशान
कैफी को इस विचारधारा में जैसे सारी समस्याओं का हल मिल  गया।  उन्होंने   निश्चय किया कि सामाजिक संदेश के लिए ही लेखनी का उपयोग करेंगे।
1943 में साम्यवादी दल ने मुंबई कार्यालय शुरू किया और ‍उन्हें जिम्मेदारी देकर भेजा। यहाँ आकर कैफी ने उर्दू जर्नल ‘मजदूर मोहल्ला’ का संपादन किया।
जीवनसंगिनी शौकत से मुलाकात हुई। आर्थिक रूप से संपन्न और साहित्यिक संस्कारों वाली शौकत को कैफी के लेखन ने प्रभावित किया।मई1947 मेंदोसंवेदनशील
कलाकार विवाह बंधन में बँध गए।शादी के बाद शौकत ने रिश्ते की गरिमा इस हद तक निभाई कि खेतवाड़ी में पति के साथ ऐसी जगह रहीं जहाँ टॉयलेट/बाथरूम कॉमन थे। यहीं पर शबाना और बाबा का जन्म हुआ।


बाद में जुहू स्थित बंगले में आए। फिल्मों में मौका बुजदिल (1951) से मिला। स्वतंत्र रूप से लेखन चलता रहा। कैफी की भावुक, रोमांटिक और प्रभावी लेखनी से प्रगति के रास्ते खुलते गए और वे सिर्फ गीतकार ही नहीं बल्कि पटकथाकार के रूप में भी स्थापित हो गए। ‘हीर-रांझा’ कैफी की सिनेमाई कविता कही जा सकती है। सादगीपूर्ण व्यक्तित्व वाले कैफी बेहद हँसमुख थे, यह बहुत कम लोग जानते हैं।


वर्ष 1973 में ब्रेनहैमरेज से लड़ते हुए जीवन को एक नया दर्शन मिला - बस दूसरों के लिए जीना है। अपने गाँव मिजवान में कैफी ने स्कूल, अस्पताल, पोस्ट ऑफिस और सड़क बनवाने में मदद की।


उत्तरप्रदेश सरकार ने सुल्तानपुर से फूलपुर सड़क को कैफी मार्ग घोषित किया है। दस मई 2002 को कैफी यह गुनगुनाते हुए इस दुनिया से चल दिए : ये दुनिया, ये महफिल मेरे काम की नहीं। ..।
                  💐    व्यक्तिगत जीवन। 💐
मई 1947 में इनका विवाह शौकत से हुआ। आर्थिक रूप से संपन्न और साहित्यिक संस्कारों वाली शौकत को कैफी के लेखन ने प्रभावित थीं। उनके यहाँ एक बेटी और एक बेटे का जन्म हुआ, जिनका नाम शबाना और बाबा है। शबाना आज़मी हिंदी फिल्मों की एक अज़ीम अदाकारा बनीं।
                     💐  प्रमुख रचनाएँ 💐
उनकी रचनाओं में आवारा सज़दे, इंकार, आख़िरे-शब आदि प्रमुख हैं।
                💐 पुरस्कार एवं सम्मान  💐
क़ैफ़ी आज़मी को राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। 1974 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
   💐कैफी आज़मी के कुछ प्रमुख फिल्मी गीत💐
1.  मैं ये सोच के उसके दर से उठा था।..(हकीकत)


2. है कली-कली के रुख पर तेरे हुस्न का फसाना...    
   (लालारूख)


3. वक्त ने किया क्या हसीं सितम... (कागज के फूल)


4  इक जुर्म करके हमने चाहा था मुस्कुराना... (शमा)


5. जीत ही लेंगे बाजी हम तुम... (शोला और शबनम)


6  तुम पूछते हो इश्क भला है कि नहीं है।.. (नकली   
     नवाब)


7  .राह बनी खुद मंजिल... (कोहरा)


8. सारा मोरा कजरा चुराया तूने... (दो दिल)


9. बहारों...मेरा जीवन भी सँवारो... (आखिरी खत)


10. धीरे-धीरे मचल ए दिल-ए-बेकरार... (अनुपमा)


11. या दिल की सुनो दुनिया वालों... (अनुपमा)


12. मिलो न तुम तो हम घबराए... (हीर-रांझा)


13 .ये दुनिया ये महफिल... (हीर-रांझा)


14. जरा सी आहट होती है तो दिल पूछता है।.. 
       (हकीकत)


         💐 क़ैफ़ी की शायरी कुछ पंक्तियाँ💐


इतना तो ज़िंदगी में किसी की ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून ना रोने से कल पड़े


जिस तरह हंस रहा हूं मैं पी-पी के
अश्क-ए-ग़मयूं 
दूसरा हंसे तो कलेजा निकल पड़े


कोई ये कैसे बताये ,के वो तन्हा क्यों हैं
वो जो अपना था, वो ही और किसी का क्यों हैं


तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो
तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है कि नही
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💐(C)आज के दिनकी प्रमुख ऐतिहासिकघटनाएँ💐


1758 -इंग्लैंड के राजा ने ईस्ट इंडियाकंपनी को भारत
 में लड़ाई में जीती हुई संपत्ति अपने पास रखने का अधिकार दिया।
1760- फ्रांसीसी जनरल लेली ने पुडुचेरी अंग्रेज़ों को सौंप दिया।
1784- अमेरीकी स्वतंत्रता संग्राम में विजय के बाद सरकार ने ब्रिटेन के साथ शांति संधि की।
1809- नेपोलियन बोनापार्ट के विरुद्ध इंग्लैंड और स्पेन ने गठबंधन किया।
1867- पेरू ने स्पेन के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की।
1907- जमैका में आए भूकंप से किंगस्टन शहर बरबाद हो गया और एक हजार से अधिक लोग मारे गए।
1918- फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ कैलाक्स को देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।
1950- ईरान में मुहम्मद सईद ने सरकार बनायी।
1982- भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने 20सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की।
1985- हुन सेन कंबोडिया के प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए।
1986- ग्वाटेमाला में विनिसियों केरजो 6 वर्षों के बाद पहले असैनिक राष्ट्रपति बने।
1989 इलाहाबाद में बारह वर्ष बाद आयोजित होने वाला कुम्भ मेला शुरु हुआ।
1992-इज़रायल ने जॉर्डन के साथ शांतिवार्ता शुरू की।
1992-पोलैंड के जहाज़ के बाल्टिक सागर में डूबने से 54 लोग मारे गये।
1994- यूक्रेन, रूस तथा अमेरिका  मास्को में परमाणु अस्त्र कम करने का समझौता हुआ।
1998- पाकिस्तान में अफ़ग़ान कार्गो जहाज़ की दुर्घटना में 50 लोगों की मृत्यु हो गई।
1999- बुलंट इसेविट तुर्की के नये प्रधानमंत्री नियुक्त हुए।
2001 अल साल्वाडोर में आए भूकम्प में 234 लोग मारे गये।
2007- नेपाल में अंतरिम संविधान स्वीकार किया गया।
2010 - ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न के समीपवर्ती क्रैनबर्न
 में नानकसर ताथ गुरुद्वारे की चारदीवारी के अंदर बन रही एक इमारत आग लगा देने के कारण क्षतीग्रस्त हो गई।
2010 - मुम्बई के आयकर विभाग ने स्वयं को चैरिटी संगठन बताकर कर अदायगी से अबतक बचने वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को व्यवसायी संगठन माना तथा कर और जुर्माने के रूप में 120 करोड़ रुपए चुकाने का आदेश दिया।
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 💐 (D) आज के दिन जन्में महत्वपूर्ण व्यक्क्तित्व💐


1551 - मुग़ल काल में अकबर के नवरत्नों में से एक अबुल फ़जल।
1919 - कैफ़ी आज़मी - उर्दू के एक अज़ीम शायर थे। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिए भी कई ग़ज़ल और गीत लिखे थे।
1977 - नारायण कार्तिकेयन - भारत के एकमात्र फ़ॉरमूला वन चालक।
1926 - महाशवेता देवी - प्रख्यात लेखिका और सामाजिक कार्यकर्त्ता |
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               💐(E)आज के दिन 💐
     💐 निधन हुवे महत्वपूर्ण  व्यक्क्तित्व💐
1937 - जयशंकर प्रसाद - हिन्दी साहित्यकार
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          💐 (F) आज का दिवस का नाम💐
1   प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार स्व.जयशंकर प्रसाद।
     पुण्यतिथि दिवस।
2. अकबर के नवरत्न स्व.अबुल फजल की जयंती
3   शायर  स्व. कैफ़ी आज़मी जयंती दिवस ।
4. इलाहाबाद कुम्भ स्थापना दिवस।
5 अमेरिका सरकार द्वारा ब्रिटेन शांति संधि स्थापना     
    दिवस
6 नेपाल में अंतरिम संविधान स्वीकार दिवस।
7 मकर संक्रांति दिवस, पतंग उत्सव दिवस


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आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।


💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल।💐
💐जय हिंद जय भारत💐


 💐 निवेदक;-💐


  💐 चित्रांश - विजय निगम


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