फुले दंपत्ति को भारत रत्न देने की मांग

माली समाज ने दिया ज्ञापन



          दिल्ली। फुले दंपत्ति को भारत रत्न देने की मांग को लेकर देश के कई नेताओं को माली समाज ने ज्ञापन सौंप दिया है। राष्ट्रीय फुले बिग्रेड संयुक्त माली समाज के प्रदेश अध्यक्ष विनोद माली के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के 8 जिल व 6 प्रांत के अध्यक्षों ने दिल्ली पंहुचकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पंवार एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत, केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले के दिल्ली निवास पर पंहुचकर ज्ञापन दिया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली एवं अन्य प्रदेशों के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे।


          महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। उनकी माता का नाम चिमणाबाई तथा पिता का नाम गोविन्दराव था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले माली का काम करता था। वे सातारा से पुणे, फूल लाकर फूलों के गजरे आदि बनाने का काम करते थे, इसलिए उनकी पीढ़ी 'फुले' के नाम से जानी जाती थी।


          ज्योतिबा बहुत बुद्धिमान थे। उन्होंने मराठी में अध्ययन किया। 1840 में ज्योतिबा का विवाह सावित्रीबाई से हुआ था। फुले एक समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें 'महात्मा फुले' एवं 'ज्योतिबा फुले' के नाम से जाना जाता है। महात्मा फुले जाति से माली थे। सितम्बर 1873 में इन्होने महाराष्ट्र में 'सत्य शोधक समाज' नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं व दलितों के उत्थान के लिय इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गो को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेद-भाव के विरुद्ध थे। इनका मूल उद्देश्य स्त्रीयों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा है। महात्मा फुले समाज की कुप्रथा, अंधश्रद्धा के जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे, अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने स्त्रीयों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया। 19वीं सदी में स्त्रीयों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। महात्मा फुले जी महिलाओ को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचना चाहते थे, उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे में बनाई, स्त्रीयों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से महात्मा फुले जी बहुत व्याकुल और दुखी होते थे, इसलिए उन्होंने दृढ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदल लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले जी को स्वतः शिक्षा प्रदान की। सावित्रीबाई फुले जी भारत की प्रथम महिला अध्यापिका थी।


          ज्ञापन में कार्यकर्ता प्रमुख ने बताया कि फुले दंपत्ति ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए। महात्मा ज्योति बा फुले और सावित्री देवी फुले ने शिक्षा को माध्यम बनाकर गरीब पिछड़े आदिवासियों के जीवन में ज्योत जगाई। उनके इस अनुकरणीय कार्य के लिये फुले दंपत्ति को अतिशीघ्र भारत रत्न प्रदान करने की मांग की गई।