गिलक्रिस्ट ने हरभजन को सबसे कठिन गेंदबाजों में से एक बताया


                    पूर्व ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट का मानना है कि हरभजन सिंह ऐसे गेंदबाजों में से एक हैं, जिनका सामना करने में उन्हें हमेशा परेशानी हुई। गिलक्रिस्ट ने अपने 48वें जन्मदिन से पहले क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया वेबसाइट को दिए एक इंटरव्यू में कहा- हरभजन उनने करियर के लिए 'अभिशाप' की तरह थे। उन्होंने भारत के खिलाफ साल 2001 में हुई सीरीज को भी याद किया। तब ऑस्ट्रेलियाई टीम लगातार 15 टेस्ट जीतकर भारत पहुंची थी। मुंबई में सीरीज के पहले टेस्ट में भारत को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद टीम इंडिया ने अगले दोनों टेस्ट में जीत हासिल की थी। हरभजन ने तीन मैचों में 32 विकेट लिए थे। 18 साल पहले हुई इस ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज को खासतौर पर ईडन गार्डन्स में खेले गए टेस्ट मैच के लिए याद किया जाता है। सीरीज के दौरान मुंबई में हुए पहले टेस्ट मैच में गिलक्रिस्ट ने शतक लगाया था, लेकिन अगले दो मैचों में वे कुछ खास नहीं कर सके। हर बार उन्हें हरभजन ने उन्हें आउट किया था।


'पहले मैच के बाद लगा था सबकुछ आसान है' : क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया वेबसाइट ने गिलक्रिस्ट के हवाले से लिखा, ''99 रन पर हमारे 5 विकेट गिर चुके थे। इसके बाद मैं खेलने उतरा और 80 गेंदों पर सौ रन बनाए। हम तीन दिनों में ही जीत गए। फिर मैंने सोचा ये लोग (भारतीय टीम) पिछले 30 सालों से क्या कर रहे हैं। ये कितना आसान है, लेकिन मैं पूरी तरह गलत था। सच्चाई से मेरा सामना जल्द ही अगले टेस्ट मैच के दौरान हो गया। सीरीज के अंत तक हमें समझ आ चुका था कि सिर्फ अटैल की रणनीति हमेशा काम नहीं करती। हरभजन हमें बुरी तरह नुकसान पहुंचा चुके थे। मेरे पूरे करियर के दौरान वे मेरे लिए अभिशाप की तरह रहे। मेरी नजर में हरभजन और मुरलीधरन दो ऐसे गेंदबाज हैं, जिनका सामना करने में शायद मुझे सबसे ज्यादा परेशानी हुई।''


कोलकाता में भारत ने फॉलोऑन के बाद की थी वापसी : ईडन गार्डन्स, कोलकाता टेस्ट के दौरान भारत को फॉलोऑन खेलने पर मजबूर होना पड़ा था। पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के 445 रन के जवाब में सौरव गांगुली की कप्तानी वाली भारतीय टीम 171 रन पर सिमट गई थी। दूसरी पारी में भारतीय सलामी जोड़ी के आउट होने के बाद वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने 376 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की। इसकी बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासित जीत दर्ज कर ली। तब लक्ष्मण ने 281 रन बनाए थे, जो उस वक्त टेस्ट क्रिकेट में किसी भी भारतीय बल्लेबाज का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था।