आज की बात आपके साथ - विजय निगम

प्रिय साथियो,


🌻राम-राम🌻 
🌻 नमस्ते🌻


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक  01 अप्रेल 2020 बुधवार चैत्रिय नवरात्रि की महाअष्टमीदिवस 21दिवसीय लॉक डाऊन के 8वे दिन तथा 1अप्रेल अप्रैल फूल दिवस की प्रातः की बेला मेंआप सभी को बधाई।  हार्दिक वंदन है। अभिनन्दन है।


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     🌻आज की बात आपके साथ 🌻
                   अंक मे है 


A कुछ रोचक समाचार 
B आज के दिन जन्मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवारका  जीवन परिचय लेख. ।
Cआज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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🎂 (A) कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)
🌻(A/1)(A/1)महाराष्ट्र ने सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन में कटौतीकी घोषणा की,।
🌻(A/2)आज है महाअष्टमी,जानिएआज
के दिन कैसे करे पूजा,क्या हैविधि🌻
 🌻(A/3) क्यों 1अप्रैल को ही मनाया जाता है मूर्ख दिवस हैहैप्पीअप्रैल फुल दिवस  2020: जानें आखिर क्यों?
🌻(A/4)पीएम नरेंद्रमोदी ने कोरोना वाय
रसके खिलाफ लड़ाई में दान के लिए "मेहनती खिलाड़ी" का धन्यवाद किया🌻
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 🌻(A)कुछ रोचक समाचार(विस्तृत)🌻
🌻(A/1)महाराष्ट्र ने सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन में कटौतीकी घोषणा की,🌻 
महाराष्ट्र ने सरकारीकर्मचारियों के लिए वेतन में कटौती
की घोषणा की।
जिसके तहत मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री 60% वेतन कटौती लेंगे। हालाँकि, कटौती आवश्यक सेवाओं में शामिल लोगों पर लागू नहीं होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र से कहा कि जिन प्रवासियों को अपने लंबे सफर के घर पर रोका गया और कोरोनोवायरस लॉकडाउन के बीच आश्रयों में भेजा गया, उन्हें सभी धर्मों के नेताओं से भोजन, चिकित्सा सहायता और परामर्श मिलना चाहिए। अदालत ने कहा कि हम आप पर आरोप लगाना चाहते हैं कि आतंक वायरस से ज्यादा जीवन नष्ट कर देगा।
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दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन मरकज़ - प्रार्थना और सभाओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक इमारत - को केंद्र द्वारा 25 से अधिक लोगों द्वारा एक सभा में भाग लेने के बाद COVID -19 के लिए सकारात्मक परीक्षण के बाद एक वायरस "हॉटस्पॉट" घोषित किया गया था।  
300 से अधिक लोगों ने बीमारी के लक्षण दिखाए हैं और तब्लीगी जमात के 1200 से अधिक सदस्यों - धार्मिक समूह ने इस महीने की शुरुआत में इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।
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दिल्ली धार्मिक आयोजन में भाग लेने वाले लोगों के लिए असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में खोज जारी है।
महाराष्ट्र में, अब तक केवल एक व्यक्ति पाया गया है, जो दिल्ली में धार्मिक आयोजन में भाग लेने वाले लोगों से जुड़ा हुआ है। व्यक्ति फिलीपींस का नागरिक है।
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आज, केंद्र ने कहा कि लगभग 6 लाख प्रवासी श्रमिकों को समायोजित करने के लिए 21,000 से अधिक सुविधाएं राज्यों में तैयार की गई हैं। इसके अलावा, देश के 23 लाख स्थानों से जरूरतमंदों को भोजन वितरित किया जा रहा है। 
गोवा में, जहां लोगों को कई दिनों तक भोजन या पानी तक पहुंच नहीं थी, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि उन्होंने किराना आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने के लिए थोक विक्रेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि पशुओं के चारे की समस्या भी हल हो गई है।
गोवा के मुख्यमंत्री ने भी कहा कि लगभग 7,000 से 8,000 समुद्री जहाज जहाजों पर फंस गए हैं। सरकार उनके मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रही है और दो दिनों के भीतर फैसला लेगी।     
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🌻(A/2)आज है महाअष्टमी,जानिए आजकेदिन कैसे करे पूजा,क्या हैविधि🌻 
🌻सौभाग्य प्राप्‍ति और सुहाग कीरक्षा🌻 
मंगलकामना लेकर मां को चुनरी भेंट करने का भी इस दिन विशेष महत्व है।
महा अष्टमी के दिन होती है महा गौरी की पूजा, ऐसे करें देवी मां को प्रसन्न
इस सालचैत्र नवरात्रि की शुरुआत25 मार्च से हुई है। 9 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार मेंमां दुर्गा के9 रूपोंकीपूजा-अर्चना
होती है। चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन यानि कि अष्टमी को दुर्गा मां के महागौरी रूप की पूजा की जाती है। इस बार अष्टमी 1 अप्रैल को है, इस दिन भक्त देवी की पूजा के बाद कन्या पूजन भी करते हैं। मां महा
गौरी परम कल्याणकारी और मंगलकारी हैं।ये ममता की मूरत हैं और भक्तोंकी सभी जरूरतों को पूरा करने वाली हैं। महागौरी कीअराधना करने से पूर्व जन्म के पाप नष्ट होते हैं। इसके साथ ही इस जन्म के दुख, दरिद्रता और कष्ट भी मिट जाते हैं। आइए जानते हैं कि महा अष्टमी पर कैसे कीजानी चाहिए देवी मां की पूजा- लॉकडाउन में ऐसे करें कन्‍या पूजन और चैत्र नवरात्र के व्रत का समापन
देश भर में चैत्र नवरात्र की धूम है, लेकिन कोरोनावायरस के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से लोग न तो मंदिर जा पा रहे हैं औरन इसबार घर पर कन्‍याओंकोआमंत्रित
कर उनका पूजन कर सकते हैं।.
घर में बंद रहते हुए भी आप कन्‍या पूजन कर सकते हैं
 चैत्र नवरात्रि के आखिरी दो द‍िनों में कन्या पूजन का व‍िशेष महत्‍व है. अष्टमी  और नवमी के दिन कन्‍या पूजन या कंजक पूजा बेहदशुभ माना जाता है।नवरात्रि के दौरान पूजी जानेवाली इन कन्‍याओं को दुर्गामाता 
का ही अलग-अलग रूप माना जाता है.। कन्याओं को हलवा, पूरी और चने काभोग लगाने के साथ-साथ उन्हें भेंट देकर विदा किया जाता है. लेकिन इस बार आप पहले की तरह कन्‍या पूजन नहीं कर पाएंगे. वजह है कोरोनावायरस  के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए देश भर में लगाया गया 21 दिनों का लॉकडाउन. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपिछले हफ्ते देश व्‍यापी लॉकडाउन  की घोषणा की थी तभी उन्‍होंने साफ कर दिया था कि "आपके घर के सामने एक लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है. इस लक्ष्मण रेखा का हर हाल में पालन करना है." यानी किआप और बार की तरह इस बार कन्‍या पूजन के लिए कन्‍याओं को घर पर नहीं बुलासकते तोक्‍या इस बार हमें कन्‍यापूजन 
नहीं करना चाहिए? जवाब है कन्‍या पूजन करेंगे लेकिन थोड़ा अलग तरीके से विधि-
विधान संपन्‍न किया जाएगा. 
          🌻कन्‍या पूजन कब है?🌻
चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्‍टमी और नौवें दिन नवमी मनाई जाती है।इस बार अष्‍टमी1अप्रैल कोहैजबकि नवमी 2अप्रैल
को मनाई जाएगी।इसी दिन राम नवमी का त्‍योहार भी है।आप अपनी सुविधानुसार अष्‍टमी या नवमी में से कोई भी एक दिन चुन सकते हैं।. लॉकडाउन के दौरान कैसे करें कन्‍या पूजन ध्‍यान रहे कि कन्‍या पूजन से पहलेघरमेंसाफ-सफाई हो जानीचाहिए. 
-    🌻अष्‍टमी के दिन कन्‍या पूजन🌻
 के दिन सुबह-सवेरे स्‍नान कर भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें.
- अगर नवमी के दिन कन्‍या पूजन कर रहे हैं तो भगवान गणेश की पूजा करने के बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा करें.
- लॉकडाउन के चलते कन्‍याओं को घर पर नहीं बुलाया जा सकता. ऐसे में आप अपनी बेटी या घर में मौजूद भतीजी की पूजा कर सकते हैं. ध्‍यान रहे कि कन्‍या की आयु 10 वर्ष से ऊपर नहीं होनी चाहिए.  
अगर आपके घर में कोई बालक हैतोकन्‍या
पूजन मेंउसेभी बैठाएं.दरअसल,बालक को बटुकभैरव के रूप में पूजाजाता है.मान्‍यता है किभगवान शिव नेहरशक्ति पीठ में माता की सेवा के लिए बटुक भैरव को तैनात किया हुआ है. कहा जाता है किअगरकिसी
शक्‍ति पीठ में मां के दर्शन के बाद भैरव के दर्शननकिए जाएं तो दर्शनअधूरे मानेजाते हैं.
- घर की बेटी या भतीजी को आसन पर बैठाने से पहले जय माता दी का जयकारा लगाएं.
- अब कन्‍या को बैठने के लिए आसन दें
- अब उनके पैर धोएं. 
- अब उन्‍हें रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाएं. 
- इसके बाद उनके हाथ में मौली बाधें. 
- अब उन्‍हें घी का दीपक दिखाकर उनकी आरती उतारें. 
- आरती के बाद खाने के लिए पूरी, चना और हलवा दें.
- भोजन के बाद उन्‍हें यथाशक्ति भेंट और उपहार दें.
- इसके बाद उनके पैर छूएं.
घर में न हो बेटी तो ऐसे करें कन्‍या पूजन
अगर आपके घर में बेटी या भतीजी नहीं है तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है. अष्‍टमी या नवमी में से जिस भी दिन आप कन्‍या पूजन करना चाहते हैं उस दिन इस तरह आप विधि-विधान पूरा कर सकते हैं:
- कन्‍या पूजन के दिन सुबह-सवेरे उठकर घर की साफ-सफाई करें. 
- अब स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें. 
- इसके बाद भोग तैयार करें. शगुन के लिए हल्‍वा, पूरी और चने बनाएं. ध्‍यान रहे इस भोग की मात्रा उतनी ही रखें जितना क‍ि परिवार के सदस्‍य ग्रहण कर सकते हों. 
- माता रानी के लिए ऐसा प्रसाद भी तैयार करें जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके. जैसे कि मेवे, मखाने, शक्‍करपारे आदि. 
- अब घर के मंदिर में ही माता रानी की विधिवत पूजा करें. 
- माता रानी की आरती उतारें और भोग लगाएं. 
- अब सूखे भोग के 10 अलग-अलग पैकेट (9 पैकेट कन्‍याओं के और 1 बटुक भैरव रूपी बालक के लिए) बनाकर रख लें. 
- इन पैकेट के साथ यथाशक्ति भेंट भी रखें. 
- अब घर के सभी सदस्‍यों में प्रसाद बांट कर व्रत का पारण करें.
- बाद में जब लॉकडाउन खत्‍म हो जाएगा और स्थिति सामान्‍य हो जाएगी तब आप इन पैकेट्स को कन्‍याओं में बांट सकते हैं. 
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🌻(A/3) क्यों 1अप्रैल को ही मनाया जाता है मूर्ख दिवस हैहैप्पीअप्रैल फुल दिवस  2020: जानें आखिर क्यों? 
1 अप्रैल यानी मूर्ख दिवस, इस तारीख की इसी खास दिन से अलग पहचान है। दुनिया के ज्यादातर देशों में इस  अप्रैल फुल दिवस के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन सभी एक दूसरे को मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं। भारत में भी अप्रैल फुल दिवस यानि मूर्ख दिवस मनाया जाता है। आमतौर पर इस दिन दोस्त, साथी एक दूसरे को मूर्ख बनाने का मौका तलाशते हैं। इस दिन गंभीर बातों पर को लेकर भी लोग उसकी सच्चाई जानने तक सतर्क रहते हैं कि कहीं कोई उन्हें उल्लू तो नहीं बना गया। आमतौर पर इस दिन मिलने वाली किसी सूचना या बात को अक्सर हल्के में लिया जाता है। आखिर क्यों होता है ऐसा और जानें कि आखिर कब से शुरू हुई 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाने की शुरुआत..
19वीं सदी से है प्रचलित
19वीं सदी से ही 1 अप्रैल को अप्रैल फुल दिवस यानि मूर्ख दिवस के तौर पर मनाने की परंपरा चली आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्योफ्री चौसर द्वारा 1392में लिखी गई किताब कैंटरबरी टेल्स में 1 अप्रैल और बेवकूफी के बीच संबंध स्थापित किया गया था। ऐसे में साफ है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। चौसर की किताब दरअसल एक कहानियों का संग्रह थी। इसमें एक कहानी है जिसमें इसका जिक्र होना बताया गया है।
फ्लेमिश कवि एडवर्ड डे डेने ने 1539 में एक ऐसे ऑफिसर के बारे में लिखा था जिसने अपने नौकरों को एक मूर्खतापूर्ण यात्रा पर 1 अप्रैल को भेजा था। इसके अलावा 1968 में जॉन औब्रे ने 1 अप्रैल को अप्रैल फुल दिवस कहा था क्योंकि इसी दिन बहुत से लोगों को बेवकूफ बनाकर लंदन के टॉवर पर इकट्ठा किया गया था।यह भी माना जाता है कि एप्रिल फुल मनाने  की प्रेरणा रोमन त्योहार हिलेरिया से ली गई है। इसके अलावा भारतीय त्योहार होली और मध्यकाल का बेवकूफों की दावत भी इसकी प्रेरणा माने जाते हैं।
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🌻(A/4)पीएम नरेंद्रमोदी ने कोरोना वाय
रसके खिलाफ लड़ाई में दान के लिए "मेहनती खिलाड़ी" का धन्यवाद किया🌻
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पीएम-कार्स फंड में उनके योगदान के लिए खेल बिरादरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
 रोहित शर्मा ने मंगलवार को 80 लाख रुपये के कोरोनावायरस रिलीफ फंड दान किए।
                🌻हाइलाइट🌻
1पीएम नरेंद्र मोदी ने खेल बिरादरी के प्रति आभार व्यक्त किया
2पीएम मोदी एथलीटों को पीएम-कार्स फंड में योगदान देते हुए देखकर खुश हुए
3रोहित शर्मा ने विभिन्न COVID-19 राहत कोषों के लिए 80 लाख रुपये का दान दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पीएम-कार्स फंड में उनके योगदान के लिए खेल बिरादरी के प्रति आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने 28 मार्च को प्रधानमंत्री के नागरिक सहायता और आपात स्थिति में राहत (पीएम-CARES) फंड बनाया था और देशवासियों से अपील की थी कि वे इसका समर्थन करें। शरद कुमार, रोहित शर्मा, राष्ट्रीय चैंपियन ईशा सिंह और महिला क्रिकेटर मिताली राज जैसी कई खेल हस्तियों ने योगदान के लिए अपना योगदान दिया।
"मुझे बहुत खुशी है कि हमारे मेहनती खिलाड़ी COVID-19 को हराने के लिए लड़ाई में सबसे आगे हैं। मैं PM-CARES में उनके योगदान के लिए  धन्यवाद देना चाहूंगा।" पीएम मोदी ने ट्वीट किया।
रोहित शर्मा ने मंगलवार को दुनिया भर में कहर बरपा रही महामारी से लड़ने के लिए विभिन्न सीओवीआईडी ​​-19 राहत कोषों में 80 लाख रुपये का दान दिया । 
दाएं हाथ के बल्लेबाज ने ट्विटर पर यह घोषणा करने के लिए कहा कि उन्होंने क्रमशः पीएम-कार्स फंड और मुख्यमंत्री राहत कोष (महाराष्ट्र) को 45 लाख रुपये और 25 लाख रुपये दान किए हैं। उन्होंने "ज़ोमैटो फीडिंग इंडिया" को 5 लाख रुपये भी दिए हैं, जो चल रहे राष्ट्रीय तालाबंदी से प्रभावित परिवारों की मदद कर रहा है, सोमवार को, भारतीय महिला एकदिवसीय टीम की कप्तान मिताली राज ने पीएम-केआरईएस फंड और तेलंगाना के मुख्यमंत्री फंड में से प्रत्येक को 5 लाख रुपये दिए थे।
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🌻(B)आज दिन जन्मे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन परिचय लेख।🌻


  🎂 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक   
    🎂डॉ केशव राव बलीराम हेडगेवार   


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार  का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था | वह बचपन से ही क्रांतिकारी प्रवृति के थे और उन्हें अंग्रेज शासको से घृणा थी | अभी स्कूल में ही पढ़ते थे कि अंग्रेज इंस्पेक्टर के स्कूल में निरिक्षण के लिए आने पर केशव राव  ने अपने कुछ सहपाठियों के साथ उनका “वन्दे मातरम” जयघोष से स्वागत किया जिस पर वह बिफर गया और उसके आदेश पर केशव राव को स्कूल से निकाल दिया गया | तब उन्होंने मैट्रिक तक अपनी पढाई पूना के नेशनल स्कूल में पूरी की |
नाम:-            डॉ॰केशवराव बलिराम 
                    हेडगेवार 
जन्म;-          1 अप्रैल 1889
जन्मस्थान;   -नागपुर, भारत
मृत्यु:-          21जून1940 (उम्र 51)
मृत्युस्थल:;   नागपुर, भारत
1910 में जब डॉक्टरी की पढाई के लिए कोलकाता गये तो उस समय वहा देश की नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़ गये । 
1915 में नागपुर लौटने पर वह कांग्रेस में सक्रिय हो गये व कुछ समयमेंविदर्भप्रांतीय 
कांग्रेस के सचिव बन गये 1920 में जब नागपुरमें कांग्रेस का देश स्तरीय अधिवेशन हुआतो डा.केशव राव हेडगेवारनेकांग्रेस में पहलीबार पूर्ण स्वतंत्रता को लक्ष्य बनानेके 
बारे में प्रस्ताव प्रस्तुत किया तो तब पारित 
नही किया गया 1921में कांग्रेस केअ-सह
-योगआन्दोलन में सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दीऔर उन्हें एक वर्ष की जेल हुयी । तब तक वह इतनेलोकप्रिय होचुके थेकिउनकी
रिहाई पर उनके स्वागत के लिए आयोजित सभा को पंडित मोतीलाल नेहरु व हकीम अजमलखा जैसेदिग्गजों ने संबोधित किया 
कांग्रेस में पुरी तन्मन्यता के साथ भागीदारी और जेल जीवन के दौरान जोअनुभव पाए उससे वहयह सोचनेको प्रवृत हुएकिसमाज 
में जिस एकता धुंधली पड़ी देशभक्ति की भावना के कारण हम परतंत्र हुए है वह केवल कांग्रेस के जन आन्दोलन से जागृत और पृष्ट नही हो सकती | जन-तन्त्र के पर
तंत्रता के विरुद्ध विद्रोह की भावना जगाने का कार्यबेशकचलता रहेलेकिन राष्ट्रजीवन 
में गहरी हुयी विघटन वादी प्रवृति को  दूर करने के लिए कुछ भिन्न उपाय की जरूरत है |डा.केशव राव बलीराम हेडगेवारके इसी चिन्तन एवं मंथन का प्रतिफल थी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नाम से संस्कारशाला के रूपमें शाखा पद्दति की स्थापना जो दिखने में साधारण किन्तु परिणाम में चमत्कारी सिद्ध हुयी1925में विजयदशमी के दिन संघ कार्य की शुरुवात के बाद भी उनका कांग्रेस.व क्रांतिकारीयो के प्रति रुख सकारात्मक रहा | यही कारण था कि दिसम्बर 1930 में जब महात्मा गांधी द्वारा नमक कानून विरोधी आन्दोलन छेड़ा गया तो उसमे भे उन्होंने संघ प्रमुख (सरसंघ चालक) की जिम्मेदारी डा.परापंजे को सौप कर व्यक्तिगत रूप से अपने एक दर्जन सहयोगियों के साथभाग दियाजिसमे उन्हें 9 माह की कैद हुयी |इसी तरह1929 में जब लाहौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन में पूर्व स्वराज का प्रस्ताव पास कियागया और 26 जनवरी1930 को देशभरमेंतिरंगा
फहरानेकाआह्वान किया तो डा.हेडगेवार डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार केनिर्देश
पर सभी संघ शाखाओं में 30 जनवरी को
तिरंगा फहराकर पूर्ण स्वराज प्राप्ति का
संकल्प किया गया |इसी तरहक्रांतिकारीयो
से भी उनके संबध चलते रहे | जब 1928 में लाहौर में उप कप्तान सांडर्स कीहत्या के बाद भगतसिंह ,राजगुरु व सुखदेव फरार 
हुए तो राजगुरु फरारी के दौरान नागपुर में डा हेडगेवार डा.केशव राव बलीराम हेडगे
वार के पासपहुचे थे जिन्होंने उमरेड में एक प्रमुख संघ अधिकारी भय्या जी ढाणी के निवास पर ठहरने की व्वयस्थाकीथी ऐसे युगपुरुष थे डा.हेडगेवार डा. केशव राव
बलीराम हेडगेवार  जिनका जून 1940 को निधन हो गया था किन्तु संघ कार्य अविरल चल रहा है |
डॉ॰केशवराव बलिरामराव हेडगेवार (मराठी: डॉ॰केशव बळीराम हेडगेवार; जन्म : 1 अप्रैल 1889 - मृत्यु : 21 जून 1940) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं प्रकाण्ड क्रान्तिकारी थे।[1] उनका जन्म हिन्दू वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था।[2] घर से कलकत्ता गये तो थे डाक्टरी पढने परन्तु वापस आये उग्र क्रान्तिकारी बनकर। कलकत्ते में श्याम सुन्दर चक्रवर्ती के यहाँ रहते हुए बंगाल की गुप्त क्रान्तिकारी संस्था अनुशीलन समिति के सक्रिय सदस्य बन गये। सन् 1916 के कांग्रेस अधिवेशन में लखनऊ गये। वहाँ संयुक्त प्रान्त (वर्तमान यू०पी०) की युवा टोली के सम्पर्क में आये। बाद में कांग्रेस से मोह भंग हुआ और नागपुर में संघ की स्थापना कर डाली। मृत्युपर्यन्त सन् 1940 तक वे इस संगठन के सर्वेसर्वा रहे।
           💐  संक्षिप्त जीवन परिचय। 💐
डॉ॰ हेडगेवार का जन्म २ अप्रैल, १८८९ को महाराष्ट्र के नागपुर जिले में पण्डित बलिराम पन्त हेडगेवार के घर हुआ था। इनकी माता का नाम रेवतीबाई था। माता-पिता ने पुत्र का नाम केशव रखा। केशव का बड़े लाड़-प्यार से लालन-पालन होता रहा। उनके दो बड़े भाई भी थे, जिनका नाम महादेव और सीताराम था। पिता बलिराम वेद-शास्त्र एवं भारतीय दर्शन के विद्वान थे एवं वैदिक कर्मकाण्ड (पण्डिताई) से परिवार का भरण-पोषण चलाते थे।
                 💐 बडे भाई से प्रेरणा 💐
केशव के सबसे बड़े भाई महादेव भी शास्त्रों के अच्छे ज्ञाता तो थे ही मल्ल-युद्ध की कला में भी बहुत माहिर थे। वे रोज अखाड़े में जाकर स्वयं तो व्यायाम करते ही थे गली-मुहल्ले के बच्चों को एकत्र करके उन्हें भी कुश्ती के दाँव-पेंच सिखलाते थे। महादेव भारतीय संस्कृति और विचारों का बड़ी सख्ती से पालन करते थे। केशव के मानस-पटल पर बड़े भाई महादेव के विचारों का गहरा प्रभाव था। किन्तु वे बड़े भाई की अपेक्षा बाल्यकाल से ही क्रान्तिकारी विचारों के थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि वे डॉक्टरी पढ़ने के लिये कलकत्ता गये और वहाँ से उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से प्रथम श्रेणी में डॉक्टरी की परीक्षा भी उत्तीर्ण की; परन्तु घर वालों की इच्छा के विरुद्ध देश-सेवा के लिए नौकरी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। डॉक्टरी करते करते ही उनकी तीव्र नेतृत्व प्रतिभा को भांप कर उन्हें हिन्दू महासभा बंगाल प्रदेश का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया l[2]
         💐क्रान्ति का बीजारोपण।।💐    
कलकत्ते में पढाई करते हुए उनका मेल-मिलाप बंगाल के क्रान्तिकारियों से हुआ। केशव चूँकि कलकत्ता में अपने बड़े भाई महादेव के मित्र श्याम सुन्दर चक्रवर्ती[3] के घर रहते थे अत: वहाँ के स्थानीय लोग उन्हें केशव चक्रवर्ती के नाम से ही जानते व सम्बोधित करते थे। उनकी असाधारण योग्यता को मद्देनजर रखते हुए उन्हें पहले अनुशीलन समिति का साधारण सदस्य बनाया गया। उसके बाद जब वे कार्यकुशलता की कसौटी पर खरे उतरे तो उन्हें समिति का अन्तरंग सदस्य भी बना लिया गया। उनकी तीव्र नेतृत्व प्रतिभा को देख कर उन्हें हिन्दू महासभा बंगाल प्रदेश का उपाध्यक्ष भी बनाया गया l इस प्रकार क्रान्तिकारियों की समस्त गतिविधियों का ज्ञान और संगठन-तन्त्र कलकत्ते से सीखकर वे नागपुर लौटे।[1]
   💐कांग्रेस और हिन्दू महासभा में भागीदारी💐
सन् 1916 के कांग्रेस अधिवेशन में लखनऊ गये। वहाँ संयुक्त प्रान्त (वर्तमान यू०पी०) कीयुवा टोली केसम्पर्क 
में आये।बाद में आपका कांग्रेस से मोह भंग हुआ और 
नागपुर में संघ की स्थापना की।
      💐लोकमान्य तिलक की मृत्यु के बाद💐    
लोकमान्य तिलक की मृत्यु के बाद केशव कॉग्रेस और
हिन्दू महासभा दोनों में काम करते रहे। गांधीजी के अहिंसक असहयोग आन्दोलन और सविनय अवज्ञा 
आन्दोलनों में भाग लिया, परन्तु ख़िलाफ़त आंदोलन
 की जमकर आलोचना की। ये गिरफ्तार भी हुए और सन् 1922 में जेल से छूटे। नागपुर में 1933 के दंगों के दौरान इन्होंने डॉक्टर मुंजे के साथ सक्रिय सहयोग कियाअगले साल सावरकर के पत्र हिन्दुत्व कासंस्करण 
निकला जिसमें इनका योगदान भी था। इसकी मूल पांडुलिपि इन्हीं के पास थी।
                  💐 व्यक्तित्व व कृतित्व 💐
1921 ई. में अंग्रेजो ने तुर्की को परास्त कर, वहां के सुल्तान को गद्दी से उतार दिया था, वही सुल्तान मुसलमानों के खलीफा/मुखिया भी कहलाते थे, ये बात भारत व अन्य मुस्लिम देशों के मुसलमानों को नागवार गुजरी जिससे जगह-जगह आन्दोलन हुए l हिन्दुस्थान में खासकर केरल के मालाबार जिले में आन्दोलन ने उग्र रूप ले लिया l
1922 ई. में भारत के राजनीतिक पटल पर गांधी के आने के पश्चात ही मुस्लिम सांप्रदायिकता ने अपना सिर उठाना प्रारंभ कर दिया। खिलाफत आंदोलन को गांधी जी का सहयोग प्राप्त था - तत्पश्चात नागपुर व अन्य कई स्थानों पर हिन्दू, मुस्लिम दंगे प्रारंभ हो गये तथा नागपुर के कुछ हिन्दू नेताओं ने समझ लिया कि हिन्दू एकता ही उनकी सुरक्षा कर सकती है। ऐसी स्थिति में कई हिंदू नेता केरल की स्थिती जानने एवं वहां के लूटे पिटे हिंदुओं की सहायता के लिए मालाबार-केरल गये, इनमें नागपुर के प्रमुख हिंदू महासभाई नेता डॉ॰ बालकृष्ण शिवराम मुंजे, डॉ॰ हेडगेवार, आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद जी आदि थे, उसके थोड़े समय बाद नागपुर तथा अन्य कई शहरों में भी हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए l ऐसी घटनाओं से विचलित होकर नागपुर में डॉ॰ मुंजे ने कुछ प्रसिद्ध हिंदू नेताओं की बैठक बुलाई, जिनमें डॉ॰ हेडगेवार एवं डॉ॰ परांजपे भी थे, इस बैठक में उन्होंने एक हिंदू-मिलीशिया बनाने का निर्णय लिया, उद्देश्य था “हिंदुओं की रक्षा करना एवं हिन्दुस्थान को एक सशक्त हिंदू राष्ट्र बनाना”l इस मिलीशिया को खड़े करने की जिम्मेवारी धर्मवीर डॉ॰ मुंजे ने डॉ॰ केशव बलीराम हेडगेवार को दी l
डॉ॰साहब ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने व्यक्ति की क्षमताओं को उभारने केलिये नये-नये तौर-तरीके विकसित किये। हालांकि प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की असफल क्रान्ति और तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक अर्ध-सैनिक संगठन की नींव रखी। इस प्रकार 28/9/1925 (विजयदशमी दिवस) को अपने पिता-तुल्य गुरु डॉ॰बालकृष्ण शिवराम मुंजे,उनकेशिष्य 
डॉ॰हेडगेवार,श्री परांजपे और बापू साहिबसोनी ने एक
हिन्दूयुवक क्लब की नींव डाली जिसका नाम कालांतर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ दिया गया l
यहाँ पर उल्लेखनीय है कि इस मिलीशिया का आधार बना -वीर सावरकर का राष्ट्र दर्शन ग्रन्थ (हिंदुत्व)जिसमे
हिंदू की परिभाषायह की गई थीआ सिंधु-सिंधु पर्यन्ता, यस्य भारत भूमिका l पितृभू-पुण्यभू भुश्चेव सा वै हिंदू रीती स्मृता ll
इस श्लोक के अनुसार “भारत के वह सभी लोग हिंदू हैं जो इस देश को पितृभूमि-पुण्यभूमि मानते हैं”l इनमे सनातनी, आर्यसमाजी, जैन, बौद्ध, सिख आदि पंथों एवं धर्म विचार को मानने वाले व उनका आचरण करने वाले समस्त जन को हिंदू के व्यापक दायरे में रखा गया था l मुसलमान व ईसाई इस परिभाषा में नहीं आते थे अतः उनको इस मिलीशिया में ना लेने का निर्णय लिया गया और केवल हिंदुओं को ही लिया जाना तय हुआ, मुख्य मन्त्र थाअस्पष्टतानिवारण एवं हिंदुओं कासैनिकी 
कारण”lऐसी मिलीशियाको खड़ा करने के लिए स्वंय
सेवको की भर्ती की जाने लगी, सुबह व शाम एक-एक घंटे की शाखायें लगाई जाने लगी| इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षक, मुख्य शिक्षक, घटनायक आदि पदों का सृजन किया गया l इन शाखाओं में व्यायाम, शारीरिक श्रम, हिंदू राष्ट्रवाद की शिक्षा के साथ- साथ वरिष्ठ स्वंयसेवकों को सैनिक शिक्षा भी दी जानी तय हुई l बाद में यदा कदा रात के समय स्वंयसेवकों की गोष्ठीयां भी होती थी, जिनमें महराणा प्रताप, वीर शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, बंदा बैरागी, वीर सावरकर, मंगल पांडे, तांत्या टोपे आदि की जीवनियाँ भी पढ़ी जाती थीं l वीर सावरकर द्वारा रचित पुस्तक (हिंदुत्व) के अंश भी पढ़ कर सुनाये जाते थे lथोड़े समय बाद
 इस मिलीशियाको नाम दियागया राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ- जो आर.एस.एस. के नाम से प्रसिद्ध हुआ प्रार्थना भी मराठी की बजाय संस्कृत भाषा में होने लगी l वरिष्ठ स्वंयसेवकों के लिए ओ.टी.सी. कैम्प लगाये जाने लगे, जहाँ उन्हें अर्धसैनिक शिक्षा भी दी जाने लगी l इन सब कार्यों के लिए एक अवकाश प्राप्त सैनिक अधिकारी श्री मार्तंड राव जोग की सेवाएं ली गईं lसन् 1935-36 तक ऐसीशाखाएं केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित थी व
 इसके स्वंयसेवकों की संख्या कुछ हज़ार तक ही थी, पर सरसंघचालक और स्वंयसेवकों का उत्साह देखने लायक था l स्वयं डॉ॰ हेडगेवार इतने उत्साहित थे कि अपने एक उदबोधन में उन्होंने कहा की:-
“संघ के जन्मकाल के समय की परिस्थिति बड़ी विचित्र सी थी, हिंदुओं का हिन्दुस्थान कहना उस समय निरा पागलपन समझा जाता था और किसी संगठन को हिंदू संगठन कहना देश द्रोह तक घोषित कर दिया जाता था” l (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ तत्व और व्यवहार पृष्ठ 64)डॉ॰ हेडगेवार ने जिस दुखद स्थिति को व्यक्त किया
,उसमें नवसर्जित राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और हिंदू महा
सभा के नेतृत्व के प्रयास से- हिंदू युवाओं में साहस के साथ यह नारा गूंजने लगा “हिन्दुस्थान हिंदुओं का- नहीं किसी के बाप का”इस कथन की विवेचना डॉ॰हेडगेवार
ने इन शब्दों में की:-
कई सज्जन यह कहते हुए भी नहीं हिचकिचाते की हिन्दुस्थान केवल हिन्दुओ का ही कैसे?यह तो उनसभी 
लोगों का है जो यहाँ बसते हैं l खेद है की इस प्रकार का कथन/आक्षेप करने वाले सज्जनों को राष्ट्र शब्द का अर्थ ही ज्ञात नहीं l केवल भूमि के किसी टुकड़े को राष्ट्र नहीं कहते l एक विचार-एक आचार-एक सभ्यता एवं परम्परा में जो लोग पुरातन काल से रहते चले आए हैं उन्हीं लोगों की संस्कृति से राष्ट्र बनता है l इस देश को हमारे ही कारण हिन्दुस्थान नाम दिया गया है l दूसरे लोग यदि समोपचार से इस देश में बसना चाहते हैं तो अवश्य बस सकते हैं l हमने उन्हें न कभी मना किया है न करेंगे l किंतु जो हमारे घर अतिथि बन कर आते हैं और हमारे ही गले पर छुरी फेरने पर उतारू हो जाते हैं उनके लिए यहाँ रत्ती भर भी स्थान नहीं मिलेगा l संघ की इस विचारधारा को पहले आप ठीक ठाक समझ लीजिए l” (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पृष्ठ 14)
एक अन्य अवसर पर डॉ॰ हेडगेवार ने कहा था “संघ तो केवल, हिन्दुस्थान हिंदुओं का- इस ध्येय वाक्य को सच्चा कर दिखाना चाहता है l” दूसरे देशों के सामान, “यह हिंदुओं का होने के कारण”- इस देश में हिंदू जो कहेंगे वही पूर्व दिशा होगी (अर्थात वही सही माना जाएगा) l यही एक बात है जो संघ जानता है, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ताओं के लिए किसी भी अन्य पचड़े में पड़ने की आवश्कता नहीं है l”(तदैव पृष्ठ 38)
जब वीर सावरकर रत्नागिरी में दृष्टि बंद (नजरबंद) थे, तब डॉ॰ हेडगेवार वहां उनसे मिलने गये। तब तक वह वीर सावरकर रचित पुस्तक हिन्दुत्व भी पढ़ चुके थे। डॉ॰ हेडगेवार उस पुस्तक के विचारों से बहुत प्रभावित हुए और उसकी सराहना करते हुए बोले कि “वीर सावरकर एक आदर्श व्यक्ति है”।
दोनों (सावरकर एवं हेडगेवार) का विश्वास था कि जब तक हिन्दू अंध विश्वास, पुरानी रूढ़िवादी सोच, धार्मिक आडम्बरों को नहीं छोडेंगे तब तक हिन्दू-जातीवाद, छूत-अछूत, शहरी-बनवासी और छेत्रवाद इत्यादि में बंटा रहेगा और जब तक वह संगठित एवं एक जुट नहीं होगा, तब तक वह संसार में अपना उचित स्थान नहीं ले सकेगा।
सन् 1937 में वीर सावरकर की दृष्टिबंदी (नजरबंदी) समाप्त हो गयी और उसके बाद वे राजनीति में भाग ले सकते थे। उसी वर्ष वे हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गये जिसके उपाध्यक्ष डॉ॰ हेडगेवार थे। 1937 में हिन्दू महासभा का अधिवेशन कर्णावती (अहमदाबाद) में हुआ। इस अधिवेशन में वीर सावरकर के अध्यक्षीय भाषण को “हिन्दू राष्ट्र दर्शन” के नाम से जाना जाता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापकों में से दो मुख्य व्यक्ति डॉ॰ मुंजे एवं डॉ॰ हेडगेवार हिन्दू महासभाई थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वीर सावरकर द्वारा प्रतिपादित हिन्दू एवं हिन्दू राष्ट्रवाद की व्याख्या को ही अपना आधार बनाया था, साथ ही वीर सावरकर के मूलमंत्र- अस्पर्श्यता निवारण और हिन्दुओं के सैनिकीकरण आदि सिद्धांत को मान्य किया था l
इसी परिपेक्ष्य में हिन्दू महासभा ने भी उस समय एक प्रस्ताव पास कर अपने कार्यकर्ताओ एवं सदस्यों को निर्देश दिया कि वे अपने बच्चों को संघ की शाखा में भेजें एवं संघ के विस्तार में सहयोग दें। आर.एस.एस. की विस्तार योजना के अनुसार उसके नागपुर कार्यालय से बड़ी संख्या में युवक, दो जोड़ी धोती एवं कुर्ता ले कर संघ शाखाओ की स्थापना हेतु दिल्ली, लाहौर, पेशावर, क्वेटा, मद्रास, गुवाहाटी आदि विभिन्न शहरों में भेजे गये।
दिल्ली में पहली शाखा हिन्दू महासभा भवन, मंदिर मार्ग नयी दिल्ली के प्रांगण में हिन्दू सभाई नेता प्राध्यापक राम सिंह की देख रेख में श्री बसंत राव ओक द्वारा संचालित की गयी। लाहौर में शाखा हिन्दू महासभा के प्रसिद्द नेता डॉ॰ गोकुल चंद नारंग की कोठी में लगायी जाती थी, जिसका संचालन श्री मुले जी एवं धर्मवीर जी (जो महान हिन्दू सभाई नेता देवता स्वरुप भाई परमानन्द जी के दामाद थे) द्वारा किया जाता था। पेशावर में आर.एस.एस. की शाखा सदर बाजार से सटी गली के अंदर हिन्दू महासभा कार्यालय में लगायी जाती थी जिसकी देख रेख श्री मेहर चंद जी खन्ना- तत्कालिक सचिव हिन्दू महासभा करते थे।
वीर सावरकर के बड़े भाई श्री बाबाराव सावरकर ने अपने युवा संघ जिसके उस समय लगभग 8,000 सदस्य थे ने, उस संगठन को आर.एस.एस. में विलय कर दिया। वीर सावरकर के मित्र एवं हजारों ईसाईयों को शुद्धि द्वारा दोबारा हिन्दू धर्म में लाने वाले संत पान्च्लेगाँवकर ने उस समय अपने 5,000 सदस्यों वाले संगठन “मुक्तेश्वर दल” को भी आर.एस.एस. में विलय करा दिया। उद्देश्य था कि हिन्दुओ का एक ही युवा शक्तिशाली संगठन हो। इस प्रकार संघ की नीतियों, पर हिंदू महासभा व वीर सावरकर के हिन्दुवाद का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था l
इस तरह डॉ॰ हेडगेवार के कुशल निर्देशन, हिन्दू महासभा के सहयोग एवं नागपुर से भेजे गये प्रचारकों के अथक परिश्रम एवं तपस्या के कारण संघ का विस्तार होता गया और 1946 के आते-आते संघ के युवा स्वयंसेवकों की संख्या करीब सात लाख हो गयी। उन प्रचारको की लगन सराहनीय थी। इनके पास महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, गुरु गोविन्द सिंह, बन्दा बैरागी की जीवनी की छोटी छोटी पुस्तके एवं वीर सावरकर द्वारा रचित पुस्तक हिंदुत्व रहती थी।
1938 में वीर सावरकर दूसरी बार हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गये और यह अधिवेशन नागपुर में रखा गया। इस अधिवेशन का उत्तरदायित्व पूरी तरह से आर.एस.एस. के स्वयंसेवको द्वारा उठाया गया। इसका नेतृत्व उनके मुखिया डॉ॰ हेडगेवार ने किया था। उन्होंने उस अवसर पर वीर सावरकर के लिए असीम श्रद्धा जताई।पूरे नागपुर शहर में एक विशाल जलूस निकाला गया, जिसमे आगे-आगे श्री भाऊराव देवरस जो आर.एस.एस. के उच्चतम श्रेणी के स्वयंसेवक थे, वे हाथी पर अपने हाथ में भगवा ध्वज ले कर चल रहे थे।
हैदराबाद (दक्षिण) के मुस्लिम शासक निजाम ने वहाँ के हिन्दुओ का जीना दूभर कर रखा था। यहाँ तक कि कोई हिन्दू मंदिर नहीं बना सकता था और यज्ञ आदि करने पर भी प्रतिबन्ध था। 1938 में आर्य समाज ने निजाम हैदराबाद के जिहादी आदेशो के विरुद्ध आन्दोलन करने की ठानी। गाँधीजी ने आर्य समाज को आन्दोलन ना करने की सलाह दी। वीर सावरकर ने कहा कि अगर आर्य समाज आन्दोलन छेड़ता है तो हिन्दू महासभा उसे पूरा-पूरा समर्थन देगी।
आंदोलन चला, लगभग 25,000 सत्याग्रही देश के विभिन्न भागों से आये। निजाम की पुलिस और वहाँ के रजाकारो द्वारा उन सत्याग्रहियों की जेल में बेदर्दी से पिटाई की जाती थी। बीसियों सत्याग्रहियों की रजाकारों की निर्मम पिटाई से मृत्यु तक हो गयी। इन सत्याग्रहियों में लगभग 12,000 हिन्दू महासभाई थे। वीर सावरकर ने स्वयं पूना जा कर कई जत्थे हैदराबाद भिजवाये। पूना से सबसे बड़ा जत्था हुतात्मा नाथूराम गोडसे के नेतृत्व में हैदराबाद भिजवाया, इनमे हिन्दू महासभा कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त संघ के भी कई स्वयंसेवक थे। इस तरह 1940 तक- जब तक डॉ॰ हेडगेवार जीवित थे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हिन्दू महासभा का युवा संगठन ही माना जाता था।
धर्मवीर डाक्टर मुंजे और वीर सावरकर के सान्निध्य में डाक्टर हेडगेवार ने भारत की गुलामी के कारणों को बडी बारीकी से पहचाना और इसके स्थाई समाधान हेतु संघ कार्य प्रारम्भ किया। इन्होंने सदैव यही बताने का प्रयास किया कि नई चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें नये तरीकों से काम करना पड़ेगा और स्वयं को बदलना होगा, अब ये पुराने तरीके काम नहीं आएंगे। डॉ॰साहब 1925 से 1940 तक, यानि मृत्यु पर्यन्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक रहे। 21 जून,1940 को इनका नागपुर में निधन हुआ। इनकी समाधि रेशम बाग नागपुर में स्थित है, जहाँ इनका अंत्येष्टि संस्कार हुआ था।
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     💐(C) आज के दिन की  प्रमुख घटनाएं 💐
 1582-पोप चार्ल्स नवम ने पुराने कैलेंडर की जगह नया रोमन कैलेंडर शुरू किया।
1793-जापान में उनसेन ज्वालामुखी में विस्फोट से 53 हजार लोगों की मौत।
1867-सिंगापुर, पेनांग और मलक्का क्षेत्र ब्रिटेन के उपनिवेश बने।
1878-कलकत्ता (अब काेलकाता) संग्रहालय की नयी इमारत को जनता के लिए खोला गया।
1881-यरुशलम में यहूदियों के खिलाफ दंगा भड़का।
1889- डाॅ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म जिन्होंने बाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की।
1891-ब्रिटेन की राजधानी लंदन और फ्रांस की राजधानी पेरिस के बीच दूरभाष संपर्क शुरु।
1912-दिल्ली को भारत की राजधानी बनाकर इसे प्रांत घोषित किया गया।
1930-देश में विवाह के लिए लड़कियों की न्यूनतम उम्र 14 और लड़कों की 18 वर्ष तय की गई।
1931-निकारागुआ के मानागुआ क्षेत्र में भूकंप से दो हजार लोगों की मौत।
1933- अविभाजित भारत के कराची में भारतीय वायु सेना की स्थापना की गयी।
1935-भारतीय रिर्जव बैंक की स्थापना की गई।
1936-उड़ीसा (अब ओडिशा) को बिहार से अलग कर एक नया राज्य बनाया गया।
1969-भारत का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन महाराष्ट्र के तारापुर क्षेत्र में शुरु।
1976-दूरदर्शन को रेडियो से अलग करके दूरदर्शन कॉर्पोरेशन की स्थापना हुयी।
1987- भारतीय मानक ब्यूरो का नाम भारतीय मानक संस्थान किया गया।
2001-नीदरलैंड समलैंगिक विवाह को कानूनी तौर पर अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।
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     💐(D) आज के दिन  जन्मे प्रमुख व्यक्ति  💐
1621: सिखों के नवें गुरु गुरु तेग बहादुर का जन्म हुआ.।
1889: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बालीराम हेडगेवार का जन्म हुआ.।
1891: भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्राण कृष्ण पारिजा का जन्म हुआ।.
1937: भारत के 13वें उपराष्ट्रपति रहे मोहम्मद हामिद अंसारी का जन्म हुआ.।
1941: भारतीय क्रिकेटर अजीत वाडेकर का जन्म हुआ.।
1984: भारतीय क्रिकेटर मुरली विजय का जन्म हुआ.
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  💐(E) आज के दिन  निधन हुवे प्रमुख व्यक्तित्व 💐
1907: आधुनिक गुजराती साहित्य के कथाकार तथा इतिहासकार गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी का निधन हुआ था.
1977: भारत और पाकिस्तान के बीच रैडक्लिफ़ नाम की विभाजन रेखा तैयार करने वाले सर सिरिल रैडक्लिफ़ का निधन हुआ.
2010: पर्सनल कम्प्यूटर (पीसी) के युग की शुरुआत करने वाले हेनरी एडवर्ड रॉबर्ट्स का निधन हुआ था.
2015: हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार कैलाश वाजपेयी का निधन हुआ था।.
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              💐 ( F) आज का दिवस का नाम 💐
   आज अन्तर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस है/ साथ ही आज
  01अप्रैल 2020 चैत्र नवरात्रि का महाष्टमी दिवस है।
 1. सिखों के नवें गुरु गुरु तेग बहादुर की जयंती दिवस     
 2.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव       
   बालीराम हेडगेवार की जयंती दिवस
3. भारत के 13वें उपराष्ट्रपति रहे मोहम्मद हामिद     
   अंसारी की जयंती दिवस
4. जाने माने भारतीय क्रिकेटर अजीत वाडेकर की   
   जयंती दिवस
5.आधुनिक गुजराती साहित्य के कथाकार तथा 
  इतिहासकार गोवर्धनराम माधवराम त्रिपाठी की 
  पुण्यतिथि दिवस  
6.हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार कैलाश वाजपेयी की
   पुण्यतिथि दिवस
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    आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐