आज की बात आपके साथ - विजय निगम

10 अप्रैल 2020 
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प्रिय साथियो। 
🌹राम-राम🌹 
🌻 नमस्ते।🌻


       आज की बातआपके साथ मे आप सभी साथीयों का दिनांक 10 अप्रैल 2020  शुक्रवार  की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
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आज की बात आपके साथ  अंक मे है 
 A कुछ रोचक समाचार
B आज के दिन जन्मे  घनश्याम् दास बिरला जीवन परिचय  लेख. 
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण    
    व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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                 A कुछ रोचक समाचार(संक्षिप्त)
 💐   (A/1) जया बच्चन जन्मदिन स्पेशल ;-कल दिनांक 09 अप्रैल 2020 को जय बच्चन जी का 72 वा जन्मदिन था।जानिए10 अनसुनी कहानियां।💐 
💐(A/2) क्या आप जानते हैं ? रामायण धारावाहिक में  अरुण गोविल की जगह डुप्लीकेट एक्टर ने भी राम की भूमिका कई बार निभाई है।
💐(A/3 कोविड-19 से निपटने के लिए मोदी सरकार की तैयारी, बनाया तीन चरणों वाला प्लान💐
💐(A/4)💐मध्य प्रदेश में लॉकडाउन परअभीफैसला नहीं💐         
💐🎂💐@🎂💐🎂💐🎂💐🎂💐🎂💐🎂💐        💐  A कुछ रोचक समाचार (विस्तृत)💐
💐(A/1) जया बच्चन जन्मदिन स्पेशल ;-कल दिनांक 09 अप्रैल 2020 को जय बच्चन जी का 72 वा जन्म
दिन था।जानिए10 उनकी अनसुनी कहानियां।💐
💐बीटिया की बात सुन रो पड़ी थीं जया बच्चन और छोड़ दी एक्टिंग,💐
कलाकार एक लेकिन नाम अनेक। हर किरदार में अपनी छाप छोड़ देने वाली अभिनेत्री जया भादुड़ी, जो बाद में जया बच्चन बनीं, हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। सत्यजीत रे और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे गुणी निर्माता, निर्देशकों ने उनके हुनर को दूर से देखकर ही पहचान लिया था। ये उन गिने-चुने कलाकारों में से रहीं जिन्होंने फिल्मों के साथ राजनीति में भी बराबर नाम कमाया। फिल्मों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने नौ फिल्म फेयर पुरस्कार जीते, जिसमें तीन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और तीन सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार शामिल हैं।
जया बच्चन का जन्म 9 अप्रैल 1948 को जबलपुर, मध्य प्रदेश में हुआ। इनके पिता तरुण कुमार भादुड़ी एक मशहूर लेखक और कवि थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई लिखाई भोपाल के ही सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल में हुई। पिता एक लेखक थे इसलिए घर में माहौल पढ़ाई लिखाई का ही था और अक्सर बातें भी साहित्य और कला की हुआ करती थीं। इसलिए जया का रुझान शुरुआत से ही कला में रहा।
जया के पिता एक दिन उन्हें एक फिल्म की शूटिंग दिखाने ले गए। वहां जया को अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने देखा। उस वक्त फिल्म निर्माता सत्यजीत रे अपनी फिल्म के लिए एक ऐसी लड़की की तलाश कर रहे थे, जो उनकी फिल्म में एक खास किरदार निभा सके। उनके सामने शर्मिला टैगोर ने जया का नाम लिया। सत्यजीत रे की फिल्म 'महानगर' के किरदार में जया एकदम फिट बैठ गईं, और यहां से शुरू हुआ उनका अभिनय का सिलसिला। 
इस फिल्म को करने के बाद जया के घर में उनके आगे के करियर को लेकर खूब सलाह मशविरा किया गया। अंत में फैसला किया गया कि अब जया को अभिनय की पढ़ाई ही कराई जाए। तब उन्हें एफटीआईआई भेजा गया। इनकी कला को देखकर एफटीआईआई में उन्हें स्वर्ण पदक से नवाजा गया। अभी इनके पढ़ाई पूरी भी नहीं हुई थी, कि उससे पहले महान निर्माता-निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी एफटीआईआई पहुंच गए। और उन्होंने प्रिंसिपल से बात करके जया को अपनी फिल्म में लेने की बात कही। यहीं से जया को फिल्म 'गुड्डी' में काम मिला।
उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री के हालात बदल रहे थे। 'गुड्डी' में पहले अमिताभ बच्चन को बतौर मुख्य अभिनेता लिया गया था, लेकिन जब निदेशक ऋषिकेश मुखर्जी को लगा कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की कला व्यर्थ जाएगी। इसलिए उन्होंने इस फिल्म से अमिताभ को बाहर करना ही मुनासिब समझा। अमिताभ बच्चन को इस फिल्म से निकाल दिया गया। और यहां अमिताभ और जया का मिलन नहीं हो पाया। उस वक्त अमिताभ फिल्म 'आनंद' में काम कर रहे थे।
अभिनेता संजीव कुमार के साथ जया बच्चन का बहुत गहरा नाता रहा है। उन्होंने उनके साथ फिल्म 'अनामिका' में काम किया। उसके बाद फिर 'कोशिश' भी की। संजीव कुमार अपने परिचय में हमेशा कहा करते थे कि फिल्म 'अनामिका' में जया मेरी हीरोइन बनीं, 'कोशिश' में मेरी पत्नी, 'शोले' में मेरी बहू और 'परिचय' में मेरी बेटी बनीं। बस एक ही ख्वाहिश बाकी है कि किसी फिल्म में मैं जया के बेटे का किरदार निभाऊं।
जया बच्चन और अमिताभ बच्चन के मिलन का एक किस्सा बहुत मशहूर रहा है। जब जया एफटीआईआई में पढ़ती थीं, उस समय ऋषिकेश मुखर्जी के साथ अमिताभ बच्चन भी एफटीआईआई गए थे। वहां जया ने पहली बार अमिताभ बच्चन को देखा था। उस वक्त जया ने अपनी सहेलियों से कहा था, कि इस लड़के में कुछ तो अलग बात है, क्योंकि इसकी आंखों में बहुत गहराई है। कुछ लोग तो यहां तक मानते हैं कि जया और अमिताभ का वही पहली नजर का प्यार था।
वर्ष 1973 में नए अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ कोई भी हीरोइन काम करने के लिए तैयार नहीं थी। कहा जाता था कि यह तो पहले से ही फ्लॉप हो चुका है। बाद में जया ने अपने कदम बढ़ाए और उन्होंने उनके साथ फिल्म 'जंजीर' में काम करने की ठानी। इस फिल्म को करते हुए दोनों ने फैसला किया था, कि अगर यह फिल्म हिट होगी तो वे छुट्टी मनाने विदेश जाएंगे। फिल्म तो सुपरहिट हुई, लेकिन इन दोनों को छुट्टी मनाने की इजाजत नहीं मिली। इनके घर वालों ने कहा था कि अगर तुम्हें छुट्टी मनानी हैं, तो पहले शादी करो और फिर विदेश जाओ।
फिल्म 'शोले' के दौरान जया गर्भवती थीं। पेट में इनकी पहली संतान श्वेता बच्चन थी। इसके बाद उन्होंने अभिषेक बच्चन को जन्म दिया। उस समय जया फिल्म सिलसिला में काम कर रही थीं, तब इनकी छोटी सी बेटी श्वेता ने कहा कि आप हमारे साथ घर पर क्यों नहीं रहती? काम सिर्फ पापा को करने दीजिए। इस बात ने जया को हिला कर रख दिया। तभी उन्होंने फैसला किया कि अब वे फिल्मों में काम नहीं करेंगी। और उसके बाद जया ने फिल्मों से किनारा कर लिया।
फिल्मों से लंबा ब्रेक लेने के बाद जया 1998 में फिल्म 'हजार चौरासी की मां' में नजर आईं। इसके बाद उन्होंने फिल्म 'फिजा', 'कभी खुशी कभी गम', 'लागा चुनरी में दाग' में भी काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने राजनीति की तरफ अपना रुख किया, और समाजवादी पार्टी की सदस्य बनीं। वे राजनीति में भी खूब सक्रिय रहती हैं। दादी और नानी का फर्ज निभाने के साथ ही वे समाज सेविका का पूरा फर्ज अदा करती हैं।
वर्ष 2008 में फिल्म 'द्रोणा' के म्यूजिक लांच पर इन्हें एक भाषण देना था। फिल्म के निर्देशक ने इनका भाषण अंग्रेजी में तैयार किया था, लेकिन उन्होंने कहा, 'हम यूपी के लोग हैं, इसलिए हिंदी में बात करेंगे। महाराष्ट्र के लोग माफ कीजिए।' उनके इस वक्तव्य से बहुत विवाद खड़ा हुआ था। एमएनएस के मुखिया राज ठाकरे ने इन्हें माफी मांगने पर मजबूर भी किया। अंत में जया के बदले उनके पति अमिताभ बच्चन ने माफी मांगी
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💐(A/2) क्या आप जानते हैं ? रामायण धारावाहिक में  अरुण गोविल की जगह डुप्लीकेट एक्टर ने भी राम की भूमिका कई बार निभाई है।
रामानंद सागर की रामायण में कई छोटे किरदारों में दिखे असलम खान इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं. असलम खान ने महाभारत में वानर से लेकर राक्षस तक के रोल्स किए. लेकिन क्या आप जानते हैं वे रामायण में राम का किरदार भी अदा कर चुके हैं.
ये खुलासा खुद असलम खान ने किया है. उनका कहना है कि रामानंद सागर की रामायण में अरुण गोविल की गैरमौजूदगी में वे डुप्लीकेट राम की भूमिका निभाते थे.
मीडिया से बातचीत में असलम खान ने शूटिंग के दौरान का ये किस्सा साझा किया. उन्होंने कहा- जब कभी भी अरुण गोविल सेट पर नहीं होते थे. फिर कई बार सेट पर लोगों की बहुत भीड़ होती थी. इस बीच खबर आती थी कि राम नहीं आ रहे हैं. सभी परेशान हो जाते थे.
फिर डुप्लीकेट राम को तैयार किया जाता था. होता ये था कि मैं राम का पूरा गेटअप पहनता था. राम के ज्यादातर लॉन्ग शॉट फिर मुझपर फिल्माए जाते थे.
असलम खान का कहना है कि वे ऐतिहासिक शो रामायण का हिस्सा बनकर काफी खुश हैं. उन्हें किसी से कोई भी नाराजगी नहीं है. असलम ने बताया कि सेट पर सभी लोग परिवार की तरह काम करते थे
          💐कैसे चर्चा में आए असलम खान?💐
दरअसल, रामायण के री-टेलीकास्ट के बाद असलम के बेटे ने एक पोस्ट शेयर कर लिखा था- मुझे काफी गर्व है कि दूरदर्शन पर रामायण का फिर से टेलीकास्ट हो रहा है. मेरे पिता सर असलम खान ने इस शो में कई बड़े सपोर्टिंग रोल्स निभाए. रामायण की टीम को बेहद शुक्रिया।
इसके बाद से असलम खान कौन हैं, ये जानने के लिए लोग बेताब होने लगे. सोशल मीडिया पर असलम के रामायण में निभाए कई सीन्स वायरल होने लगे. उन्हें लेकर ढेरों मीम्स बनने लगे.
असलम खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक्टिंग में रुचि नहीं थी. उनका पहला शो विक्रम बेताल था. जिसमें उन्होंने छोटी सी भूमिका निभाई थी. इसके बाद रामानंद सागर ने उन्हें रामायण में लिया
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💐(A/3 कोविड-19 से निपटने के लिए मोदी सरकार की तैयारी, बनाया तीन चरणों वाला प्लान💐


 राज्य सरकारों की ओर से कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए केंद्र से स्पेशल पैकेज की लगातार मांग की जा रही है।
कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा
मोदी सरकार ने बनाई तीन चरणों की रणनीति
देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. मोदी सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. अब कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने तीन चरणों वाली रणनीति बनाई है.।
केंद्र ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के लिए राज्यों को पैकेज जारी किया है. इस पैकेज को इमरजेंसी रिस्पॉन्स एंड हेल्थ सिस्टम प्रेपेअरनेस पैकेज का नाम दिया गया है. ये पैकेज 100% केंद्र की ओर से फंडेड है. केंद्र का अनुमान है कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लंबी चलेगी. वहीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई चिट्ठी के मुताबिक प्रोजेक्ट के तीन चरण हैं-
पहला चरण- जनवरी 2020 से जून 2020
दूसरा चरण-जुलाई 2020 से मार्च 2021
तीसरा चरण-अप्रैल 2021 से मार्च 2024
पहले चरण में Covid-19 अस्पताल विकसित करने, आइसोलेशन ब्लॉक बनाने, वेंटिलेटर की सुविधा के ICU बनाने, PPEs (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स)- N95 मास्क- वेंटिलेटर्स की उपलब्धता पर फोकस रहेगा.
लैब नेटवर्क्स और डायग्नोस्टिक सुविधाएं बनाने पर ध्यान दिया जाएगा. साथ ही फंड का इस्तेमाल सर्विलांस, महामारी के खिलाफ जागरूकता जगाने में भी किया जाएगा. फंड का एक हिस्सा अस्पतालों, सरकारी दफ्तरों, जनसुविधाओं और एम्बुलेंस को संक्रमण रहित बनाने पर भी खर्च किया जाएगा
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💐(A/4)💐मध्य प्रदेश में लॉकडाउन परअभीफैसला नहीं💐
शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि केंद्र सरकार ने परिस्थितियों को देखते हुए संकेत दिए थे, लेकिन मध्य प्रदेश में लॉकडाउन खत्म करने का अभी फैसला नहीं हुआ है। इस संबंध में अधिकारियों एवं समाज के विभिन्न वर्गो की राय ले रहे हैं। कुछ दिन में जैसी स्थिति रहेगी, उसके अनुसार फैसला करेंगे। इंदौर और भोपाल की जोस्थिति लग रही हैउसे देखते हुए लॉकडाउनयका
यक हटाना मुश्किल लग रहा है।यदि एकदमलॉकडाउन
खोला गया तो कोरोना का खतरा और बढ़ सकता है।, तब उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।हमारे लिए सबसे जरूरी लोगों की जान बचाना है।
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🌻(B)आजकेदिनजन्मे प्रसिद्धउध्योगपती
 घनश्यामदास बिड़लाका जीवन परिचय लेख🌻


प्रसिद्ध उध्योगपती घनश्यामदास बिड़ला


जन्म:10 अप्रैल1894, पिलानी,राजस्थान
निधन: 11 जून, 1983, मुंबई, महाराष्ट्र
कार्यक्षेत्र: उद्योगपति, बी. के. के. एम.     
       बिड़ला समूह के संस्थापक
घनश्यामदासबिड़लाभारतके प्रसिद्धउद्योग
पति व बिड़लासमूह के संस्थापक थे उनके
द्वारा स्थापित बी. के.के.एम. बिड़ला समूह की परिसंपत्तियाँ लगभग 195 अरब रुपये से अधिक है।स्वाधीनताआन्दोलन केसमय भी उनका अमूल्य योगदान रहा। स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान उन्होंने पूंजीपतियों से राष्ट्रीयआन्दोलनका समर्थन करने वकांग्रेस
को मज़बूत करने की गुज़ारिश की। घनश्याम दास ने सविनय अवज्ञाआन्दोलन
का समर्थन किया और राष्ट्रीयआन्दोलन के लिए अनेक मौकों पर आर्थिक सहायताभी
दी।इसके साथ ही सामाजिक कुरीतियों का भी विरोध कियाऔर सन 1932 मेंगांधीजी
के नेतृत्व में हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष बने।वे महात्मा गाँधी केकरीबी मित्र,सलाह
कार एवं सहयोगी थे। उनके द्वारा स्थापित बिड़ला समूह का मुख्य व्यवसाय कपड़ा, विस्कट फ़िलामेंट यार्न, सीमेंट, रासायनिक पदार्थ, बिजली, उर्वरक, दूरसंचार, वित्तीय सेवा और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों में फैला है। देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए भारत सरकार ने सन् 1957 में उन्हें पद्म विभूषण कीउपाधिसे सम्मानितकिया। वे भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) के भी सह-संस्थापक थे। यह संस्था भारत के व्यापारिक संगठनों का संघ है।
               🌻प्रारंभिक जीवन🌻
घनश्यामदास बिड़ला का जन्म 10 अप्रैल, 1894 में राजस्थान के पिलानी गाँव में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके दादा शिव नारायण बिड़ला ने मारवाड़ी समुदाय के पारंपरिक व्यवसाय ‘साहूकारी
/गिरवी’ से हटकर अलग क्षेत्रों में व्यापार का विकासकिया था।घनश्यामदास केपिता 
बलदेवदास(जो नवलगढ़ बिरला परिवार से गोद लिए हुए दत्तक पुत्र थे)ने अपनेभतीजे
फूलचंद सोधानी के साथ मिलकर अफीम के व्यवसाय में पैसा कमाया था।इसी व्यव
-साय में घनश्यामदास के बड़े भाई जुगल किशोर ने भी नाम कमाया।घनश्यामदास
का विवाह सन 1905 में दुर्गा देवी के साथ करा दिया गया। दुर्गा देवी महादेव सोमानी की पुत्री थीं जो पिलानी के पास के चिरावा गांव केनिवासीथे।बिड़ला परिवार कीभांति घनश्यामदास के ससुर महादेव सोमानी भी व्यवसाय के लिए कोलकाता चले गए थे। सन1909 में दुर्गादेवीने एक पुत्री को जन्म दिया जिसकानाम लक्ष्मी निवास रखागया। लगभगइसी समयदुर्गा देवी टी.बी.सेपीड़ित
हो चुकी थीं और सन 1910 में इस रोग से उनकीमृत्यु होगयी।1912 में घनश्यामदास
बिड़ला नेअपने ससुर एम.सोमानी कीमदद 
से दलाली का व्यवसाय शुरू कर दिया।
सन 1912 में घनश्यामदासने महेश्वरी देवी से पुनर्विवाह कर लिया। इस विवाह से बिड़लादंपत्ति केपांच संताने(दोपुत्र –कृष्ण
कुमार और बसंत कुमार और तीनपुत्रियाँ चन्द्रकला देवी,अनसुइयादेवी,व महेश्वरी) हुईं। दुर्भाग्यवस महेश्वरी देवी को भी क्षय रोग हो गया। घनश्यामदास ने अपनी पत्नी सहित सभीबच्चों को स्वास्थ्य लाभ केलिए
एक निजी चिकित्सक कीदेख-रेख में हिमा
-चल प्रदेश स्थित सोलनभेज दिया पर महेश्वरी देवी बच नहीं पायीं और 6 जनवरी 1926 को परलोक सिधार गयीं। हालाँकि घनश्यामदास की उम्र इस समय महज 32 साल थीपर उन्होंने दोबाराविवाह नहींकिया औरलालन-पालन के लिए अपने चारबच्चों
को छोटे भाई ब्रिज मोहन बिड़ला के पास भेज दिया औरदो पुत्रियों कोअपने बड़ेभाई रामेश्वर दास बिड़ला के पास भेजा।
    🌻व्यापार और उद्योग का विस्तार🌻
घनश्यामदास को पारिवारिक व्यापार और उद्योग विरासत में मिला जिसका विस्तार उन्होंनेअलगअलग क्षेत्रों में किया।वेपरिवार
के परंपरागत‘साहूकारीव्यवसायकोनिर्माण
 केक्षेत्र में मोड़नाचाहते थे इसलिए वे कोल
काता चले गए।वहां जाकरउन्होंने एक जूट कंपनी की स्थापना की क्योंकि बंगाल जूट का सबसे बड़ा उत्पादक था। वहां पहले से ही स्थापित यूरोपियऔर ब्रिटिशव्यापारियों
को घनश्यामदास से घबराहटहुई तो उन्होंने अनैतिक तरीके सेउनका व्यापार बंदकराने 
की कोशिश की पर घनश्याम दास भी धुन के पक्के थेऔरदांते रहे।प्रथम विश्व युद्ध के दौरानजब समूचे ब्रिटिशसाम्राज्य मेंआपूर्ति की कमी होने लगी तब बिड़ला का व्यापार खूब फला-फूला।सन 1919 में उन्होंने 50 लाख की पूँजी से ‘बिड़ला ब्रदर्स लिमिटेड’ की स्थापना की और उसी साल ग्वालियर में एक मिल की भी स्थापना की गयी।
             💐  बिड़ला परिवार💐
बिड़ला परिवार भारत के सबसे बड़े व्याव
-सायिक एवं औद्योगिक परिवारों में से एक है।इस परिवार के अधीन वस्त्र उद्योग,आटो
मोबाइल्स,सूचनाप्रौद्योगिकीआदि हैंबिड़ला
परिवार भारत के स्वतंत्रतासंग्राम कानैतिक
एवंआर्थिक रूप से समर्थन किया।इस परि
वार की गांधीजी के साथ घनिष्ट मित्रता थी।बिड़ला समूह के संस्थापक बलदेवदास
बिड़ला थे जो राजस्थानके सफलमारवाड़ी 
समुदाय के सदस्य थे।उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दिनों में वे अपना पारिवारिक व्यव
-साय आरम्भ करने के लिये कोलकाता चले आये और उस समय चल रहे भारत के स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन के साथ निकट से जुड़ गये।
            🌻स्वतंत्रता आन्दोलन🌻
घनश्याम दास बिड़ला एक सच्चे स्वदेशी और स्वतंत्रताआंदोलन के कट्टर समर्थकथे तथ महात्मा गांधी की गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने के लिये तत्पर रहतेथे। इन्होंने पूंजीपतियों से राष्ट्रीय आन्दोलन का
समर्थन करने एवं कांग्रेस के हाथ मज़बूत करने की अपील की।इन्होंनेसविनयअवज्ञा
आन्दोलन का समर्थनकिया। इन्होंने राष्ट्रीय आन्दोलन के लिए आर्थिक सहायता दी। इन्होंने सामाजिक कुरीतियों का भी विरोध किया तथा 1932 ई. में हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष बने
            🌻बिड़ला उद्योग समूह🥀
30 वर्ष की आयु तक पहुँचने तकघनश्याम
दास बिड़ला काऔद्योगिक साम्राज्यअपनी जड़ेंजमा चुका था।बिड़ला एक स्व-निर्मित
व्यक्ति थे और अपनी सच्चरित्रता तथा ईमानदारी के लिये विख्यात थे। ये बिड़ला समूह केप्रमुख व भारत केअग्रणी उद्योग
पतियों में थे। बिड़ला उद्योग समूह जिसका नेतृत्व उनके बेटे कर रहे हैं, इसका व्यापार दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीका में भी फैलाहुआहै।इन्होंनेअनेकवैज्ञानिक,धार्मिक
,शैक्षणिक तथा औद्योगिक संस्थाओं की स्थापना की।


🌻बिरला प्रौद्योगिकी वं विज्ञानसंस्थान🌻


बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (BITS), भारतवर्ष के सबसे पुराने और अग्रणी प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है। पिलानी (राजस्थान) के अलावा बिट्स के कैम्पस गोआ, हैदराबाद और दुबई में भी हैं । यह संस्थान पूर्णतः स्ववित्तपोषित और आवासीय है। बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी की स्थापना घनश्याम दास बिड़ला के द्वारा 1929 में एक इंटर कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के समय, भारत सरकार के रक्षा सेवाओं और उद्योग के लिए तकनीशियनों की आपूर्ति के लिए पिलानी में एक तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की। 1946 में, यह बिरला इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री कार्यक्रमों से परिवर्तित कर दिया गया। इसके अलावा हिन्दुस्तान टाइम्स एवं हिन्दुस्तान मोटर्स (सन् 1942) की नींव डाली। कुछ अन्य उद्योगपतियों के साथ मिलकर इन्होंने सन् 1927 में 'इण्डियन चैम्बर आफ कामर्स एंड इन्डस्ट्री' की स्थापना भी की थी।
                  🌻कृतियाँ🌻
मरूभूमि का वह मेघ (आत्मकथा लेखक- राम निवास जाजू)
इन्होंने कुछ कृतियाँ भी लिखीजो निम्न
लिखित हैं-
1 रुपये की कहानी
2  बापू
3-जमनालाल बजाज
4 पाथ्स टू प्रोपर्टी 
5 इन द शेडो ऑफ़ द महात्मा 
6आत्मकथा
मरूभूमिकावह मेघनामकपुस्तक घनश्याम
दासबिड़ला कीआत्मकथा हैजोरामनिवास
जाजू नेलिखी है।‘मरुभूमि का वह मेघ’एक
कवि की गद्य-रचना है इसमें कविजनोचित भाव-प्रवणता और लालित्य के सर्वत्र दर्शन होते हैं।यद्यपिलेखकने पुस्तकों,पत्र-पत्रिका
ओं, पुराने पत्राचारों और ताजाभेंटवार्ताओं
से बिड़लाजी यानी जी. डी. बाबू के जीवन के विषयमेंउपलब्ध सारी सूचनाएं क्रमबद्ध 
ढंगऔर कथासुलभ रोचकता से प्रस्तुत कर दी हैं तथापि साधारण जीवन-चरित नहीं है यह तोश्री घनश्यामदास बिड़ला केकई-कई
आयामों वाले व्यक्तित्व पर कई-कई कोणों से नज़रटिकाते हुएउसकीसमग्रता कोअभि
व्यक्ति देने की एक अद्भुद,असम्भवप्राय कोशिश है। लेखक पिछले पचपन साल से बिड़लाओं से समबद्ध रहा है तथापि विष्णु सहस्रनामनहीं श्रीमद्भागवत’ लिखने के संकल्प ने उसे अपने श्रद्धेय पात्र के प्रति वैसी ही तठस्थता प्रदान की है जैसी स्वयं घनश्यामदासबिड़लाने कभी ‘बापू’ कीछवि आँकते हुए प्रदर्शित की थी। हाँ,बिड़लापरि
-वार से निकट का परिचय उसकी कृति को अन्तरंगता का प्रीतिकार स्पर्श दे पाया है।
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  🌻(C)आज के दिन की महत्त्वपूर्ण 
                   घटनाएँ🌻


1816 -संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार ने  में वहां दूसरे बैंक की स्थापना को मंजूरी दी।
1866 -हेनरी बेर्घ ने  में न्यूयॉर्क शहर में पशु क्रूरता निवारण के लिए अमेरिकन सोसायटी की स्थापना की।
1868-इथियोपिया में ब्रिटिश व भारतीय सेना ने  में टेवॉड्रोज़ द्वितीय  की सेना को हराया और इस युद्ध में 700 इथियोपियन मारे गये, जबकि सिर्फ़ दो ब्रिटिश-भारतीय सैनिक शहीद हुए।
1875- स्वामी दयानंद सरस्वती ने  में आर्यसमाज की स्थापना की।
1887-राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को  में स्प्रिंगफील्ड के इलिनोइस में अपनी पत्नी के साथ फिर से दफन किया गया।
1889-राम चंद्र चटर्जी  में गर्म गुब्बारे में उड़ान भरने वाले पहले भारतीय बने।
1912 -टाइटेनिक  में ब्रिटेन के साउथेप्टन बंदरगाह से अपनी पहली और आखिरी यात्रा पर रवाना हुआ।
1916- प्रोफेशनल तरीके से पहले गोल्फ टूर्नामेंट का में आयोजन।
1922  मे ऐतिहासिक जेनेवा सम्मेलन  शुरू।
1930- में पहली बार सिंथेटिक रबक का उत्पादन हुआ।
1938 में  आस्ट्रिया  जर्मनी का एक राज्य बन गया।
1959 में  जापान के तत्कालीन युवराज अाकिहितो ने मिचिको से  शादी की।
1963 में पनडुब्बी “यूएसएस थ्रेशर” के  समुद्र में डूबने से 123 अमेरिकी नाविकों की मौत हो गई।
1972 में ईरान में  आए भूकंप से लगभग 5 हजार लोगों की मौत हो गई।
1982 में भारत का बहुउद्देशीय उपग्रह “इनसेट-1ए” का  सफल प्रक्षेपण।
1998 में उत्तरी आयरलैंड में कैथोलिक एवं प्रोटेस्टेंटों के बीच  समझौता सम्पन्न।
2001 में भारत व ईरान के बीच  तेहरान घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर।
2003 में अमेरिका ने इराक पर कब्जा कर लिया।
2010 में यूरोपीय देश पोलैंड के राष्ट्रपति लेक काजिंस्की का  दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में सवार सभी 96 लोगों की मौत हो गई।
2016 में केरल के कोल्लम जिले के पुत्ति
-लिंग मंदिर में  लगे भीषण आग से करीब 110 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा लोग घायल।
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🌻(D)आज के दिन जन्मे प्रमुख व्यक्तित्व 🌻


1847- में पुलित्जर पुरस्कारों के प्रणेता अमेरिकी पत्रकार एवं प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर का  जन्म।
1880 में  स्वतंत्रता पूर्व भारत के प्रतिष्ठित संपादकों तथा उदारवादी दल के संस्था
पकों में से एक सी. वाई. चिन्तामणि का  जन्म हुआ।
1894- में भारतीय उद्योगपति घनश्याम
दास बिड़ला का  जन्म।
1897- में बंगाल के प्रमुख कांग्रेसी नेता, 
महात्मा गांधी जी के अनुयायी और स्वतं
त्रता सेनानी प्रफुल्लचंद्र सेन का  जन्म।
1928- में  परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक मेजर धनसिंह थापा का  जन्म।
1931- में हिंदुस्‍तानी शास्‍त्रीय परंपरा की प्रमुख गायिकाओं में से एक और जयपुर घराने की अग्रणी गायिका किशोरी अमोनकर का जन्म।
1932- में  बहुमुखी प्रतिभाशाली, अनेक विषयों के विद्वान, विचारक और कवि श्याम बहादुर वर्मा का  जन्म।
1952- में भारतीय राजनेता नारायण राणे का  जन्म।
1986- में भारतीय अभिनेत्री आयशा टाकिया का  जन्म।
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🌻(E)आज के दिन निधन हुवे प्रमुख व्यक्तित्व 🌻
1931- में विश्व के श्रेष्ठ चिंतक महाकवि के रूप में ख्याति प्राप्त करने वाले महान दार्शनिक खलील जिब्रान का निधन।
1984- में उर्दू के सुप्रसिद्द शायर व कवि नाजिश प्रतापगढ़ी का  निधन।
1995- मेंप्रसिद्ध स्वतंत्रतासेनानी व भारत
- रत्न से सम्मानित भारत के छ्ठे प्रधान
मंत्री मोरारजी देसाई का निधन।
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  🌻(F)आज के दिन/उत्सव का नाम🌻


1-भारतीय उद्योगपति घनश्यामदास 
बिड़ला की जयंती दिवस।
2- कवि श्याम बहादुर वर्मा का जयंती दिवस।
3- महान दार्शनिक खलील जिब्रानकी पुण्यतिथि दिवस।
4-भारत के छ्ठे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई
की पुण्यतिथि दिवस।
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      आज की बात -आपके साथ" मे आज    इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तबतक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐


💐  निवेदक;-💐


 💐 चित्रांश ;-विजय निगम।💐


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