आज की बात आपके साथ - विजय निगम

04/03/20 आज की बात 
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प्रिय साथियो।  
🌻राम-राम🌻 ,
🌻 नमस्ते🌻।


 ।🌻। आज की बात आपके साथ।🌻।


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का 
दिनांक   04 मार्च    बुधवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
vBHआज की बात आपके साथ  अंक मे है 


A कुछ रोचक समाचार 
B आज के दिन जन्मे .हिंदी भाषा के साहित्यकार
    फणीश्वर नाथ "रेणु का  जीवन परिचय  लेख. ।
C आज के दिन   की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
D आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
E आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
F आज का दिवस का नाम ।
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                A कुछ रोचक समाचार (संक्षिप्त)
💐(A/1)जानिए कितने रुपये में रखी गई थी टाटा समूह की नींव, आज है समूह की कितनी कीमत💐
💐(A/2)विराट कोहली के लिए बुरा सपना रहा न्यूजीलैंड दौरा, हर मोर्चे पर खाई मात💐
💐(A/3)कैलाश विजयवर्गीय ने 20 साल बाद किया अन्‍न ग्रहण, जानें- क्या था संकल्‍प💐
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               (A) कुछ रोचक समाचार (विस्तृत)
💐(A/1)जानिए कितने रुपये में रखी गई थी टाटा समूह की नींव, आज है समूह की कितनी कीमत💐
नई दिल्ली। एक समय में कहा जाता था कि एक आदमी अपने पूरे जीवन में टाटा कंपनी की न जानें कितनी चीजें इस्तेमाल करता है। शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जिसमें टाटा कंपनी का किसी न किसी तरह से भूमिका न हो। टाटा कंपनी नमक से लेकर देश दुनिया में प्रसिद्ध व्यवसायिक वाहन और शानदार होटलों की चेन बनाने के लिए जानी जा रही है। 18 वीं सदी में गुजरात के एक पारसी परिवार में जमशेदजी का जन्म हुआ था। मात्र 14 साल की उम्र में वो अपने पिता के साथ मुंबई आ गए और यहां व्यवसाय में कदम रखा, व्यवसाय में उन्होंने अपने पिता का साथ देना शुरू किया था। उसके बाद वो लगातार आगे बढ़ते गए।
                      💐प्रारंभिक जीवन💐
जमशेदजी का जन्म 3 मार्च 1839 में दक्षिणी गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा था। उनके पिता का नाम नुसीरवानजी तथा माता का नाम जीवनबाई टाटा था। उनके पिता अपने ख़ानदान में अपना व्यवसाय करने वाले पहले व्यक्ति थे। मात्र 14 साल की आयु में ही जमशेदजी अपने पिता के साथ मुंबई आ गए और व्यवसाय में क़दम रखा था। उसी उम्र में उन्होंने अपने पिता का साथ देना शुरू कर दिया था। जब वे 17 साल के थे तब उन्होंने मुंबई के एलफिंसटन कॉलेज में प्रवेश लिया और दो साल के बाद सन 1858 में ग्रीन स्कॉलर (स्नातक स्तर की डिग्री) के रूप में पास हुए और पिता के व्यवसाय में पूरी तरह लग गए। इसके पश्चात इनका विवाह हीरा बाई दबू के साथ करा दिया गया था।
      💐व्यापार के लिए की विदेश की यात्राएं💐
व्यापार के संबंध में जमशेदजी ने इंग्लैंड, अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों की यात्राएं की। जिससे उनको व्यापार करने के लिए तमाम तरह के आइडिया मिले, इससे उनके व्यापारिक ज्ञान में भी बढ़ोतरी हुई। इन यात्राओं के बाद एक बात ये भी सामने आई कि उन्होंने सोचा कि ब्रिटिश आधिपत्य वाले कपड़ा उद्योग में भारतीय कंपनियां भी सफल हो सकती हैं।
              ---    💐उद्योग में प्रवेश💐
29 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता की कंपनी में काम किया फिर उसके बाद सन 1868 में मात्र 21 हजार की पूँजी लगाकर एक व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित किया। सन 1869 में उन्होंने एक दिवालिया तेल मिल खरीदी और उसे एक कॉटन मिल में तब्दील कर उसका नाम एलेक्जेंडर मिल रख दिया था। लगभग दो साल बाद जमशेदजी ने इस मिल को ठीक-ठाक मुनाफे के साथ बेच दिया और इन्हीं रुपयों से उन्होंने सन 1874 में नागपुर में एक कॉटन मिल स्थापित की। उन्होंने इस मिल का नाम बाद में इम्प्रेस्स मिल कर दिया जब महारानी विक्टोरिया को भारत की रानी का खिताब दिया गया। साल 2015-16 में कंपनी को 103.51 अरब डॉलर का राजस्व मिलता था। ये कंपनी देश की जीडीपी में भी काफी योगदान देती है। 
                💐खड़ा किया साम्राज्य💐
जमशेदजी टाटा भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति तथा औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक थे। भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में जमशेदजी ने जो योगदान दिया वह असाधारण और बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। जब सिर्फ अंग्रेज ही उद्योग स्थापित करने में कुशल समझे जाते थे, जमशेदजी ने भारत में औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया था। टाटा साम्राज्य के संस्थापक जमशेदजी द्वारा किए गये कार्य आज भी लोगों प्रोत्साहित करते हैं। उनके अन्दर भविष्य को देखने की अद्भुत क्षमता थी जिसके बल पर उन्होंने एक औद्योगिक भारत का सपना देखा था। उद्योगों के साथ-साथ उन्होंने विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के लिए बेहतरीन सुविधाएँ उपलब्ध कराई।
                 💐जीवन के बड़े लक्ष्य💐
जमशेद जी के जीवन के बड़े लक्ष्यों एक स्टील कंपनी खोलना, एक विश्व प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र स्थापित करना, एक अनूठा होटल खोलना और एक जलविद्युत परियोजना लगाना शामिल था। हालांकि उनके जीवन काल में इनमें से सिर्फ एक ही सपना पूरा हो सका होटल ताज महल का सपना। बाकी की परियोजनाओं को उनकी आने वाली पीढ़ी ने पूरा किया। होटल ताज महल दिसंबर 1903 में 4 करोड़ 21 लाख रुपये के भारी खर्च से तैयार हुआ। उस समय यह भारत का एकमात्र होटल था जहां बिजली की व्यवस्था थी। भारत में उन दिनों भारतीयों को बेहतरीन यूरोपिय होटलों में घुसने नहीं दिया जाता था। ताजमहल होटल का निर्माण कर उन्होंने इस दमनकारी नीति का करारा जवाब दिया था।
       💐देश के औद्योगिक विकास में योगदान💐
देश के औद्योगिक विकास में जमशेदजी का असाधारण योगदान है। इन्होंने भारत में औद्योगिक विकास की नींव उस समय रखी थी जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था और उद्योग-धंधे स्थापित करने में अंग्रेज ही कुशल समझे जाते थे। भारत के औद्योगीकरण के लिए उन्होंने इस्पात कारखानों की स्थापना की महत्वपूर्ण योजना बनाई। उनकी अन्य बड़ी योजनाओं में पश्चिमी घाटों के तीव्र धाराप्रपातों से बिजली उत्पन्न करने की योजना (जिसकी नींव 8 फरवरी 1911 को रखी गई) भी शामिल है।
          💐व्यवसायिक वाहन बनाने 
                वाली है सबसे बड़ी कंपनी💐
टाटा मोटर्स भारत में व्यावसायिक वाहन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। इसका पुराना नाम टेल्को (टाटा इंजिनीयरिंग ऐंड लोकोमोटिव कंपनी लिमिटेड) था। यह टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों में से एक है। इसकी उत्पादन इकाइयाँ भारत में जमशेदपुर (झारखंड), पुणे (महाराष्ट्र) और लखनऊ (यूपी) सहित अन्य कई देशों में हैं। टाटा घराने द्वा्रा इस कारखाने की शुरुआत अभियांत्रिकी और रेल इंजन के लिए की गई थी। किन्तु अब यह कंपनी मुख्य रूप से भारी एवं हल्के वाहनों का निर्माण करती है। इसने ब्रिटेन के प्रसिद्ध ब्रांडों जगुआर और लैंड रोवर को भी खरीद लिया है।
💐दिग्गज कारोबारी ही नहीं महान राष्ट्रवादी और परोपकारी भी💐
जमशेद जी दिग्गज उद्योगपति के साथ ही बड़ेराष्ट्रवादी
और परोपकारी थेआज भले ही परोपकार याफिलेंथ्रॉपी की कारोबारी दुनिया में गूंज हो लेकिन जमशेद जी के बेटे दोराब टाटा ने 1907 में देश कीपहली स्टीलकंपनी
 टाटा स्टील एंड आयरन कंपनी, टिस्को खोली थी तो यह कर्मचारियों को पेंशन, आवास, चिकित्सा सुविधा और दूसरी कई सहूलियतें देने वाली शायद एक मात्र कंपनी थी। 
     💐विज्ञान के लिए दान कर दी आधी संपत्ति💐
कल्याणकारी कामों और देश को एक बड़ी ताकत बनाने के विजन में वह काफी आगे थे। बेंगलुरू में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना के लिए उन्होंने अपनी आधी से अधिक संपत्ति जिनमें 14 बिल्डिंगें और मुंबई की चार संपत्तियां थीं, दान दे दीं।
        💐जमशेदपुर है उनके विजन का
               जीता  जागता  नमूना💐
सिर्फ फैक्ट्रियां लगाना और उससे कमाई करना ही उनका लक्ष्य नहीं था बल्कि वो एक ऐसा शहर भी बसाना चाहते थे जो एक उदाहरण बनकर रह जाए। उनका विजन क्लीयर था। अगर जमशेद जी का विजन देखना हो तो एक बार झारखंड में जमशेदपुर जरूर देखना चाहिए। टाटानगर के नाम से मशहूर इस शहर को जिस नियोजित तरीके से बसाया गया और कर्मचारियों के कल्याण और सुविधाओं का जिस तरह से यहां ख्याल रखा गया है, वह उस दौर में कल्पना से बाहर की बात थी।
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(A/2)विराट कोहली के लिए बुरा सपना रहा न्यूजीलैंड दौरा, हर मोर्चे पर खाई मात💐


क्राइस्टचर्च, प्रेट्र। न्यूजीलैंड का दौरा भारतीय टीम के लिए बेहद ही मुश्किल माना जा रहा था लेकिन टीम इंडिया इतना बुरा प्रदर्शन करेगी यह किसी ने नहीं सोचा था। इस दौरे पर खेली गई तीन में से दो सीरीज में भारत कोशर्मनाक हार मिली। वनडे और टेस्ट दोनों सीरीज मेंकप्तानविराट कोहलीरन बनाने मेंनाकाम रहे।
भारतीय टीम को पांच मैचों की टी20 सीरीज में जीत मिली और उसके बाद वनडे और टेस्ट में करारी हार का सामना करना पड़ा। दोनों ही सीरीज में न्यूजीलैंड ने भारत का क्लीन स्वीप किया। वनडे में 3-0 और टेस्ट में मेजबान टीम ने भारत को 2-0 से हराया।
   💐कोहली के लिए न्यूजीलैंड दौरा बुरा सपना💐
भारतीय कप्तान विराट कोहली के लिए न्यूजीलैंड दौरा बुरा सपना रहा। चार टी--20, तीन वनडे और दो टेस्ट की कुल 11 पारियों में कोहली के बल्ले से सिर्फ 218 रन ही निकल पाए। वहीं टेस्ट सीरीज में उनका औसत 9.50 का रहा है, जिसमें उन्होंने 2, 19, 3, 14 का स्कोर किया। यह किसी भी सीरीज में उनका दूसरा सबसे खराब औसत है।
  💐कोहली का सबसे खराब औसत 2016--17💐 बॉर्डर--गावस्कर सीरीज में है, जहां उन्होंने पांच पारियों में 9.20 के खराब औसत से मात्र 46 रन बनाए थे। वहीं 10वीं बार घर से बाहर किसी सीरीज में भारतीय कप्तान का औसत 10 से कम का रहा है। इन 10 सीरीज में भारत को नौ में हार मिली जबकि एक सीरीज ड्रॉ रही।
       💐  भारतीय टीम का शर्मनाक प्रदर्शन💐
2002-03 के बाद दो या उससे ज्यादा मैचों की टेस्ट सीरीज में किसी भी भारतीय बल्लेबाज ने शतक नहीं लगाया है। तब से लेकर अब तक भारत ने 60 सीरीज खेली हैं
2011-12 के बाद भारतीय टीम ने दो या उससे ज्यादा टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप झेला है। यह पहली बार है जब भारतीय कप्तान विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने क्लीन स्वीप झेला है
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(A/3)कैलाश विजयवर्गीय ने 20 साल बाद किया अन्‍न ग्रहण, जानें- क्या था संकल्‍प
इंदौर, जेएनएन।भाजपा के राष्‍ट्रीय महासचिव कैलाश
विजयवर्गीय नेहाल ही में 20 वर्षों बादअन्‍न ग्रहणकिया
है। 20 साल पहले महापौर बनने के बाद कैलाशने पितृ पर्वत पर भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित कराने का संकल्प लिया था। उन्होंने  पिछले 20 वर्षों से अन्‍न उनके भोजन का हिस्‍सा नहीं था। लेकिन बताया जाता है कि उन्‍होंने ऐसा संकल्‍प इंदौर के विकास के लिए ही लिया था।असल में, कैलाश विजयवर्गीय सन 2000 में जब इंदौर के महापौर बनें हुए उस समय उन्‍हें किसी संत ने बताया था कि शहर पितृ दोष सेग्रस्‍त है,औरइसी
वजह से इंदौर का विकास अवरुद्ध है। इसके उपाय के तौर पर यह बताया गया किअगर इंदौर क पितृपर्वत पर भगवान श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्‍थापित की जाए तो यह दोष दूर हो सकता है।
💐72 फीट ऊंची, 108 टन वजन की अष्‍टधातु की हनुमान जी की प्रतिमा स्थापना 💐 
भाजपा कैलाश विजयवर्गीय ने अपने जन्‍मस्‍थान इंदौर की उन्‍नति के लिए संकल्‍प लिया कि वह जब तक पितृ पर्वत पर विश्‍व की सबसे ऊंची अष्‍टधातु की प्रतिमा स्‍थापित नहीं कराएंगे तब तक अन्‍न ग्रहण नहीं करेंगे। अब 20 साल बाद जाकर उनका यह संकल्‍प पूरा हुआ है।इंदौर के पितृ पर्वत पर 72 फीट ऊंची108 टनवजन
की अष्‍टधातु की हनुमान जी की प्रतिमा स्‍थापित कर उसकी प्राण प्रतिष्‍ठा की गई। इस पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
💐प्रतिमाकीप्राणप्रतिष्‍ठा के बाद अन्‍न ग्रहणकिया💐
हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा के साथ महामंडलेश्वर जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरीजी महा
राज, संत मुरारी बापू और वृंदावन से महामंडलेश्वर गुरु
शरणानंदजी महाराज की उपस्थितमें कैलाशविजवर्गीय ने 20 साल बाद संकल्‍प पूरा होने परअन्‍न ग्रहणकिया।
   💐20 साल तक फल, साबूदाने व 
                      सवा के चावल  ग्रहण किये💐
लेकिन इन 20 वर्षों में उनके इस संकल्‍प के दौरान उनकी पत्‍नी आशा विजयवर्गीय ने पूरा सहयोग दिया और उन्‍हें फल, साबूदाने, सवा के चावल वगैरह की खाद्य सामग्री खाने के लिए दी। इतना ही नहीं इन 20 वर्षों में कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों का आह्वान किया किवेअपने पूर्वजों की याद में पितृपर्वत पर पेड़ लगाएं। इस तरह दो दशकों में लगभग यहां एक लाख पौधे लगाए गए जो वृक्ष बन चुके हैं।
                💐3 मार्च को विशाल भंडारा💐
कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर कहा कि श्री पितरेश्वर हनुमान जी के इंदौर अागमन की खुशी में सभी इंदौर वासियों का नगरभोज (महाप्रसादी)। आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं। दिनांक -3 मार्च 2020, मंगलवार।  समय शाम पांच बजे से रात्रि 10 बजे तक।स्थानबड़ागणपतिसेपितरेश्वर धाम तक।
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💐A(1/4)कोरोनावायरस चीन में उत्पन्न हुआ और दुनिया भर में तेजी से फैल गया (फाइल)


 


जैसा कि उपन्यास कोरोनोवायरस का प्रकोप दुनिया भर में फैल रहा है, चिकित्सा विशेषज्ञ इस बारे में जागरूकता फैला रहे हैं कि दुनिया भर में 3,100 से अधिक लोगों की जानलेवा बीमारी से कैसे निपटा जाए। इस वायरस ने 60 से अधिक देशों में लगभग 90,000 लोगों को संक्रमित किया है। माना जाता है कि रोगज़नक़ की उत्पत्ति एक बाज़ार में हुई थी जो हुबेई की राजधानी वुहान में जंगली जानवरों को बेचता था। चीन के अलावा अमेरिका, इटली और ईरान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। भारत से तीन मामले सामने आए हैं जिनमें एक इतालवी पर्यटक भी शामिल है। डॉक्टरों ने कहा कि भारत में पहले वायरस का अनुबंध करने वाले तीन अन्य लोग ठीक हो गए हैं। चीन ने सोमवार को 42 और मौतों की सूचना दी - सभी मध्य हुबेई प्रांत में, मौत की गिनती 2,912 तक पहुंच गई। लगभग 1,700 संक्रमणों के साथ यूरोप के सबसे प्रभावित देश इटली ने कहा कि सोमवार को वायरस से होने वाली मौतों की संख्या18 से 52 होगई।
                   प्रयोजित संपर्क
   उपन्यास कोरोनोवायरस क्या है?
कोरोनावीरस वायरस का एक बड़ा परिवार हसामान्य सर्दी से लेकर अधिक गंभीर बीमारियों तक का कारण होता है। उपन्यास कोरोनावायरस एक नया तनाव है जो पहले मनुष्यों में मान्यता प्राप्त नहीं था। वायरस को मनुष्यों और जानवरों के बीच प्रेषित किया जा सकता है।



कोरोनावायरस के लक्षण क्या हैं?


COVID-19 संक्रमण के सामान्य लक्षणों में श्वसन लक्षण, बुखार, सूखी खांसी और सांस की तकलीफ शामिल हैं। कुछ रोगियों में दर्द और दर्द, नाक की भीड़, नाक बह रही है, गले में खराश या दस्त हो सकता है। वृद्ध लोगों, और उच्च रक्तचाप, हृदय की समस्याओं या मधुमेह जैसी अंतर्निहित चिकित्सा समस्याओं वाले लोगों में गंभीर बीमारी विकसित होने की अधिक संभावना है। अधिक गंभीर मामलों में, संक्रमण से निमोनिया, गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, गुर्दे की विफलता और यहां तक ​​कि मृत्यु भी हो सकती है।
           💐कोरोनोवायरस कैसे फैलता है?💐
संक्रमण उन लोगों से फैल सकता है जिनके पास वायरस है। यह बीमारी नाक या मुंह की बूंदों से फैल सकती है और किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या बाहर निकलने पर फैल सकती है। जब बूंदें दूसरों के संपर्क में आती हैं और वे अपने मुंह या आंख या नाक को छूती हैं, तो संक्रमण फैलता है। लोग वायरस को पकड़ भी सकते हैं अगर वे COVID-19 वाले व्यक्ति से बूंदों में सांस लेते हैं जो खांसी करते हैं या बूंदों को बाहर निकालते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अध्ययन से पता चलता है कि सीओवीआईडी ​​-19 का कारण बनने वाला वायरस मुख्य रूप से हवा के बजाय श्वसन बूंदों के संपर्क के माध्यम से फैलता है।


कोरोनावायरस के बारे में आम गलत धारणाएं क्या हैं? चलो डिबैंक करते हैं
              💐  यह हवा में फैलती है💐
सच्चाई: कोरोनावायरस संक्रमण की आम गलतफहमी में से एक यह है कि यह हवा में फैल सकता है। हालांकि, यह मुख्य रूप से श्वसन बूंदों के संपर्क के माध्यम से प्रेषित होता है।
             💐 यह मल से फैलता है💐
सच्चाई: संक्रमित व्यक्ति के मल से COVID-19 को पकड़ने का जोखिम कम प्रतीत होता है। हालांकि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि वायरस कुछ मामलों में मल में मौजूद हो सकता है, इस मार्ग के माध्यम से फैलता प्रकोप की एक मुख्य विशेषता नहीं है☺️
     💐भ्रांति: यह एक पशु स्रोत से फैलती है💐


सच्चाई: COVID -19 के संभावित पशु स्रोतों की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, संरक्षण के लिए, जीवित पशु बाजारों का दौरा करते समय, जानवरों के संपर्क में जानवरों और सतहों के सीधे संपर्क से बचें। हर समय अच्छे खाद्य सुरक्षा अभ्यास सुनिश्चित करें। कच्चे खाद्य पदार्थ, दूध या पशु अंगों की देखभाल करें ताकि बिना पके हुए खाद्य पदार्थों के दूषित होने और कच्चे या अधपके पशु उत्पादों के सेवन से बचें।


💐भ्रांतियहपालतूजानवरों के माध्यम से फैलता है💐


सच्चाई: इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बिल्लियों और कुत्तों जैसे पालतू जानवरों को संक्रमित किया गया है या यह वायरस फैल सकता है जो COVID-19 का कारण बनता है।
भ्रांति: एंटीबायोटिक्स कोरोनावायरस को रोक सकते हैं या उनका इलाज कर सकते हैं
सच्चाई: नहीं, एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ कामनहीं करते हैं और केवल बैक्टीरिया के संक्रमण पर काम करते हैं
   👍 💐संक्रमित होने से बचाने के लिए क्या करें?
शराब-आधारित हाथ रगड़ने या साबुन और पानी धोने के साथ नियमित रूप से हाथ धोएं। विषाणुओं से छुटकारा पाने के लिए भोजन से पहले और बाद में और नियमित अंतराल पर हाथ धोएं।
अपने और किसी के बीच कम से कम 1 मीटर (3 फीट) की दूरी बनाए रखें जो संक्रमित लोगों के साथ बूंदों के संकुचन से बचने के लिए खांसी या छींक रहे हैं ८बिना धोए आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें।
यदि आप अस्वस्थ महसूस करते हैं तो घर पर रहें। यदि आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई है, तो चिकित्सा पर ध्यान दें और पहले से फोन करें। अपने स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करें।
सुनिश्चित करें कि आप और आपके आस-पास के लोग अच्छे श्वसन स्वच्छता का पालन करें। इसका मतलब है कि खांसी या छींक आने पर अपना मुंह और नाक ढक लें। यदि आपने एक ऊतक का उपयोग किया है, तो ऊतक का तुरंत निपटान करें।
जिन लोगों में कोई श्वसन लक्षण नहीं है, जैसे कि खांसी, उन्हें चिकित्सा मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है। लक्षण वाले लोगों को एक निवारक उपाय के रूप में मास्क पहनना चाहिए। सभी मास्क वायरस के प्रसार को रोकने में मदद नहीं करते हैं। कुछ ऐसे मुखौटे हैं जो काम करेंगे जिन्हें लगाने के लिए उचित प्रशिक्षण की भी आवश्यकता होती है। सुनिश्चित करें कि मास्क साफ है, अप्रयुक्त है, इसमें कोई छेद नहीं है और इसे लगाने से पहले अपने हाथों को साफ करें। उपयोग के बाद मास्क को त्याग दें और फिर से हाथ धोएं।
💐आप कोरोनावायरस का पता कैसे लगा सकते ह💐?
       ??
ऊष्मायन अवधि 1-14 दिनों से होती है, जो आमतौर पर पांच दिनों के आसपास होती है। शुरुआती लक्षण दिखाई देने के बाद, परीक्षणों के तीन दौर होते हैं जो किसी को संक्रमित होने की पुष्टि करने के लिए किए जाने की आवश्यकता होती है। फिर उन्हें अलगाव में रखा जाता है।
        💐कोरोनावायरस का इलाज क्या है?💐
कोरोनावायरस को रोकने या उसके इलाज के लिकोई टीका और कोई विशिष्ट दवा नहीं है। हालांकि, वसूली के लिए अस्पताल में भर्ती और देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है। संभावित टीकों और कुछ विशिष्ट दवा उपचारों की जांच चल रही है। नैदानिक ​​परीक्षणों के माध्यम से उनका परीक्षण किया जा रहा है।
सभी देश इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए निवारक उपाय कर रहे हैं और इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जैसा कि बीमारी पर शोध जारी है, इसके वायरस के बारे में अफवाहों से घबराने और ध्यान न देने की सलाह दी जाती है।
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💐(B)आज के दिन जन्मे हिंदी भाषा जे साहित्यकार
    फणीश्वर नाथ "रेणु  " का जीवन चरित्र लेख💐
फणीश्वर नाथ 'रेणु' (4 मार्च 1921 औराही
हिंगना, फारबिसगंज - 11अप्रेल 1977 हिन्दी भाषा के साहित्यकार थे। इनके पहले उपन्यास मैला आंचल को बहुत ख्याति मिली थी जिसके लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
                       💐  जीवनी💐
फणीश्वर नाथ ' रेणु ' का जन्म 4 मार्च 1921को बिहार
 केअररिया जिले में फॉरबिसगंज केपास औराहीहिंगना 
गाँव में हुआ था।उस समय यह पूर्णिया जिले में उनकी शिक्षा भारत और नेपाल में हुई। प्रारंभिक शिक्षा फार
बिसगंज तथा अररियामें पूरी करने के बाद रेणु नेमैट्रिक
नेपाल केविराटनगर के विराटनगर आदर्श विद्यालय से 
कोईरालापरिवार में रहकर की। इन्होने इन्टरमीडिएट
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1942 में की जिसके बाद वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। बाद में 1950 में उन्होने नेपाली क्रांतिकारीआन्दोलन में भी हिस्सा लियाजिसके
 परिणामस्वरुप नेपाल में जनतंत्र की स्थापना हुई। पटना विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ छात्र संघर्ष समिति में सक्रिय रूप से भाग लिया और जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति में अहम भूमिका निभाई। 1952-53 के समय वे भीषण रूप से रोगग्रस्त रहे थे जिसके बाद लेखन की ओर उनका झुकाव हुआ। उनके इस काल की झलक उनकी कहानी तबे एकला चलो रे में मिलती है।उन्होने हिन्दी में आंचलिक कथा कीनींव 
रखी।सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायनअज्ञेय, एक सम
-कालीन कविउनके परम मित्र थे।इनकी कईरचनाओं में कटिहार के रेलवे स्टेशन का उल्लेख मिलता है।
                   💐लेखन-शैली💐
इनकी लेखन-शैली वर्णणात्मक थी जिसमें पात्र के प्रत्येक मनोवैज्ञानिक सोच का विवरण लुभावने तरीके से किया होता था। पात्रों का चरित्र-निर्माण काफी तेजी से होता था क्योंकि पात्र एक सामान्य-सरल मानव मन (प्रायः) के अतिरिक्त और कुछ नहीं होता था। इनकी लगभग हर कहानी में पात्रों की सोच घटनाओं से प्रधान होती थी। एक आदिम रात्रि की महक इसका एक सुंदर उदाहरण है।
रेणु की कहानियों और उपन्यासों में उन्होंने आंचलिक जीवन के हर धुन, हर गंध, हर लय, हर ताल, हर सुर, हर सुंदरता और हर कुरूपता को शब्दों में बांधने की सफल कोशिश की है। उनकी भाषा-शैली में एक जादुई सा असर है जो पाठकों को अपने साथ बांध कर रखता है। रेणु एक अद्भुत किस्सागो थे और उनकी रचनाएँ पढते हुए लगता है मानों कोई कहानी सुना रहा हो। ग्राम्य जीवन के लोकगीतों का उन्होंने अपने कथा साहित्य में बड़ा ही सर्जनात्मक प्रयोग किया है।
इनका लेखन प्रेमचंद की सामाजिक यथार्थवादी परंपरा को आगे बढाता है और इन्हें आजादी के बाद का प्रेमचंद की संज्ञा भी दी जाती है। अपनी कृतियों में उन्होंने आंचलिक पदों का बहुत प्रयोग किया है।
                  💐 साहित्यिक कृतियाँ💐
                         💐उपन्यास💐
रेणु को जितनी ख्याति हिंदी साहित्य में अपने उपन्यास मैला आँचल से मिली, उसकी मिसाल मिलना दुर्लभ है। इस उपन्यास के प्रकाशन ने उन्हें रातो-रात हिंदी के एक बड़े कथाकार के रूप में प्रसिद्ध कर दिया। कुछ आलोचकों ने इसे गोदान के बाद इसे हिंदी का दूसरा सर्वश्रेष्ठ उपन्यास घोषित करने में भी देर नहीं की। हालाँकि विवाद भी कम नहीं खड़े किये उनकी प्रसिद्धि से जलनेवालों ने. इसे सतीनाथ भादुरी के बंगला उपन्यास 'धोधाई चरित मानस' की नक़ल बताने की कोशिश की गयी। पर समय के साथ इस तरह के झूठे आरोप ठन्डे पड़ते गए।
रेणु के उपन्यास लेखन में मैला आँचल और परती परिकथा तक लेखन का ग्राफ ऊपर की और जाता है पर इसके बाद के उपन्यासों में वो बात नहीं दिखी।
                      💐 उपन्यास 💐
1.मैला आंचल 2.परती परिकथा 3.जूलूस
4.दीर्घतपा 5.कितने चौराहे 6.पलटू बाबू 7.रोड                 
                    💐  कथा-संग्रह💐
1.एक आदिम रात्रि की महक 2.ठुमरी
3.अग्निखोर   4.अच्छे आदमी
                  💐 रिपोर्ताज़💐
1.ऋणजल-धनजल   2.नेपाली क्रांतिकथा
3.वनतुलसी की गंध   4.श्रुत अश्रुत पूर्वे
                 💐 प्रसिद्ध कहानियाँ💐
1.मारे गये गुलफाम (तीसरी कसम) 2.एक आदिम रात्रि की महक  3.लाल पान की बेगम  4.पंचलाइट
5.तबे एकला चलो रे  6.ठेस  7.संवदिया


मारे गए गुलफाम की कहानी पर तीसरी कसम नाम   नाम से राजकपूर और वहीदा रहमान की मुख्य भूमिका में प्रसिद्धफिल्म"तीसरी कसम"बनी जिसे बासुभट्टाचार्य
ने निर्देशित किया और सुप्रसिद्ध गीतकार शैलेन्द्र इसके निर्माता थे। यह फिल्म हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती है। हीरामन और हीराबाई की इस प्रेम कथा ने प्रेम का एक अद्भुत महाकाव्यात्मकपर दुखांतकसक से भरा आख्यानसा रचा, जोआजभीपाठकोंऔरदर्शकों
को लुभाता है।
                       💐 सम्मान💐
अपने प्रथम उपन्यास 'मैला आंचल' के लियेउन्हें पद्मश्री
से सम्मानित किया गया।
                      💐 पुस्तक💐
फणीश्वरनाथरेणु की कथा शिल्प,विश्वविद्यालयअनुदान
आयोग के ग्रांट से प्रकाशित (1990) लेखक :रेणु शाह
                 💐  भारत रत्न की मांग💐
वर्ष 2019 में यूथ फॉर बिहार के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव उदय मंडल ने भारत सरकार से फणीश्वरनाथ 'रेणु' को भारत रत्न देने की मांग की
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 💐 (C) आज के दिन की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ💐


1921 - असहयोग आंदोलन में इस दिन ननकाना के एक गुरुद्वारे, जहाँ पर शान्तिपूर्ण ढंग से सभा का संचालन किया जा रहा था, पर सैनिकों के द्वारा गोली चलाने के कारण 70 लोगों की जानें गई।
1931 - ब्रिटिश वायसराय, गवरनोर-जनरल एडवर्ड फ्रेदेरिक्क लिन्द्ले वुड और मोहनदास करमचंद गाँधी जी (महात्मा गाँधी) में भेंट राजनीतिक कैदियों की रिहाई और नमक के सर्वजन उपयोग की छूट को लेकर मंत्रणा और इकरारनामे की घोषणा। 
1998 - भारत के प्रकाश शाह सं.रा. महासचिव द्वारा बगदाद में विशेष प्रतिनिधि नियुक्त।
1999 - संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को अपनी परित्यक्ता पतनी एवं बच्चों को जीवन निर्वाह भत्ता देने की घोषणा।
 2001 - तालिबान ने मूर्तियों को ख़रीदने की ईरान की पेशकश ठुकराई।
 2002 - राष्ट्रमंडल में जिम्बाब्वे के ख़िलाफ़ प्रस्ताव नामंजूर, अफ़ग़ानिस्तान में भूस्खलन से 150 मरे। 2003 - नाइजीरिया के कब्बी राज्य में एक नौका के नाइजर नदी में डूब जाने से 80 व्यक्ति मारे गये। 2008- तेलंगाना राज्य के गठन में हो रही देरी से नाराज़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टी.आर.एस) के विधायकों ने आन्ध्र प्रदेश विधानमण्डल की सदस्यता से इस्तीफा दिया। हिन्दी के प्रसिद्ध विद्वान् डॉ. मदन लाल मधु को प्रतिष्ठित सम्मान मीडिया यूनियन ने स्वर्णाक्षर पुरस्कार से सम्मानित किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान के ख़िलाफ़ नई पाबंदियाँ लागू की। 
2009 - रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने प्रमुख ब्याज दरों में आधा प्रतिशत की कटौती की घोषणा की। पटना उच्च न्यायालय के चन्दमौली कुमार प्रसाद को इलाहाबाद उच्च न्यायालय व कर्नाटक उच्च न्यायालय को न्यायधीश दीपक वर्मा को राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायधीश बनाया गया है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने नवीन चावला के मुख्यचुनाव आयुक्त पद पर नियुक्ति को मंज़ूरी दी। राजस्थान के पोखरन से ब्रह्मोस मिसाइल के नये संस्करण का परीक्षण किया गया। 
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  💐(D)आज के दिन जन्मे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व💐


1856 - तोरु दत्त - अंग्रेज़ी भाषा की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभासम्पन्न कवयित्री। 
1881 - रामनरेश त्रिपाठी, प्राक्छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि। 
1886 - बलुसु संबमूर्ति, मद्रास के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी। 
1921 - फणीश्वरनाथ रेणु, साहित्यकार। 
1922 - दीना पाठक, प्रसिद्ध गुजराती रंगमंच और फ़िल्म अभिनेत्री। 
1929 - कोमल कोठारी - राजस्थान के ऐसे व्यक्ति, जो राजस्थानी लोक गीतों व कथाओं आदि के संकलन एवं शोध हेतु समर्पित थे।
1980 - रोहन बोपन्ना, भारतीय टेनिस खिलाड़ी। कामालिनी मुखर्जी, भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री
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💐(E)आज के दिन निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व💐


1899 - ठाकुर जगमोहन सिंह - मध्य प्रदेश स्थित विजयराघवगढ़ के राजकुमार और प्रसिद्ध साहित्यकार। 
1928 - सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा - प्रसिद्ध भारतीय अधिवक्ता और राजनेता। 
1939 - लाला हरदयाल - भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी और 'गदर पार्टी' के संस्थापक। 
2007 - सुनील कुमार महतो, भारतीय सांसद।
 2016 - पी. ए. संगमा - भारत के राजनीतिज्ञों में से एक थे। 
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💐(F)आज केदिन के महत्त्वपूर्ण अवसर वं उत्सव💐


राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा)
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       आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।
💐।जय चित्रांश।💐
💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐
💐।जय हिंद जय भारत💐


💐  निवेदक;-💐


  💐 चित्रांश ;-विजय निगम।💐
 💐 दिनांक:-  04 मार्च  2020💐
 💐 वार:-  बुधवार                 💐


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