एक पत्नि पीड़ित की कथा और जज साहब की व्यथा - व्यंग्य

एक पत्नि पीड़ित व्यक्ति कोर्ट में जाता है।
अपनी सम्पूर्ण व्यथा जज को बताता।
आदमी जब पत्नि से तंग आ जाता है।
रात को भी चैन की नींद नही ले पाता है।
पता नही कब रात को उठाकर धुलाई कर  दे।
सुबह होने से पहले मेरी सफाई कर दे।
रोज सुबह जोर से चिल्लाकर उठाती है।
और आर्डर की लाइन लगाती है।
कहती है जल्दी से किचन में जाओ।
मेरे लिए चाय बनाकर लाओ।
वर्ना आज तो खैर नही।
इसके सामने पुरानी वैर नही।
बर्तन और कपड़ें धोना तो पुरानी बात हो गई है।
आजकल कामवाली को हटाकर मेरे से झाडू-पोछा भी करवाती है।
हर बार बात-बात में जोरदार हड़काती है।
जज साहब आप भी तो एक पति हो
इंसाफ हमे भी दिलाओ।
जज साहब अपने आंसू पोछते हुए बोले
आप मेरी कुर्सी में बैठ जाओ।
और खुद इंसाफ लेलो
क्योकि शाम को मुझे भी घर जाना पड़ता है।
और वही घर से रोज कोर्ट आना पड़ता है।
              - राम नारायण साहू"राज, रायपुर - छत्तीसगढ़


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