स्नान दान पूर्णिमा : क्षिप्रा नदी में अब भी मौजूद है, खान नदी का गन्दा पानी!

          उज्जैन। क्षिप्रा नदी में खान का दूषित और बदबूदार पानी अब भी मौजूद है, जबकि पूर्णिमा का पर्व स्नान क्षिप्रा नदी में होगा ऐसे में प्रशासन द्वारा क्षिप्रा नदी और रामानुजकोट के पास स्थित बोरिंग की मोटरों से पाइप जोड़कर श्रद्धालुओं को फव्वारों से स्नान कराने की तैयारी की गई है। मानसून सीजन में इस वर्ष औसत से अधिक बारिश दर्ज हुई।



          क्षिप्रा नदी का छोटा पुल डेढ़ माह तक पानी में डूबा रहा। सीजन समाप्त होने के बाद भी बारिश का दौर जारी रहा। नदी में भरपूर और साफ पानी मौजूद था, लेकिन खान डायवर्सन के गेट जो मानसून समाप्ती के बाद बंद होना थे खराबी आने के कारण बंद नहीं किये गये और खान नदी का दूषित और बदबूदार पानी लगातार क्षिप्रा नदी में मिलता रहा। परिणाम यह हुआ कि क्षिप्रा नदी के साफ पानी में खान का दूषित पानी मानसून समाप्ती के बाद आज तक मिल रहा है और वर्तमान स्थिति यह है कि क्षिप्रा नदी के पानी का रंग काला हो चुका है जो बदबू भी मार रहा है


          गौमुख और बोरिंग में जोड़े पाइप- संभागायुक्त और कलेक्टर द्वारा पूर्णिमा के पर्व स्नान के मद्देनजर रामघाट क्षेत्र में निरीक्षण कर श्रद्धालुओं के लिये आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिये थे। इसके बाद पीएचई विभाग के अधिकारियों ने क्षिप्रा आरती द्वार के पास स्थित गौमुख के पाइप से फव्वारों के पाइप को जोड़ा गया है। जबकि रामानुजकोट के पास स्थित बोरिंग में भी एक पाइप जोड़कर सामने की ओर स्थित धर्मशाला की बाउण्ड्री के पास फव्वारे लगाये गये हैं। क्षिप्रा नदी में मौजूद खान नदी के दूषित और बदबूदार पानी में यदि श्रद्धालु स्नान नहीं करते हैं तो वे फव्वारों में स्नान कर सकते हैं।


          रोज हजारों श्रद्धालु करते हैं स्नान-पूजन- क्षिप्रा नदी में खान का पानी मिलने से हजारों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती है। देश भर के श्रद्धालु यहां स्नान और पूजन के लिये प्रतिदिन पहुंचते हैं, खान नदी का दूषित पानी नदी में मिलने के साथ नगर निगम के सफाईकर्मी फायर फायटर के प्रेशर से घाटों की धुलाई भी करते हैं और घाटों की गंदगी को भी नदी में ही प्रवाहित कर देते हैं।


          नर्मदा का पानी भी काम नहीं आया- हरियाखेड़ी-त्रवेणी के पहले पाइप लाइन से नर्मदा का पानी क्षिप्रा नदी में छोड़ा गया। इसके पीछे उद्देश्य था कि खान नदी के पानी को आगे बहाकर नर्मदा का साफ पानी रामघाट तक लाया जायेगा। इसके लिये छोटे पुल के आगे स्टापडेम के गेट भी खोले गये जिससे नदी का जलस्तर दो फीट तक कम हो गया बावजूद इसके नर्मदा का पानी रामघाट तक नहीं आ पाया है।


          बोरिंग से बह रहा गर्म जल- क्षिप्रा नदी के किनारे लगे बोरिंग इन दिनों ओवरफ्लो होकर पानी बह रहा है। खास बात यह कि बोरिंग से निकलने वाला पानी शुद्ध होकर गर्म भी होता है। वर्तमान में क्षिप्रा नदी का पानी प्रदूषित होने के कारण श्रद्धालु इन्हीं बोरिंग से पानी लेकर भगवान का अभिषेक और स्नान भी कर रहे हैं। इन बोरिंग की खासियत यह है कि इनमें कोई मोटर नहीं लगी है लेकिन पानी स्वत: ओवरफ्लो होकर बहता है।