आज की बात आपके साथ - विजय निगम


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💐प्रिय साथियो💐।  
💐राम-राम ,💐
💐 नमस्ते।💐


आज की बात आपके साथ मे आप सभी साथीयों का 
दिनांक   25 दिसंबर 2019  बुधवार की प्रातः की बेला में हार्दिक वंदन है अभिनन्दन है।
आज की बात आपके साथ  अंक मे है 


A  कुछ रोचक समाचार 
B  आज के दिन जन्मे सुप्रसिद्ध राजनेता भारत  के भूतपूर्व        
    10 वे प्रधानमंत्री स्व.श्रीअटल बिहारीवाजपेयी    
     का जीवन परिचय
C आज के दिन जन्म लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व
D आज के निधन हुवे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व।
E आज का दिवस का नाम ।
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                 A कुछ रोचक समाचार
💐(A/1)सरकारीपेंशनस्कीम मेंबड़े बदलाव कीतैयारी
रकम डबल होने के साथ-साथ मिलेंगेयेफायदे।
💐(A/2) बर्न आउट यानी ऑफिस की थकान को  माना बीमारी, जान‍िए इसके कारण।
💐💐(A/3) राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर मोदी कैबिनेट की मुहर।,।
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💐(A/1)सरकारीपेंशनस्कीम मेंबड़े बदलाव कीतैयारी
रकम डबल होने के साथ-साथ मिलेंगेयेफायदे💐


   सरकारी पेंशन स्कीम एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारीहै।पीएफआर
डीए ने एक फरवरी 2020 को पेश होने वाले बजट में एनपीएस में 1 लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट दिए जाने की सिफारिश की है।. आइए जानें और क्या बदलाव हो सकते हैं।.
 रिटायरमेंट के बाद पेंशन  का पैसा लोगों की जिंदगी में एक बहुत बड़ा तोहफा होता है।यही वजह हैकिसरकार
समय-समय पर पेंशन के नियमों में बदलाव कर करती रहती है।. इसीलिए, सरकारी पेंशन स्कीम एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है . न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए  ने एक फरवरी 2020 को पेश होने वाले बजट में एनपीएस में 1 लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट दिए जाने की सिफारिश की है  मौजूदा समय में व्यक्तिगत करदाताओं को 50,000 रुपये तक के निवेश पर कर लाभ मिलता है।
    ,💐पेंशन स्कीम में 4 बड़े बदलाव की तैयारी 💐
(1) पीएफआरडीए के पूर्णकालिक सदस्य सुप्रतिम बंदोपाध्याय ने पीटीआई से कहा है कि बजट के लिए हम यह देख रहे हैं कि क्या एनपीएस के तहत मौजूदा 50,000 रुपये तक के निवेश पर कर छूट को बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक किया जा सकता है।.
(2) बंदोपाध्याय ने कहा, इसके अलावा हम अटल पेंशन योजना के तहत उम्र सीमा बढ़ाकर 40 से 60 करने का आग्रह कर रहे हैं. फिलहाल अटल पेंशन योजना 18 से 40 वर्ष के लोग ले सकते हैं.।
(3) अटल पेंशन योजना में मौजूदा अधिकतम पेंशन सीमा 5,000 रुपये को बढ़ाकर 10,000 रुपये मासिक करने को कहा है.।
(4) पीएफआरडीए ने सरकार से एनपीएस के तहत सरकारी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए टैक्स फ्री 14 फीसदी योगदान के प्रावधान को सभी कैटेगिरी के लिए बढ़ाने का भी आग्रह किया है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 14 फीसदी नियोक्ता का योगदान एक अप्रैल 2019 से टैक्स फ्री है. राज्य सरकार और स्वायत्त निकायों के मामले में नियोक्ता की ओर से किया जाने वाला 10 फीसदी योगदान टैक्स मुक्त है और शेष 4 फीसदी पर टैक्स लगता है जो कर्मचारी को देना पड़ता है.
 नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस एक सरकारी रिटायरमेंट सेविंग स्कीम  है, जिसे केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को लॉन्च किया था. इस तारीख के बाद ज्वाइन करने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना अनिवार्य है. साल 2009 के बाद से इस योजना को प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए भी खोल दिया गया.
            अब सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से इस योजना में शामिल हो सकता है. रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी एनपीएस का एक हिस्सा निकाल सकते हैं और बाकी रकम से रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम के लिए एन्यूटी ले सकते हैं.
            इससे क्या होगा-  एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. साथ ही, अटल पेंशन स्कीम के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा.
                   सरकार ने देश भर में पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (पीओपी)बनाए हैं,जिनमें एनपीएस अकाउंट खुलवाया जा सकता है।देश केलगभग सभी सरकारी औरप्राइवेट 
बैंकों को पीओपी बनाया गया है।. आप पेंशन फंड रेगुलेटरी एवं डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) की बेवसाइट के जरिये  भी प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस तक पहुंच सकते हैं. किसी भी बैंक के नजदीकी ब्रांच में भी खाता खुलवाया जा सकता है.
        खाता खुलवाने के लिए ये हैं जरूरी दस्तावेज     -एड्रेस प्रूफ, आइडेंटिटी प्रूफ, बर्थ सर्टिफिकेट यादसवीं
 कक्षा का सर्टिफिकेट, सब्सक्राइबर रजिस्ट्रेशन फॉर्म
      इस योजना में दो तरह के अकाउंट होते हैं. टियर 1 और टियर 2. हर सब्सक्राइबर को एक परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर 12 अंकों का एक नंबर होता है. यही नंबर सभी लेन-देन में काम आता है।
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💐(A/2) बर्न आउट यानी ऑफिस की थकान को  माना बीमारी, जान‍िए इसके कारण।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन WHO ने बर्न आउट यानी ऑफिस में वर्कलोड के प्रेशर की वजह से होने वाली थकान को एक मेडिकल कंडिशन माना है। WHO ने अपनी इंटरनैशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीजेज की लिस्ट में बर्न आउट को शामिल कर लिया है। इस लिस्ट में शामिल होने के बाद अब बर्न आउट को भी बीमारियों श्रेणी में मान ल‍िया गया है और इसके न‍िदान पर ध्‍यान देने पर कहा है।
  💐  बर्न आउट फील करना है मेडिकल कंडीशन💐
WHO समय-समय पर दुन‍ियाभर के हेल्‍थ एक्‍सपर्ट की मदद से मेडिकल कंडीशन पर रिसर्च करके इंटर
-नेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीजेज की ल‍िस्‍ट अपडेट करती रहती है। साल 2018 में WHO ने इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीजेज (ICD) की लिस्ट तैयार की थी जिसमें इस बार बर्न आउट की समस्‍या को शामिल किया गया है।जेनेवा के वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के दौरान आधिकारिक रूप सेबर्नआउट फील करने की स्थिति को बीमारी माना हैं।
          💐  वर्कलोड के प्रेशर की वजह से💐
WHO ने बर्न आउट को परिभाषित करते हुए कहा कि यह एकऐसा सिंड्रोम हैजो वर्कप्लेस परहोनेवालेक्रॉनिक
स्ट्रेस यानी काम के बहुत ज्यादा बोझ की वजह सेहोता 
है। अगर इस समस्‍या को सही तरीके से मैनेज न किया जाए तो व्यक्ति बर्न आउट की स्थिति में पहुंच जाता है। इस सिंड्रोम को 3 पहलुओं में विश्लेषित किया जा सकता है.।..
1- एनर्जी की बहुत ज्यादा कमी और थकान महसूस करना
2- प्रफेशनल क्षमता और गुण में कमी आ जाना
3- काम से मानसिक दूरी बढ़ना, अपने काम के प्रति मन में नकारात्मक भाव आना।
     💐40 प्रतिशत लोग जूझ रहे इस समस्‍या से💐
WHO के डिजीज लिस्ट के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक बर्न आउट सिर्फ काम और व्यावसायिक कॉन्टेक्स्ट में बीमारी के तौर पर इस्तेमाल होने वाली घटना है और इसे जीवन के किसी और अनुभव को परिभाषित करने के लिए नहीं देखा जाना चाहिए। दुनियाभर में लाखों लोग अपने काम से जुड़े हेक्टिक शेड्यूल की वजह से हद से ज्यादा थक जाते हैं और बर्न आउट फील करने लगते हैं। 1 हजार लोगों पर हुए एक सर्वे में यह बात सामने आयी थी कि करीब 40 प्रतिशत लोग हफ्ते में 3 बार काम की वजह से तनाव और स्ट्रेस महसूस करते है।
              💐 ये हैं बर्न आउट के लक्षण 💐
1- कम सोना और सुबह उठते वक्त थकान महसूस करना।
2- मोटिवेशन की कमी महसूस होना और काम में कॉन्सनट्रेट करने में मुश्किल का सामना करना।
3- वर्कप्लेस पर छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना और कॉन्फ्लिक्ट की स्थिति पैदा होना।
4- दोस्तों और परिवारवालों से इमोशनली दूर होते जाना।
इससे पहले आईसीडी (इंटरनैशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीजेज) में विडियो गेमिंग और कम्पल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर को भी मानसिक बीमारी की सूची में रखा गया था।    
            💐 बर्न-आउट क्या है ?💐
ज़िंदगी की भागम-भाग, तनाव, काम की अधिकता अक्सर हमे शारीरिक और मानसिक रूप से थका देती है। जब यह थकान और परेशानी काफी ऊंचे स्तर तक चला जाता है तब ऐसा लगने लगता है जैसे जिंदगी की सामान्य समस्याओ को भी सुलझाना कठिन हो गया है। बर्न-आउट मानसिक या शारीरिक कारणो से हो सकता है। यह लंबे दवाब तथा थकान का परिणाम होता है।बर्न-आउट कार्य-संबंधी या व्यक्तिगत या दोनों कारणो से हो सकता है। ऐसे में मानसिक तनाव व स्ट्रैस बढ़ जाता है। स्वभाव में चिड़चिड़Iपन बढ़ जाता है। व्यक्ति अपने को ऊर्जा-विहीन, असहाय व दुविधाग्रस्त महसूस करने लगता है।
                 💐बर्न-आउट कैसे पहचाने ?💐
 बर्न आउट से अक्सर  नकारात्मक सोच ज्यादा बढ़ जाती है।आत्मविश्वास व प्रेरणा मे कमी , अकेलापन, आक्रोश, नशे की लत, जिम्मेदारियो से भागने जैसे व्यवहार बढ़ जाते है।ऐसाव्यक्तिअपना फ्रस्टेशन दूसरों
पर उतारने लगता है।ऐसे मे व्यक्ति हमेशा थका-थका
व बीमार से लगता है। लगातार सिर और  मांसपेशिओ
मे दर्द, भूख व नींद मे कमी होने लगती है। अपने कार्य मे रुचि मे कमी, हमेशा असफलता का डर, अपना हर दिन बेकार लगने लगता है। ऐसे व्यक्ति दूसरों के साथ जरूरत से ज्यादा कठोर, असहनशील और चिड़चिड़ा हो जाता है। गैस्ट्रिक व ब्लड-प्रेशर का उतार-चढ़ाओ असामान्य हो जा सकता है।ऐसे परिवर्तनो कामतलब है
किअपने शारीरिक व मानसिककार्यभार को सहीतरीके 
से संभालने की जरूरत है। अगर संभव है तो कार्य-भार को कम कर देना चाहिए। साथ ही अपनेलाइफ-स्टाइल 
को संयमित करना कहिए। अपनी आवश्यकताओ तथा समस्याओं को समझ कर उनका ध्यान रखना चाहिए।
              💐 बर्न आउट का समाधान💐
ऐसी समस्याए अक्सर काम को लत (वर्कहोलिक) बना लेने वाले लोगों मेंज्यादा पाया जाता है।इसलिए कामके 
साथ-साथ मनोरंजन,रचनात्मकता, मित्रों और परिवार के साथ समय बिताना भी जरूरी है। जीवन कीखुशिया 
मानसिक तनाव काम करती है।हर काम का ध्येय सिर्फ 
जीत-हार,जल्दीबाजीया लक्ष्य-प्राप्ति नहीं रखनाचाहिए
 सकारात्मक सोच और दूसरों को समझने की कोशिश भीआवश्यक है। जिंदगी की परेशानियों औरसमस्याओं
को सही नजरिए से समझना भी जरूरी है। समस्याओं  सेबचने के बदलेउनकासामना करना चाहिएकाल्पनिक 
दुनिया से हट करवास्तविकता और जरूरत केमुताबिक
कठिनाइयों  को सुलझाना चाहिए।कार्य-स्थल पर  टीम मे काम करना, अपनी समस्यओं को बताना,नयी जिम्मे
-दारियों को सीखना भी सहायक होती है।कुछ लोग'ना' 
नहीं बोल पाने के कारण अपने को काम के भार तले दबा लेते है।अतः व्यकितयों को 'ना'कहना सीखना  ही चाहिए। प्राणायाम, योग, योगनिद्रा, ध्यान, मुद्रा आदि की  भी मदद  ली  जा सकती है। इससे तनाव मुक्ति होती है। स्फूर्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पूरे व्यक्तित्व को सकारात्मक और रचनात्मक ऊर्जा प्रदान करताहै।आयुर्वेद मे तुलसी को नर्व-टानिक व एंटिस्ट्रैस 
कहा गया है।अतःइसकाभी सेवन लाभदायक होसकता
है,पर महिला में गर्भावस्था स्थिति में डॉक्टर की बिना सलाह के  इसे ना लें।
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 💐(A/3) राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर मोदी कैबिनेट की मुहर।,💐,
अपडेट  होगा। NRC  याने राष्ट्रीय  नागरिक रजिस्टर  नागरिकता संशोधनकानून(CAA)औरराष्ट्रीयनागरिक .
रजिस्टर (NRC) पर देशभर में हो रहे बवाल के बीच मोदी कैबिनेटने एक बड़ा फैसला लिया है.मोदी के सूत्रों के मुताबिक, यह मंजूरी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी NPR को अपडेट करने के लिए दी गई है.।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को मोदी कैबिनेट से मंजूरी
रजिस्टर अपडेट करने के लिए सरकार की हरी झंडी
पूरी प्रक्रिया के लिए 8500 करोड़ रुपये का बजट
       नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर देशभर में हो रहे बवाल के बीच मोदी कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है. मोदी कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) पर मुहर लगा दी है. सूत्रों के मुताबिक, यह मंजूरी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी NPR को अपडेट करने के लिए दी गई है।
मोदी कैबिनेट की यह बैठक मंगलवार को हुई. बैठक में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर अपडेट करने के लिए मंजूरी दी गई. इस काम में आने वाले खर्च का बजट भी जारी किया गया है. रजिस्टर अपडेट करने के लिए सरकार की तरफ से 8500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट अप्रूव किया गया है.
       यह रजिस्टर नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है. कोई भी व्यक्ति जो 6 महीने या उससे अधिक समय से किसी इलाके में रह रहा हो तो उसे नागरिक रजिस्टर में जरूरी रजिस्ट्रेशन कराना होता है.
         💐क्या है राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट
सिटीजनशि‍प (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटीजन्स ऐंड इश्यू ऑफ नेशनल आइडेंटिटी कार्ड्स) रूल्स 2003 में जनसंख्या रजिस्टर को इस तरह से परिभाषि‍त किया गया है: 'जनसंख्या रजिस्टर का मतलब यह है इसमें किसी गांव या ग्रामीण इलाके या कस्बे या वार्ड या किसी वार्ड या शहरी क्षेत्र के सीमांकित इलाके में रहने वाले लोगों का विवरण शामिल होगा.'
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के तहत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर गणना की तैयारी है. देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है. इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी.
      बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी एनपीआर में दर्ज होना है. एनपीआर के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटातैयार कर सरकारी योजनाओं की पहुंच असली लाभार्थियों तकपहुंचाने का भी मकसद है।.
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  💐(B)आज के दिन जन्मे भारतीय  सुप्रसिद्ध      
     राजनेता ,भारत के  भूतपूर्व 10 वे प्रधानमंत्री 
💐स्व.श्रीअटल बिहारीवाजपेयी काजीवन परिचय 💐


 अटल बिहारी वाजपेयी (25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018) भारत के दसवें प्रधानमंत्री थे। वे पहले 16 मई से 0इन। तक, तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई  2005 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे हिन्दी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और185M से 13 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्‍ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया।।   । 


         💐 अटल बिहारी वाजपेयी 💐


भारत के दसवें प्रधानमंत्री
(प्रथम शासनकाल)
पूर्ववर्तीपी. वी. नरसिंह राव
परवर्तीऍच. डी. देवगौड़ा
(द्वितीय शासनकाल)
कार्यकाल
19 मार्च 1998 –22 मई 2004 
पूर्ववर्ती;- इन्द्र कुमार गुजराल
परवर्ती:-मनमोहन सिंह
जन्म:-25 दिसंबर 1924
जन्मस्थल;-ग्वालियर, मध्य प्रदेश
मृत्यु;-अगस्त 16, 2018 (उम्र 93)एम्स दिल्ली 
नई दिल्ली, भारत
राष्ट्रियता:-भारतीय
राजनैतिक दल;-भारतीय जनता पार्टी
Religion;-हिन्दू धर्म
हस्ताक्षर
वह चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य थे, लोकसभा, निचले सदन, दस बार, और दो बार राज्य सभा, ऊपरी सदन में चुने गए थे। उन्होंने लखनऊ के लिए संसद सदस्य के रूप में कार्य किया, 2009 तक उत्तर प्रदेश जब स्वास्थ्य सम्बंधी चिंताओं के कारण सक्रियराजनीति से सेवानिवृत्त हुए।अपनाजीवनराष्ट्रीय
स्वयंसेवकसंघकेप्रचारक के रूप मेंआजीवनअविवाहित
रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ करने वाले वाजपेयी 
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए।आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने के कारण इन्हे भीष्म पितामह भी कहा जाता है।उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे।2005 से वे
 राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे ।16अगस्त 2018 को एकलम्बी बीमारी केबाद अखिल
 भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में श्री वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे।
                  💐 आरम्भिक जीवन💐
उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर
 के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे।वहीं शिन्दे 
कीछावनी में25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहूर्त मेंउनकी
सहधर्मिणी कृष्णा वाजपेयी की कोख से अटल जी का जन्म हुआ था। पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर 
में अध्यापन कार्य तो करते ही थे इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि  भी थे। पुत्र में काव्य के गुण वंशानुगत परिपाटी से प्राप्त हुए। महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति "विजय पताका" पढ़कर अटल जी के जीवन की दिशा ही बदल गयी। अटल जी की बी॰ए॰ की शिक्षा ग्वालियर केविक्टोरिया
 कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभीसे राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं
में भाग लेते रहे।
कानपुर केडीएवी कॉलेज से राजनीतिशास्त्र में एम॰ए॰ 
की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी केसाथ-साथ कानपुर मेंहीएल॰एल॰बी॰ 
की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये। डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते रहे।
    सर्वतोमुखी विकास के लिये किये गये योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2015 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
               💐 राजनीतिक-जीवन💐
वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और सन् 1968 से 1973 तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके थे। सन् 1952 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977
 से 1979 तक विदेश मन्त्री र हे और विदेशों में भारत की छवि बनायी।
1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् १९९६ में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।
सन् 2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भा॰ज॰पा॰ के नेतृत्ववालेराष्ट्रीय जनतांत्रिकगठबन्धन(एन॰डी॰ए॰)
 ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया।इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भा॰ज॰पा॰ विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई।सम्प्रति वेराजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नईदिल्ली
 में 6-एकृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे।प्रधानमंत्री के रूप में अटल का कार्यकाल भारत को 
परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाना इन्हें भी देखें:भारतीय
परमाणु परीक्षण  प्रियतोष नाती थेअटल सरकार ने 11
और 13 मई 1998कोपोखरण में पाँच भूमिगतपरमाणु 
परीक्षण विस्फोट करकेभारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी
गोपनीयतासे किया गया कि अति विकसित  जासूसी
 उपग्रहों व तकनीक से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी
भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमीदेशों 
द्वाराभारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गएलेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊँचाईयों को छुआ।पाकिस्तान
से संबंधों में सुधार की पहल प्रियतोष19 फ़रवरी1999
नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी जी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की।
                    💐  कारगिल -युद्ध 💐
मुख्य लेख:      कारगिल युद्ध
कुछ ही समय पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया। इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य हो गए।
            💐 स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना💐
भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (अंग्रेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी॰क्यू॰ प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्गों से जोड़ा गया। ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था।
वाजपेयी सरकार के अन्य प्रमुख कार्यसंपादित करें
एक सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया।
संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया।
राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये।
राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित कीं।
आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमन्त्रियों का सम्मेलन बुलाया।
उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया।
आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया।
ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की।
सरकारी खर्चे पर रोजा इफ़्तार शुरू किया
ये सारे तथ्य सरकारी विज्ञप्तियों के माध्यम से समय समय पर प्रकाशित होते रहे हैं।
                    💐  व्यक्तिगत जीवन 💐
वाजपेयी अपने पूरे जीवन अविवाहित रहे। उन्होंने लंबे समय से दोस्त राजकुमारी कौल और बी॰एन॰ कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को उन्होंने दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया। राजकुमारी कौल की मृत्यु वर्ष 2014 में हो चुकी है। अटल जी के साथ नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य रहते थे।
 वह हिंदी में लिखते हुए एक प्रसिद्ध कवि थे। उनके प्रकाशित कार्यों में कैदी कविराई कुंडलियां शामिल हैं, जो 1975-77 आपातकाल के दौरान कैद किए गए कविताओं का संग्रह था, और अमर आग है। अपनी कविता के संबंध में उन्होंने लिखा, "मेरी कविता युद्ध की घोषणा है, हारने के लिए एक निर्वासन नहीं है। यह हारने वाले सैनिक की निराशा की ड्रमबीट नहीं है, लेकिन युद्ध योद्धा की जीत होगी। यह निराशा की इच्छा नहीं है लेकिन जीत का हलचल चिल्लाओ। "
              💐अटल जी की कविताए💐
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कविभी थे।मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्य संग्रह है।वाजपेयीजी को  काव्य रचना
शीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं।उनके 
पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत मेंअपने
समय के जाने-मानेकवि थे।वे ब्रजभाषाऔर खड़ीबोली
में काव्य रचना करते थे।पारिवारिक वातावरण काव्यमय व साहत्यिक एवं होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी।इसमें शृंगार रस के प्रेम प्रसून नचढ़ाकर"एक शहंशाहनेबनवा केहसीं ताजमहल
हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक" की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया। वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता।
    अटल जी ने किशोर वय में ही एक अद्भुत कविता लिखी थी - ''हिन्दू तन-मन हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय", जिससे यह पता चलता है कि बचपन से ही उनका रुझान देश हित की तरफ था।राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है। उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ,राष्ट्रव्यापी
आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था।
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     💐आज 25 दिसंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ💐


1763 - भरतपुर के महाराजा सूरजमल की हत्या।
1771 - मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय मराठाओं के संरक्षण में दिल्ली के सिंहासन पर बैठे।
1892 - स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी में समुद्र के मध्य स्थित चट्टान पर तीन दिन तक साधना की।
1924 - पहला अखिल भारतीय कम्युनिस्ट कांफ्रेस कानपुर में संपन्न।
1946 - ताईवान में संविधान को अंगीकार किया गया।
1947 - पाकिस्तानी सेना ने झनगड़ को कब्जे में ले लिया था।
1962 - सोवियत संघ ने नोवाया जेमल्या क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया।
1977 - हालीवुड के प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता चार्ली चैपलिन का निधन।
1974 - राेम जा रहे एयर इंडिया के विमान बोइंग 747 का अपहरण।
1991 - राष्ट्रपति मिखाइल एस. गोर्बाचोव के त्यागपत्र के साथ ही सोवियत संघ का विभाजन एवं उसका अस्तित्व समाप्त।
1998 - रूस एवं बेलारूस द्वारा एक संयुक्त संघ बनाये जाने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर।
2002 - चीन और बांग्लादेश के बीच रक्षा समझौता।
2005 - मारीशस में 400 वर्ष पूर्व विलुप्त 'डोडो' पक्षी का दो हज़ार वर्ष पुराना अवशेष मिला।
2007 - कनाडा के प्रसिद्ध जॉज पियानोवादक और संगीतकार आस्कर पीटरसन का निधन।
2008- भारत के द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गये चन्द्रयान-1 के 11 में से एक पेलोडर्स ने चन्द्रमा की नई तस्वीर भेजी।
2012 - दक्षिणी कजाखस्तान के शिमकेंट शहर में
एन्टोनोव कम्पनी का एएन-72 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई।
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         💐 25 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति💐


1861 - मदनमोहन मालवीय - महान् स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद और एक बड़े समाज सुधारक भी थे।
1872 - गंगानाथ झा - संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड पंडित, जिन्होंने हिन्दी, अंग्रेज़ी और मैथिली भाषा में दार्शनिक विषयों पर उच्च कोटि के मौलिक ग्रन्थों की रचना की।
1876 - मुहम्मद अली जिन्ना - ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख नेता और 'मुस्लिम लीग' के अध्यक्ष।
1923 - धर्मवीर भारती, हिन्दी साहित्यकार का जन्म प्रयाग में।
1924 - अटल बिहारी वाजपेयी - भारत के दसवें प्रधानमंत्री।
1927 - राम नारायण
1978 - मनोज कुमार चौधरी, सेप कोन्सुल्तंत इंजिनियर का जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ।
1919 - नौशाद, प्रसिद्ध संगीतकार
1944 - मणि कौल, फ़िल्म निर्देशक
1925 - सतीश गुजराल, प्रसिद्ध चित्रकार
1880 - मुख़्तार अहमद अंसारी - एक प्रसिद्ध चिकित्सक, प्रसिद्ध राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लिया।
1642 - आइज़ैक न्यूटन - महान् गणितज्ञ, भौतिक वैज्ञानिक, ज्योतिर्विद एवं दार्शनिक थे।


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 💐 आज के दिन 25 दिसम्बर को निधन हुवे वयक्तित्व💐


1763 - भरतपुर के महाराजा सूरजमल की हत्या।
1977 - हालीवुड के प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता चार्ली चैपलिन का निधन।
2007 - कनाडा के प्रसिद्ध जॉज पियानोवादक और संगीतकार आस्कर पीटरसन का निधन।


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             आज के दिवस का नाम/ उत्सव


1.क्रिसमस - यह इसाई धर्म का एक उत्सव है, जो 24 दिसंबर की पूर्वसंध्या पर आरंभ होता है।
2.क्वार्टर डे :- ब्रिटेन और आयरलैंड - a quarter day in England, Wales, Northern Ireland, and the Republic of Ireland. (but not in Scotlandआ)
3.रोमन उत्सव - (re)birth of Sol Invictus, the winter solstice feast in the रोमन साम्राज्य since 274.
4.क़ैद-ए-आज़मकादिन ;पाकिस्तान में क़ैद-ए-आज़म 
का दिन एक सरकरी छुट्टी है पाकिस्तान में,यहमोहम्मद
अली जिन्ना का जन्मदिन है।
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    आज की बात -आपके साथ" मे आज इतना ही।कल पुन:मुलाकात होगी तब तक के लिये इजाजत दिजीये।
      आज जन्म लिये  सभी  व्यक्तियोंको आज के दिन की बधाई। आज जिनका परिणय दिवस हो उनको भी हार्दिक बधाई।  बाबा महाकाल से निवेदन है की बाबा आप सभी को स्वस्थ्य,व्यस्त मस्त रखे।


              💐।जय चित्रांश💐।


💐जय महाकाल,बोले सो निहाल💐


💐।जय हिंद जय भारत💐


💐  निवेदक;-🎂💐


💐   चित्रांश ;-विजय निगम।💐
💐  दिनांक;-  25 दिसंबर 2019💐
 💐 वार;-      बुधवार. 💐


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